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अनुशीलन

रात थी स्वप्न था ~~~~~~~~~~~~~ (डॉ.लक्ष्मी कान्त शर्मा )रात थी और स्वप्न था तुम्हारा अभिसार था !कंपकपाते अधरद्व्य पर कामना का ज्वार था !स्पन्दित सीने ने पाया चिरयौवन उपहार था ,कसमसाते बाजुओं में आलिंगन शतबार था !!आखेटक था कौन और किसे लक्ष्य संधान था !अश्व दौड़ता रात्रि का इन सबसे अ...
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  September 10, 2016, 12:20 am
तुम्हारे स्मृति वन से ~~~~~~~~~~~~~~~{I}शहर के दूसरे छोर पर जहाँ पेड़ों का घना झुरमुट है एक वीरान सा मंदिर ,एक टूटा सा गुम्बद है वहीँ तुम्हारा “स्मृतिवन”है  {II}यहीं एक दिन “केवलार” के लाल –बैंगनी फूलों वाले झाड तले कहा था तुमने आओ हिसाब करें कितने दिन हम यूँ ही निरुदे...
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  May 24, 2016, 10:59 pm
फाग-फाग होरी हो गई ~~~~~~~~~~~~( डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा)(1)आज फिर अचानकथम सी गयीं हवाएं ,ठिठक गए पत्तों के पांव !जाग सी उठी घटाएं ,कुनमुनाई पीपल की छाँव !! (2)आज फिर अचानक“सोनजूही” ने बरसा दिए,फूल अंजुरी भर-भर ! सरसों के खेत में उड़ते उड़ते,रुक गए कृष्ण-भ्रमर!! (3)आज फिर अचानकबादलों की ओ...
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  May 12, 2016, 1:51 pm
ऐसे ही आना तुम ~~~~~~~~~~~~~(डॉ.लक्ष्मीकान्त शर्मा )ऐसे ही आना तुम चली आती हैं जैसे सूरज की रश्मियाँ सोनार दुर्ग की प्राचीर से करने रोज अठखेलियाँ !ऐसे ही रुक जाना तुम जैसे थार के  इस आखिरी स्टेशन पर थम जाते हैं रेल के पहिएवापस मुड़ते हैं कल फिर लौटने के लिए !ऐसे गुनगुनाना तुम जैस...
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  May 12, 2016, 1:33 pm
गौरैया ,कभी कभी लगता है ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~(डॉ.लक्ष्मीकान्त शर्मा )कभी कभी लगता है गौरैया ………पूछूँ तुमसे किस अनाम देस से आई हो किस का संदेस लाई हो आखिर तुम हो कौन सूखी डाल पर बैठी इतनी सहज इतनी मौन कभी कभी लगता है गौरैया …….रच डालूँ कुछ नगमात इस अशांत से वक़्त में क...
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  March 5, 2016, 12:46 pm
रश्मि शर्मा की कविताओं के विविध आयाम : ‘नदी को सोचने दो’---------------------------------------------------------------------------------------                  नदी को सोचने दोकविता संग्रहलेखिकाः रश्मि शर्मामूल्यः120 रुपएप्रकाशकः बोधि प्रकाशन, जयपुररांची के  काव्यांचल में अपेक्षाकृत युवा व सशक...
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  February 27, 2016, 3:36 pm
फाग-फाग होरी हो गई  ~~~~~~~~~~~~~~~~(डॉ.लक्ष्मीकान्त शर्मा )(1)आज फिर अचानकथम सी गयीं हवाएं ,ठिठक गए पत्तों के पांव !जाग सी उठी घटाएं ,कुनमुनाई पीपल की छाँव !!(2)आज फिर अचानक“सोनजूही” ने बरसा दिए,फूल अंजुरी भर-भर ! सरसों के खेत में उड़ते उड़ते,रुक गए कृष्ण-भ्रमर!!(3)आज फिर अचानकबादलों की ओ...
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  February 27, 2016, 3:06 pm
फिर से दे मुझे ~~~~~~~~~~~ (लक्ष्य “अंदाज़”)पीले शहर के वो खुशनुमा मंजर फिर से दे मुझे !!रेत से भरे नंगे पांवों  के सफर फिर से दे मुझे  !!रक्से सहरा शबे शामियाना इक और बार बख्श ,उजड़ी नींद कांपते कपड़े का दर फिर से दे मुझे !!किसी सूने गलियारे में तेरा सट के सिमट जाना ,धडकते सीने पे म...
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  January 17, 2016, 11:49 am
गुजरे साल से खुश हैं ~~~~~~~~~~~~~~~ (लक्ष्य “अंदाज़”)हम वो हैं जो के गुजरे साल से खुश हैं !!माछ नहीं न सही हम दाल से खुश हैं !!बिखरी हुई रेत की कहानियाँ कौन कहे ,तेरे गीतों के उड़ते गुलाल  से खुश हैं !!सावन ने धरती की  सूनी गोद भरी है , फूल ले लो हम पातभरी डाल से खुश हैं !!तुम दोस्तों के भ...
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  December 19, 2015, 12:23 am
मेरे अदीब रहने दे ~~~~~~~~~~~~~ (लक्ष्य “अंदाज़”)सब झमेले हादिसों के मेरे करीब रहने दे !!हाथ ना रख सीने पे जख्मे-सलीब रहने दे !!  फिर इक बार धूप फिर से वही तन्हाई है ,इस पे गजल ना लिख मेरे अदीब रहने दे !!सर्द सर्द इन रातों की तवील सी तन्हाइयां ,चाँद न सही पहलू में मेरा हबीब रहने दे !!फू...
अनुशीलन ...
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  December 11, 2015, 2:20 pm
क्यूँ ना चाहूँ    ~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”)  दर्द की बारिशों के बाद धनक सा खिला है !!तुझे क्यूँ ना चाहूँ जो अब जा के मिला है !!जूनूँ –ऐ- इश्क नहीं ये सादा सा रिश्ता है ,खुशबू बनकर जो मेरी हवाओं में घुला है !!आजाद ही रहते हैं रंगों -बू चाँद बारिशें ,कौन मिल्कियत बांधे किसका हौसल...
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  November 29, 2015, 12:12 am
तू  भी समझा होता     ~~~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”)  बेहतर होता ये शनासाई समझा होता !!उगते सूरज की  तनहाई समझा होता !!बागो-शुबहा में फूलों के खिलने से पहले ,उस वसले-गुल की रानाई समझा होता !!मेरे होठों पे अपना नाम ढूंढने की जगह,मेरी नज्मात की रोशनाई समझा होता !!डूबती साँझों क...
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  November 29, 2015, 12:08 am
दूरियाँ कम कर दे ~~~~~~~~~~~~ (लक्ष्य “अंदाज़”)  इस से पहले कि देर हो जाए दूरियाँ कम कर दे !!आ गले मिल शिकवों भरी मजबूरियां कम कर दे !!नर्म अल्फाजों की हरारत कुछ इस तरह अता कर ,बदन में सुलगते लहू की चिनगारियाँ कम कर दे !!अपने गीतों में सुनपेड़ की जलती लाशें भी लिख ,बाम पर इठलाते महबूब ...
अनुशीलन ...
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  November 25, 2015, 2:00 pm
सोचो, सुदेष्णा दृश्य यूँ भी बदलते हैं ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~असंख्य शंख मालिका पीत चित्र तालिका !!रास राग गुनती हो सुर की संचालिका !!उद्दीपिनी संदीपिनी दैदीप्य सी दामिनी !!सौष्ठवी तुम सुन्दरी मृदुल सुहासिनी !!दिव्यका देबांगी शुभ्रा  शुभांगी बज्र कठोर मन कमला कोमलांगी !!भाव...
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  November 23, 2015, 11:30 am
सोचो, सुदेष्णा दृश्य यूँ भी बदलते हैं ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~कहो , तुम कौन हो जन्मों से मौन हो झील के पानियों में हंसिनी सी तैरती !!निश्शब्द शब्द टेरतीकालनिशा की झोली से नींद को सकेरती चक्षुओं की चितवन अनेक चित्र उकेरती !!यक्षिणी कि , भैरवी अप्सरा कि , गंधर्वीरक्त वाहिका में क्यूं उत...
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  November 15, 2015, 12:29 am
द से दवात द से दर्द~~~~~~~~~~~~~~~{“Tumhen Yaad Hoga” }दशहरे वाले दसवें महीने ने ,फिर दी है दस्तक आ रहा है  दबे पाँव दग्ध करती यादों का मौसम सर्दीला सा मौसम  !!दर्दीला सा मौसम  !!औसारे खड़ी सोचूं मैं ,मेरे पास नहीं कोई याद भरा सपनीला सा मौसम  !!देश में ऋतुकाल दिन-दर –दिन बदलता है नहीं बदलता त...
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  October 12, 2015, 9:18 pm
लब सडक के रह गया ~~~~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य“अंदाज़”)तू बारिशों में भीगी बंद खिड़की सा अडक के रह गया !!गुस्सैल हवाओं की तड़प सा मैं बस तडक के रह गया !!तू कव्वाली की राग सी गूंजी थी मंदिर से पंडाल तक ,मकई के जल भुन दानों सा मैं बस भडक के रह गया !!उस धनक के सारे रंग लिए तू शाम आसमां पर उतरी , किसी औ...
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  October 10, 2015, 11:27 pm
लौट आए वो बचपन ~~~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य“अंदाज़”)सेब की बर्फ लदी शाखें सुर्ख गुलों से भर जाएँ !!बच्चों की बदमाशियाँ घर भर में घर कर जाएँ !!इक आगोश के लम्स में मेरी माँ जैसी नजदीकी हो !खामोश पनाह के साए में नींदें आँखों में भर  जाएँ !!चाँद की मद्दम रौशनी में माँ कागज लिए बैठी सोचे !प्रवास...
अनुशीलन ...
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  October 8, 2015, 8:56 pm
ठीक नहीं ये~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”)इश्क में इतनी भी ज्यादा मसीहाई ठीक नहीं  IIधडकनें तो नुमायाँ हैं गिनती पढाई ठीक नहीं  IIमेरे कांपते हुए बदन पर बेड़ियों का पहरा है  , तानों की रुई से बुनी झीनी रजाई ठीक नहीं  IIपेशानी पे तेरे करम के निशाँ कम तो ना थे ,यूँ मेरे बिगड़े नक्श की ज...
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  October 7, 2015, 10:32 pm
सलाम वो सुहाने~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”) फूल और रंग के सफ़र जब कुहरे की घनी चादर ताने !!फूलों वाली वादी की डगर साथ चलो ना सैर के बहाने !!मेरे अख्तियार में नहीं अब शरारतें सर्द सर्द हवाओं की ,रुई के गोलों सी भाप बनो फिर बुनूँ सांस के ताने बाने !!तेरी छत के नीचे से गुजरती काली सडक का ख...
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  September 27, 2015, 8:14 pm
सिमट कर नहीं रहता ~~~~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”) वैसे भी मेरे घर की चिलमन में सिमट कर नहीं रहता !!रंग नहीं खुशबू है वो मधुवन में सिमट कर नहीं रहता !!गहरी आँखों के पानी में इक किश्ती कोई डूबी तो क्या ,रूप का दरिया एक ही दरपन में सिमट कर नहीं रहता !!कल जब वो उस जंगल से ज़ख़्मी हुए पाँव लिए ल...
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  September 13, 2015, 1:46 pm
एक सहमी सी शाम ~~~~~~~~~~~(डॉ.लक्ष्मीकान्त शर्मा )एक सहमी सी शाम दबे पाँव आएगी हाईवे पर दौड़ते ट्रक्स और हैडलाइट्स की चिंघाड़ती रौशनी मेंदम तोड़ जाएगी मुझे फिर यादों के उसी बियाबान में छोड़ जायेगी हौसला अब तो यह भी कहने का नहीं मेरा वो किसी रोज़ लौट आएगी और… किस...
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  September 10, 2015, 9:53 pm
भानमती के गाँव में ~~~~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”) अब के जो लोग हाथ में पत्थर उठा के आयेंगे !!तेरे कूचे में हम भी अब ज़ख्म बिछा के जायेंगे !!अंगारों सी रात को रोशन करो और जल जाओ, हम धूनी की राख को पलकों से उठा ले जायेंगे !!भानमती के गाँव में तुम अन्धमति सी फिरती हो,देखना एक दिन तुम्हे...
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  September 6, 2015, 5:01 pm
तुम नहीं थे, जीवन में~~~~~~~~~~~~~~~बस तुम नहीं थे जीवन में कोई और थे ,कई ठौर थे !!अधिकार दर्प के मठाधीश कुछ शीशकटे सिरमौर थे !!मैं तुम बिन बहुत अधूरा हूँ !“रैतिल्य-जन्म” का चूरा हूँ !!हरी-भरी इस दुनिया में ,एक टूटा पाँख सुनहरा हूँ !!अब ढलती साँझ का दीप बनूँ !उन आँखों का अंतरीप बनूँ !!म...
अनुशीलन ...
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  September 5, 2015, 3:07 pm
नहीं है , कुछ याद मुझे -I~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~{“TUMHEN YAAD HOGA “}अब नहीं मुझे याद आते ‘कायलाना’ झील के निर्जन हरे किनारे !!नहीं जगमगाते निगाह में तुम्हारी धानी चूनर के झिलमिल सितारे !!अब नहीं बहता मेरी आँखों में तुम्हारे यौवन का विक्षुब्ध विक्रांत ‘जलधि’ !!फाग की इस दुपहरी में अब ल...
अनुशीलन ...
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  September 5, 2015, 10:48 am
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