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रास्‍ते की धूल

बहुत दिनों के बाद कुछ समय निकल सका ग़ज़ल के लिये और एकाएक हो गई ये ग़ज़ल; जैसे कि आने को बेताब ही थी। प्रस्‍तुत है:हुआ क्‍या है ज़माने को कोई निश्‍छल नहीं मिलताकिसी मासूम बच्‍चे सा कोई निर्मल नहीं मिलता।युगों की प्‍यास क्‍या होती है वो बतलाएगा तुमकोजिसे मरुथल में मीलो...
रास्‍ते की धूल...
तिलक राज कपूर
Tag :ग़ज़ल कोई निश्‍छल नहीं मिलता
  May 3, 2012, 4:37 pm
बस ज़रा सा इंतज़ार और होली आपके द्वार। होली में एक विशिष्‍ट आवश्‍यकता एक वर्ग विशेष की होती है जिसका मध्‍यप्रदेश में उस दिन बाज़ार में मिलना दूभर होता है। इसलिये पहले से स्टॉक जमा होने लगता है। आज उसी स्‍टॉक शौकीनों की बात एक तरही के माध्‍यम से। तरही तो पुरानी है लेकि...
रास्‍ते की धूल...
तिलक राज कपूर
Tag :तरही: रोज पव्वा पी लिया तो पीलिया हो जायेगा
  March 5, 2012, 6:54 pm
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