Hamarivani.com

रास्‍ते की धूल

बहुत दिनों के बाद कुछ समय निकल सका ग़ज़ल के लिये और एकाएक हो गई ये ग़ज़ल; जैसे कि आने को बेताब ही थी। प्रस्‍तुत है:हुआ क्‍या है ज़माने को कोई निश्‍छल नहीं मिलताकिसी मासूम बच्‍चे सा कोई निर्मल नहीं मिलता।युगों की प्‍यास क्‍या होती है वो बतलाएगा तुमकोजिसे मरुथल में मीलो...
रास्‍ते की धूल...
तिलक राज कपूर
Tag :ग़ज़ल कोई निश्‍छल नहीं मिलता
  May 3, 2012, 4:37 pm
बस ज़रा सा इंतज़ार और होली आपके द्वार। होली में एक विशिष्‍ट आवश्‍यकता एक वर्ग विशेष की होती है जिसका मध्‍यप्रदेश में उस दिन बाज़ार में मिलना दूभर होता है। इसलिये पहले से स्टॉक जमा होने लगता है। आज उसी स्‍टॉक शौकीनों की बात एक तरही के माध्‍यम से। तरही तो पुरानी है लेकि...
रास्‍ते की धूल...
तिलक राज कपूर
Tag :तरही: रोज पव्वा पी लिया तो पीलिया हो जायेगा
  March 5, 2012, 6:54 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]


Members Login

Email ID:
Password:
        New User? SIGN UP
  Forget Password? Click here!
Share:
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3904) कुल पोस्ट (190733)