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अमिताभ

ये वो समय था जबचारों दिशाएं मुट्ठी में थींसारे ग्रह -नक्षत्र नाक की सीध में थेऔर धरा जैसे अपनीकनिष्ठा पर घूम रही थी।यकीन जानोमाता-पिता संगब्रह्माण्ड की समस्त महाशक्तियांएकत्रित होकर वास करती है देह मेंऔर निस्तेज जान पड़ता है इंद्र का सिंहासनअप्रभ होता है उसका फैला ...
अमिताभ...
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  January 21, 2019, 11:31 am
उस वक्त जबमहानगर दूर हुआ करते थेचाँद की तरह तबमैंने धरती छोड़ी थी।इस तथ्य को नकारते हुए किहर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती।---उबड़ खाबड़आक्सीजन रहित उपग्रह के लिएजीवन के एकमात्र ब्रह्माण्डी स्थल को त्यागनाइसरो या नासा का कोई अनुसंधान कार्य नहीं था।वो टिमटिमाते स्वप्न ...
अमिताभ...
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  January 9, 2019, 5:36 pm
सारे, हाँ सारे के सारेबदमाशों ने पहन ली हैसफेद कमीज़ताकि न दिखे मैली बनियान।सारे, हाँ सारे के सारेबदमाशों की हैं तख्तियांजिस पर लिखे हैंअनेक उच्च पदनाम।सारे, हाँ सारे के सारेबदमाश जुट रहे हैं एक मंच परहाथों में हाथ डाले जिनकेमन में फूट रहे हैं लड्डू ।सारे, हाँ सारे के ...
अमिताभ...
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  January 9, 2019, 5:35 pm
मोर से आकर्षकसुनहरी दुम वालेहरे,नीले बैंगनी रंग से लिपे पुतेकिन्तु बड़े मुंह और भूखे पेट वाले होते हैं वर्ष।राख से जन्मे।इनका हाजमा इतना दुरुस्त होता है किजीवन के जीवन लील जाते हैंऔर इतने नकटे कि जरा भी शिकन नहीं।बावजूद खूँटी पर टाँगे जाते हैंफीनिक्स के 365 सिर।【टुकड़...
अमिताभ...
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  January 9, 2019, 5:33 pm
रुको,ये जली हुई धरती का उज्जडपनराक्षसी नहींबल्कि ये काला टीका बनबुरी नज़र से बचाता है।और यकीन मानोजंगल नहीं होते जंजालघबराओ मत, आओ,गहरे उतरो ,छाती पर चढ़ बैठो अँधेरे कीकि बस कुछ देर बाद हीसूरज आसमान के सिर पर होगाऔर तुम्हारा घर साफ दिखाई देगा।【टुकड़ा टुकड़ा डायरी/6 जनवरी 20...
अमिताभ...
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  January 9, 2019, 5:32 pm
कैसा तो गूंथा है आपस मेंहरा, सूखा सब झाड़ झँखड़जैसे अब कोई रास्ता ही न होउलझे रह जाओ यहीं सुख दुःख की तरहमुक्त हो ही न सको।सुनो प्रिये,मत थको,कि आगे बढ़ो..हरे भरे में खोओ मतकि सूख चुके पत्तों का दुःख ओढो मतपार करो इसे भी क्योंकिउस पार फैला 'आकाश'हैऔर वही सार है।(2 des 2018)...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 12:12 pm
यादें तो आ रही हैं मगर वो नहीं आते ,लौटे नहीं वो क्यूँ जो बिछड़ के चले जाते ;मुद्दत हुई उन्हें नहीं देखा है इसलिए ,रह रह के हमको अब ये उजाले भी सताते ।मआलूम है आएँगें नहीं वो किसी सूरत ,हर वक़्त मगर दिल से उन्हें हम हैं बुलाते ।बढ़ जाएँ न बेचैनियाँ बेहद इस डर से ,दुन्या मे लग लग क...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 12:09 pm
मैं तुम्हारे लिए प्रेम लिखता हूँतुम नफरत।जिसकी कलम में जो रंग स्याही वो वही लिखता है।(9 nov 2018)...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 12:08 pm
तुमने कांटो में देखा क्या प्यारपाया क्या सूखे झाड़ झंखाड़ में सौंदर्य ?निर्जन पड़े हिस्से में कभी जाकर पूछा क्याकैसे हो?दिखी क्याअकेले रास्ते, पड़े पत्थरों, खड़ी सूनी बदसूरत सी झाड़ियों में बिखरी मुस्कान?तुम्हारे आने से जिनका एकांतवास पूर्ण हुआलंबी राहत भरी उनकी सांस की आ...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 12:07 pm
ये पर्वत,पेड़पथ और पत्थरपीर किसे सुनाएं अपनी?पास कौन आता इनकेप्यार करता भला कौन?देख मुझे डबडबा कर आँखेपूछापथिक तू है कौन?तभी अचानक उड़ के आईप्रीत पवन कीकंधो पे अपने लेकर आईगीत एक पुराना-मैं पल दो पल का शायर हूँ ....(19 nov 2018)...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 12:06 pm
सुबह लिखती है आसमान पर कवितासूरज बिंदी बन छाता है।कोई टिटहरी कंठ खोल गाती हैऔर दिन हो जाता है ।( 22 nov 2018)...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 12:05 pm
पर्वत हो जाना चाहा कभीकभी नदीतो कभी वो पगडंडी जिस पर चल करगुजरते रहे पर्वत, नदी, ताल ।हुआ कुछ नहींबस सफर ही रहाउपर फैला विस्तृत आकाशशून्य का महासागर बनसिर पर तारी रहाऔर बस मन की लहरेंउथलती रही, चढ़ती उतरती रही।मंजिल थी ही नहींघुमावदार रस्ते ,घाट, खाइयांजंगल और फिर लंबी ...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 12:04 pm
परिंदा है हुनर मेरापंख हैं इसमें ..बंधेंगा तो उड़ेगा नहींये खुली जमीन और खुले आसमान के लिए बना है।जटायू सा वजूद हैबहुत दूर तक नज़र हैइत्मीनान रखोखोज लूँगी लक्ष्य की अशोक वाटिका ।एक बारआकाश में छोड़ दो ..सूरज के पास जाकर भी जलूँगी नहींबल्कि उसकी आग लेकरधरती के सारे चूल्हे ...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 12:03 pm
जिन्हें देख मंद मंद मुस्कुराते हैं ये क्षण किन्तु कम आते हैं....(25 OCT 2018)...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 12:02 pm
मुसोलिनी या हिटलर नहीं थे तानाशाहमार देना शौक बड़ा नहीं जितना कि तड़पाना।तानाशाह तो वो हैंजो बिना जाल और कांटे केफांस लेते हैं मछलीउस्ताद शिकारी की तरह दोस्ती का लालच देकर।हाँ, देखोन बेचते हैं , न खाते हैंछोड़ देते हैं पानी से बाहर निकाल कर।और तड़पते देखना उन्हेंनृत्य स...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 12:01 pm
आदमीयत वाला आदमी------------------मैं बहुत पीछे छूटा हुआ आदमी हूँ।बहुत पीछे।जहाँ होशियारी नहीं होती जहाँ वो गंवारपन होता हैजरा सा कोई प्रेम से कह देहृदय खोल के परोस दिया जाता है।मैं नहीं समझ पाता आज भीसमझदारी की वो बातेंकि हर किसी को प्रेम नहीं करना चाहिएहर किसी को दोस्त नही...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 11:58 am
देह कोमल धरते हो फिरसख्त हृदय क्यों रखते हो ?कांटे ने फूल से कहा-एक बात तो बताओ भाईकौनसी चक्की का आटा खाते हो ?मैं तो काँटा हूँचुभना काम मेरा , गाली रोज खाता हूँ।किन्तु कितनी सदियां बीत गईरहस्य न जान सका ये अभी तकफूल होकर भी कैसे चुभ लेते हो?दिखता ही नहीं जो वोजहर कहाँ से ल...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 11:57 am
बेवजह बदनाम करनावजह बना देता है दुश्मनी की।आओ देखें कितना दम तुम्हारे झूठ में हैऔर कितना सच हमारे पास है।जिन सबूतों को लेकर इतरा रहे होउन्ही सबूतों में तुम्हारे भी खिलाफपुख्ता शब्द हैं स्मरण रखना,याद ये भी रखना किशीशे के घर में हो और पत्थर चला रहे हो।खामोशी में डूबे ...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 11:55 am
आभासकि तुम होतुम हो..?पूजा,पाठप्रार्थनाएंआस्था,श्रद्धा जगाती है।तुम नहीं जगेसोए होइसलिए आभासी हो।उठोगे?कि प्रेम छटपटा रहा हैकि मन विचलित हैकि दर्द बह रहा हैएक बारकह ही दोकि तुम हो...(8 Oct 2018)...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 11:54 am
दुविधाओं के मेघों से घिरेआसमान कोकौन समझेगा?अहंकार नहीं ये मेराप्रतीक्षा है बस किप्रेम दुबारा बरसेगा ।【टुकड़ा टुकड़ा डायरी/4अक्टूबर 2018】...
अमिताभ...
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  December 16, 2018, 11:53 am
सुनो,तुम सुखी होइसलिए दुःख कोबहुत अच्छे सेएक्सप्लेन कर सकते हो ...प्रेम की बातें इसीलिए तो खूब करते हो।और गर सचमुच होता तो?(2 oct 18)...
अमिताभ...
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  November 3, 2018, 11:22 am
बीज में बिना फूल पत्तियों के पेड़ थाउगा और बड़ा हुआडूंड सा , लम्बी लम्बी शाखाओं वाली भुजाओं सादैत्याकार।न छाहँ देता हैन सुकूनबस भयावह दिखता है।पानी तो उसने भी पीया हैबोया तो वह भी गया हैजमीन तो उसकी भी यही हैफिर ?(30 sept 18)...
अमिताभ...
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  November 3, 2018, 11:21 am
तुममेमुझमेंएक बुनियादी फर्क है।हुनरमंद हाथों केछैनी हथौड़े से उकेरी गईमूरत की तरह हो तुम।मैंठोकरों सेतराशा चला जाता गयाएक पत्थर ।(24 sept 18)...
अमिताभ...
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  November 3, 2018, 11:19 am
यूं तो हर जगह पराजित हुआप्रेम में, व्यवहार में , कार्यों में, जिंदगी में..और खुश हुए मेरे अकेलेपन ,मेरी असफलताओं ,मेरी पराजयों, मेरी नाकाम कोशिशों को देखकरमेरे दुश्मन, मेरे ईर्ष्यालु ..मेरे अप्रेमी।किन्तु इसके बावजूदनेपथ्य की एक महसूस होती जीत नेहर हमेश खड़ा रखा किमैं कि...
अमिताभ...
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  November 3, 2018, 11:16 am
फूल ऋतुओं को अपने सौंदर्य में समेट लेते हैं ..जैसे हरसिंगार शरद को अपनी आगोश में भींच लेते हैं। ये मौसम हरसिंगार का है, शरद के श्रृंगार का। कांच सा आकाश और उस पर तैरते बादल के टुकड़े। ऐसा लगता है जैसे मानसून में उधम मचाने वाले काले -मटमैले मेघों को नहला धुला कर प्रकृति ने ट...
अमिताभ...
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  November 3, 2018, 11:15 am
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