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Blog: अनकहे अल्फाज़

Blogger: sarita panthi
जब भी तुमको पास में अपने पाते हैंचाहत कर हम सौ सौ दिये जलाते हैंकौन डगर है जिस पर हमको चलना हैकौन से रस्ते तुम तक लेकर जाते ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   5:31am 21 Feb 2019
Blogger: sarita panthi
नही मरता प्रेम मेनोपॉज से दिल धडकता है सांसे सुलगती हैं चेहरे पर अनगिनत रंग.. अब भी बिखर जाते हैं आईना देखकर मुस्कुराना अच्छा लगता है फूल, खुशबु, भौरे, पतंगे, सब कुछ ही तो अच्छे लगते हैं.. बारिश की बूंदें तन को अब भी तरंगित करती हैं  हवाएं मन को गुदगुदा जाती हैं मेनोपॉज के ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   2:09am 17 Feb 2019
Blogger: sarita panthi
सुन्दर सुन्दर नार करके साज श्रृंगार फेसबुक पे छा जाते नित चित्रों के हार नित चित्रों के हार देखदमकते सबके मुहार इसकी भूल भुलैया में छूटा घर संसार छुटा घर संसार लुट गया कारोबार फेसबुक के क़दमों में डाल दिए हथियार लत, कुलत, महालतसबको दे लतियाएइसकी लत ऐसे लगे पानी ना मांग... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   1:50pm 27 Dec 2014
Blogger: sarita panthi
गणेश जी ने व्यथा सुनाई माँ पार्वती के आगे इतनी सर्दी पड़ रही माँ कैसे कोई  नींद से जागे भक्तजन जगा देते है घंटी बजा बजा कर लड्डुओं का लोभ दिखलाते थाल सजा सजा कर ठन्डे ठन्डे पानी से रोज पुजारी नहलाता कितनी भी सर्दी लग जाए छींक कभी ना मैं पाताकपडे तुमने कम पहनाये कुछ तो ब्... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   1:06pm 27 Dec 2014
Blogger: sarita panthi
तोड़ के बंधन बह गया ये मनज्यों बह जाता बाढ़ का पानीहाथ पसारे रह गयी अंखियाँदिल ने हठ करने की ठानी तुम आये तो हो गये जिन्दा दिल के सब अहसास कुंवारे दिल ने किया है धोखा ऐसा जा बैठा वो पास तुम्हारे मीठा मीठा स्पंदन देतातेरी नज़र का हर एक झोंकाबहुत लगाई बाड़े हमने हर रस्ता आने ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   3:55pm 2 Dec 2014
Blogger: sarita panthi
स्त्री को चाह होने लगी स्त्री की पुरुष कर रहा पुरुष से प्यार कैसे तो ये संभव है और कैसे हो जाता इकरार||स्वभाविक सी अभिव्यक्ति है या सामाजिक वर्जनाओं को तिरस्कृति हैईश्वर का तो नही रहा होगा ऐसा कोई अभिप्राय प्यार के नये नये रूप देते दिल हिलाए||स्त्री और पुरुष का अनमोल अन... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   12:35pm 26 Nov 2014
Blogger: sarita panthi
पानी हमको पीना है मिनरल या फिर फ़िल्टर साफ़ पानी सुरक्षित पानीखुद का बर्तन खुद का पानी||पानी बड़ा या प्यास ?विषय है ये बेहद ही ख़ास प्यास है एक स्वाभाविक सी क्रियाप्यास सभी को जगती है||कभी मिल जाता पानी तो कभी सूखे से तपती है प्यास है तन के प्यास है मन की प्यास आँखों की प्यास क... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   12:32pm 26 Nov 2014
Blogger: sarita panthi
पैर रहें धरती पर अड़ेहाथों में सूरज चाँद पड़ेखुशियाँ बरसाए हर इक पलदामन जितना भी छोटा पड़ेतन कंचन मन साफ रहेआत्मा तुम्हार... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   3:02pm 29 Oct 2014
Blogger: sarita panthi
खुद ही रूठे और खुद ही मना लेते है दिल जब रोता है तो खुद ही हंसा लेते है सुनी हो जाती है जब कभी आँखेंआंसुओं से सजा लेते है भर जाता है जब दिल दर्द से मुस्कराहट होठों पे सजा लेते है अपने गम का हम खुद ही जी भरके मज़ा लेते है ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   2:02am 10 Oct 2014
Blogger: sarita panthi
आओ पूजा करें देवी की रोज नये रूप में सराबोर कर दें देवी को चन्दन और धुप में||  खुश होकर दिया वरदान तो होगा हर एक सपना पूरासच जीवन हो जाएगा कुछ ना रहेगा फिर अधुरा ||बेटी मरने के लिए और बहु है जलने के लिएफिर भी चाहिए कन्या नवरात्र पूजन के लिए|| जग को तो बहुत लिया ठग आओ थोडा भगवन... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   1:59am 10 Oct 2014
Blogger: sarita panthi
आज फिर एक नये सफ़र की रवानी है जिन्दगी बहते दरिया का पानी है ||ठहरती हुई जिन्दगी नेएक बार फिर से गति पकड़ी है||हर नया मोड़ एक नई मंजिल दिखा रहा है यादों में दफ़न सपने सामने बैठकर मुस्करा रहे है|| डरती हूँ नए सफ़र में जाने कोबांकी है जिन्दगी में अभी बहुत कुछ पाने को ||एक सफ़र ही तो है ... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   1:56am 10 Oct 2014
Blogger: sarita panthi
घर का दर्द दुखड़े अपने सुना रहा है मुझसे मेरा घरक्यों मुझमें यूँ जान बसायीजाना था जो अगर||हमसे आकर टकराती थीखुशियों की अठखेलीतन्हा तन्हा हुआ हर कोनारोती दीवार अकेली ||हर कमरा मुरझाया है हर कोना कोना उदास है साल ख़तम होने को आया अब तो उनकी आस है ||तुम जैसे को झेल रहे थे हँसते,... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   1:54am 10 Oct 2014
Blogger: sarita panthi
शाख से टूटे पत्ते सा हो गया हूँ मैंउड़ा ले जाती है तेरी हवा जिधर चाहे मुझेखाली बर्तन सा हो गया है ये दिल भी मेराभाप बनकर उड़ जाते है अहसास सारेखुद ही दिल के छाले फोड़ते है और खुद ही सी लेते हैजिन्दा जो रहना है गर तो कुछ तो करना होगावाह वाह तो सब करते है गहराई को कौन समझ पाया है... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   1:25am 10 Oct 2014
Blogger: sarita panthi
मेरा भारत महानदे रहे है मंत्री देश को अपना अपना उत्तराधिकारी||राजनीति है ये याविरासत की खेती बाड़ी?देशभक्त मंत्री रहतेहमेशा मस्ती और मौज में किस नेता का बेटा कहो ?गया आजतक फौज में एक विरासत को बामुश्किलफेंका है हमने उखाड  के बांकी आ गये है देखोकैसे झंडा गाड के||जान ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   12:26pm 18 Sep 2014
Blogger: sarita panthi
ये मन भागता सा ये मन भागता सा हाथो से फिसलता दूर जा खड़ा होता है|| कुछ कहता है कुछ सुनता है अपने ही सपने बुनता है ||रोक ना सकती सीमा कोई हवाओं के संग बहता है ||भटका देता है राह मेरीभ्रमित दिशाएँ कर देता है ||सूनी सूनी दिल की राहों मेंआशाओं के दीप सजाता है ||देख उजाला दबे पाँव ना ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   12:02pm 18 Sep 2014
Blogger: sarita panthi
रसोईघर का झगडासोते सोते रात में आवाजे दी कुछ सुनाई|| कान लगाकर सुना तो अजब ही दिया दिखाई||रसोई घर में चल था था बड़ा ही भारी मसअला||कौन सही कौन गलत नही हो रहा था फैसला|| बर्तनों में छिड़ी हुई थी आपस में इक जंग|| नये नवेले बर्तन आगे पुराने पीछे तंग||मिक्सी ने शान से था अपना आसन जमाय... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   11:57am 18 Sep 2014
Blogger: sarita panthi
हाँ में किन्नर हूँ ||हँसते हो तुम सब मुझको देखनाम रखते हो मेरे अनेक||सुन्दर सुन्दर उसकी रचना मेरी ना किसी ने की कल्पना|| ईश्वर ने किया एक नया प्रयोग स्त्री पुरुष का किया दुरूपयोग|| जाने क्या उसके जी में आया मुझ जैसा एक पात्र बनाया|| तुम क्या जानो मेरी व्यथा कैसे में ये जीवन ज... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   2:11am 18 Sep 2014
Blogger: sarita panthi
फिर से आई है बारी धरती पर वापस जाने की|| पुत्र कर रहे है तैयारी पितरों संग त्यौहार मनाने की||अफरा तफरी मची हुई है जाना भी तो जरुरी है||पितृ पक्ष में मिलन है होता फिर तो लम्बी दुरी है ||कुछ आ जाते ख़ुशी ख़ुशी कुछ अनमने से आये है|| सुख ही सुख तो ना था जीवनदुखों के घाव भी खाए है ||जीते ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   10:38am 11 Sep 2014
Blogger: sarita panthi
आजकल के बच्चे थोड़े नादान थोड़े अनजान, थोड़े सँभलते थोड़े फिसलते समय की भट्टी में जलते, संस्कारों से कुंदन से दमकते|| अच्छी पढाई का बोझ लिए घर से निकलते दुनियादारी की आंधी में खुद से संभलते||घर का सुख नही माँ का लाड नहीबचपन की मस्ती नही, जीवन का आनंद नही||यूँ ही तो नही तकदीर अपन... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   12:11pm 28 Aug 2014
Blogger: sarita panthi
जब भी हमने काला चश्मा लगायासीने को ४ इंच चौड़ा ही पाया ||ना जाने क्या कनेक्शन था दोनों मेंचश्मा लगाते ही सीना फूल जाता था||सीना फूलते ही शरीर हरकत में आ जाता५ फिट के हम खुद को ६ फिट के समझने लगते ||क्रांति ही आ जाती शरीर मेंएक तो वैसे ही हमारी मोटी नाक ||फूलकर और मोटी हो जातीतो ... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   11:31am 22 Aug 2014
Blogger: sarita panthi
कलम थोडा सा जो हम चलाने लगे दोस्त सभी हमारे हमें भुलाने लगे||वो जो सिखाते थे हमें मायने गज़ल केउन्ही को मनाने में हमें ज़माने लगे ||पदचिन्हों का पीछा करते रहे हम पाने में सदियों और जमाने लगे ||कलम थोडा सा जो हम चलाने लगे दोस्त सभी हमारे हमें भुलाने लगे||कलम जो लगी झूम कर चलने प... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   10:07am 22 Aug 2014
Blogger: sarita panthi
चिरैया एक सोयी थी,मीठी मीठी नींद में, देख रही थी सपने, देश एक अनजाने के ||मुड़ी तुड़ी सी थी चिरैया, घेरा था घना सुरक्षा का,आँखें अभी खुली भी ना थी, बस महसूस होता था उसे, माँ की ममता की गर्माहट ||जिस से जीवन बना था उसका,भूल में थी भोली चिरैया, जीवन ना था सुरक्षित उसका, जा पंहुचा दान... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   2:09pm 20 Aug 2014
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