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कलमबाज़ ( धीरज झा )

हम गाँओं हूँ “सब खाना खाके दारू पी के चले गये, चले गये चले गये ।” सुबह से नीम के स्वाद की तरह ज़ुबान पर लिपटा ये गाना गुनगुनाते हुए किसी शीतल छाया की तलाश में हम अपने  खलिहान की तरफ बढ़े चले  जा रहा थे । गाने के नाम पर इस कलंक को हम गुनगुनाते हुए खलिहान पहुंचे तो देखे &nb...
कलमबाज़ ( धीरज झा )...
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  July 16, 2017, 9:52 pm
#दूसरी_प्रेमिका (काल्पनिक कहानी) “क्या मेरे शेर किस बात पर मुंह लटका कर बैठा है ?” शर्मा जी ने अपने पड़ोस में रहने वाले जतिन के सुबह से बंद कमरे का दरवाज़ा खोल कर उसके पास बैठते हुए कहा ।  सुबह काॅलेज गया था जतिन मगर एक एक ही घन्टे में वापिस आ गया और तब से ना जाने क्यों दर...
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  July 15, 2017, 10:18 pm
#सम्मान_के_इंतज़ार_में  मुझे लिखना है  लिखते जाना है  लिख लिख कर  कर देने हैं ज़िंदगी के सारे काग़ज़  काले नीले और लाल  जीवन के मरन तक  आँसुओं की मुस्कुराहटों तक रुदन के अटहासों तक लाशों के अहसासों तक मुझे सब कुछ लिखना है और तब तक लिखना है जब तक मैं पा ना लूँ कई सम...
कलमबाज़ ( धीरज झा )...
Tag :वयंग
  July 14, 2017, 11:43 am
#देश_को_अपाहिज_मत_बनाईए बड़ा दुःख होता है ये देख कर कि कुछ लोगों को लगता है मेरा देश अपाहिज हो गया है । मैं ये कभी नहीं मानता मगर कुछ संदेश, कुछ पोस्ट ऐसे देखता हूँ तो सच में लगता है कि कुछ लोगों ने सच में देश को अपाहिज घोषित कर दिया है ।  आए दिन भारत एक मुस्लिम देश बन जाएगा जै...
कलमबाज़ ( धीरज झा )...
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  July 12, 2017, 10:53 pm
#सरोज_ताई (कहानी) “ई गुबारा बड़े जिद से मंगवाई थी मनटुनिया । उस दिन तो रोएत रोएत जान देने पे उतारू हो गए रही । कहे जात गुब्बाला लेंगे तभे खाएंगे । एक तो इस गाँव में कछु मिलता भी तो नाहीं । रजना को कितना कहे तब बाजार से ला कर दिया था ई गुबारा ।” सरोज ताई खिड़की के पास खड़ी उस ला...
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  July 12, 2017, 12:34 am
हर ‘वो’ जिससे सीखा उन सबको नमन   __________________________________________ “गुरु” लिखने बोलने में छोटा सा शबाद मगर इस शब्द के मायने इतने बड़े हैं कि इसके बिना पूरा ब्रह्माण्ड ही अर्थहीन है । हर वो विशिष्ट व्यक्ति जिसका नाम हम बड़े अदब से लेते हैं उन सबने अपने गुरुओं से ही सीखा और उनके गुरुओं...
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Tag :माँ
  July 9, 2017, 6:48 pm
#वो_मुस्कुरा_दिया (काल्पनिक कहानी ) “ऐ साले भाग यहाँ से, दोबारा दिखा तो टांगें तोड़ दूंगा ।” राम किसन हलवाई ने गल्ले पर बैठै बैठे दिन में चौथी बार उसे धमकाते हुए एक समौसा चला कर मारा होगा । आगे से वह भी वो समौसा चुप चाप उठा कर राम किसन के दुकान की सामने वाली पुलिया पर जा बै...
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  July 8, 2017, 9:41 pm
मिस्टर राॅय कुछ याद करिए, क्या आप दोनों के बीच कोई अनबन हुई या फिर कोई झगड़ा ?” इंस्पैक्टर दिक्षित ने चाय का कप ट्रे में उसी चाय के निशान पर रखते हुए कबीर से ये सवाल किया जहाँ से उन्होंने कप उठाया था । “मिस्टर दीक्षित मैं आपसे पहले भी कह चुका हूँ कि हम दोनों के बीच ऐसा कुछ...
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  July 8, 2017, 1:49 am
​#और_नारीवाद_का_नकली_झंडा_गिर_गया  “दिदिया मेरे पिता जी कह रहे हैं अब आगे मत पढ़ो । ज़्यादा पढ़ लोगी तो हमारी हैसीयत का लड़का मिलना मुश्किल हो जाएगा । क्या आप कुछ कर सकती हैं ।” बी. ए सैकेंड पार्ट की एक बेबस कन्या ने बी.ए थर्ड पार्ट की एक लड़की से कहा । “क्या नाम है तेरा ल...
कलमबाज़ ( धीरज झा )...
Tag :लेख
  July 5, 2017, 7:12 pm
​#दोस्ती (कहानी) “क्यों बे, आज फिर “भाभी जी” से झगड़ा हुआ क्या ? बोल ना क्या हुआ आज फिर गलिया दी क्या ?” भाभी जी शब्द पर पूरा ज़ोर देते हुए विनय ने काऊंटर पर बैठे माधव को चिढ़ाते हुए कहा और फिर विनय और रौशन दोनों हंसने लगे ।   विनय माधव का इतना जिगरी दोस्त था कि दोनों को ...
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  July 4, 2017, 10:09 pm
डर क्लासरूम में बैठा था । साथ में मेरा एक होस्टलर बैठा।था जिसकी उम्र 10 की । पास के कमरे में आवाज़ हुई।वो डर गया । मैं उसके डर को भाँप गया था । उसे ले जा कर पास के कमरे में खड़ा कर दिया , डरता हुआ मेरे पीछे दुबका था मैने दिखाया की हवा से बोर्ड गिरा है । फिर उसे समझाया ” देखो डर ...
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  June 25, 2016, 10:26 pm
घर के भेदी ( कहानी ) बिसेसर बाबा अपना गाँव भरतपुर के मुखिया चुन लिए गए थे । अब गाँव बहुते बड़े था जिम्मा भी।बड़ा था तो एक तेज तर्रार मुखिया का होना तो लाजमिए  । तो बहुमत से बिसेसर बाबा की आ उनकी हाँकी गई बातों की जीत हुई । उनके विपक्ष में था उनके ही चाचा के पोता मने उनका भतीजा...
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  June 25, 2016, 12:49 pm
प्रेम कहानियाँ पढ़ कर ये आँसू बहाते हैं सामने कोई किसी के लिए तड़प रहा होता है उसे पागल बताते हैं बड़ा अजीब है दस्सतूर इन दुनिया वालों का किसी के प्यार को ना जाने क्यों ये समझ ना पाते हैं धीरज झा ...
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  June 24, 2016, 11:30 pm
चलता हूँ कभी सोचा था तुम जब साथ रहोगी तब मौसम की पहली बौझार लिखूँगा , फिज़ा में बिखरी बहार लिखूँगा , समंदर का किनारा लिखूँगा जब मिले थे पहली दूसरी दफा वो नज़ारा लिखूँगा और ये ये भी लिखूँगा किस हद तक पागल थे हम एक दूजे के लिए , क्या क्या कोशिशें की एक दूसरे को पाने के लिए , कहा...
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  June 24, 2016, 11:29 am
सो जाता हूँ अक्सर मैं दिन ढलते ही ये देर रात तक तो मेरे तड़पते हुए अहसास जगते हैं । धीरज झा ...
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  June 22, 2016, 10:57 pm
बच्चे दो तरह के होते हैं एक वो जो खुद सीख जाते हैं | इन्हे हमेशा बदमाश बच्चों के रूप में ही देखा जाता है | किसी चीज़ के प्रती इतनी जिज्ञासा होती है इनमें के ये बिना किसी से पूछे ही अपना दिमाग चला देते हैं फिर चाहे बड़े से बड़े नुक्सान क्यों ना हो जाये और बदले में जात जूतों की...
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  June 22, 2016, 12:20 pm
भीड़ ( कहानी जैसा ही ) नहर वाले रोड़ पर भीड़ से रस्ता जाम था । नारों की आवाज़ से आसमान का कलेजा फट रहा था । आज ऐसा लग रहा था सी एम जी पिघलें ना पिघलें पर आसमान इन दुखियारों के नारों से ज़रूर पिघल जाएगा । लोगों के मुख कहाँ लाल लाल हुआ करते थे आज वो सारे पीले पड़ गए थे । जन जन में आक्र...
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  June 21, 2016, 2:56 pm
कहानी का अंश मेरा कसूर क्या है जो दिन के हर पहर हर घड़ी पल में मुझे तड़पने की सज़ा मिल रही है । क्या मेरा गुनाह बस इतना है की मैने उस हद की मोहब्बत की जिसके लिए लोग तरसते हैं जिसे पाक कहा गया है । नही समझ आती मुझे दुनियादारी की बातें । मेरा रोम रोम हर पल एक ही नाम पुकारता है सिर...
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  June 20, 2016, 11:54 pm
कर्म या महानता ? आज कुछ हट कर लिखने का मन है , हो सकता है ऐसा लिखने पर कई लोग हमेशा की तरह फिर ना समझें फिर से बे सिर पैर का लाॅजिक ला पटकें फिर से वही असहमत हूँ वाला राग मगर क्या करें अच्छा या बुरा जो मन की कोख में पल गया उन ख़यालों की भ्रूण हत्या का पाप अपने सर कैसे ले लें । तो ...
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  June 20, 2016, 11:17 am
है ना ? . मैं स्वाभिमानी हूँ… स्वाभिमान मुझ में इतना कूट कूट कर भरा है… की शायद माँग कर मैं साँसें तक ना लूँ… घमन्डी नही कहलाता फिर भी… क्योंकी उस लायक कुछ है भी नही… पर स्वाभिमानी तो हूँ… मगर प्रेम ने जैसे स्वाभिमान का हनन कर लिया हो… जैसे एक बल दे कर दूसरी तरफ द...
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  January 31, 2016, 11:42 am
फिर आज 3:36 हो गये पर नींद को ढूँढने में नाकाम रहा तो सोचा दो बातों कहता चलूँ तुम से | तुम्हारी ज़िंदगी है , उसमें तुम्हारी कुछ परेशानियाँ भी हैं |  छोटी ही सही पर तुम शायद मुझे नही बताना चाहती शायद ये सोच कर की मैं परेशान हो जाऊँगा | पर एक बात साथ कर दूँ ज़िंदगी तुम्हारी है पर ...
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  January 31, 2016, 3:40 am
अगर आपने मन से कोशिश नही की फिर आपको किस्मत को कोसने का अधिकार नही है….अगर आपने जी जान से कोशिश की तो किस्मत आपको कोसने का मौका ही नही देगी…. . धीरज झा… धीरज झा ...
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  January 30, 2016, 9:27 pm
रोईत भोजपूरी… एगो छोट चुकी प्रयास… (कहानी ) . ” हेलो ! ” ” हाँ पापा कहिये | ” रमन गमे से बोललक… ” बेटा कहाँ बारू तू | ” ” पापा बताया था ना दोस्तों के साथ जा रहा हूँ | आज कॉलेज में कम्पटीश्न है | ” रमन झुंझला गईल ई ओकरा जबाब से स्पष्ट हो गइल की ऊ खिसिआ के बोल रहल बा | R...
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  January 30, 2016, 12:23 pm
मन से पढ़ना दिल से महसूस करना….और मुस्कुरा देना ऐसे की वो मुस्कान मेरे होंठों पर चमके | मैं नही जानता मैं कैसा हूँ , अच्छा हूँ या बुरा मैं बस इतना जानता हूँ की मुझे तुमसे मोहब्बत है , लोग सिर्फ कहते हैं पर मुझे हकीकत में तुमसे दिवानगी की हद से कोसों आगे तक की मोहब्बत है | ये ...
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  January 29, 2016, 5:54 pm
इक्विलाईज़र… . इंसान की ज़िंदगी के दो दिन ही सबसे खास होते हैं… एक वो दिन जब वो पैदा हुआ दूसरा वो दिन जब उसने जाना की वो क्यों पैदा हुआ…. कहते हैं पैदा तो हर इंसान होता है मगर इंसान हो कर मरता कोई कोई है | आप पैदा होते हैं तो कुछ खास नही होता सिवा धरती के भार में एक और संख्...
कलमबाज़ ( धीरज झा )...
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  January 29, 2016, 1:20 pm
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