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धरती की गोद

जिन्दगी में परेशानी-बाधायें आती रहती है, उनका सामना करने के अनेक उपाय होते हैं, जैसे चोरी होने पर पुलिस व बीमारी में डाक्टर के पास जाकर अपनी समस्याओं से निपटा जा सकता है, परन्तु जब समस्याऐं अस्भाविक रूप से बार-बार होती रहती है और उनका समाधान उपरोक्त प्रकार से नहीं हो पा...
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Tag :navagrahas
  December 24, 2014, 9:34 am
  मौत की सजा मिलने के बाद, कुछ लिख-पढ़ पाना ही कठिनतम है। ''मौत''बड़े से बड़े रेपिस्टों, दरिन्दों तथा सब को ''मौत''बांटने वाले ''हत्यारों''तक को भी ''पागल''बना देती है, अधिकतर तो फाँसी से पहले ही मांस के लोथड़े (मृतप्राय:) हो जाते हैं, केवल उन्हें उठाकर फाँसी पर लटकाने भर की प्रक्...
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Tag :autobiography
  December 19, 2014, 9:53 am
वैराग्य शतकम् में भर्तृहरि आगे कहते हैं कि इस प्रकार का जीवन व्यर्थ है-‘‘निष्कलंक विद्या का अध्ययन नहीं किया, दान एवं भोग के लिये धन का उपार्जन भी नहीं किया, एकाग्रचित होकर प्रसन्न मन से माता-पिता की सेवा भी नहीं की, चंचल एवं विशाल नेत्रों वाली प्रियतमा का स्वप्न में भ...
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Tag :भर्तृहरि का वैराग्य शतकम्
  December 11, 2014, 2:09 pm
वैराग्य शतकम् में भर्तृहरि ने कारुण्य और निराकुलता के साथ संसार की नश्वरता और वैराग्य की आवश्यकता पर बल दिया है। संसार एक विचित्र पहेली है-कही वीणा का सुमधुर संगीत है, कही सुन्दर रमणीयाँ दिख पड़ती है तो कहीं कुष्ठ पीडि़त शरीरों के बहते घाव तो, कही प्रिय के खोने पर बिल...
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Tag :
  December 1, 2014, 12:12 pm
सूर्य ग्रह- ऊँ ह्नां ह्नीं ह्नौं सः सूर्याय नमः।। जप समय-सूर्य उदय     जप संख्या-7000       हवन समिधा-अर्क चन्द्र ग्रह- ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः।। जप समय-संध्या        जप संख्या-11000      हवन समिधा-पलाश मंगल ग्रह- ऊँ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।। जप समय-2 घटी श...
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Tag :
  November 22, 2014, 1:16 pm
महाकवि भर्तृहरि की कविताएं जितनी प्रसिद्ध हैं, उनका व्यक्तित्व उतना ही अज्ञात है, जनश्रुति के आधार पर वे महाराजा विक्रमादित्य के बड़े भ्राता थे। चीनी यात्री इत्सिंग ने भर्तृहरि नाम के लेखक की मृत्यु 654 ई0 में लिखी है, उन्होने यह भी लिखा है कि भर्तृहरि सन्यास जीवन के आ...
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Tag :
  November 7, 2014, 12:19 pm
नवग्रहों का मानव जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है, इस बात में अब दो मत नहीं हैं, क्योंकि  ग्रहों के प्रभाव को वैज्ञानिक भी स्वीकार करने लगे हैं। प्रस्तुत वैदिक मन्त्रों के जप निष्फल नहीं हो सकते, ऐसा मेरा मानना हैं! व्यक्ति में जिस ग्रह से संबंधित पीड़ा हो उसे उस ग्रह ...
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Tag :navagrahas
  October 30, 2014, 11:32 am
     छोटे-छोटे पद्य अथवा श्लोक लिखने में भारतीय सबसे आगे हैं। उनका रीति पर अधिकार, उनकी कल्पना की उड़ान, उनकी अनुभूति की गहराई और कोमलता-सभी अत्युत्कृष्ट हैं। जिन व्यक्तियो ने ऐसे पद्य लिखे हैं उनमें भर्तृहरि अग्रणी हैं। ये शब्द पाश्चात्य लेखक आर्थर डब्ल्यू राइडर ने ...
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  October 25, 2014, 1:07 pm
भारतीय संस्कृति एक महान संस्कृति है, इसमें न केवल जन्म से मृत्यु तक बल्कि दिन के प्रारम्भ से लेकर अंत तक की भी, महत्वपूर्ण एवं सुन्दर प्रार्थनाओं का समावेश किया गया है। मैं इनमें से दिन के प्रारम्भ की प्रार्थनों को आपके सम्मुख लेकर आया हूं, इस आशा के साथ कि ये प्रार्थ...
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  October 13, 2014, 10:30 am
 मेरे शहर की रामलीला आसपास के क्षेत्रों में प्रसिद्ध है। बात काफी पुरानी हैै। उस साल मैं रामलीला कमेटी में ''प्रेस सचिव''था। रामलीला के मन्चन की सारी कवरेज मैं ही विभिन्न समाचार पत्रों में भेजता था।     उस साल की रामलीला की दो विशेषताऐं थी-पहली मथुरा की रामलीला मंडली, द...
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  October 5, 2014, 3:00 am
सौरभ एक शिक्षक होने के साथ-साथ एक अच्छा लेखक भी था। ज्योतिष, वास्तु, तन्त्र-मन्त्र आदि उसके लेखन के प्रिय विषय थे। रात के दो बजे थे। सौरभ एक जन्मपत्री का अध्ययन कर रहा था। वह संसार की सुध-बुध खोये एक जातक की कुण्डली में खोया था। उसका सूक्ष्म शरीर सुदूर अंतरिक्ष मेें मंड...
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  September 24, 2014, 12:58 pm
बात कुछ महीनों पहले की है है, मैं सुबह लगभग 10 बजे निकटवर्ती कस्बे में सिथत अपने विधालय, स्कूटर से जा रहा था। आधा रास्ता तय हो चुका था। तभी मैंने दूर से देखा 3-4 बाइक सड़क के किनारे खड़ी हैं और सड़क के किनारे कुछ लोग जमा हैं। मैं भी जिज्ञासावश रूक गया और उन लोगों से पूछा-भाई...
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  September 8, 2014, 10:57 am
घाघ और भड्डरी में अवश्य ही में कोई दैवीय प्रतिभा थी। क्योंकि उनकी जितनी कहावतें हैं, प्रायः सभी अक्षरशः सत्य उतरती हैं। गांवों में तो इनकी कहावतें किसानों को कंठस्थ हैं। इनकी  कहावतों के अनेक संग्रह मिलते हैं. परन्तु इनमें पाठांतरों की भरमार है। इसी कारण इनकी बहुत-...
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  August 20, 2014, 3:50 pm
'भावना''कुतर्क'के सामने हार गईं थी, क्योंकि वो अपनी ‘ईश्वर'रूपी ‘भावना'को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पायीं थीं। 'कुतर्क'जोर-जोर से अटठ्हास कर रहे थे।कहां है तुम्हारा "ईश्वर"बुलाओ? नही तो शर्त के अनुसार अपनी चोटी-जनेऊ काट डालो!ये 'कलिकाल'का शास्तार्थ था। पूरा सभागार ठहाको...
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  August 1, 2014, 2:42 pm
पिकनिक मनाने आये कुछ छात्र नदी के बहाव में बह गये थे।  उनमें से कुछ छात्रों के शव मिल गये थे, बाकि छात्रों की खोज चल रही थी। किसी के जीवित रहने की संभावना न्यून थी। शवों को खोेजने के लिए अनेक टीमें लगायी गयी थीं। नदी का जल रोक दिया गया था ताकि शवों को खोजने में परेशानी न ह...
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  June 24, 2014, 12:29 pm
हाँ! जी खाना लग गया है! आ जाईये! रोहित की पत्नि ने रोहित को आवाज लगाई!रोहित आकर खाना खाने लगा।तभी उसके दो साल के बेटे ने पोट्टी (लेट्रीन) कर ली। रोहित को पता चलते ही ऊबकाई आने लगी और वह ऊबकाई लेता हुआ तेजी से वाॅशवेसन की ओर दौड़ पड़ा।रोहित की यह एक ‘‘मनोवैज्ञानिक‘‘ समस्या ...
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  June 16, 2014, 3:27 pm
अफवाहों से मनुष्य का पुराना रिश्ता रहा है, क्योंकि मनुष्य को कहानी-किस्से सुनने व घढ़ने में आनन्द आता है। संसार का इतिहास एक से एक बढ़कर अफवाहों से भरा पड़ा है, कहा जाता है कि अफवाहों के सिर-पैर नहीं होते परन्तु इनकी गति तीव्रतम होती है। मनोविज्ञान की भाषा में अफवाहो...
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  June 2, 2014, 12:44 pm
पाठकजनों!! "जिन्दगी"हमें "र्इश्वर"का दिया हुआ एक सुन्दर पुरस्कार है। हर इन्सान अपनी मानसिक स्थिति के अनुसार "जिन्दगी"को भिन्न-भिन्न रूपों में देखता है। मैंने अपने इस ब्लॉग में आपके ज्ञानार्थ  कवि-शायरों की 'कविताओं'व 'शेरों'का संकलन किया है, जो अपने-अपने अन्दाज में "जिन्...
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  May 26, 2014, 4:38 pm
वैवाहिक जीवन का पहला पड़ाव- नयी-नयी शादी हुर्इ है, "पतिदेव"प्रात: सेविंग कर रहे हैं तभी उनको ब्लैड लग जाता है। आहs की हल्की आवाज उनके मुंह से निकली, पत्नी किचिन से भागी हुर्इ आयी! 'डार्लिंग'ब्लैड लग गया! पति ने पत्नी से 'नार्मल'होते हुए कहा! (पत्नी जल्दी से 'डिटाल'लाती है।) अरे! ...
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  May 13, 2014, 1:16 pm
"ज्यादा खाये जल्द मरि जाय, सुखी रहे जो थोड़ा खाय। रहे निरोगी जो कम खाये, बिगरे काम न जो गम खाये।"ऐसी अनेक कहावतों से हमें जिन्दगी के विभिन्न पहलुओं का सटीक मार्गदर्शन मिलता है। घर के बुजुर्ग ऐसी अनेक कहावतों से, समय-समय पर हमारा मार्गदर्शन करते रहते हैं। कान्वेन्ट विद...
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Tag :
  April 25, 2014, 4:15 pm
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