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Blog: Pre-Mortem फ़िल्म, समाज और मैं

Blogger: Sanjay Grover
कृश्न चंदर की एक कहानी थी ‘गड्ढा’। एक आदमी ऐसे गहरे गड्ढे में गिर जाता हैं जहां से दूसरों की मदद के बिना निकलना संभव नहीं है। लोग आते हैं, तरह-तरह की बातें करते हैं, अपना टाइम पास करते हैं, मनोरंजन करते हैं, सुबह से शाम हो जाती है पर कोई उसे गड्ढे से निकालने का नाम तक नहीं ले... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   1:55pm 8 Oct 2018
Blogger: Sanjay Grover
कृश्न चंदर की एक कहानी थी ‘गड्ढा’। एक आदमी ऐसे गहरे गड्ढे में गिर जाता हैं जहां से दूसरों की मदद के बिना निकलना संभव नहीं है। लोग आते हैं, तरह-तरह की बातें करते हैं, अपना टाइम पास करते हैं, मनोरंजन करते हैं, सुबह से शाम हो जाती है पर कोई उसे गड्ढे से निकालने का नाम तक नहीं ले... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   1:55pm 8 Oct 2018
Blogger: Sanjay Grover
 Hichki Ek Katha Latest Hindi Movie 2018फुलझड़ी अपनी मां के साथ झोंपड़ पट्टी में रहती है। वह ग़रीब है, फ़िल्मों में काम करना चाहती है, ख़ासी सुंदर भी है।सुभाष के कहने पर डायरेक्टर विक्टर उसे चांस दे देता है। वह उसे एक नया नाम सुप्रिया भी देता है।वह मशहूर होने लगती है। प्रोड्यूसर-डायरेक्टर चक्कर ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   11:36pm 6 Apr 2018
Blogger: Sanjay Grover
 Hichki Ek Katha Latest Hindi Movie 2018फुलझड़ी अपनी मां के साथ झोंपड़ पट्टी में रहती है। वह ग़रीब है, फ़िल्मों में काम करना चाहती है, ख़ासी सुंदर भी है।सुभाष के कहने पर डायरेक्टर विक्टर उसे चांस दे देता है। वह उसे एक नया नाम सुप्रिया भी देता है।वह मशहूर होने लगती है। प्रोड्यूसर-डायरेक्टर चक्कर ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   11:36pm 6 Apr 2018
Blogger: Sanjay Grover
(पिछला हिस्सा यहां पढ़ें)बात तो दिलचस्प है। ‘ईश्वर जब हमें पिता बनने के लिए चुनते हैं तो हमारे लिए बड़ी इज़्ज़त की बात होती है’, करन जौहर से लगभग यही तो कहा शाहरुख ने।यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है कि ‘भगवान’ के प्रचार-प्रसार और ‘मेंटेनेंस’ में हिंदी फ़िल्मों की बहुत बड़ी भूमिक... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:14pm 26 Dec 2017
Blogger: Sanjay Grover
यूं तो इससे पहले कुछ पैंडिंग/लंबित पड़े लेख/मामले निपटाने का इरादा था मगर चैनल बदलते-बदलते कुछ ऐसा दिख गया कि जो लिखना था लिख गया।( ‘‘कुछ ऐसा दिख गया कि जो लिखना था लिख गया’’ वाक्य के कोई ख़ास मायने नहीं हैं, बस फ़िल्मी क़िस्म का डायलॉग ही है)बात हो रही थी शब्दों की ताक़त पर। प... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   11:31am 20 Dec 2017
Blogger: Sanjay Grover
इस फ़िल्म के बारे में आवश्यक जानकारियां आप इन दो लिंक्स् पर क्लिक करके देख सकते हैं -  1, IMDb  2. Wikipediaएक कोई लड़की है। कुछ गुण्डे हैं। उनके पास अच्छी, बड़ी-बड़ी गाड़ियां हैं। वे लड़की को उन्हीं गाड़ियों में उठा ले जाना चाहते हैं। वह जाना नहीं चाहती। जय फ़िल्म का हीरो है। वह गुण्डों क... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   1:13pm 27 Jun 2017
Blogger: Sanjay Grover
हमारे यहां ‘पराग’ और ‘चंपक’ जैसी बाल पत्रिकाएं आतीं थीं। कभी-कभार ‘लोटपोट’, ‘दीवाना’ वगैरह कहीं से मिल जाएं तो पढ़ लेते थे। ज़्यादातर दूसरे बच्चे ‘नंदन’ और ‘चंदामामा’ पढ़ते थे। ये दोनों ख़ूब बिकतीं थीं। मगर मैं नहीं पढ़ पाता था क्योंकि इनमें अकसर सभी कहानियां राजा-रानि... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   3:55pm 8 May 2017
clicks 180 View   Vote 0 Like   8:42am 10 Apr 2017
Blogger: Sanjay Grover
कल जब उठा तो इंटरनेट से पता लगा कि ओम पुरी नहीं रहे। काफ़ी टाइम बाद टीवी लगाया। उससे पहले देखा कि फ़ेसबुक आदि पर श्रद्धांजलियों की मात्रा और रफ़्तार बहुत कम है। मैं सोचने लगा कि इसकी वजह क्या हो सकती है ? मेरी तो ‘श्रद्धांजलियों’ में दिलचस्पी ही कम रही है लेकिन दूसरे बहुत-स... Read more
clicks 239 View   Vote 0 Like   9:42am 12 Jan 2017
Blogger: Sanjay Grover
शायद बारहवीं में पढ़ता होऊंगा, एक दोस्त से किसी फ़िल्म की कुछ बुराई कर दी तो बोला कि उनके करोड़ो रुपए लग जाते हैं और तुम तो मुंह उठाके किसीकी भी बुराई कर देते हो! मैंने कहा युद्ध में भी ख़रबों रुपए लग जाते हैं तो क्या सिर्फ़ इसी वजह से मैं मार-काट की तारीफ़ करने लगूं! बहरहाल, वह ... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   12:32pm 26 Dec 2016
Blogger: Sanjay Grover
दिलचस्प है कि यहां भी तीन सहेलियां हैं मगर वे अनपढ़ हैं, राजस्थानी गांव के सूखे में सूख रहीं हैं, पिट रहीं हैं, ग़रीब तो हैं ही मगर उन्हें किसी अवतार, किसी मसीहा, किसी राम, किसी कृष्ण की तलाश नहीं है। वे ग़ालियों से लेकर रंगीनियों तक पर आपस में बात करतीं हैं, बहस करतीं हैं।लाज... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   7:11am 27 Sep 2016
Blogger: Sanjay Grover
फ़िल्म की शुरुआत में रश्मि शर्मा फ़िल्म्स् का लोगो/मोनोग्राम दिखाई देता है जिसमें एक मर्द, चेहरा देखनेवालों के सामने किए, बांसुरी बजा रह़ा है। सर में मोरपंख लगा है। साथ में एक स्त्री है जिसका साइड पोज़ दिखाया गया है, बल्कि उसकी पीठ दर्शकों की तरफ़ है, स्त्री भयभीत मालूम होत... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   3:53pm 18 Sep 2016
Blogger: Sanjay Grover
कई महीने बाद टीवी रीचार्ज कराया। आठ-दस दिन से कई मजेदार चीज़ें देख रहा हूं। आज जैसे ही रिमोट चलाया, एक चैनल पर किसी पुराने सीरियल में एक नया और जवान लड़का किसीसे कह रहा था-‘तुम अगर मेरे मां-बाप का आदर नहीं कर सकते तो मैं नहीं सोचता कि तुमसे रिश्ता रखना चाहिए.......’मैं हंसा, हंस... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   11:36am 15 Sep 2016
Blogger: Sanjay Grover
हालांकि शाहरुख़ की पिछली फ़िल्मों जोकि काफ़ी समय से बचकाना कहानियों पर आधारित रहीं हैं, की तुलना में यह फ़िल्म एक गंभीर प्रयास दिखाई देती है। मगर यह गंभीरता किसके पक्ष में, इसके पीछे नीयत क्या है, यह पता लगाने की कोशिश करने में कोई बुराई नहीं है।सायबर क़ैफ़े चलानेवाला गौरव ... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   6:24pm 15 Apr 2016
Blogger: Sanjay Grover
इस फ़िल्म के बारे में आवश्यक जानकारियां आप इन दो लिंक्स् पर क्लिक करके देख सकते हैं -  1, IMDb 2. Wikipedia12-03-2016कांजीलाल मेहता नास्तिक है और चोर बाज़ार में मूर्तियों की दुकान चलाता है। धंधे के लिए झूठ भी बोलता है, बेईमानी भी करता है। बेटे चिंटू को ‘मटकी फोड़ो’ कार्यक्रम से वापस लेने ... Read more
clicks 257 View   Vote 0 Like   7:19pm 12 Mar 2016
Blogger: Sanjay Grover
इस फ़िल्म के बारे में आवश्यक जानकारियां आप इन दो लिंक्स् पर क्लिक करके देख सकते हैं -  1, IMDb 2. Wikipediaआदमी ने दो दुनिया बनाईं-एक दिखाने की, एक छिपाने की।और तरह-तरह की परेशानियों में पड़ गया।अब न वह जी पाता है न किसीको जीने देता है।अब वह खिड़कियों में झांकता फिरता है, दीवारों से क... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   10:23am 27 Feb 2016
Blogger: Sanjay Grover
इस फ़िल्म के बारे में आवश्यक जानकारियां आप इन दो लिंक्स् पर क्लिक करके देख सकते हैं -  1, IMDb 2. Wikipediaआदमी ने दो दुनिया बनाईं-एक दिखाने की, एक छिपाने की।और तरह-तरह की परेशानियों में पड़ गया।अब न वह जी पाता है न किसीको जीने देता है।अब वह खिड़कियों में झांकता फिरता है, दीवारों से क... Read more
clicks 330 View   Vote 0 Like   10:23am 27 Feb 2016
Blogger: Sanjay Grover
4.17 मिनट का यह वीडियो है। फ़ेसबुक पर कुछ लोगों ने इस सलाह के साथ लगाया कि इसे देखकर आपकी आंखें खुल जाएंगी। मैंने, देखा तो मुझे इसमें कोई ख़ास या नई बात नज़र नहीं आई। मैंने पूरा वीडियो ढूंढने की कोशिश की, क़रीब आधा घंटा लगाया, नहीं मिला। एक अन्य वीडियो मिला जो तकरीबन दस मिनट का ... Read more
clicks 292 View   Vote 0 Like   3:35pm 12 Feb 2016
Blogger: Sanjay Grover
इस फ़िल्म के बारे में आवश्यक जानकारियां आप इन दो लिंक्स् पर क्लिक करके देख सकते हैं -  1, IMDb 2. Wikipedia(विकीपीडिया पर इस फ़िल्म के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है)06-01-2016तारा अपने पति व अन्य परिवारियों के साथ गांव में शराब बनाती है। ख़ानदानी रईस और अय्याश पाटिल भी वहीं से शराब... Read more
clicks 279 View   Vote 0 Like   7:08pm 6 Jan 2016
Blogger: Sanjay Grover
फ़िल्म-समीक्षाइस फ़िल्म के बारे में आवश्यक जानकारियां आप इन दो लिंक्स् पर क्लिक करके देख सकते हैं -IMDbWikipediaहीरो काली है, हीरोइन मीरा है, और एक गाना है-‘रंग दे तू मोहे गेरुआ.....’फ़िल्म धार्मिक लगती है। जहां धर्म है वहां कहीं न कहीं आस-पास धर्मनिरपेक्षता भी होनी चाहिए। दोनों सगे ... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   11:46am 19 Dec 2015
Blogger: Sanjay Grover
फ़िल्म-समीक्षाहीरो काली है, हीरोइन मीरा है, और एक गाना है-‘रंग दे तू मोहे गेरुआ.....’फ़िल्म धार्मिक लगती है। जहां धर्म है वहां कहीं न कहीं आस-पास धर्मनिरपेक्षता भी होनी चाहिए। दोनों सगे भाई-बहिन हैं।देखते हैं, इंतज़ार करते हैं। तब तक-शुरुआत में अजीब लगता है कि एक लड़की इतनी सह... Read more
clicks 292 View   Vote 0 Like   11:46am 19 Dec 2015
Blogger: Sanjay Grover
इस फ़िल्म के बारे में आवश्यक जानकारियां आप इन दो लिंक्स् पर क्लिक करके देख सकते हैं -IMDbWikipediaदिलीप राय(राजेश खन्ना) एक पेंटर है। वह एक, जैसा कि क़िताबों और फ़िल्मों में अकसर कलाकारों को दिखाया जाता रहा है, उलझा-उलझा-सा, खोया-खोया-सा आदमी है। शादीशुदा है मगर दुनियादारी से ज़्याद... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   10:33am 19 Nov 2015
Blogger: Sanjay Grover
फ़िल्म किस दिन रिलीज़ होगी, हिट होगी या फ़्लॉप होगी..... ये सब आंकड़ेबाज़ों के लिए महत्वपूर्ण मसले हैं। अपने लिए अहम मुद्दा यह जानना है कि फ़िल्मकार कहना क्या चाहता है, उसकी नीयत क्या है, उसका कहने का ढंग क्या है.....। या फिर पैसे, प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा के लिए उसे ऐसा कुछ भी कहने और ... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   9:52am 9 Nov 2015
Blogger: Sanjay Grover
वह महीन फ्रेम का चश्मा लगाकर ज़हीन-सा दिखता है। आप उसकी अदाएं देखिए, जेस्चर्स या बॉडी लैंग्वेज देखिए, धीमी आवाज़ में बात करने का धैर्य देखिए, कई भाषाओं का ज्ञाता होना देखिए, स्त्रियों में लोकप्रियता देखिए, उसकी मुस्कान में गंभीरता और गहराई देखिए....वह कुछ भी हो सकता था। कोई... Read more
clicks 360 View   Vote 0 Like   6:04pm 1 Nov 2015
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