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Blog: चरैवेति

Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
जहाँ तक मुझे याद आ रहा है यह 1998 की बात है। अक्टूबर के मिडटर्म की तैयारी हो रही थी। यूँ तो सब ठीक-ठाक था, पर न जाने क्यों फिर भी कुछ अजीब सा लग रहा था। उस साल वर्षा भी कुछ ज्यादा हुई थी। आदरणीय डॉक्टर मोहन चंद जोशी, आदरणीय बसंत लाल आहूजा और मैंने मिलकर एक टोली बनाई और यह तय किया... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   5:40pm 17 Sep 2018
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
दोनों हैं यदि  एक  बता फिर अपना मिलन कहाँ होगा!मैं  पथरीले  पथ का  राही तू खिला फूल है उपवन में,मैं  मरुस्थल  प्यासा  हूँ  तेरे सरस स्रोत बहा मन में,मैं आँसू  टपका  आँखों  से  और रुपहला मोती है तू,मैं  दीपक की जलती बाती और दमकती ज्योति है तू|जिसमें जीवन ... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   4:37pm 27 Feb 2018
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
कवि – श्री उमाकांत शुक्लपत्रव्यवहार - ६०४ संजय मार्ग, नई मंडी, पटेल नगर, मुजफ्फर नगर| उत्तरप्रदेश|फेसबुक यू आर एल - https://www.facebook.com/umakant.shukla.58ई मेल  - shukla_umakant@rediffmail.comदूरभाष - +९१९९९७८३७०६२--------------------------------------------------------------नायक - नायिका प्रकरणनारीज... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   2:21pm 5 Feb 2018
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
आज का समय ‘पेट का समय’ है|जहाँ तक हमारी जानकारी है, पेट सभी प्राणियों में पाया जाता है| जीवन के सारे काम-धाम पेट के चक्कर में ही हुआ करते हैं| सयाने कहते हैं कि मनुष्य के शरीर में दिमाग का वह स्थान होता है जो किसी ज़माने में राज्यों के राजाओं का हुआ करता था| सच बात तो यह है कि आ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   11:01am 3 Dec 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
आज एक नए कवि से आपका परिचय कराने में मुझे बहुत फख्र महसूस हो रहा है| इस कवि की कुछ कविताओं को एक विद्यालय की पत्रिका में देखा तो चकित रह गया| जाकर मिला तो पता लगा कि ये बरखुरदार तो खूब लिखते हैं, लगातार लिखते हैं|माना जाता है कि अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र जिन्दगी ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   5:19am 5 Nov 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
कवि – श्री उमाकांत शुक्लपत्रव्यवहार - ६०४ संजय मार्ग, नई मंडी, पटेल नगर, मुजफ्फर नगर| उत्तरप्रदेश|फेसबुक यू आर एल - https://www.facebook.com/umakant.shukla.58ई मेल  - shukla_umakant@rediffmail.comदूरभाष - +९१९९९७८३७०६२एक कटोरी चाँदनी एक कटोरी धूप (भाग ४)२९-९-२०१७ से १-... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   5:38pm 1 Oct 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
विजय-दशमी,विक्रम सम्वत् २०७४प्रिय पाठकों,जिन परिस्थितियों में समय बीत रहा है उनके चलते मूल रूप से भय हमारे जीवन का स्थायी भाव हो चुका है|हम सभी खतरे की घंटियाँ अपने-अपने गले में टाँगे हुए चलते चले जा रहे हैं| खुद से ही खतरा महसूस करते हैं और खुद को ही सावधान करने के लिए अ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   7:24am 30 Sep 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
अनुभव ज्ञान की कसौटी होता है| इसी तरह ज्ञान भी अनुभव की सत्यता परखता है| प्रस्तुत दोहों में दोनों के इस पारस्परिक सम्बन्ध को बार-बार और बहुत स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है| जब सहस्रों वर्षों के संचित अनुभव और ज्ञान एकाकार होते हैं और कविता का रूप लेकर सम्मुख उपस्थित होते ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   8:53am 28 Sep 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
कवि – श्री उमाकांत शुक्लपत्रव्यवहार - ६०४ संजय मार्ग, नई मंडी, पटेल नगर, मुजफ्फर नगर| उत्तरप्रदेश|फेसबुक यू आर एल - https://www.facebook.com/umakant.shukla.58ई मेल  - shukla_umakant@rediffmail.comदूरभाष - +९१९९९७८३७०६२एक कटोरी चाँदनी एक कटोरी धूप (भाग २)(७-७-२०१७ से ३१-७-२... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   5:00pm 2 Sep 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
समयतोलगाकिन्तुइसबार‘अतिथिलेखक’ श्रृंखलामेंसुकविश्रीउमाकांतशुक्लद्वारारचित१४५दोहेलेकरउपस्थितिहुआहूँजोभाषा, कथ्यऔरअभिव्यक्तिकीदृष्टिसेबेजोड़हैं|दोहोंकेलेखकमूलरूपसेसंस्कृतकेकविऔरसाहित्य-शास्त्रकेआचार्यहैं| हालहीमेंआपनेएकअभिनवप्रयोगप्रारम्भकिय... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   8:14pm 6 Jul 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
समयतोलगाकिन्तुइसबार‘अतिथिलेखक’ श्रृंखलामेंसुकविश्रीउमाकांतशुक्लद्वारारचित१४५दोहेलेकरउपस्थितिहुआहूँजोभाषा, कथ्यऔरअभिव्यक्तिकीदृष्टिसेबेजोड़हैं|दोहोंकेलेखकमूलरूपसेसंस्कृतकेकविऔरसाहित्य-शास्त्रकेआचार्यहैं| हालहीमेंआपनेएकअभिनवप्रयोगप्रारम्भकिय... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   8:14pm 6 Jul 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
फैशन का युग है| स्टेटस का दौर है| डिज़ाईनर जूते, कपड़े, घड़ियाँ, गाड़ियाँ, फर्नीचर और मकान आदि प्रचलन में हैं| इन सबके अलावा आजकल एक और चलन है, डिज़ाईनर बच्चों के उत्पादन का| अंतर इतना है कि बाकी सब चीज़ें शरीर पर या शरीर के आस-पास सजाई जाती हैं और बच्चे सभी जगह प्रदर्शित किये जाते ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   5:04am 26 Apr 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
जीवन का खेल खेलते हुए जब सालों का अर्ध-शतक हो गया तब जाकर बात समझ में आई कि खेल जीवन के लिए कितने महत्त्वपूर्ण हैं| खेलों का असर हमारी जिंदगी में खूब दिखाई देता है। कभी हमारे लड़के क्रिकेट जीत जाते हैं तो हमारा दिल बल्लियों उछलने लगता है और कभी हार जाते हैं तो खिलाड़ियों ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   4:43pm 6 Apr 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
स्पष्टीकरणआप आगे की बात पढ़ना शुरू करें इससे पहले एक-दो बात साफ़ कर दी जाएँ तो अच्छा होगा| वैसे भी आजकल मानहानि के केस मिनटों में दर्ज हो जाते हैं| मान हो या न हो, बहरहाल हानि का खतरा सूंघते ही लोगों की पुलीस थानों की तरफ दौड़ने की कवायद शुरू होने में देर नहीं लगती| बात यह है - स... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   5:22pm 2 Apr 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
एक ज़माना था जब महापुरुष वचन का पालन किया करते थे| राजा लोग अपनी प्रजा का पालन करते थे| साधु-महात्मा तपश्चर्या का पालन करने में लगे रहते थे| सज्जन सदाचार का पालन करते थे| साधारण लोग धर्म का पालन करते थे| बालक-बटुक माता-पिता और गुरु की आज्ञा का पालन किया करते थे|समय बदला और इन ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   1:53pm 30 Mar 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
संजय शुक्ल नवगीत काव्य-विधा के सशक्त हस्ताक्षर हैं| उनकी कविता वर्तमान की विसंगतियों, विद्रूप और लिजलिजेपन को पूरी ईमानदारी के साथ प्रकट करती है| उनकी कविता अखबार नहीं है अपितु प्रकाशित पंक्तियों के बीच दबी-छिपी संवेदना को शिल्प के धरातल पर उकेर देने का सफल और स्तुत्... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   5:21pm 20 Mar 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
प्रातकाल खटिया से उठिकै, पियै तुरतै पानी|कबहूँ घर मा वैद न अइहै, बात घाघ के जानि||साफ़ है कि महाकवि घाघ ने सुबह उठने की बात तो चलाई, लेकिन ‘सुबह’का अर्थ खोल कर नहीं बताया| ज़ाहिर है, उन्होंने सभी को अपनी-अपनी ‘सुबह’अपनी-अपनी तरह परिभाषित करने की स्वतंत्रता दे दी है| वैसे भी आ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   4:02pm 17 Mar 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
लो भाई, होली से पहले ही होली खिल गई!बबुआ डिब्बे में बैठे हँस-हँस कर बतियाए तो रहे थे, लेकिन चेहरे पर फैला हुआ हार का रंग भी लगातार दिखाई देता रहा| हार का रंग क्या, बस यह समझ लीजिए कि साफ़-साफ़ दिखाई दे गया कि ‘अंगूर खट्टे’ वाली कहावत कैसे बनी होगी| भौजी तो उसी दिन से कोप-भवन में ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   1:09pm 11 Mar 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
हमारा देश एक भिक्षा-प्रधान देश है|भिक्षा के क्षेत्र में हमने अभूतपूर्व उन्नति की है| स्थिति यहाँ तक आ पहुँची है कि भिक्षा माँगना हमारे देश में मात्र एक कार्य नहीं रहा है, उसने तो यहाँ कला और विज्ञान का रूप धारण कर लिया है| इस वृत्ति की साधना में राजा से लेकर रंक तक सभी अपन... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   4:32am 5 Mar 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
नाम एक ऐसा रत्न है जो मनुष्य के पास ता-उम्र रहा करता है| इसे चमकाया जा सकता है, बिगाड़ा जा सकता है, मिट्टी में मिलाया जा सकता है, डुबाया जा सकता है, ऊँचा उठाया जा सकता है, गिराया जा सकता है, खराब किया जा सकता है, कमाया जा सकता है, ताक पर रखा जा सकता है और यहाँ तक कि बदनाम भी किया जा... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   4:25pm 26 Feb 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
दो छोटी छोटी कविताएं-https://youtu.be/WVnZJYzRFIE... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   1:17am 28 Jan 2017
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
श्राद्धों का मौसम चल रहा था|कुत्ते दावतें उड़ाने में व्यस्त थे| पंडित जी अपना झोला लिए किसी घर की ओर बढ़ते दिखाई दिए नहीं कि श्वानवृन्द ऊर्ध्वकर्ण होकर उनके पीछे-पीछे चल पड़ता| इधर पंडित जी सांकल खड़खड़ा कर दरवाजा खुलने का इंतज़ार करते और उधर पूँछ-संचालन का कार्य अबाध गति से ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   3:49pm 9 Dec 2016
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
घर के सामने एक कटहल का पेड़ है; भरा-भरा, घना-घना, चमकदार पत्तों वाला| पेड़ के डालियों पर कुछ मिट्टी के बर्तन टंगे हुए हैं जिनमें पानी और कुछ दाना मुसलसल पड़ा रहता है| सुबह के समय तोते आते हैं, टें-टें करते हुए दाना चुगते हैं| उनके बाद गौरैय्या, कौए और जंगली फाख्ता आसपास मंडराते ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   1:57pm 4 Dec 2016
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
प्रिय पाठकों,समय का चक्का घूम कर फिर वहीं आ पहुंचा है, जहाँ एक साल पहले था। बहुत कुछ बदला है और बहुत कुछ बदलाव की तरफ बढ़ा भी है। उठा-पटक जारी है जो काफी हद तक अच्छा लक्षण है। समय ठिठक कर रुक जाए तो साँस थमने लगती है। इतिहास ने हमें एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां हम न ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   6:30pm 29 Oct 2016
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल
हमारी और हमारी हिन्दुस्तानी कौम की एक बड़ी गज़ब की आदत है| कहीं भी, कुछ भी चल रहा हो हम छाती ठोक कर यह कहने में कतई संकोच नहीं करते थे कि हमारे देश में तो यह पहले से होता आ रहा है| जहाज बना तो हमने कहा कि पुराने भारत में पुष्पक विमान था| चिकित्सा और सर्जरी की बात चले तो तो हम दुन... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   4:02pm 21 Oct 2016
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