Hamarivani.com

ग्रेविटॉन

एक गाँव में कुछ लोग ऐसे थे जो देख नहीं पाते थे, कुछ ऐसे थे जो सुन नहीं पाते थे, कुछ ऐसे थे जो बोल नहीं पाते थे और कुछ ऐसे भी थे जो चल नहीं पाते थे। उस गाँव में केवल एक ऐसा आदमी था जो देखने, सुनने, बोलने के अलावा दौड़ भी लेता था। एक दिन ग्रामवासियों ने अपना नेता चुनने का निर्णय लि...
Tag :
  April 5, 2018, 2:32 pm
उसने कहा 2=3 होता हैमैंने कहा आप बिल्कुल गलत कह रहे हैंउसने लिखा 20-20=30-30फिर लिखा 2(10-10)=3(10-10)फिर लिखा 2=3(10-10)/(10-10)फिर लिखा 2=3मैंने कहा शून्य बटा शून्य अपरिभाषित हैआपने शून्य बटा शून्य को एक मान लिया हैउसने कहा ईश्वर भी अपरिभाषित हैमगर उसे भी एक माना जाता हैमैंने कहा इस तरह तो आप हर व...
Tag :
  February 2, 2018, 2:51 pm
कब तक ऐसे राज करेगा तेरी ऐसी की तैसीतू केवल पूँजी का चमचा तेरी ऐसी की तैसीपाँच साल होने को हैं अब घर घर जाकर देखेगाकरती है कैसे ये जनता तेरी ऐसी की तैसीखाता भर भर देने का वादा करने वाले तूनेखा डाला जो खाते में था तेरी ऐसी की तैसीबापू का नाखून नहीं तू गप्पू भी सबसे घटिया ब...
Tag :
  January 1, 2018, 9:21 pm
मेरा पहला कहानी संग्रह अंजुमन प्रकाशन, इलाहाबाद से प्रकाशित हो गया है। नीचे दिये गये पुस्तक के कवर पर  क्लिक करके इसे 30% छूट के साथ अमेजन (www.amazon.in) से मँगवाया जा सकता है।...
Tag :
  October 16, 2017, 4:02 pm
बह्र : फायलातुन फायलातुन फायलातुन फायलुन----------जिस घड़ी बाज़ू मेरे चप्पू नज़र आने लगे।झील सागर ताल सब चुल्लू नज़र आने लगे।ज़िंदगी के बोझ से हम झुक गये थे क्या ज़रा,लाट साहब को निरे टट्टू नज़र आने लगे।हर पुलिस वाला अहिंसक हो गया अब देश में,पाँच सौ के नोट पे बापू नज़र आने लगे।कल तलक ...
Tag :
  June 18, 2017, 12:40 am
मिल नगर से न फिर वो नदी रह गई।लुट गया शुद्ध जल, गंदगी रह गई।लाल जोड़ा पहन साँझ बिछड़ी जहाँ,साँस दिन की वहीं पर थमी रह गई।कुछ पलों में मिटी बिजलियों की तपिश,हो के घायल हवा चीखती रह गई।रात ने दर्द-ए-दिल को छुपाया मगर,दूब की शाख़ पर कुछ नमी रह गई। करके जूठा फलों को पखेरू उड़ा,रूह तक...
Tag :
  June 10, 2017, 9:35 am
बिना तुम्हारेहे मेरी तुमसब आधा हैसूरज आधा, चाँद अधूराआधे हैं ग्रह सारेदिन हैं आधे, रातें आधीआधे हैं सब तारेधरती आधीसृष्टि अधूरीरब आधा हैआधा नगर, डगर है आधीआधे हैं घर, आँगनकलम अधूरी, आधा काग़ज़आधा मेरा तन-मनभाव अधूरेकविता कामतलब आधा हैफागुन आधा, मधुऋतु आधी आया आधा सावनआ...
Tag :
  February 13, 2017, 11:19 pm
महाबुद्ध से शिष्य ने पूछा, “भगवन! समाज में असत्य का रोग फैलता ही जा रहा है। अब तो इसने बच्चों को भी अपनी गिरफ्त में लेना शुरू कर दिया है। आप सत्य की दवा से इसे ठीक क्यों नहीं कर देते?”महाबुद्ध ने शिष्य को एक गोली दी और कहा, “शीघ्र एवं सम्पूर्ण असर के लिये इसे चबा-चबाकर खाओ, म...
Tag :
  February 9, 2017, 9:51 am
बह्र : मफऊलु फायलातुन मफऊलु फायलुन (221 2122 221 212)है अंग अंग तेरा सौ गीत सौ ग़ज़लपढ़ता हूँ कर अँधेरा सौ गीत सौ ग़ज़लदेखा है तुझको जबसे मेरे मन के आसपास,डाले हुए हैं डेरा सौ गीत सौ ग़ज़ल।अलफ़ाज़ तेरा लब छू अश’आर बन रहे,कर दे बदन ये मेरा सौ गीत सौ ग़ज़ल।नागिन समझ के जुल्फें लेकर गया, सो अब,गाता ...
Tag :
  January 22, 2017, 9:29 pm
ये दुनिया है भूलभुलैयारची भेड़ियों नेभेड़ों की खातिरपढ़े लिखे चालाक भेड़ियेगाइड बने हुए हैं इसकेओढ़ भेड़ की खालजिन भेड़ों की स्मृति अच्छी हैउन सबको बागी घोषित कररंग दिया है लालफिर भी कोई राह न पायेइस डर के मारेछोड़ रखे मुखबिरभेड़ समझती अपने तन परखून पसीने से खेती करउगा रही ज...
Tag :
  January 14, 2017, 11:24 pm
बह्र : ११२१ २१२२ ११२१ २१२२जो करा रहा है पूजा बस उसी का फ़ायदा हैन यहाँ तेरा भला है न वहाँ तेरा भला हैअभी तक तो आइना सब को दिखा रहा था सच हीलगा अंडबंड बकने ये स्वयं से जब मिला हैन कोई पहुँच सका है किसी एक राह पर चलवही सच तलक है पहुँचा जो सभी पे चल सका हैइसी भोर में परीक्षा मेरी ...
Tag :
  January 10, 2017, 10:19 am
है यही विनती प्रभो नव वर्ष ऐसा होएक डॉलर के बराबर एक पैसा होऊसरों में धान हो पैदारूपया दे पाव भर मैदाहर नदी को तू रवानी देहर कुआँ तालाब पानी देलौट आए गाँव शहरों सेहों न शहरी लोग बहरों से खूब ढोरों के लिये चोकर व भूसा होकैद हो आतंक का दानवऔर सब दानव, बनें मानवताप धरती का ज...
Tag :
  December 31, 2016, 7:26 pm
बह्र : 2122 1122 1122 22दिल के जख्मों को चलो ऐसे सम्हाला जाएइसकी आहों से कोई शे’र निकाला जाएअब तो ये बात भी संसद ही बताएगी हमेंकौन मस्जिद को चले कौन शिवाला जाएआजकल हाल बुजुर्गों का हुआ है ऐसादिल ये करता है के अब साँप ही पाला जाएदिल दिवाना है दिवाने की हर इक बात का फिरक्यूँ जरूरी है...
Tag :
  December 23, 2016, 3:02 pm
बह्र : 1212 1122 1212 22प्रगति की होड़ न ऐसे मकाम तक पहुँचेज़रा सी बात जहाँ कत्ल-ए-आम तक पहुँचेगया है छूट कहीं कुछ तो मानचित्रों मेंचले तो पाक थे लेकिन हराम तक पहुँचेवो जिन का क्लेम था उनको है प्रेम रोग लगागले के दर्द से केवल जुकाम तक पहुँचेन इतना वाम था उनमें के जंगलों तक जायँनगर से ...
Tag :
  December 15, 2016, 12:48 pm
बह्र : 2122 2122 2122 212आदमी की ज़िन्दगी है दफ़्तरों के हाथ मेंऔर दफ़्तर जा फँसे हैं अजगरों के हाथ मेंआइना जब से लगा है पत्थरों के हाथ मेंप्रश्न सारे खेलते हैं उत्तरों के हाथ मेंजोड़ लूँ रिश्तों के धागे रब मुझे भी बख़्श देवो कला तूने जो दी है बुनकरों के हाथ मेंछोड़िये कपड़े, बदन पर बच न पा...
Tag :
  December 4, 2016, 1:13 pm
बह्र : १२२२ १२२२ १२२उतर जाए अगर झूठी त्वचा तो।सभी हैं एक से साबित हुआ, तो।शरीअत में हुई झूठी कथा, तो।न मर कर भी दिखा मुझको ख़ुदा, तो।वो दोहों को ही दुनिया मानता है,कहा गर जिंदगी ने सोरठा, तो।समझदारी है उससे दूर जाना,अगर हो बैल कोई मरखना तो।जिसे मशरूम का हो मानते तुम,किसी मज़ल...
Tag :
  November 28, 2016, 12:43 pm
हमें साथ रहते दस वर्ष बीत गयेदस बड़ी अजीब संख्या हैये कहती है कि दायीं तरफ बैठा एकमैं हूँतुम शून्य होमिलकर भले ही हम एक दूसरे से बहुत अधिक हैंमगर अकेले तुम अस्तित्वहीन होहम ग्यारह वर्ष बाद उत्सव मनाएँगेंक्योंकि अगर कोई जादूगर हमें एक संख्या में बदल देतो हम ग्यारह हों...
Tag :
  November 9, 2016, 9:34 pm
बह्र : १२२२ १२२२ १२२एल ई डी की क़तारें सामने हैंबचे बस चंद मिट्टी के दिये हैंदुआ सब ने चराग़ों के लिए कीफले क्यूँ रोशनी के झुनझुने हैंरखो श्रद्धा न देखो कुछ न पूछोअँधेरे के ये सारे पैंतरे हैंअँधेरा दूर होगा तब दिखेगासभी बदनाम सच इसमें छुपे हैंउजाला शुद्ध हो तो श्वेत होग...
Tag :
  October 31, 2016, 9:48 am
अंधकार भारी पड़ता जबदीप अकेला चलता हैविश्व प्रकाशित हो जाता जबलाखों के सँग जलता हैहैं प्रकाश कण छुपे हुयेहर मानव मन के ईंधन मेंचिंगारी मिल जाये तो भर दें उजियारा जीवन मेंइसीलिए तो ज्योति पर्व सेहर अँधियारा जलता हैज्योति बुझाने की कोशिश जब कीट पतंगे करते हैंजितना जो...
Tag :
  October 28, 2016, 12:03 pm
झील ने कवि से पूछा, “तुम भी मेरी तरह अपना स्तर क्यूँ बनाये रखना चाहते हो? मेरी तो मज़बूरी है, मुझे ऊँचाइयों ने कैद कर रखा है इसलिए मैं बह नहीं सकती। तुम्हारी क्या मज़बूरी है?”कवि को झटका लगा। उसे ऊँचाइयों ने कैद तो नहीं कर रखा था पर उसे ऊँचाइयों की आदत हो गई थी। तभी तो आजकल उस...
Tag :
  October 23, 2016, 1:00 pm
बह्र : २१२२ १२१२ २२दर्द-ए-मज़्लूम जिसने समझा हैवो यक़ीनन कोई फ़रिश्ता हैदूर गुणगान से मैं रहता हूँएक तो जह्र तिस पे मीठा हैमेरे मुँह में हज़ारों छाले हैंसच बड़ा गर्म और तीखा हैदेखिए बैल बन गये हैं हमजाति रस्सी है धर्म खूँटा हैसब को उल्लू बना दे जो पल मेंये ज़माना मियाँ उसी का ...
Tag :
  October 18, 2016, 7:57 pm
बह्र : २१२२ १२१२ २२जिसके दिल का दिलों से रिश्ता हैवो यक़ीनन कोई फ़रिश्ता हैदूर गुणगान से मैं रहता हूँएक तो जह्र तिस पे मीठा हैमेरे मुँह में हज़ारों छाले हैंसच बड़ा गर्म और तीखा हैदेखिए बैल बन गये हैं हमजाति रस्सी है धर्म खूँटा हैसब को उल्लू बना दे जो पल मेंये ज़माना मियाँ उस...
Tag :
  October 18, 2016, 7:57 pm
बह्र : २२११ २२११ २२११ २२क्या क्या न करे देखिए पूँजी मेरे आगेनाचे है मुई रोज़ ही नंगी मेरे आगेडरती है कहीं वक़्त ज़ियादा न हो मेराभागे है सुई और भी ज़ल्दी मेरे आगेसब रंग दिखाने लगा जो साफ था पहलेजैसे ही छुआ तेल ने पानी मेरे आगेख़ुद को भी बचाना है और उसको भी बचानाहाथी मेरे पीछे ...
Tag :
  October 12, 2016, 1:08 pm
बह्र : २१२२ १२१२ २२अंधे बहरे हैं चंद गूँगे हैंमेरे चेहरे पे कितने चेहरे हैंमैं कहीं ख़ुद से ही न मिल जाऊँये मुखौटे नहीं हैं पहरे हैंआइने से मिला तो ये पायामेरे मुँह पर कई मुँहासे हैंफ़ेसबुक पर मुझे लगा ऐसाआप दुनिया में सबसे अच्छे हैंअब जमाना इन्हीं का है ‘सज्जन’क्या हुआ...
Tag :
  October 3, 2016, 6:17 pm
बह्र : २१२२ २१२२ २१२रंग सारे हैं जहाँ हैं तितलियाँपर न रंगों की दुकाँ हैं तितलियाँगुनगुनाता है चमन इनके कियेफूल पत्तों की जुबाँ हैं तितलियाँपंख देखे, रंग देखे, और? बस!आपने देखी कहाँ हैं तितलियाँदिल के बच्चे को ज़रा समझाइएआने वाले कल की माँ हैं तितलियाँबंद कर आँखों को क...
Tag :
  September 17, 2016, 10:11 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3774) कुल पोस्ट (177015)