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मन के वातायन

युवा सन्यासी के गौर वर्ण और आकर्षक देह यष्टि से प्रभावित होकर रूप गर्विता स्त्री ने उनसे प्रवचन के पश्चात एकान्त में मिलने की इच्छा प्रकट की। उसने स्वामीजी से एकान्त में कहा कि वह उन जैसे तेजस्वी पुत्र की माँ बनना चाहती है। स्वामीजी ने एक क्षण सोचा और मुस्कर...
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  December 10, 2018, 7:24 am
शमा रातभर जलती रही,पिघलती रही।खोती रही अपना अस्तित्व,मिटाने को तमस।उसकी सदेच्छा,न भटके कोई अँधेरे में।न होये अधीर,घबड़ा कर निबिड़ अन्धकार से।उसके परोपकारी भाव का,नहीं दिया किसी ने सिला।नहीं गाया किसी ने प्रशस्ति गीत,उसके उत्सर्ग  का।पतंगा, सृष्टि का क्षुद्र जीव,न स...
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  December 2, 2018, 7:27 am
मेरा भारतअनेक भाषाभाषीरहते यहां।पालते धर्मबिना भेदभाव केकरते कर्म।हवा सबकीआसमान सबकाजमीं सबकी।झंडा उठाओ'जय भारत माता'नारे लगाओ।करो न शकहैं सब देशभक्तनहीं संदेह।करो प्रयासदल दल दलों काहो जाये साफ।साफ कर दोकूड़ा राजनीति काअभियान से।साकार करोसपना भारत काहो विश्...
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  November 25, 2018, 10:00 pm
हम नहीं थे इनके नहीं थे उनके,सबके ही हम खास रहे।नहीं किसी से दूर रहे,सबके ही हम पास  रहे।जो मिला उसे अपना समझा,जो नहीं मिला उसे सपना समझा।रूठे अपने टूटे सपने,नहीं रोये नहीं उदास रहे।चूमना चाहते थे हम गगन,छू भी न सके पर रहे मगन।नहीं विफलता से हुए विकल,असफलता से नहीं निरा...
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  November 17, 2018, 10:08 pm
बोलौ गोरी रहिहौं कित में,कै काहू के आईं पाहुने,देखी नहीं कबहू इत में।मैं सब बीथिन में आवत जावत, घूमूँ वनखड़ में गऊ चरावत।सिगरौ वृज मेरौ देखौ भालौ,तुम दिखीं नहीं कबहू उत में।कै तुम आईं नंद बवा के,सर्वाधिक गउएँ खरिक में जाके।कै तुम भूलि गयी हौ पथ,चैन नहीं चित में।बोलौ मै...
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  November 10, 2018, 10:33 am
अपनी नेतागीरी चमकाने को,दबंग को गांधीगीरी दिखाने को।वे पहुँच गये लेकर गुलाब के फूल,पर वह नहीं हुआ अनुकूल।फेंक दिये उसने नोंचकर फूल-और चटा दी उनको धूल।हाथ-पैर तुड़ाकर,सिर फुटौबल करा कर।चारपाई पर पड़े पड़े कराह रहे हैं,गांधीगीरी ईजाद करने वालों को-गालियाँ सुना रहे हैं।&...
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  November 5, 2018, 11:56 pm
जग दुख का आगार है नहीं रोइये रोज।रोना धोना छोड़ कर सुख के कारक खोज।।सुख के कारक खोज लगा लत नेक काम की।कर दुखियों की मदद फिकर नहीं कर इनाम की।।परमारथ की लगन जब तुम्हें जायेगी लग।भूलोगे निज कष्ट लगेगा अति सुंदर जग।।पोथी पढ़कर फैंक दी हुआ न कुछ भी ज्ञान।नहीं किया चिंतन मनन ...
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  October 28, 2018, 7:29 am
सुन चिड़े हो सावधान,बदल गया है अब विधान।हम दोनों हैं अनुगामी।नहीं हो तुम मेरे स्वामी।तुम मुझको नहीं  टोक सकोगे,अब नहीं मुझको रोक सकोगे।चाहे कहीं भी मैं जाऊँ,चाहे किसी के नीड़ रहाऊँ।तेरी ही होकर नहीं रहूँगी,जहाँ  चाहूँगी मैं विचरूँगी।मादाओं को नरों ने बहुत सताया,अब ...
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  October 20, 2018, 4:09 pm
धृतराष्ट्र थे जन्मांध,सुनयना थीं गांधारी।पटका  बाँध  बनीं  निरंध,ओढ़ ली लाचारी।अविवेकी मन कुंठित  बुद्धि ने,करी वंश वृद्धि।सौ पुत्रों को दिया जन्म,कुविचारों की हुई  सृष्टि।पुत्र मोही राजा रानी,पुत्रों को दे न सके संस्कार।उनके धर्म विरोधी कार्यों का,कर न सके ...
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  October 13, 2018, 8:04 pm
जिनके बिगड़े रहते हैं बोल,बातों में विष देते घोल।वे सोच समझ कर नहीं बोलते,नहीं जानते शब्दों का मोल।आपे में वे नहीं रहते हैं,जो मुँह में आता है कहते हैं।वे नहीं जानते छिछली बातों से,खुल जाती है उनकी पोल।कुछ लोग बातों का ही खाते हैं,बातों से वे अपनी साख बनाते हैं।रहता है स...
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  October 6, 2018, 8:46 am
पावस की अमावस की रात किसी पापीके मन सी काली                                घोर डरावनी गंभीर मेघ गर्जन                                                          दामिनी की चमक कर देती है विरहणी को त्रस्त                      ...
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  September 29, 2018, 7:43 pm
मैं गलियों में गलियारों में इंसानियत ढूंढता रहा,मंदिरों में मस्जिदों में उसका पता पूँछता  रहा।वह मिली तो मिली सर्वहारों के बीच,जिनका जीवन अभावों से जूझता रहा।वे अपनी पीड़ा से दुखी रहते हैं,अंग अंग उनके टीसते रहते हैं।पूँछते हैं एक दूसरे की कुशल क्षेम,नहीं चुराते जी ...
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  September 21, 2018, 8:24 pm
जय गणेश गिरिजा नन्दन, करते हैं तेरा वंदन................. जय गणेश.....।शंकर सुवन भवानी नन्दन-हम शरण तुम्हारी आये हैं।पान, फूल, मेवा, मिष्ठान-हम पूजा को लाये हैं।सिंदूर का मस्तक पर तिलक लगा कर-करते हैं तेरा अभिनन्दन.................जय गणेश.....।मूषिकारुढ़ प्रभु कृपा करें,भक्तों का संताप हरें।अशु...
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  September 13, 2018, 10:06 pm
सखी री मैं तो उनकी दिवानी,नहीं आवै उन बिन चैन।मन तड़पत घायल पंछी सौ,विरह करै बेचैन.................सखी री...........।                    बानि पड़ी ऐसी अंखियन को,                    प्रतिक्षण देखन चाहत उनको।                    नहीं दिखाई दें वे पलभर,             ...
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  September 8, 2018, 5:47 pm
मैं अनुरागी श्री राधा कौ!नाम लेत बन जाती बिगड़ी,महा मंत्र भव बाधा कौ•••।राधा प्रसन्न, मैं प्रसन्न,बात नही है यह प्रच्छन्न।कर न सकूँगो मैं अनदेखी,उनके भक्तों की ब्याधा कौ•••।बिन राधा के श्याम अधूरौ,कर न सकूं कोई काम मैं पूरौ।वे हैं मेरी कर्म शक्ति,मैं उन बिन प्रतीक आधा ...
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  September 1, 2018, 10:52 am
मधुकर मत कर अंधेर। अभी कली है नहीं खिली है,नहीं कर उनसे छेड़।वे अबोध हैं तू निर्बोध है,प्रीत की रीत का नहीं प्रबोध है।समझेंगी वे चलन प्रेम का,रे भ्रमर देर सवेर.....................मधुकर मत........।रह भँवरे तू कुछ दिन चुप,खिलने दे कलियाँ बनने दे पुष्प।चढ़ने दे उन पर मौसम के रंग,मादक बनते न...
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  August 26, 2018, 3:05 pm
जय शिव शंकर बम भोले।पी गये गरल,जैसे पेय तरल।न बनाया मुंह,न कुछ बोले ......जय शिव शंकर।थी लोक कल्याण की भावना,सबके प्रति थी सद्द्भावना।हुआ कंठ नीलाभ,भड़कने लगे आँख से शोले ......जय शिव शंकर।चन्द्र कला सिर पर धरी उसकी शीतलता से विष ज्वाल हरी।हुये शान्त उमाकांत,सामान्य हुए हौले ...
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  August 12, 2018, 12:40 pm
उसकी बात बात होती है,मेरी बात गधे की लात।लग जाये तो ठीक है वरना,उसकी नहीं कोई बिसात।                मैं जब तक प्रश्न समझ पाता हूँ,                वह उत्तर दे देती है।                मैं जब तक विषय में उतराता हूँ,                वह समाधान दे देती है।...
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  August 6, 2018, 9:40 pm
आयौ बसंत फूली सरसों,खेतों से सौंधी महक उठी।सोये से तरुवर जाग उठे, चिड़िया आँगन में चहक उठी।पक गये धान मगन भये किसान,  ओठों पर तैरी मुस्कान। चंग बजाते रंग जमाते, गाते सोरठ-फगुआ के गान। बात बात पर हँसती छोरी,घूँघट में गोरी मुस्काती है। करती रह-रह कर सैन मटक्का,&nb...
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  February 28, 2018, 11:28 pm
दम्भी पुत्र जिसको पिता ने घर से  निकाल दिया था, ने छल-बल से घर में पुनः प्रवेश किया और गर्वोक्ति से पिता से कहा, पापा मैं आ गया हूँ, आप हार गये। पिता ने शान्त स्वर में कहा “ठीक है तुम रहो, मैं जा रहा हूँ"।अगले ही पल स्वाभिमानी पिता का निस्पंद शरीर कुर्सी पर लुढ़क गया।  जयन्...
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  November 25, 2017, 3:30 pm
प्रजा तंत्र का दोष है, तंत्र रहे कमजोर। शाह झांकते है बगल, हावी रहते चोर।।बागी-दागी तंत्र को, कर देते कमजोर।शासन का इन पर नहीं, चल पाता है जोर।। तुष्टिकरण समाज में, पैदा करता भेद। बढ़ जाते हैं भेद से, आपस में मतभेद।। मैं चाहूँ मेरी बने, एक अलग पहचान। इनका उनका सा ...
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  October 28, 2017, 10:45 am
जय हनुमान महाबलवान,रक्षा करो,करों दुखों का शमन दुष्टों का दमन,नहीं किसी आदेश की प्रतीक्षा करो .............जय हनुमान....।                            तुम प्रखर बुद्धि हो,                            स्वयं सिद्ध हो।                            भक्तों क...
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  October 21, 2017, 5:57 pm
आदरणीय प्रवर बन्धुसादर नमस्ते।कुछ अपरिहार्य कारणों और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क तथा मदर बोर्ड  के खराब हो जाने के कारण एक लम्बे समय तक आपसे सम्पर्क नहीं हो पाया, जिसका मुझे अत्यंत खेद है। धन्यबाद जहाँ तुम थे वहाँ मैं भी था,किसी पुस्तक सी प्रस्तावना सा।तमाम किन्तु...
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  September 19, 2017, 10:03 pm
समता निश्छलता और वत्सलता,हैं मित्रता क आधार। वे भाई तो नहीं होते, भाई से बढ़कर होता है उनका प्यार।              निश्छल प्रेमी जन ही मित्र बन पाते हैं,              निष्ठावान होकर वे उसे निभाते हैं।              जब सारे रिश्ते हो जाते है बेकार, &n...
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  May 27, 2017, 11:09 am
माँ जीवन का आधार,माँ ममता का भण्डार।नहीं माँ जैसा कोई उदार, कैसा भी हो बच्चा करती प्यार। माँ सुख बच्चों को देती, बलायें उसकी ले लेती। नहीं माँ की ममता का मोल, नहीं उसके स्नेह का तोल।माँ कष्ट में बच्चे को पाती, भूख प्यास उसकी उड़ जाती। नहीं माँ की करुणा का अन्त,...
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  May 13, 2017, 12:47 pm
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