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धर्म के “धंधे” का सबसे हास्यास्पद और विकृत रूप देखना है तो पितृ पक्ष श्राद्ध और इसके कर्मकांडों को देखिये. इससे बढ़िया कí...
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  September 27, 2018, 12:39 pm
    आज शिक्षक दिवस है, मतलब शिक्षा और शिक्षकों के योगदान और महत्व को समझने का दिन। देशमें रहने वाले नागरिकों के भविष्य निर्माण के द्वारा शिक्षक राष्ट्र-निर्माणका कार्य करते है। लेकिन समाज में कोई भी शिक्षकों और उनकेयोगदान के बारेमें नहींसोचता अपितु शिक्षा का प...
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  September 5, 2018, 6:55 pm
यह बहुत मजे की बात है कि जीवन के असम्मान के कारण प्रेम अशोभन मालुम पडता है।क्योंकि प्रेम जीवन का गहनतम फूल है।अगर दो आदम...
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  June 18, 2018, 7:35 am
     जब मै अपने बचपन की दुनिया की तुलना आज की दुनिया से करता हू तब सबसे पहले इस बात की ओर घ्‍यान जाता है कि उस दुनिया में किसी व्‍यक्ति के सफल या विफल होने की बात कहीं सुनने में नहीं आती थी। जबकि इस दुनिया में हर कहीं सफलता विफलता की ही चर्चा है। उस दुनिया में सफलता की ...
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  June 2, 2018, 3:02 pm
पिछले समय में देश के कई हिस्सों में पढे-लिखे बेरोजगारों के स्वतःस्फूर्त तरीके से संगठित होने-सड़कों पर उतरने की घटनायें लगातार बढ़ती गयीहैं। अंधकारमय भविष्य कोसामने देख लड़ने को तैयार हुए बेरोजगारों का जज्बासरकार नहीं तोड़ पायीं। कोई कह सकता है किबेरोजगारों के साथ ठ...
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  June 2, 2018, 2:41 pm
मनुष्य के कृत्यों को देखो , तीन हजार वर्षों में पाँच हजार युद्ध आदमी ने लड़े हैं । उसकी पूरी कहानी हत्याओं की कहानी है , लोग...
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  May 6, 2018, 2:36 am
  पिता बेटे को डॉक्टर बनाना चाहता था। बेटा इतना मेधावी नहीं था कि NEET क्लियर कर लेता। इसलिए  दलालों से MBBS की सीट खरीदने का जुग...
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  May 5, 2018, 4:24 am
भारत के पुरुषों के चारों तरफ पूरे वक़्त  सेक्‍स घूमता रहता है और इस घूमने के कारण उसकी सारी शक्‍ति इसी में लीन और नष्‍ट ह...
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  April 20, 2018, 7:24 pm
युवाओं का देश कहे जाने वालेभारतमें शिक्षित बेरोजगारों की एक बड़ी फौज खड़ी हो गई है। हर साल तीसलाख युवा स्नातक व स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करते हैं। इसके बावजूद देश में बेरोजगारी दिन दूनी-रात चौगुनी बढ़ रही है।हमारी शिक्षाप्रणाली दोषपूर्ण है। न तो वह अपने निर्धारित लक...
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  April 7, 2018, 9:16 pm
उसने कभी यह घोषणा ही नहीं की कि मेरे पास भी आत्मा है। वह चुपचाप पुरूष के पीछे चल पड़ती है।अगर राम को सीता को फेंक देना है तो सीता की कोई आवाज नहीं। अगर राम कहते हैं कि मुझे शक है तेरे चरित्र पर तो उसे अण में डाला जा सकता है। यह बडे मजे की बात है। यह किसी के खयाल में कभी नहीं आत...
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  February 11, 2018, 2:37 am
मतलबी हो तुमजब ज़रुरत पड़ती है तुम्हेंतब याद आता हूँ मैंकभी बेवजह याद किया तुमनेनहीं...हर वक़्त एक वजह होती हैएक दर्द,एक ज़ख्म,एक शिकवा होता हैहमेशा शिकायते होती है फिरमन होता है तुम्हारा.. तो चले आती होबेवक्त...एक बेसहारे की तरहसहमा रहता हूँ मैं हर वक्तडर लगता है मुझे तुम...
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  December 20, 2017, 12:47 am
जब मै अपने बचपन की दुनिया की तुलना आज की दुनिया से करता हूँ, तब सबसे पहले इस बात की ओर घ्‍यान जाता है कि, उस दुनिया में किसी व्‍यक्ति के सफल या विफल होने की बात कहीं सुनने में नहीं आती थी। जबकि इस दुनिया में हर कहीं सफलता विफलता की ही चर्चा है। उस दुनिया में सफलता की बात भी न...
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  December 19, 2017, 10:19 pm
हर सब्जेक्ट की काॅपी अलग अलग बनती थी, परंतु एक काॅपी एसी थी जो हर सब्जेक्ट को सम्भालती थी। उसे हम रफ काॅपी कहते थे। यूं तो रफ काॅपी का मतलब खुरदुरा होता है। परंतु वो रफ काॅपी हमारे लिए बहुत कोमल होती थी। कोमल इस सन्दर्भ में कि, उसके पहले पेज पर हमें कोई इंडेक्स नहीं बना...
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  July 13, 2017, 11:55 am
समझ नही आता कि इस 21वीं सदी में निर्मल बाबा,स्‍वामी ओम, मन्नत बाबा जैसे लोगो का भी टीवी चैनल में प्रसारण होता वो न्यूज चैनल में। आखिर इतने ढोंगी बाबा आज भी राज कैसे कर लेते।ऐसा लगता कि आज भी भारत रूढीवादी और ढोंग में अंधा है।अंधा तो अंधे को रास्ता दिखा रहा।नोट- ढोंग ,अन्ध...
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  July 13, 2017, 11:29 am
मैं शांति से बैठा अख़बार पढ़ रहा था, तभी कुछ मच्छरों ने आकर मेरा खून चूसना शुरू कर दिया। स्वाभाविक प्रतिक्रिया में मेरा हाथ उठा और अख़बार से चटाक हो गया और दो-एक मच्छर ढेर हो गए.!! फिर क्या था उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया कि मैं असहिष्णु हो गया हूँ.!!मैंने कहा तुम खून चूसोगे ...
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  February 25, 2017, 9:46 am
          जब मै अपने बचपन की दुनिया की तुलना आज की दुनिया से करता हू तब सबसे पहले इस बात की ओर घ्‍यान जाता है कि उस दुनिया में किसी व्‍यक्ति के सफल या विफल होने की बात कहीं सुनने में नहीं आती थी। जबकि इस दुनिया में हर कहीं सफलता विफलता की ही चर्चा है। उस दुनिया म...
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  February 20, 2017, 11:23 pm
अब न मिट्टी के खिलौनों की मांग है ना भोज एवं दावतों में मिट्टीके कुल्हड़ का प्रचलन। दीपावली पर मिट्टी के दीये बस नाम मात्र को जलते है।कच्चे मकानों पर नक्काशीदार नरिया और थपुआ का स्थान आयरन व स्टील की चादरोंने ले लिया है। ऐसे में कुम्हारो की रोजी रोटी का सहारा नहीं रहा उ...
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  February 17, 2017, 4:52 pm
आज से करीब 7 साल पहले जब मै अपने पडोस के बुआ को लेकर झांसी से बनारस बाय ट्रेन आ रहा था तभी रास्‍ते में एक युवती अपने माता के स...
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  December 9, 2016, 10:10 pm
संसार मे अच्छाई और बुराई दोनों है, लेकिन उनके पीछे दोनों मे बहुतजटिलताएं भी है, जो परिस्थितियों पर निर्भर होती है, और उन्हें समझना कठिनहोता है। इसीलिए हमें जो सामने दिख रहा है उसपर सतही तौर से देख कर अपनी राय नहीं बनाना चाहिए , जब तक हम पूरी बात समझ ना लें।अगर कोई किसी की ...
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  October 19, 2016, 9:42 am
       समाज में हर एक इंसान को बराबर का दर्जा हासिल है, वहीं इंसान को इंसान समझने की सोच जैसे धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही है और इंसानियत दम तोड़ती नजर आ रही है, जिसके चलते लगातार सामाजिक मूल्यों का पतन हो रहा है। इंसानियत वो जज्बा है जो इंसान को बुलन्दियों तक ले जात...
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  September 30, 2016, 4:19 pm
मैं उस दिन बाज़ार से लौट रहा था | सामने से एक 8 -10 बर्ष का लड़काएक हाथ का ठेला खींचता हुआ चला आ रहा था.ढलान होने के कारण ठेले की गê...
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  September 27, 2016, 4:05 pm
वो रोज़ाना की तरह आज फिर इश्वर का नाम लेकर उठी थी । किचन में आई और चूल्हे पर चाय का पानी चढ़ाया। फिर बच्चों को नींद से जगाया ताकि वे स्कूल के लिए तैयार हो सकें ।कुछ ही पलों मे वो अपने  सास ससुर को चाय देकर आयी फिर बच्चों का नाश्ता तैयार किया और इस बीच उसने बच्चों को ड्रेस भी ...
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  September 27, 2016, 2:50 pm
जैसे जैसे  हम  बड़े  होते  चले  जा  रहे है, वैसे वैसे  हम अपने  बचपन  की यादों को  संजोने में लगे है।  बचपन का वो सारा  खेल खिलौने  यहा  तक की  त्‍योहार  मनाने के  तरीके को  भी। त्‍योहार आते  ही हमारे  मन मे एक उमंग सा फूटने  लगता  था। खास तौर प...
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  January 27, 2016, 1:42 am
आज कल के शादी विवाहों में थोडी सी नोक झोंक, लड़ाई झगड़ा तो प्राय: होते ही रहते है। चाहे वो डिजे पर डांस करते समय या दहेज को लेकर और कुछ शराबी नशे के हालत मे वाहियात हरक्कते करते रहते है। जो आज कल की एक मामूली सी घटना होकर रह गयी है,  लेकिन जो मैने घटना देखी वो मेरे हिसाब से मा...
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  December 22, 2015, 1:08 am
केवल निर्णय लेने से ही अधिक से अधिक सजग या स्पष्ट हुआ जा सकता है, जिससेहम  तीक्ष्ण बुद्धि के बन सकते हैअन्यथा सुस्ती तो बरकरार ही रहेगी |लोग न जाने कितने लोगों से सलाह लेते है,इसलिए नहीं कि वे एक महान खोजी है, पर इसलिए कि वेनिर्णय लेने में असमर्थ होते है|  इसलिए वे एक को ...
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  November 28, 2015, 9:28 am
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