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मन के वातायन

सबकी अपनी अपनी ढपली,अपना अपना राग।किसी को सुहाता है सावन,किसी को भाता फाग।जब सब गाते कजरी-टप्पे,वे गीत ओज के गाते हैं।सीमा पर रहते मुस्तैद,नहीं मौसम उन्हें डराते हैं।वे रहते हैं सदा सजग,कोई लगा न दे कभी आग।न कोई उनको गर्मी,न कोई उनको सर्दी।न कोई उनकी इच्छा ,न कोई उनकी मर...
मन के वातायन...
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  August 10, 2019, 11:44 am
घिर घिर बदरा आबते, बिन बरसें उड़ जांय।नीको जोर दिखावते ,पर बरसत हैं नायँ।पर बरसत हैं नायँ ,दया नहि दिखलाते हैं।गरजत चमकत खूब,नहीं जल बरसाते हैं।रहते चलायमान ,बादल रहते नहीं थिर।नहि होती बरसात, जलद आते हैं घिर घिर।सावन सगुन मनाइये झूला झूलौ जाय, पैंग बढ़ाइ लेउ पकड़ बदरा उ...
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  August 5, 2019, 8:11 am
ये भी आये, वे भी आये,सभी ही उनके,जनाजे मे आये।आये करीबी, आये रकीबी,रोते थे बिसूरते थे सभी ही।उनमें से कुछ थे,मुखौटे लगाये।कुछ थे देनदार,कुछ थे लेनदार।संग वे अपने,बही खाते भी लाये।कुछ आये थे निभाने को फ़र्ज,नहीं थे उनके रसूखों में दर्ज।वे सिर्फ इंसानियत,दिखाने को आये।कुछ ...
मन के वातायन...
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  July 29, 2019, 1:26 pm
घड़ियां इंतज़ार कीलगती हैं पहाड़ सीपलकें होती हैं बोझिलआँखें सुर्खरूजैसे तप्त हों बुखार से।मनहो जाता है व्याकुलऔर तन आकुलहर आहट पर चौंक उठती हैआ गये सनम।आवारा बयार का झौंका होगाअथवा कोई श्वानखड़का गया दरवाजे केकिवाड़।न देख कर प्रिय को हुई मायूसखो गया दिल का चैनबढ़ गई बे...
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  July 20, 2019, 10:02 pm
भोर भई अब जागो लाल!मुँह उठाय रँभाइ रही गैया,बाट देखि रहे ग्वाल।उदय भये रवि किरण पसारीं,अम्बर से उतराईं।चूँ चूँ करती चुगने दाना,चिड़ियाँ आँगन में आईं।काहे लाला अब तक  सोवै,है रहे सब बेहाल।उठो लाल मुँह हाथ पखारो,मैं लोटा भर जल लाई।नित्य कर्म कर बंशीवट जाओ,प्यारे कृष्ण क...
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  July 15, 2019, 2:08 pm
लगता है सर्वत्र आग लगी है, दहक रहे नफरत के अंगारे।लाल भभूका हैं सबके मुख,आरक्त हुऐ गुस्से के मारे।सूख गये हैं नेह कूप,जुल्म ढा रही ईर्ष्या की धूप।दिखता नहीं कहीँ सौहार्द,जायँ कहाँ अपनों से हारे।अपनों का चुक गया अपनापन,रहने लगी सम्बन्धों में अनबन।गला काटते अपने ही अ...
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  July 4, 2019, 4:05 pm
बन्धु रे जीवन है संग्राम,निज अस्तित्व बचाने को,लड़ना पड़ता है आठौ याम। कभी समाज से कभी सिद्धांत से,कभी अपने मन की उद्भ्रान्ति से।बीत जाता है जीवन लड़ते लड़ते,मिलता नहीं मुकाम।कुछ स्वस्ति वाचक समाज में,पा जाते हैं शीर्ष ठौर ।लेकर सहारा जाति पाँति का,बन जाते हैं सिर मौर।व...
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  June 14, 2019, 6:32 am
यह तेरी गली यह मेरी गली,सौ बार आएंगे जाएंगे।लाख करेंगे कोशिशें,पर कभी न कभी टकराएंगे।टकराहट में होगी खनक ,पायल की जैसे झनक।हम नहीं करेंगे गौर,सुनी अनसुनी कर जाएंगे।कभी खा जायेंगे  तैश,लाठी डंडों से होएंगे लैस। हम रोक लेंगे रक्त पात,जब लोग हमें समझायेंगे।नहीं होएं...
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  April 7, 2019, 2:20 pm
मौसम सुहाना हो गया है,समाँ आशिकाना हो गया है।जिन रास्तों पर अक्सर आते जाते थे,उन पर चले बिना एक जमाना हो गया है।जो अशआर बिखरे पड़े थे,उनके मिलने पर सुन्दर तराना हो गया है।उजड़ा दयार आपकी इनायत से,खुशियों का खजाना हो गया है।किसी रूंठे को मनाने की कोशिशें,खुद को झिकाना हो ग...
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  April 2, 2019, 7:54 am
मैं शराब हूँ,लोग कहते हैं मैं खराब हूँ।खराबी मुझमें नहीं,पीने वालों की सोच में है।छक कर पीना,खोना होश में है।मैं अंगूरी आसव,घूँट दो घूँट पीने वालों को देती मज़ा।बे हिसाब पीने वालों को,देती सजा।मैं उसके मन बुद्धि  पर,कर लेती अधिकार।पटक कर उसे किसी नाले में,करती प्रतिका...
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  March 24, 2019, 8:07 pm
होली खेलि रहे नन्दलाल,बिरज की खोरी में।होरी खेलन बरसाने आये, ग्वाल बाल कान्हा लैकें आये।भर लाये लाल गुलाल,पीत पट झोरी में ।                     चंद्र सखी राधा की आयी,भरि कें गगरी जल लै आयी।जानें घोरि लियौ रँग लाल-कमोरी कोरी में।                      &nb...
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  March 19, 2019, 10:22 pm
मैं हूँ आज ग़म ज़दा,आक्रोशित होता हूँ यदा कदा।दुश्मनों ने गहरी घात की है,आँसुओंकी मुल्क को सौगात दी है।बैरियों का नाश हो,दुखी दिल से निकलती है सदा।होता युद्ध तो करते कुछ बारे न्यारे,छिपी घात से बिना दिखाये शौर्य-मारे गये बेचारे।उनकी शहादतों के गीत गाये जायेंगे सर्वदा।...
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  March 10, 2019, 8:29 pm
श्री शिव शंकर संसार सार,करते थे अपना श्रृंगार।सँभाल कर जटाओं में गंग,धारण कर नाग-चन्द्र।मलने लगे भभूत,महादेव अवधूत। कुछ भभूत उड़ी,नाग की आँख में पड़ी।नाग फुंफकार उठा,फुसकार से चंद्र से टपकी सुधा। अमृत की वह बूंद ब्याध्र चर्म परचढ़ी,जी उठा ब्याध्र जान उसमें पड़ी।जी कर ...
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  March 4, 2019, 11:02 am
नाम मिटा दो दुनियाँ के नक्शे से,पाकिस्तान का।उतार फैंको चाँद सितारा,फहरादो झंडा हिंदुस्तान का।कोई मुल्क था पाकिस्तान,रहे न इसका कोई निशान।आतताइयों को करो ख़त्म,दूर करो दर्द सारे जहान का।शहीदों की मौत का लो प्रतिकार,कर लो पाक पर अधिकार।बनाओ उसको एक प्रान्त, भारत मह...
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  February 28, 2019, 10:07 pm
नापाक पाक को पाक करो,गन्दा है वह साफ करो।आतंकवाद का पोषक है,उसको दण्डित आप करो।करता रहता है छद्म युद्ध,नेतृत्व वहाँ का नहीं प्रबुद्ध।उनकी शुद्ध भावना हो जाये,ऐसा कुछ आप करो।विश्व मंचों पर हुई फजीहत,हर किसी ने दी उसे नसीहत।बन्द करो व्यर्थ का भारत विरोध,युद्ध के कारक हो...
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  February 23, 2019, 7:23 pm
कूट कूट कर भुस भर दो,नापाक निगोड़ों में।बिना पिटे नहीं आएगी अक्ल,इन हराम खोरों में।वर्षों से वे कर रहे छल छइयां,बहुत हो गईं अब गलबहियां।न रहो विनोदी अब मोदी,  लतियाओ लगाओ मार इन डंगर ढोरों में।दिखलादो हिन्दुस्तानी दम खम,बतलादो नहीं कम हम।इतना कूटो दर्द रहे दौड़ता उन...
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  February 17, 2019, 12:09 pm
तारे न तुम आना ज़मीं पर,यहाँ बहुत दुश्वारियां हैं।कदम कदम पर धोखे हैं,कदम कदम पर मक्कारियां हैं।यह मतलब की दुनियाँ हैं,बिना मतलब कोई नहीं जानता।रोज मिलते हैं मगर,कोई नहीं पहचानता।मतलब के हैं रिश्ते नाते,मतलब की ही यारियां हैं।भाईचारे की यहाँ कमी है,सब आपस में डरे हुए ह...
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  February 2, 2019, 8:19 pm
मेरा भारत देश!सुजल,सुफल,सुखद परिवेश।यहाँ गंगा यमुना बहतीं अविरल,निर्मल,शीतल पवित्र इनका जल।रहते मनुष्य निर्लिप्त,वातावरण में गूंजते-गीता के उपदेश।मनो में धर्म का प्रभाव,उपजाता है बन्धुत्व भाव।रहती है मिल कर रहने की चाह,दिया विभूतियों ने सदा-शान्ति का सन्देश।धर्म ...
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  January 26, 2019, 10:35 am
ज़िन्दगी!तेरी ज़िन्दगीमेरी ज़िन्दगीइसकी ज़िन्दगीउसकी ज़िन्दगीहम सबकी ज़िन्दगी।रोती है ज़िन्दगीरुलाती है ज़िन्दगीहँसती है ज़िन्दगीहँसाती है ज़िन्दगीसबकी मुस्कराती है ज़िन्दगी।सकाम होती है ज़िन्दगीनिष्काम होती है ज़िन्दगीबदनाम होती है ज़िन्दगीगुमनाम होती है ज़िन्दगीअंजा...
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  January 18, 2019, 8:09 pm
कुहासे की चिलमन से झाँकते सूर्य नेभेज दीं कुछ किरणें भूमि परवे लगीं बड़ी भलीसर्द शरीरों में पड़ गई जानखुल गए अंगउठी मन में उमंगगीत लेने लगे अंगड़ाईपत्तों पर पड़ी ओसहो गई विगलितबहने लगी बन कर जलनहा उठे वृक्षखिल गईं कलियाँनिखर गए पुष्पउपवन हो गये मोहकसर्दी से त्रस्त परिं...
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  January 12, 2019, 8:43 pm
बोला गुरू से शिष्य,मेरी उलझन सुलझाइए।अंतरंग परिचय मेरा,मुझसे कराइये।मैं मन हूँ या तन हूँ,नूतन हूँ पुरातन हूँ।मैं अपने को समझ न सका,मैं कौन हूँ बताइये।मैं भोगी हूँ या भोग हूँ,योगी हूँ या योग हूँ।मैं कैसे स्वयं को परिभाषित  करूं,मुझे समझाइये।इस वासना के संसार में मैं ...
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  January 6, 2019, 5:18 pm
अब तुम शीत कहाँ सेआये?ढूँढत रहे ग्रीष्म भर तुमको,हमको तुम नहीं पाये.........अब तुम..।              हम रहे ढूंढते वन उपवन में,              ताल तलैया और पोखरन में।              नदियाँ और तालाब खंगाले,              कीन्हीं खोज सघन कुंजन में।पाने को गर्मी स...
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  December 30, 2018, 3:32 pm
वह समझ न सकी वह समझा न सका,बीत गई उम्र समझते समझाने में।कुछ ऐसे तल्ख हुये रिश्ते,वह अब बैठा करते हैं मयखाने में।           खेल-खेल में ले लिया दर्द,           अब झेले नहीं झिलता है।           वे हो गये हैं बेदर्द और रूखे,           नहीं उनकी फितरत से च...
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  December 15, 2018, 1:24 pm
युवा सन्यासी के गौर वर्ण और आकर्षक देह यष्टि से प्रभावित होकर रूप गर्विता स्त्री ने उनसे प्रवचन के पश्चात एकान्त में मिलने की इच्छा प्रकट की। उसने स्वामीजी से एकान्त में कहा कि वह उन जैसे तेजस्वी पुत्र की माँ बनना चाहती है। स्वामीजी ने एक क्षण सोचा और मुस्कर...
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  December 10, 2018, 7:24 am
शमा रातभर जलती रही,पिघलती रही।खोती रही अपना अस्तित्व,मिटाने को तमस।उसकी सदेच्छा,न भटके कोई अँधेरे में।न होये अधीर,घबड़ा कर निबिड़ अन्धकार से।उसके परोपकारी भाव का,नहीं दिया किसी ने सिला।नहीं गाया किसी ने प्रशस्ति गीत,उसके उत्सर्ग  का।पतंगा, सृष्टि का क्षुद्र जीव,न स...
मन के वातायन...
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  December 2, 2018, 7:27 am
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