Hamarivani.com

चरैवेति

संजय शुक्ल नवगीत काव्य-विधा के सशक्त हस्ताक्षर हैं| उनकी कविता वर्तमान की विसंगतियों, विद्रूप और लिजलिजेपन को पूरी ईमानदारी के साथ प्रकट करती है| उनकी कविता अखबार नहीं है अपितु प्रकाशित पंक्तियों के बीच दबी-छिपी संवेदना को शिल्प के धरातल पर उकेर देने का सफल और स्तुत्...
चरैवेति...
Tag :
  March 20, 2017, 10:51 pm
प्रातकाल खटिया से उठिकै, पियै तुरतै पानी|कबहूँ घर मा वैद न अइहै, बात घाघ के जानि||साफ़ है कि महाकवि घाघ ने सुबह उठने की बात तो चलाई, लेकिन ‘सुबह’का अर्थ खोल कर नहीं बताया| ज़ाहिर है, उन्होंने सभी को अपनी-अपनी ‘सुबह’अपनी-अपनी तरह परिभाषित करने की स्वतंत्रता दे दी है| वैसे भी आ...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  March 17, 2017, 9:32 pm
लो भाई, होली से पहले ही होली खिल गई!बबुआ डिब्बे में बैठे हँस-हँस कर बतियाए तो रहे थे, लेकिन चेहरे पर फैला हुआ हार का रंग भी लगातार दिखाई देता रहा| हार का रंग क्या, बस यह समझ लीजिए कि साफ़-साफ़ दिखाई दे गया कि ‘अंगूर खट्टे’ वाली कहावत कैसे बनी होगी| भौजी तो उसी दिन से कोप-भवन में ...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  March 11, 2017, 6:39 pm
हमारा देश एक भिक्षा-प्रधान देश है|भिक्षा के क्षेत्र में हमने अभूतपूर्व उन्नति की है| स्थिति यहाँ तक आ पहुँची है कि भिक्षा माँगना हमारे देश में मात्र एक कार्य नहीं रहा है, उसने तो यहाँ कला और विज्ञान का रूप धारण कर लिया है| इस वृत्ति की साधना में राजा से लेकर रंक तक सभी अपन...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  March 5, 2017, 10:02 am
नाम एक ऐसा रत्न है जो मनुष्य के पास ता-उम्र रहा करता है| इसे चमकाया जा सकता है, बिगाड़ा जा सकता है, मिट्टी में मिलाया जा सकता है, डुबाया जा सकता है, ऊँचा उठाया जा सकता है, गिराया जा सकता है, खराब किया जा सकता है, कमाया जा सकता है, ताक पर रखा जा सकता है और यहाँ तक कि बदनाम भी किया जा...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  February 26, 2017, 9:55 pm
दो छोटी छोटी कविताएं-https://youtu.be/WVnZJYzRFIE...
चरैवेति...
Tag :
  January 28, 2017, 6:47 am
श्राद्धों का मौसम चल रहा था|कुत्ते दावतें उड़ाने में व्यस्त थे| पंडित जी अपना झोला लिए किसी घर की ओर बढ़ते दिखाई दिए नहीं कि श्वानवृन्द ऊर्ध्वकर्ण होकर उनके पीछे-पीछे चल पड़ता| इधर पंडित जी सांकल खड़खड़ा कर दरवाजा खुलने का इंतज़ार करते और उधर पूँछ-संचालन का कार्य अबाध गति से ...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  December 9, 2016, 9:19 pm
घर के सामने एक कटहल का पेड़ है; भरा-भरा, घना-घना, चमकदार पत्तों वाला| पेड़ के डालियों पर कुछ मिट्टी के बर्तन टंगे हुए हैं जिनमें पानी और कुछ दाना मुसलसल पड़ा रहता है| सुबह के समय तोते आते हैं, टें-टें करते हुए दाना चुगते हैं| उनके बाद गौरैय्या, कौए और जंगली फाख्ता आसपास मंडराते ...
चरैवेति...
Tag :संस्मरण
  December 4, 2016, 7:27 pm
प्रिय पाठकों,समय का चक्का घूम कर फिर वहीं आ पहुंचा है, जहाँ एक साल पहले था। बहुत कुछ बदला है और बहुत कुछ बदलाव की तरफ बढ़ा भी है। उठा-पटक जारी है जो काफी हद तक अच्छा लक्षण है। समय ठिठक कर रुक जाए तो साँस थमने लगती है। इतिहास ने हमें एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां हम न ...
चरैवेति...
Tag :
  October 30, 2016, 12:00 am
हमारी और हमारी हिन्दुस्तानी कौम की एक बड़ी गज़ब की आदत है| कहीं भी, कुछ भी चल रहा हो हम छाती ठोक कर यह कहने में कतई संकोच नहीं करते थे कि हमारे देश में तो यह पहले से होता आ रहा है| जहाज बना तो हमने कहा कि पुराने भारत में पुष्पक विमान था| चिकित्सा और सर्जरी की बात चले तो तो हम दुन...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  October 21, 2016, 9:32 pm
ऐसा लगने लगा है कि वर्तमान समय में बोलना सबसे बड़ी कला हो गयी है| कुछ भी बोलना और बोलते रहना बेशर्मी की सीमा से निकलकर जीवन की ज़रूरी कुशलता बन गया है। मन, बुद्धि और विवेक की सारी ताकत खिंच कर ज़बान पर जम चुकी है| हाथ पाँव हिलें न हिलें, ज़बान का हिलना समय की मांग हो चुकी है। ...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  October 16, 2016, 2:59 pm
समस्या गंभीर थी| गंभीर!सो भी कोई ऐसी वैसी गंभीर नहीं;खतरनाक वाली गंभीर|फिजाओं में हवा की जगह खुरदुरी रेत बह रही थी जिसमें न ज़िंदगी थी, न ताजगी| बस चारों तरफ एक अजीब सी खसखसाहट घुली-मिली थी| अन्धेरा इतना कि हाथ को हाथ नहीं सूझता था| कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा था| जंगल के सार...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  October 11, 2016, 9:48 pm
आज दोस्तों के साथ बैठ ही लिए| धरती का घूमता गोला सर्दियों को हर साल अपनी परिधि में घेर लाता है| सर्दियाँ आती हैं और साथ लाती हैं हर दिल में जागती हुई गरमाहट पाने की उत्कट इच्छा| आँगन के किसी भी कोने में धूप का कतरा उतरता है, तो मन उसके पास जाकर अपनी बाहों में समेट लेने के ल...
चरैवेति...
Tag :लेख
  May 30, 2016, 12:30 pm
कहीं दिल्ली की बिल्ली में तो इसका सूत्र नहीं लुका हुआ है!सुना है, दिल्ली की बिल्ली बाघ से अधिक खतरनाक, लोमड़ी से बढ़कर चालाक, तेंदुए से कहीं ज़्यादा शातिर और भेड़िये से ऊपर क्रूर होती है| बस, उसमें हाथी सा बल नहीं होता, गैंडे की तरह सींग झुकाकर सामने की ओर से हमला नहीं करती और क...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  May 4, 2016, 10:33 am
काफी समय से देख  रहा हूँ कि अनशन की प्रथा समाप्त सी होती चली आ रही है|आजकल स्याही फेंकना चलन में है| धरना देना और धरना देकर थप्पड़ खाना भी काफी प्रचलन में है| रैलियाँ होती रहती है| लीडरों के गले में काकुली को पकड़कर झूला झूलती लक्ष्मी और सरस्वती एक दूसरे को पींगे देती दिखा...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  April 27, 2016, 10:51 pm
बच्चों के कमरे की दीवार पर चिपके हुए कागज़ के ऊपर हाथ से अंग्रेजी में एक उद्धरण लिखा हुआ है|आजकल के बच्चे हिन्दी को पिछड़ा और हिन्दी पढ़ने वालों को और भी अधिक पिछड़ा मानते हैं| उन्हें लगता है, सारी अच्छी बातें अंगरेजी में ही लिखी जा सकती हैं| अंगरेजी में लिखी बातों का प्रभाव ...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  April 20, 2016, 12:08 pm
विधि की विडम्बना देखिये, सरकार बनाने का मौक़ा हाथ में था और हमारे पाँव काँप रहे थे|न केवल शासकीय बल्कि वित्तीय अधिकार भी हमारे पास आ रहे थे और हम थे कि पार्टी से निलंबित विधायक से चेहरे पर मुर्दनी सजाये बैठे थे|क्या कहें, बस अक्ल पर ही पत्थर पड़ गए थे| अच्छी खासी जिन्दगी चल र...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  April 13, 2016, 2:29 pm
सभी पाठकों को नव वर्ष की शुभकामनाएं!'सौम्य'नामक नया संवत्सर २०७३ आप सभी के जीवन में सकारात्मकता, प्रसन्नता, ऊर्जा और अनदेखे-अनजाने में प्रवेश करने का साहस लाये, ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है। कहते हैं कि आज के दिन ही सूर्योदय के साथ ब्रह्मा ने नवीन सृष्टि की थी - चैत्रे मासि...
चरैवेति...
Tag :
  April 8, 2016, 11:03 am
सारी दुनिया सोयी थी,अँधेरे की चादर में लिपटी हुई|घास की पत्तियों पर उड़ते थे कुछ बेआवाज, बेफिक्र, आवारा जुगनूरेडियम की टार्चें लिए हुए|कभी कभी हवा की सरसराहट से जागकरपेड़ धीरे से करवट ले लेते थे |चाँद का पंछी जाकर ठहर गया थाआसमान की कोर पर|और मैं अकेला बेजुबान, बेरौनकमुंड...
चरैवेति...
Tag :
  April 7, 2016, 10:29 pm
जूते के ऊपर बहुत कहा और उससे भी अधिक सुना जाता है। कहने वाले तो जूते को आदमी का बूताभी बताते हैं। कहने वाले तो कहते ही रहते हैं, वे तो यहाँ तक कहते हैं कि आज के दौर में अगर अपनी पहचान बनानी है तोजूते की चोट मारने में सिद्धहस्त हो जाइए और अपने विवेक से तय कीजिये कि जूता च...
चरैवेति...
Tag :व्यंग्य
  April 2, 2016, 10:56 pm
“इम्तहान बहुत अच्छा हुआ,छियासी प्रतिशत आना पक्का है|”“नहीं, गाली मैंने नहीं दी थी,झगड़ा तो उसी ने शुरू किया था|”“आज मैनें रोटी खाई हैं, जी भर|”“माँ पिताजी साथ बैठे हैं, टी वी देखते हुए|”किताबों में लिखी सच-झूठ की परिभाषाओं सेबहुत आगे निकलकर खड़ा हुआ बच्चाएक के बाद एक सवालो...
चरैवेति...
Tag :
  March 20, 2016, 12:12 am
दीवार पर लगा पोस्टरध्यान से देखातो आइना सा लगने लगा| ज़िंदगी की हकीकत परत-दर-परत खुलने लगी| जब तक पिक्चर लगी हैतभी तक पोस्टर, पोस्टर है,उसके बाद गन्दगीजिसके ऊपर चस्पा हो जाता हैएक और पोस्टर| सैंकड़ों लोग दिखाई देते हैंसड़क पर चले जाते हुएदफ्तरी फ़ाइल पर नजरें जमाए हुए ...
चरैवेति...
Tag :
  March 15, 2016, 10:54 pm
धमाके की आवाज़...साथ ही कुछ तड़तड़ाहट... तड़ाक्तड़...शायद कुछ टूटा है...मंदिर? ...मस्जिद? ...गुरद्वारा?नहीं... एक पहचान, एक संस्कृति, ज़िंदगी की पहचान।फिर धमाका.... धमाकेसाथ ही कुछ चीत्कार... कराहेंशिशु का क्रंदन...शायद कोई मर रहा है... हिन्दू? मुसलमान? सिख?नही... सदियों की क्रमागत उन्नति की ...
चरैवेति...
Tag :
  March 14, 2016, 4:49 pm
कभी...हुमककर खेलती रहीसितारों के घुँघरुओं को उछाल-उछाललालच देता रहा अन्धेराचमकीली गेंद का| कभी...एक कोने से दूसरे कोने तकभागती रही आसमान के,थक कर चूर पसीने में लथपथभिगोती रही पुलकती घास को| कभी...धरती की फ़ैली हथेली परछू-छूकर पोरवे, गा-गाकरसिखाती रही गिनती और पहाड़ेआवा...
चरैवेति...
Tag :
  March 10, 2016, 11:00 pm
आज कोई किस्सा या व्यंग्य नहीं, एक नेक आदमी की जीवन-गाथा सुनाता हूँ जिसे अपनी दयालुता के परिणाम स्वरूप ‘दमनकारी’, ‘असहिष्णु’, ‘निरंकुश’, ‘शोषक’ और ‘अत्याचारी’ आदि उपाधियों से नवाजा गया| हमारे एक मित्र हैं, चकौड़ी दास| नाम फटीचर सा लगता है लेकिन बताते हैं कि उनका खानदान ...
चरैवेति...
Tag :किस्सा
  March 5, 2016, 10:55 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3652) कुल पोस्ट (163585)