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चंचल मन chanchal mann

बेचैन बहारों में क्या-क्या है जान की ख़ुश्बू आती हैबेचैन बहारों में क्या-क्या है जान की ख़ुश्बू आती हैजो फूल महकता है उससे तूफ़ान की ख़ुश्बू आती हैकल रात दिखा के ख़्वाब-ए-तरब जो सेज को सूना छोड़ गयाहर सिलवट से फिर आज उसी मेहमान की ख़ुश्बू आती हैतल्कीन-ए-इबादत की है मुझे ...
चंचल मन chanchal mann ...
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  December 5, 2016, 2:13 pm
परछाइयाँ          जवान रात के सीने पे दूधिया आँचल          मचल रहा है किसी ख्वाबे-मरमरीं की तरह          हसीन फूल, हसीं पत्तियाँ, हसीं शाखें          लचक रही हैं किसी जिस्मे-नाज़नीं की तरह          फ़िज़ा ...
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  November 30, 2016, 5:18 pm
मधुशालामृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१। प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला,एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा लेकर प्य...
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  November 30, 2016, 5:10 pm
हो जाय न पथ में रात कहींहो जाय न पथ में रात कहीं,मंज़िल भी तो है दूर नहीं –यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है !दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!बच्चे प्रत्याशा में होंगे,नीड़ों से झाँक रहे होंगे  –यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है !दिन जल्दी-जल्दी ढलता ...
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  November 30, 2016, 5:05 pm
1वो बात बात पे देता है परिंदों की मिसालसाफ़ साफ़ नहीं कहता मेरा शहर ही छोड़ दो*****2तुम्हारी एक निगाह से कतल होते हैं लोग फ़राज़एक नज़र हम को भी देख लो के तुम बिन ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती*****3अब उसे रोज़ न सोचूँ तो बदन टूटता है फ़राज़उमर गुजरी है उस की याद का नशा किये हुए*****4एक न...
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  March 8, 2016, 10:28 am
लोग हर मोड़ पर रुक - रुक के संभलते क्यों हैलोग हर मोड़ पर रुक - रुक के संभलते क्यों हैइतना डरते है तो फिर घर से निकलते क्यों हैमैं ना जुगनू हूँ दिया हूँ ना  कोई तारा हूँरौशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैंनींद से मेरा ताल्लुक ही नहीं बरसों सेख्वाब आ - आ के मेरी छत पे टहलते ...
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  March 8, 2016, 10:10 am
                   *****लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने मेंलोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने मेंतुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने मेंऔर जाम टूटेंगे, इस शराबख़ाने मेंमौसमों के आने में, मौसमों के जाने मेंहर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैंउम्र बीत जाती है, द...
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  March 8, 2016, 9:44 am
*****सारेजहाँसेअच्छा, हिन्दोस्ताँहमाराहमबुलबुलेंहैंइसकी, यहगुलिस्ताँहमारा Sare jahan se achcha Hindustan humaraHum bulbulen hai iski, yah gulsita humara *****खुदीकोकरबुलन्दइतनाकिहरतकदीरसेपहलेखुदाबंदेसेखुदपूछेबतातेरीरजा* क्याहै*रजा - इच्छा, तमन्ना, ख्वाहिश Khudi ko kar buland itna ki har taqdir se pahleKhuda bande se poonche bata teri raza kya hai *****जफा* जोइश...
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  March 8, 2016, 9:31 am
साहिर लुधियानवी *****1वहअफसानाजिसेअंजामतक, लानानहोमुमकिनउसेएकखूबसूरतमोड़देकर, छोड़नाअच्छाWah afsana jise anjm tak, laana na ho mumkinUse ek khoobsurat mod dekar, chhodna achchha*****2अपनीतबाहियोंकामुझेकोईगमनहींतुमनेकिसीकेसाथमुहब्बतनिभातोदीApni tabahiyon ka mujhe koi gham nahinTumne kisi ke saath mohabbat nibha to di*****3गरजिंदगीमेंमिलगएफिरइत्तफाकसेपूछेंगेअप...
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  March 8, 2016, 9:24 am
फ़राज़ साहब 1-वो दुशमने-जाँ, जान से प्यारा भी कभी था..अब किससे कहें कोई हमारा भी कभी था....उतरा है रग-ओ-पै में तो दिल कट सा गया है...ये ज़ेहरे-जुदाई के गवारा भी कभी था...हर दोस्त जहाँ अबरे-गुरेज़ाँ की तरह है...ये शहर यही शहर हमारा भी कभी था....तित्ली के तअक़्क़ुब्में कोई फूल सा बच्चा.....
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  February 25, 2016, 5:45 pm
भीड़ से कट के न बैठा करो तन्हाई में बेख़्याली में कई शहर उजड़ जाते हैंनिदा फ़ाज़ली...
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  February 25, 2016, 5:09 pm
मेरी ख़ुशी के लम्हे इस कदर मुख्तसिर* हैं फ़राज़गुज़र जाते हैं मेरे मुस्कराने से पहले* मुख्तसिर = छोटे...
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  February 25, 2016, 4:04 pm
शक़ ये मुझपे भला हुआ कैसे,मुझको यूँ बेवफा कहा कैसे .इश्क ख़ुद भी नहीं समझ पाया,उसका मुझ पे चढ़ा नशा कैसे.जो रगों में बहा लहू बन कर,भूल जाता उसे बता कैसे .मेरी क़िस्मत लिखी अंधेरों ने,मुझमें सूरज ये फिर उगा कैसे .ग़म ने हँसते हुए कहा मुझसे ,मुझसे होगा भला जुदा कैसे.मुझको तूने नहीं ...
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  February 11, 2015, 2:48 pm
ज़ुल्फ़ आवारा गरेबाँ चाक घबराई नज़रइन दिनों ये है जहाँ में ज़िंदगानी का निज़ामचाँद तारे टूट कर दामन में मेरे आ गिरेमेने पूछा था सितारों से तेरे गम का मक़ामपड़ गई पैरहन-ए -सुबह-ए -चमन पर सलवटेंयाद आकर रह गई है बेखुदी की एक शामतेरी इस्मत हो के हो मेरे हुनर की चांदनीवक्त के बाजार म...
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  February 11, 2015, 2:45 pm
चला हवस के जहानों की सैर करता हुआमैं ख़ाली हाथ ख़ज़ानों की सैर करता हुआपुकारता है कोई डूबता हुआ सायालरज़ते आईना-ख़ानों की सैर करता हुआबहुत उदास लगा आज ज़र्द-रू महताबगली के बंद मकानों की सैर करता हुआमैं ख़ुद को अपनी हथेली पे ले के फिरता रहाख़तर के सुर्ख़ निशानों की सैर...
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  February 11, 2015, 2:41 pm
मेरी रातों की राहत, दिन के इत्मिनान ले जानातुम्हारे काम आ जायेगा, यह सामान ले जानातुम्हारे बाद क्या रखना अना से वास्ता कोई ?तुम अपने साथ मेरा उम्र भर का मान ले जानाशिकस्ता के कुछ रेज़े पड़े हैं फर्श पर, चुन लोअगर तुम जोड़ सको तो यह गुलदान ले जानाअंदर अल्मारिओं में चंद ऑर...
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  February 11, 2015, 2:39 pm
कोई चेहरा हुआ रोशन न उजागर आंखेंआईना देख रही थी मेरी पत्थर आंखेंले उडी वक़्त की आंधी जिन्हे अपने हमराहआज फिर ढूंढ रही है वही मंज़र आंखेंफूट निकली तो कई शहर-ए-तमन्ना डूबेएक क़तरे को तरसती हुई बंजर आंखेंउस को देखा है तो अब शौक़ का वो आलम हैअपने हलकों से निकल आई हैं बाहर आंखें...
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  December 29, 2014, 1:38 pm

दर्द मिन्नत-कशे-दवा न हुआमैं न अच्छा हुआ, बुरा न हुआजमा करते हो कयों रकीबों को ?इक तमाशा हुआ गिला न हुआहम कहां किस्मत आज़माने जाएंतू ही जब ख़ंजर-आज़मा न हुआकितने शरीं हैं तेरे लब कि रकीबगालियां खा के बे मज़ा न हुआहै ख़बर गरम उनके आने कीआज ही घर में बोरीया न हुआक्या वो नमरूद की ख़...
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  December 29, 2014, 1:37 pm
वहाँ की रोशनियों ने भी ज़ुल्म ढाए बहुतमैं उस गली में अकेला था और साए बहुत..किसी के सर पे कभी टूटकर गिरा ही नहींइस आसमाँ ने हवा में क़दम जमाए बहुत..हवा की रुख़ ही अचानक बदल गया वरनामहक के काफ़िले सहरा की सिम्त आए बहुत..ये क़ायनात है मेरी ही ख़ाक का ज़र्रामैं अपने दश्त से गुज...
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  November 20, 2014, 11:32 am
वो चाहता था कि कासा खरीद ले मेरा;मैं उसके ताज की कीमत लगा के लौट आया!...
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  November 14, 2014, 4:12 pm
काम सब गेरज़रुरी हैं, जो सब करते हैंऔर हम कुछ नहीं करते हैं, गजब करते हैंआप की नज़रों मैं, सूरज की हैं जितनी अजमतहम चरागों का भी, उतना ही अदब करते हैं..................राहत इन्दौरी...
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  November 14, 2014, 4:04 pm
गुलजारदिन कुछ ऐसे गुजारता है कोईजैसे एहसान उतारता है कोईआईना देख के तसल्ली हुईहम को इस घर में जानता है कोईपक गया है शजर पे फल शायदफिर से पत्थर उछालता है कोईफिर नजर में लहू के छींटे हैंतुम को शायद मुघालता है कोईदेर से गूँजतें हैं सन्नाटेजैसे हम को पुकारता है कोई ।...
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  November 14, 2014, 3:56 pm
यह कौन है सर-ए-साहिल कि डूबने वालेसमन्दरों की तहों से उछल के देखते हैंअभी तलक तो न कुंदन हुए न राख हुएहम अपनी आग में हर रोज़ जल के देखते हैंबहुत दिनों से नहीं है कुछ उसकी ख़ैर ख़बरचलो फ़राज़ को ऐ यार चल के देखते हैं...
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  November 14, 2014, 3:50 pm
जिनके सामने है दरिया ही दरिया, फिर भी वो लोग हैं प्यासेऔर नसीब में जिनके, लिखा नहीं क़तरा, बताओं वो कहाँ जाये .... सुरभि...
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  November 10, 2014, 5:18 pm
देखा गया हूँ मैं कभी सोचा गया हूँ मैंअपनी नज़र में आप तमाशा रहा हूँ मैंमुझसे मुझे निकाल के पत्थर बना दियाजब मैं नहीं रहा हूँ तो पूजा गया हूँ मैंमैं मौसमों के जाल में जकड़ा हुआ दरख़्तउगने के साथ-साथ बिखरता रहा हूँ मैंऊपर के चेहरे-मोहरे से धोखा न खाइएमेरी तलाश कीजिए, गुम ...
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  November 2, 2014, 11:24 pm
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