Hamarivani.com

अपनी शायरी अपनी जुबानी

वफा मैनेँ की है वफा चाहता हुँ खुद से भी ज्यादा मैँ तुझे चाहता हुँ ना दिन की फिकर ना रात का गम है जो केवल तुझे देखे वो नजर चाहता हुँ बैठे रहो तुम पास मेरे ना हो दुरियाँ जुदा ना हो हम कभी ऐसा हमसफर चाहता हुँFiled under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  January 24, 2016, 6:59 am
तेरी चाहत की गहराई मेँ कुछ ऐसे खोया हुँ जैसे बरसोँ थकान के बाद आज सोया हुँ ना आरजू है ना तमन्ना है मेरी जमाने की एक तुम ही तो हो जिसके लिए मैँ बरसोँ रोया हुँFiled under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  November 29, 2015, 4:55 pm
कर ली हमने भी मुहब्बत दुनिया को देखकर जिसे सारी दुनिया करती है वो महज धोखा तो हो नहीँ सकतीFiled under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  November 29, 2015, 4:46 pm
तेरी चाहत मेँ मैनेँ खुद को युँ सँवारा है तेरे बिना नहीँ एक पल गँवारा  है दुर अगर हो जाओ तो जी नहीँ लगता मैनेँ खुदा से सजदे मेँ सिर्फ तुझे ही माँगा हैFiled under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  November 26, 2015, 11:29 am
आँखोँ मेँ चाहत दिल मेँ प्यार बिछाए बैठे हैँ अपनी आशिकी मेँ तुझको कुछ युँ सजाए बैठे हैँ अरमानोँ मेँ बसी हो तुम की तुझे हमसफर बना लुँ कितने अरसोँ से तुम्हेँ खुद मेँ समाए बैठे हैँFiled under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  November 26, 2015, 11:22 am
मेरी जिँदगी अब तेरी अमानत है तु है तो मेरी जिँदगी सलामत है आरजू नहीँ है अब तेरे बिन जीने की अगर नहीँ हो तुम तो कयामत ही कयामत हैFiled under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  November 7, 2015, 5:30 am
हमेँ जमाने की आरजू कहाँ थी मैँ वहाँ था वो जहाँ थी सितारोँ की चमक मेँ चाँदनी क्या खुब लगती है आशिकी वहाँ थी मेरी तेरी चाहत जहाँ थी खिदमत को तेरी मैँ चाँद तारे तोङ लाउँ पेश खुन-ए-दिल था मेरा तेरी कदमेँ जहाँ थी कशिश पाने की है तुझे की दुर तुझसे रह ना पाता हुँ मैँनेँ खुद को ही प...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 28, 2015, 1:51 pm
किस्मत की लकीरोँ मेँ तुम नहीँ शायद मेरी पुरी जिँदगी पर तेरे नाम होगी तुम मुझे बेवफा कहो मुझे परवाह नहीँ परवाह है तो बस ये कि मेरे बिना तुम भी कैसे खुश होगीFiled under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 28, 2015, 1:48 pm
कर दी जिँदगी मैँ थोङी भुल हमने भी देख ली सपने बेबुनियाद हमने भी रेत मेँ चले थे बनाने को घर इसी सीलसिले मेँ खो दी खुशी और सकून हमने भी नफरत होती है हमेँ अब मुहब्बत के नाम से इसमेँ कभी अश्क नैनोँ से रुकते नहीँ जख्मोँ से सनी है मुहब्बत-ए-दाँस्ता ये ऐसे जख्म है जो कभी युँ दिखते...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 28, 2015, 1:46 pm
साँस थम जाती है आपके जाने के नाम से , दिल मचल उठता है आपके आने के नाम से। कभी दुर मत जाना की जी नहीँ लगता, जान चली जाएगी आपको भुलाने के नाम सेFiled under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 11, 2015, 10:19 am
अश्को को आँखो से शिकायत इतनी है , दिल को मुहब्बत की जरुरत जितनी है। क्योँ कर देते हो मुझे पास लाकर इतनी दुर, जब तुझको मुझसे नफरत इतनी है।।Filed under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 11, 2015, 10:18 am
तेरी खुबसुरती का ये फसाना हुआ ये चाँद भी आज तुम्हारा दिवाना हुआ जुल्फोँ को तुम बिखराओ तो घटा बरसती है हर किसी की जान अब तेरी जान मेँ बसती है दुपट्टा गर लहराओ तो ही हवा भी चलती है तेरी साँस को छुने को हर अरमाँ तङपती है तुम हँसो तो बहारोँ के फुल भी तब खिलते हैँ भँवर भी तब कही...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 11, 2015, 6:46 am
बेबसी ने मुझे इस कदर सताया है खुद की लाचारी पर अब मुझे रोना आया है जिन्दगी तुझसे मैँ एक सवाल पुँछता हुँ तुने दिया किया है मुझे केवल खोया हुँ किरदार भी दिया तुमने तो ये कैसा दिया खुद को ही तुमने खुद से जुदा किया ना खुशी दी ना खुशनुमा संसार दिया ना दिल दी ना मुहब्बत और प्यार ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 11, 2015, 6:45 am
मंजिल वही रहती है बस सफर बदल जाते है मुहब्बत भरी दुनिया मेँ हमसफर बदल जाते हैँ आरजू होती है तुझ मेँ खो जाने की बेवफा तुम ना हो जाओ कहीँ ये सोच ख्यालात बदल जाते है ।Filed under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 11, 2015, 6:43 am
तमन्ना होती है तुम्हेँ हमसफर बना लुँ दुनिया की नजरोँ से तुझ को बचा लुँ कर के एलान हाँ मुहब्बत है तुमसे सारी दुनिया से कहकर खुद मेँ छुपा लुँ भुल कर दुनिया की रश्म-ओ-रिवाज तेरी झील से आँखो मेँ खो जाउँ आज तेरी सादगी मेँ कुछ ऐसा कर जाऊँ तुम मेरी गजल बनो मैँ तेरा शायर बन जाऊँ तु...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 11, 2015, 6:42 am
साँसोँ का क्या भरोसा ये तो टुट जाते हैँ चंद लम्होँ मेँ सारे रिश्ते-नाते छुट जाते हैँ जिसे आज तुम अपना-अपना कहते हो शव पर आकर तेरे बस ये ही कुछ देर रो जाते हैँ शमशान पर पहुँच कर तेरे ये अपने वक्त क्या लगेगा जलने मेँ ये सवाल पुछते हैँ कुछ नहीँ जाता साथ तेरे ए मनुष्य बस तेरे अ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 11, 2015, 6:37 am
मेरे लफ्जोँ मेँ तेरे सिवा कोई नाम ना हो तेरे बिना मेरी पुरी कोई शाम ना हो साँस भी चले तो बस तेरे पास होने पे चले हमारी जिँदगी मेँ गम का कोई नामो निशान ना होFiled under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 11, 2015, 5:30 am
शहर की झोपङपट्टी से मैँ कभी कभी गुजरा करता था एक बच्ची को नंगे पैर दौङते देखा करता था चिलचिलाती धुप ने सबको बदहाल बना डाला था उसके चेहरे पर सिकन तक ना थी शायद भुख ने उसे बेदर्द बना डाला था मेरी भी इच्छा हुई मै भी नंगे पैर चल कर देखुँ उस बच्ची की तरह मै भी दौङ कर देखुँ चप्पल ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 10, 2015, 8:35 pm
एक गरीब भुख का मारा कुछ ऐसा था करता रोज सुबह रास्ते मेँ अक्सर वो था मिलता सुबह सुबह वह कचरे के डिब्बे से कुछ था चुनता आँखे तेज थी उसकी कचरे मेँ कुछ था ढुँडता सारे पोटली को खोल खोल कर था कुछ वो देखता कंधे पर उसने एक बोरा बाँधे रखा था गर मिल जाए कुछ तो वो उसमेँ डाला करता था लाच...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 10, 2015, 8:32 pm
चाहत मे तेरी मैँ जिँदगी सँवार दुँ जितना किसी ने ना दिया वो मैँ प्यार दुँ खुदा के बेमिशाल कारीगरी का तोहफा हो तुम फिर क्युँ ना तेरी जिँदगी मेँ सारी दुनिया वार दुँFiled under: शायरी ...
अपनी शायरी अपनी जुबानी...
Tag :
  October 9, 2015, 8:53 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3652) कुल पोस्ट (163788)