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वाहियात

हर सब्जेक्ट की काॅपी अलग अलग बनती थी, परंतु एक काॅपी एसी थी जो हर सब्जेक्ट को सम्भालती थी। उसे हम रफ काॅपी कहते थे। यूं तो रफ काॅपी का मतलब खुरदुरा होता है। परंतु वो रफ काॅपी हमारे लिए बहुत कोमल होती थी। कोमल इस सन्दर्भ में कि, उसके पहले पेज पर हमें कोई इंडेक्स नहीं बना...
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  July 13, 2017, 11:55 am
समझ नही आता कि इस 21वीं सदी में निर्मल बाबा,स्‍वामी ओम, मन्नत बाबा जैसे लोगो का भी टीवी चैनल में प्रसारण होता वो न्यूज चैनल में। आखिर इतने ढोंगी बाबा आज भी राज कैसे कर लेते।ऐसा लगता कि आज भी भारत रूढीवादी और ढोंग में अंधा है।अंधा तो अंधे को रास्ता दिखा रहा।नोट- ढोंग ,अन्ध...
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  July 13, 2017, 11:29 am
मैं शांति से बैठा अख़बार पढ़ रहा था, तभी कुछ मच्छरों ने आकर मेरा खून चूसना शुरू कर दिया। स्वाभाविक प्रतिक्रिया में मेरा हाथ उठा और अख़बार से चटाक हो गया और दो-एक मच्छर ढेर हो गए.!! फिर क्या था उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया कि मैं असहिष्णु हो गया हूँ.!!मैंने कहा तुम खून चूसोगे ...
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  February 25, 2017, 9:46 am
          जब मै अपने बचपन की दुनिया की तुलना आज की दुनिया से करता हू तब सबसे पहले इस बात की ओर घ्‍यान जाता है कि उस दुनिया में किसी व्‍यक्ति के सफल या विफल होने की बात कहीं सुनने में नहीं आती थी। जबकि इस दुनिया में हर कहीं सफलता विफलता की ही चर्चा है। उस दुनिया म...
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  February 20, 2017, 11:23 pm
अब न मिट्टी के खिलौनों की मांग है ना भोज एवं दावतों में मिट्टीके कुल्हड़ का प्रचलन। दीपावली पर मिट्टी के दीये बस नाम मात्र को जलते है।कच्चे मकानों पर नक्काशीदार नरिया और थपुआ का स्थान आयरन व स्टील की चादरोंने ले लिया है। ऐसे में कुम्हारो की रोजी रोटी का सहारा नहीं रहा उ...
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  February 17, 2017, 4:52 pm
आज से करीब 7 साल पहले जब मै अपने पडोस के बुआ को लेकर झांसी से बनारस बाय ट्रेन आ रहा था तभी रास्‍ते में एक युवती अपने माता के स...
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  December 9, 2016, 10:10 pm
संसार मे अच्छाई और बुराई दोनों है, लेकिन उनके पीछे दोनों मे बहुतजटिलताएं भी है, जो परिस्थितियों पर निर्भर होती है, और उन्हें समझना कठिनहोता है। इसीलिए हमें जो सामने दिख रहा है उसपर सतही तौर से देख कर अपनी राय नहीं बनाना चाहिए , जब तक हम पूरी बात समझ ना लें।अगर कोई किसी की ...
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  October 19, 2016, 9:42 am
       समाज में हर एक इंसान को बराबर का दर्जा हासिल है, वहीं इंसान को इंसान समझने की सोच जैसे धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही है और इंसानियत दम तोड़ती नजर आ रही है, जिसके चलते लगातार सामाजिक मूल्यों का पतन हो रहा है। इंसानियत वो जज्बा है जो इंसान को बुलन्दियों तक ले जात...
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  September 30, 2016, 4:19 pm
मैं उस दिन बाज़ार से लौट रहा था | सामने से एक 8 -10 बर्ष का लड़काएक हाथ का ठेला खींचता हुआ चला आ रहा था.ढलान होने के कारण ठेले की गê...
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  September 27, 2016, 4:05 pm
वो रोज़ाना की तरह आज फिर इश्वर का नाम लेकर उठी थी । किचन में आई और चूल्हे पर चाय का पानी चढ़ाया। फिर बच्चों को नींद से जगाया ताकि वे स्कूल के लिए तैयार हो सकें ।कुछ ही पलों मे वो अपने  सास ससुर को चाय देकर आयी फिर बच्चों का नाश्ता तैयार किया और इस बीच उसने बच्चों को ड्रेस भी ...
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  September 27, 2016, 2:50 pm
जैसे जैसे  हम  बड़े  होते  चले  जा  रहे है, वैसे वैसे  हम अपने  बचपन  की यादों को  संजोने में लगे है।  बचपन का वो सारा  खेल खिलौने  यहा  तक की  त्‍योहार  मनाने के  तरीके को  भी। त्‍योहार आते  ही हमारे  मन मे एक उमंग सा फूटने  लगता  था। खास तौर प...
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  January 27, 2016, 1:42 am
आज कल के शादी विवाहों में थोडी सी नोक झोंक, लड़ाई झगड़ा तो प्राय: होते ही रहते है। चाहे वो डिजे पर डांस करते समय या दहेज को लेकर और कुछ शराबी नशे के हालत मे वाहियात हरक्कते करते रहते है। जो आज कल की एक मामूली सी घटना होकर रह गयी है,  लेकिन जो मैने घटना देखी वो मेरे हिसाब से मा...
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  December 22, 2015, 1:08 am
केवल निर्णय लेने से ही अधिक से अधिक सजग या स्पष्ट हुआ जा सकता है, जिससेहम  तीक्ष्ण बुद्धि के बन सकते हैअन्यथा सुस्ती तो बरकरार ही रहेगी |लोग न जाने कितने लोगों से सलाह लेते है,इसलिए नहीं कि वे एक महान खोजी है, पर इसलिए कि वेनिर्णय लेने में असमर्थ होते है|  इसलिए वे एक को ...
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  November 28, 2015, 9:28 am
मदद तब तब अच्‍छा लगता है जब तक अपने पास दूूसरों की मदत करने की फुरसत हो या उसकी आवश्‍यक्‍त वास्‍तव में मदद के लायक हो तो अच्‍छा भी लगता है पर इस लोभी संसार मे कुछ ऐसे भी लोग है जो एक दम दूसरे के आसरे टिक जाते है तब वो मदद करने वाला व्‍यक्ति सहायक व्‍यक्ति न रह कर अपने आप को ए...
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  October 18, 2015, 3:07 am
कुर्बानी को हर धर्म और शास्त्र में भगवान को पाने का सबसे प्रबल हथियार माना जाता है। हिंदू धर्म में जहां हम कुर्बानी को त्याग से जोड़ कर देखते हैं वहीं मुस्लिम धर्म में कुर्बानी का अर्थ है खुद को खुदा के नाम पर कुर्बान कर देना यानि अपनी सबसे प्यारी चीज का त्याग करना। इसी ...
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  September 24, 2015, 8:48 pm
इस बारिश का तो सबके इन्‍तजार के साथ-साथ हमको भी था पर हमे ये थोडी ही मालुुम था कि सामान्‍य से थोड़े से अधिक या से समझिये ही सामान्‍य बारिश  ही हमारे इस गली को नारकीय हालत पैदा कर देगी। जी मेरे कमरे का दरवाजा गली मे खुलता है और दरवाजे के ठीक सटे एक निस्‍क्रीय नाली बहती है ...
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  July 22, 2015, 11:06 pm
जब आप की यात्रा की टिकट कम्‍पलीट न हो या आप का टिकट आप के अनुरूप न हो तो वह यात्र वाहियात बन जाती है आप का कोई सीट अाप की अपनी नही होती है तब एक ही बात दिल को तसल्‍ली देने के लिए मन मे आती है कि हमारा क्‍या अब हम तो अजाद है कही भी बैठ लेगें ट्रेन का सारा बर्थ अपना ही है, यही सोच ...
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  July 12, 2015, 1:22 am
मानव जाति के इतिहास में विभिन्न प्रकार की विभिन्नता की कहानी जुड़ी हुयी है, इस इतिहास में हमने बहुत प्रकार के वर्ग निर्मित किए, जैसे गरीब का, अमीर का, धन के पद के अभाव पर और आश्चर्य की बात यह है कि इस समाज ने जो स्त्री और पुरुष के बीच जो वर्ग का निर्माण किया यह एक अनोखा और अद्...
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  May 25, 2015, 5:20 pm
मानव चाहे कितना ही योग्य और कुशल क्यों न हो, अगर उसे अकेले छोड़ दिया जाए तो वह जी नहीं सकता। कोई अपने सामान्य दिनों मेंकितना ही बलशाली और स्वतंत्र क्यों न हो, जब उसे कोई समस्‍या या किसी प्रकार की बीमारी सताती है तो उसे दूसरों से मदद लेना ही पड़ता है। भौतिक घटनाओं का सूक्ष्म...
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  April 22, 2015, 2:58 pm
ये कैफे वाले भी न ,  मन तो कर रहा है कि सहर से सारे कैफे वाले को आज एक साथ गोली मार दूं । कितने आज भाव दिखा रहे थे मानो कि अब उनसे बडा कोई इंजीनियर ही नही है। अगर काम न करना हो तो इन को बहाना बनाते देर नही लगता मानो हमे तो कुछ आता-जाता ही नही है हम बेवकूफ है जो इनकी शरण मे जा गिर...
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  April 18, 2015, 11:04 pm
जूतेभीसाफहोगयाएकजिंसथाउसेभीधोडाला, एकशर्टतथाएकटीशर्टथीउसेभीधोकेसूखनेकोडालाथालगभगवहीदोपहरऔरसुबहकेबीचकासमयलगभग11 बजेयेसोचकरकीशामतकसूखजाएगा, औरहुआभीऐसासुखभीगया।शामतककपड़ेवैसेहीछतपरझूलरहेथे।कहीजानेकीतैयारीमेंकपडेउतारनाभूलगयाहोगयीरातऔरदोस्तोंक...
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  April 13, 2015, 4:24 pm
हुआ यू की हम अपने सम्‍पादक के घर बैठे से किसी काम से नही बस उनक घर के तरफ से गुजर रहा था तो मैने सोचा कि क्‍यो न इन साहब क घर एक कप चाय हो जाय  फिर फोन करके पता किया तो ये मालूम हुआ कि घर पर ही है फिर मै उनके घर जम बैठा ।       चाय की दो प्‍याली परोसी गयी एक मेरे लिये एक ...
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  April 10, 2015, 8:09 pm
उस दिन शहर के ब्रेकर न जाने कहाँ छुप गये थे,ट्रैफिक भी कही जाम नही था।वो आवारा गायों का झुण्ड पता नही कहा चला गया था।कौन कहता हैं, सड़क पे गड्डे बहुत पड़ते हैं।क्यूँ उस दिन रास्ते इतने छोटे मालूम पड़ रहे थे। उस दिन सब कुछ इतना क्यूँ बदल सा गया था।हाँ, उस दिन कोई पहली बार ...
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  April 8, 2015, 6:20 pm
अक्सर कुछ सवाल हमें बहुत परेशान करते हैं । जैसे कहाँ हो ? किसके साथ हो ? अभी क्या कर रहे हो ? और फोन इतनीं देर सेबिजी था किससे बात कर रहे थे याकर रही थी? ये सवाल पूछने वाला कोई भी हो सकता है । माँ पिताजी बड़े भाईभाभी बहन पत्नी पति प्रेमिका या प्रेमी कोइ भी । माँ पिता जी भाई बहन त...
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  March 18, 2015, 9:04 am
मैं किसी को प्रेम करता हूं, तो चाहता हूं कि कल भी मेराप्रेम कायम रहे; जिसने मुझे आज प्रेम दिया, वह कल भी मुझेप्रेम दे। अब कल का भरोसा सिर्फ वस्तु का किया जा सकता है, व्यक्ति का नहींकिया जा सकता। कुर्सी मैंने जहांरखी थी अपने कमरे में, कल भी वहीं मिल सकती है। प्रेडिक्टेबल है,...
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  February 14, 2015, 8:32 am
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