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mere vichar- ek khuli kitab

mere vichar- ek khuli kitab: सहानुभूति या समानता (emphaty or equality): ईश्वर की सबसे सुन्दर रचना  अद्भुत ,ममतामयी ,स्थिर ललना  पीढ़ी- दर -पीढ़ी , तूने की संरचना  सह पुरुषत्व की तानाशाही ,सीखा लड़ना ।  क्यों आ......
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  October 6, 2015, 1:18 pm
ईश्वर की सबसे सुन्दर रचना अद्भुत ,ममतामयी ,स्थिर ललना पीढ़ी- दर -पीढ़ी , तूने की संरचना सह पुरुषत्व की तानाशाही ,सीखा लड़ना । क्यों आज चाहिए हमें सहानुभूति मानवता की हैसियत से ?क्या कम हैं हममें  हुनर और अनुभूति संतुलन और सहिष्णुता ,किसी नज़र से ?आजीवन क्या अर्धा...
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  October 3, 2015, 7:07 pm
मैं सच कहूँ कि  मेरे जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करनेवाला  quote अगर कोई  है तो यह वह quote है  जिसे मेरे  जीवन का मंत्र कहा जा सकता है  -  "Love what you have.Need what you want,Accept what you recieve.Give what you can. Always remember what goes around,comes around."Love what you have. Need what you want.--इस भौतिक संसार  में आत्म संतुष्टि बहुत बड़ा गुण  है । ...
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  September 24, 2015, 1:44 pm
picture googleक्या सोचती थी ,वह याद नहीं ।क्या चाहती थी ,भूल गयी ।समय के थपेड़ों ने ,समुद्री लहरों -सी ,एक छोर सेदूसरे छोर  तक ,यूँ सुरक्षित ,पहुंचा दिया कि -शहर की गलियां ,खोजने स्वयंनिकल पड़ी ।जीवन के पथ पर ,अनेक रूप मिले ,पर किसी से कोईशिकवा नहीं,क्यूंकि हमसफ़र कुछ ऐसे मिले फिर ...
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  September 15, 2015, 5:40 pm
mere vichar- ek khuli kitab: आज़ाद पंक्षी ये गगन के:                  जैसे ही एक दिन ,अपनी ऑफिस में घुसी  एक छोटी -सी चिड़िया ,चोंच में लिए मिट्टी  खिड़की से होकर बायीं दिवा......
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  September 8, 2015, 6:17 pm
voice-Archana Chaujiप्यार का दायरा बहुत विस्तृत होता है।  ढाई अक्षर का यह 'प्रेम'ही वह शब्द है ,जो हर तरह के  रिश्तों  को बांध कर रखता है।उपर्युक्त audio में लेखिका महादेवी वर्मा द्वारा रचित कहानी 'घीसा'भाषित की गयी है । इस कहानी में गुरूजी (महादेवी वर्मा जी ) का गड़ेरियों  व ग्...
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  September 2, 2015, 10:07 pm
कल बचपन था, आज बुढ़ापातब चहल -पहल थी ,आज शुनशानमिठी लगती थी तब,घुघनीवाले की घुघनीकेले के पत्ते में ,पत्ते की ही  चमच से प्याज और धनिया ,चाट -चाट कर खानाखट्टी हो गयी है चॉकलेट भी आजफोफले हो गए गाल,गिर गए सारे दाँततब केले के पत्ते में ,खाकर स्वाद आता थापिज्जा आज कीमती क्रॉक...
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  August 24, 2015, 7:16 pm
                                 ओस ने की ख्वाहिश गुलाब सेजी चाहता है भर लूँ आलिंगन में        जो देखती हूँ तुझे काँटों में पलतेफिर भी रहते सदा मुस्करातेहँसते -हँसाते और मुस्कराते ।जी चाहता है तेरे आलिंगन मेंगुजर जाए छोटा-सा जीवन मेरातेरे जैसे राजा क...
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  August 19, 2015, 4:33 pm
 स्वतंत्रता के लिए ,जब चढ़ गए फांसी पर वीर भगतसिंह और चंद्रशेखर आज़ाद अहिंसा के सैनानी ,लड़ गए अपनी जान पर तब 15 अगस्त 1947 ने सुनी स्वतंत्रता की हुंकार अंग्रेजों के चंगुल से ,भारत हुआ आज़ाद । सोहरत कमाई ,तरक्की और तकनिकी पाई शिक्षा ,संस्कृति ,धीरे -धीरे आगे बढ़ी बै...
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  August 17, 2015, 6:32 pm
                जैसे ही एक दिन ,अपनी ऑफिस में घुसी एक छोटी -सी चिड़िया ,चोंच में लिए मिट्टी खिड़की से होकर बायीं दिवार से चिपकी रोज  यूँही तिनके बिटोर खिड़की से आती । धीरे -धीरे उसने घोंसला एक सुन्दर बनाया कितनी मेहनत ,कितने चक्कर बारम्बार लगाया छोटे -छोट...
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  August 8, 2015, 1:12 pm
Is Reservation Fair #आरक्षण उन्नति या अवनतिआरक्षण शब्द सुनने में तो बड़ा आरामदायक लगता है । जहाँ  तक हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का सवाल है आरक्षण बड़ा उपयोगी है । जब कभी हॉटेल और रेस्टॉरेन्ट में पार्टी देते है ,अपनी लम्बी चौड़ी टेबल पर 'reserved'देखकर बड़ी प्रसन्नता होती है । रेल में सवार क...
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  August 6, 2015, 9:41 pm
हमारा आशियाना सारी  दुनिया का भ्रमण क्यों न कर लें, आखिर शकुन तो अपने घर आकर ही मिलता है । "अपना घर "जिंदगी में बहुत मायने रखता है । 'बेलेभ्यू  कॉटेज'- यह हमारा प्यारा -सा आशियाना है । सन  1857 में अंग्रेजोंके शासन के दौरान बनी यह कुटी ,158 साल पुरानी धरोहर हो गयी है । पश...
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  August 2, 2015, 7:22 pm
पापा के चश्मे से- देखना चाहती हूँ वह सब, जो पापा ने देखा था । एक छोटे -से गांव से शहर तक का सफर, बड़ी सफलता से अहसास किया था ।  मुझे क्यों --धुंधला दिखता है ? शायद - उम्र का तकाजा नहीं ,जो इस चश्मे को है।  देखना चाहती हूँ -वह हंसी -मुस्कराहट ,वह संजीदगी व सादगी, ...
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  July 22, 2015, 9:31 pm
mere vichar- ek khuli kitab: Budhapa - rah ka roda nahi: बुढ़ापा - राह का रोड़ा नहीं   अपनी जिंदगी के साठ  वसंत पार करने जा रही हूँ साल 2016 में । बचपन से लेकर आजतक सबकुछ झोली भरकर मिला । दाद......
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  July 22, 2015, 6:49 pm
बुढ़ापा - राह का रोड़ा नहीं अपनी जिंदगी के साठ  वसंत पार करने जा रही हूँ साल 2016 में । बचपन से लेकर आजतक सबकुछ झोली भरकर मिला । दादा -दादी ,माता -पिता का  प्यार ,भाई -बहनों संग अठखेलियाँ ,पति का प्यार ,बच्चों की खुशियां व आदर -सम्मान सबकुछ भरपूर मिला । किन्तु इन सबको पाने ...
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  July 20, 2015, 5:29 pm
Missing you Papa-You are the best(Dedicated to my father on this father,s day,who made me what am today.)याद आती है -वह काली मखमल जो तुम खरीद लाए थे ,                                                                                                    तुरन्त सिलवाकर फ्रॉक माँ से  ,           ...
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  June 20, 2015, 4:58 pm
संतुलन'संतुलन'-- शब्द को हम महज एक शब्द न समझ कर इसके विस्तृत रूप को देखें तो ,हम जानेंगे कि  हमारे सुन्दर जीवन का आधार  ही संतुलन है । जिसप्रकार तराजू पर सटीक तौल जानने के लिए दोनों पलड़ों पर बराबर वजन आवश्यक है ,ठीक उसीप्रकार जीवन के हर क्षेत्र को सुखमयी बनाने के लि...
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  May 28, 2015, 8:15 pm
घड़ियाली  आँसू कैसे सुनाऊ मेरी कहानी ,मेरी महिमा है अंजानी ,क्या ख़ुशी ,क्या गम ,मैं दिखता हर पल ,हर दम  खुशियों में भी दिख  पड़ता हूँ ,गम में तो बस बह  पड़ता हूँ ,चेहरे के भावों से होती मेरी पहचान ख़ुशी ,गम सबमें मेरी अलग है शान। नन्हे की आँखों में देख मुझे, झट माँ  ...
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  May 27, 2015, 7:46 pm
mere vichar- ek khuli kitab: पिता पापा कौन कह्ता है,तू  माँ से कम है ?माँ ने गर...: पिता   पापा कौन कह्ता है, तू  माँ से कम है ? माँ ने गर्भ में रखा , तुने गर्भ संवारा है।   माँ ने जन्म  दिया ,   तुने चलना सि......
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  May 27, 2015, 6:39 pm
mere vichar- ek khuli kitab: Parivartan: परिवर्तन   ख्यालों के तानों -बानों में  सपनो की गहराइयों में  आज और कल के अंतराल में  नव और पुरातन में  एक परिवर्तन चाहिए  एक......
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  May 27, 2015, 5:48 pm
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