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ख़ामोशी

उजड़ी हुयी दुनिया को प्यार की महफ़िल समझ बैठे डूबी हुयी कश्ती को प्यार की मंजिल समझ बैठे कितने नादां हैं , ये दुनिया के लोग भी जो टूटे हुए दिल को भी  ज़ख्मों का समन्दर समझ बैठे .......  सालिहा मंसूरी 12.01.16  09:15 pm...
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  February 10, 2017, 9:00 am
मिले थे तुम अजनबी राहों की तरह और खो गए इक गुजरते राही की तरह मुझे देखकर ठिठके भी नहीं संभालना तो बहुत दूर की बात है ..... सालिहा मंसूरी 09.01.16    04:08 pm...
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  February 9, 2017, 9:00 am
किनारा मिले न मिले फिर भी मैं चलती जाऊँगी मंजिल मिले न मिले फिर भी मैं बढ़ती जाऊँगी राही रुके न रुके फिर भी मैं संभलती जाऊँगी ...... सालिहा मंसूरी 04.01.16   07:45 am...
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  February 8, 2017, 9:00 am
तेरी ज़िन्दगी की हर – इक राह आसां हो जाए तेरे सपनों का हर – इक ख्वाब पूरा हो जाए तेरी साँसों की डोर न तुझसे दूर हो कभी मेरी साँसों की डोर भी तेरी साँसों से जुड़ जाए ..... सालिहा मंसूरी 02.01.16   12:45 pm...
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  February 7, 2017, 9:00 am
पल – दो – पल की खुशियाँ थीं वो पल – दो – पल के सपने आँख खुली तो , कुछ भी पास नहीं था बस ! थे कुछ बीते लम्हे ...... सालिहा मंसूरी 02.01.16   05:22  pm...
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  February 6, 2017, 9:00 am
ये सूरज , चाँद – सितारे हर वक़्त रहते हैं , पास हमारे हम न रहेंगे , फिर भी चमकेंगे हर दिन – रात , साथ हमारे ......  सालिहा मंसूरी 01.01.16     07:07 am ...
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  February 5, 2017, 9:00 am
सूने से दिन- सूनी सी रात फिर भी बुनते रहते हैं इक खूबसूरत सा ख्वाब जानते हैं कि – तुम नहीं मिलोगे कभी फिर भी देते रहते हैं खुद को कुछ उम्मीदों की आस ठहरा हुआ है आज भी इस अँधेरे से घर में तेरी यादों का वजूद और बिखरे पड़े हैं खामोशी में सिमटे कुछ अनकहे , कुछ अनसुने अधूरे स...
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  February 4, 2017, 9:00 am
जीने नहीं देती है , हर याद तुम्हारी हँसने नहीं देती है , हर बात तुम्हारी बस ! हर वक़्त धड़कता रहता है दिल में नाम तुम्हारा यही वो पल है , जिसे मैं भुला नहीं पाती ..... सालिहा मंसूरी...
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  February 3, 2017, 9:00 am
जिसको माना था अपना वही बेगाना हुआ जिसको चाहा था पाना वही अफसाना हुआ ये तक़दीर है या किस्मत का कोई खेल जिस राह से गुजरो बस ! यही इक तराना हुआ ---- सालिहा मंसूरी...
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  February 2, 2017, 9:00 am
तुम नहीं मिले तो क्या हुआ तेरे रूप में मिला मुझे आसमांवो आसमां जो तेरे साये की तरह हर -वक़्त मेरे साथ चला हर -वक़्त मेरे साथ रहा कड़ी धूप में भी और अँधेरी रात में भी ..... सालिहा मंसूरी...
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  February 1, 2017, 9:00 am
हर -सुबह तुम्हारी यादों की बारात लेकर आती है और मैं तुम्हारी यादों की बारात के स्वागत के लियेसूरज की इक -इक किरण को अपनी मुट्ठी में समेटती बड़ी उत्सुकता सेउस नीले आसमान की तरफ इक टक तकती तुम्हारे आने का इन्तजार करती रहती लेकिन न तुम आते और न तुम्हारी को...
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  January 31, 2017, 9:00 am
बीते दिनों तुमसे बिछड़े इक अरसा हो गया लेकिन हर -दिन हर -पल, हर- क्षण तुम याद आते रहे और धड़कते रहे इस धड़कन में इक ख्वाब की तरह वो ख्वाब जो कभी पूरा न हो सकालेकिन उस ख्वाब को पूरा करने की ख्वाहिश आज भी बाक़ी है इस दिल में इक विशवास की जीत की तरह .....सालिहा...
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  January 30, 2017, 9:00 am
हसीं है हर शाम तेरे मैख़ाने में जवां है हर जाम तेरे पैमाने मेंसालिहा मंसूरी...
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  January 29, 2017, 9:00 am
अँधेरी रात में तेरी यादों के साये हैंसुनहरी धूप में तेरी बाँहों के साये हैं क्या यही है तेरे प्यार का असर कि हर चेहरे में तेरे चेहरे के साये हैं .....सालिहा मंसूरी...
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  January 28, 2017, 9:00 am
किसी भी राह से गुजरो तुम्हें अब हम न मिलेंगे जो सितम ढाये हैं तुमने मुझ पर उन्हें अब हम न सहेंगे ....सालिहा मंसूरी...
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  January 27, 2017, 9:00 am
उनसे बिछड़े इक जमाना हो गया वो क्या मिले कि वो पल इक फ़साना बन गया ..... सालिहा मंसूरी...
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  January 26, 2017, 9:00 am
सारी दुनिया बेगानी बस !तुम मेरे अपने हो सारे लोग हैं अनजाने बस ! तुम जाने पहचाने हो .....सालिहा मंसूरी...
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  January 25, 2017, 9:00 am
खो गया वो सितारा इस जहाँ में-अब न चमकेगा वो दोबारा इस जहाँ में ....सालिहा मंसूरी...
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  January 24, 2017, 8:04 pm
कितने -ही शब्द गूंजते रहे इन कानों में कितने -ही शब्द धड़कते रहे इस धड़कन मेंकितने -ही शब्द उलझते रहेइन साँसों में कितने -ही शब्द सुलगते रहे इन आँखों में ...... सालिहा मंसूरी...
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  January 23, 2017, 9:00 am
आज तक कुछ न माँगा ख़ुदा से आज माँगा है तेरा साथ ख़ुदा से ....सालिहा मंसूरी...
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  January 22, 2017, 9:00 am
इन तन्हाइयों की राहों में अकेली ही चलती रहती हूँ हर चेहरे में,मैंतेरे चेहरे को ही ढूंढती रहती हूँ ....सालिहा मंसूरी...
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  January 21, 2017, 9:00 am
न ये ज़मी तुम्हारी हैन वो आसमां तुम्हारा है न ये घर तुम्हारा है न ये दुनियाँ तुम्हारी है इस दुनियाँ से दूर उन सितारों के पास तुम्हें भी इक रोज जाना है .....सालिहा मंसूरी...
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  January 20, 2017, 9:00 am
फिजा में रंग कितने हों लेकिन मेरी हर शाम तुमसे हैचमन में फूल कितने हों लेकिन मेरी हर सुबहो तुमसे है ....सालिहा मंसूरी...
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  January 19, 2017, 9:00 am
तुम आओगे इक रोज मेरी पलकों की मुंडेर पर कि मैंने तारों से तुम्हारे लिए ये पयाम भेजा है फिर न रुकेगा ये ख्वाबों का गुलिस्तां कि मैंने फूलों से तुम्हारे लिए ये सलाम भेजा है फिर न रहेंगी ये दूरियां भी हमारे दरमियाँ कि मैंने तन्हाईयों से तुम्हारे लिए ये कलाम भेजा है ------- साल...
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  January 18, 2017, 9:00 am
अंधेरों में तेरे होने का एहसास है सितारों में तेरे होने का ख्वाब है तुम खुश रहो सलामत रहो ये मेरी हर धड़कन की आवाज़ है .....सालिहा मंसूरी...
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  January 17, 2017, 9:00 am
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