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लोगो नेये कौन सीऱीवाज पाल रखी जहाँ खुद कीपाकीजगी साबितकरने की चाह मेंदुसरो को गिराना पडा,मसाइबो की क्या कमीखुद की रयाजत औरउसके समर की है आस..रफाकते भी चंद दिनो कीपर मुजमहिल इस कदर किमैं हि मैं हूँ।न जाने वो इख्लास की छवि गई कहाँजहाँ अजीजो की भी थी हदेंखुदी की जरकाऱसाब...
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Tag :छवि
  April 30, 2016, 12:59 pm
मुड़  कर जाती  ज़ीस्त गुज़रते  लम्हों  को शाइस्तगी  से ताकीद   की, फ़र्ज़  और क़र्ज़  किसी  ओर  रोज़,खोने  और  पाने  का हिसाब  किसी  ओर  दिन, मुद्द्त्तो  के  बाद  मिली पलक्षिण  को  समेट  तो  लू,शाद  ने  भी शाइस्तगी  से ताकीद  ...
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Tag :कर्ज.किसी
  March 31, 2016, 5:35 pm
नूर-ए-रंग है फाग कीहमें खिलने के लिए,चंद रस्म नहीं सिर्फनिभाने के लिए,निखर कर निखार देपूर्ण चांद निकला हैये बताने के लिए..-    ©पम्मी                     ...
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Tag :
  March 22, 2016, 11:16 pm
ये मेआर...बेटियो सेमधु मिश्रित ध्वनि से पुछाकहाँ से लाती हो, ये मेआरनाशातो की सहर             हुनरमंद तह.जीब,और तांजीमसदाकत,शिद्दतो की मेआर,जी..मैने हँस कर कहाँमेरी माँ ने संवारा..उसी ने बनाया हैस्वयं को कस कर हर पलक्षिण मेंइक नई कलेवर के लिए शनैः शनैः प...
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Tag :
  March 8, 2016, 8:55 am
जुम्बिशे  तो  हर    इक   उम्र  की  होगी कसमसाहटो  की  आहटे  भी  होगी ,शायद   इसलिए  हि कल  की  ज़िक्र  कर आज  हि  संवर  जाते , ज़िस्त  यू  हि कटती  जाती किसी  ने  कहाँ ?क्यू  कल  की  चिंता . . वो  भी  आजमा  कर.. रुकी  हुई  सी &n...
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Tag :आहटें
  February 14, 2016, 3:48 pm
कह  दो इन आइनों को नत हुआ है सच दस्तूर है आज का छद्म  रूप  के  सभी  है भक्त्त रोष  की आंच  में सभी  है  मस्त सत्य की  आंच कम  न  पड़  जाए इसलिए  लेखनी  को  सहारा मानती हूँ. .                                                   ...
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Tag :
  January 31, 2016, 2:21 pm
                       स्वार्थ 'स्वार्थ 'शब्द   पर परिज्ञप्ति   चंद  परिज्ञा जी हाँ, स्वार्थ   ऐसी  प्रवृति  जो  हम  सभी  में  विराजमान ..  एक  संज्ञा  और  भाव  जो  सर्वथा  नकारात्मकता  ही संजोए   हुए  है। प्रश्न  है  स्वार्थ &nbs...
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  January 18, 2016, 3:27 pm
       शफ़क़ नव वर्ष की   नवोत्थित शफ़क़ यू हि बनी  रहे . . हमारे  एवानो में आसाइशे  से नज़दीकियों की सफ़र बहुत छोटी हो साथ  ही उन दहकानों  की दरे भी  जगमगाती  रहे . . ख्वाबों  में  भी इन अज़ीयते  से दूरियाँ बहुत  लम्बी हो  इन्सानियत फ़ना होने ...
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  December 29, 2015, 9:09 pm
नियतखामोश  जबानों  की भी  खुद  की  भाषा  होती  है कभी अहदे - बफा  के  लिए ,कभी  माहोल को काबिल  बनाने के  लिए मु.ज्तारिब क्या  करु नियत नहीं . . दूसरो पर कीचड़ उछाल कर ख़ुद को कैसे साफ़ रखू।   कभी  खुद  के  घोसले ,कभी दुसरो के  तिनके  की पाकी...
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Tag :
  December 8, 2015, 6:39 pm
                                                                               रिश्ते  आप  सभी  का    अभिनन्दन, ब्लॉग  जगत  का  एक  कोना   जहाँ कलम  भी अपनी दवात  भी  अपनी  और  विचार  भी  अपने। . चलें   ...
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Tag :
  November 24, 2015, 12:52 pm

                                                तलाश                                                                                            स्वतंत्रता  तो उतनी  ही है  हमारी          जितनी लम्बी बेड़ियों  ...
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Tag :
  October 29, 2015, 3:23 pm
                                              कुछ                               भावनाओं  , संवेदनाओं   एवम विचारों  की प्रस्तुतिकरण की   प्रयास ताकि शब्द और भावो  की अभिवयक्ति संजीदगी  से हो  कुछ से सबकुछ का सफर..… ...
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Tag :
  September 30, 2015, 1:02 pm
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