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ठिकाना

आज 25 दिसबंर कोदिल्ली के सबसे षानदार चर्च के सामनेघूम रहे है छोटे-छोटे ईसा मसीहकिसी सैंटा की खोज में नहींग्राहको की खोज में.......सैंटा की टोपी बेच रहे हैं वेमखमली सुर्ख लाल गोल टोपीबिलकुल उनके चेहरों की तरहदीदी, भैया, आंटी-अंकलसबसे इसरार कर रहे हैंहाथ में पकड़ी हुई टोपिय...
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Tag :टोपी
  December 25, 2014, 7:45 pm
‘अपने देश बंग्लादेश  में, मेरे अपने पश्चिम बंगाल में, मैं एक निषिद्ध नाम हूं, एक विधि बहिष्कृत औरत, एक वर्जित किताब!’ इस एक वाक्य में लेखिका ने अपना दर्द बयां कर दिया है। एक स्वीकृत हार से उपजी हताशा  की बेकायली में उनके अंर्तमन से भारत देष के बारे में यह जो शब्द निकलते...
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  October 18, 2014, 9:52 pm
बगैर सपनों की नींद नहीं होती, बगैर नींद के सपने नहीं होते। कोई कितना भी दावा करे, कि उसकी  नींद मेंसपने नहीं होते। अगर नींद है तो सपने भी निहित है। ..........................................यह इसी तरहसच है जैसे  जीवन है,तो सपने है,सपने है तो जीवन है।। ...
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Tag :नींद
  October 4, 2014, 11:24 pm
हाल ही में मेरी एक परिचिता अपने लिए कुछ नये कपड़े खरीद कर ले आयी। शाम को जब उसके पति ने कपड़े देखे तो उसकी डांट लगा दी। कारण था कि पितृपक्ष आरम्भ हो चुके है अतः खरीदारी नहीं करनी चाहिए। अब चूकिं कपड़े खरीदकर आ चुके थे और जरूरी भी था इसलिए इस समस्या का हल निकाला गया कि रस्मी...
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Tag :श्राद्ध
  September 13, 2014, 11:39 pm
एक कॉमिक्स पात्र 'नागराज'का मॉडल रूप  कंप्यूटर युग में बच्चों से किताबें पढने की उम्मीद कोई नहीं करता है। सभी यह शिकायत करते हुए मिल जाते है कि बच्चे किताबें नहीं पढ़ते हैं। बच्चों में किताबें पढ़ने की रूचि नहीं हैं पर मुझे लगता है कि हम लोग ही बच्चों को किताबों तक नही...
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Tag :दिल्ली पुस्तक मेला
  September 6, 2014, 11:05 pm
पिजड़े के अंदर कैद थी एक बुलबुल!उसकी हर फड़फड़ाहट के साथउसकी हर बेचैनी के साथउसकी हर बेताबी के साथउसकी हर कोशिश के बादटूट कर रह जाते थे उसके मजबूत परपिजड़े के अंदर।पिजड़े के अंदर कैद थी एक बुलबुल!पर पिजड़े के अंदर! नहीं कैद थी बुलबुल की उड़ने की आकांक्षा,उड़...
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Tag :बुलबुल
  August 31, 2014, 9:59 pm
एक दिनउदासीबिन बुलाएमेहमान की तरह आ धमकती है।एक मुस्कान के साथ‘हैलो‘ बोलबगल में बैठ जाती हैहम डरते हैं, आंख चुराते हैंवह हमारा हाल-चाल पूछती है।औपचारिकतावशहम भीचाय-पानी पूछ ही लेते है।वह बेशर्म की तरहघुल-मिल कर बातकरती जाती है...करती ही जाती है...।पता नहीं उसेइतना कुछ...
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Tag :कविता
  August 3, 2014, 2:52 pm
वह बहुत बीमार चल रही हैंहालत काफी गंभीर हैं!उन्होंने बताया था-तुम बात कर लेना,तुम्हें याद करती हैं।शब्दों के चुनाव मे फंसी मैंकैसे करूंगी अपनी भावनाओं को व्यक्त!!मोबाइल पर उनका नंबर डायल करने से पहलेबहुत से शब्दों को  मन ही मनरटकर मैंने कहा-हैलो!एक खनकती सी आवाज कानो...
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Tag :बीमार औरत
  July 26, 2014, 9:30 pm
उनकी  गजलें और हमारे जज्बात आपस में बातें करते हैं। इतनी नजदीकियां  शायद हम किसी से ख्वाबों में सोचा करते हैं। उनकी मखमली आवाज के दरमियां जब अल्फाज मौसिकी का दामन पकड़ती है, तब हम खुदाओं की जन्नतों से बड़ी जन्नत की सैर करते हैं। हम बात कर रहे है महरूम पर हमारे दिलों म...
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Tag :मेहदी हसन
  July 18, 2014, 9:50 pm
जिंदगी के हर बिखरे हर्फ को सजाती हूँदरख्तों के बीच से आती धूप को सम्हालती हूँदरवाजें की ओट से रास्ता निहारती हूँआँखों में आये खारे पानी को छुपाती हूँ मैं !!...
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Tag :जिंदगी
  July 14, 2014, 12:58 am
'किसी से भीख मत मांगो, सरकार से भी नहीं मांगो। नौकरी क्यों करना चाहते हो, अपना काम करो। अपने शहर में तुम्हें दिक्कत आ सकती है क्योंकि सब तुम्हें जानते हैं। दूसरे एरिया में काम करो। वहां तुम्हारी जाति कोई नहीं जानता।’ यह बातें सविताबेन कोलसावाला या कोयलावाली के नाम से ग...
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Tag :मिलिंद खांडेकर
  July 3, 2014, 9:58 pm
पता नहीं क्यों एक जनवादी कवि के बारे में लिखने से पहले देश की राजनीति और लोकतंत्र के बारे में लिखना जरूरी लग रहा हैं। हाल ही में चुनाव संपंन हुये और भारी बहुमत से नरेंद्र मोदी की सरकार बन गई। विकास का वादा लेकर विकास करने के लिए जनता ने नरेंद्र दामोदरदास मोदी को अपना सब ...
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Tag :जनवादी कवि
  June 24, 2014, 11:21 pm
नाम मोहित बताया उसने। शरमाते लजाते उसके चेहरे पर मेरे सवालों से बचने की जल्दबाजी दिख रही थी।। मैंने पूछा कि कहां से सीखा? कोई जवाब न मिला। पर मेरा दूसरा प्रश्न  तैयार था। ‘कहां से आए हो?’ मैंने पूछा।  ‘गांध्ी हिन्दुस्तानी से।’ अपना समान समेटते हुये उसने बताया। और अप...
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  May 18, 2014, 8:24 pm
केन नदी और कवि  केदारनाथ अग्रवाल, बांदा शहर की दो बड़ी पहचान है। आज  केदारनाथ जी का जन्मदिवस है । केदार जी की जन्म शताब्दी के दौरान जब बांदा जाना हुआ तब मुझे केदार जी के घर जाने का अवसर मिला । जिसकी कुछ तस्वीरें यहाँ  दे रही हु। इस समय कवि की कुटिया जीर्ण-शीर्ण अवस्था म...
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  April 2, 2014, 12:21 am
रात के ग्यारह बज चुके है, रात अपनी रवानी में होनी चाहिए, लेकिन नहीं सारी नीरवता गरजते-बरसते बादल खत्म कर रहे हैं। ठंडी हवा के साथ पानी खिड़की-दरवाजों से होकर कमरे के अंदर आने की कोशिश में.... सिरहन पैदा करने वाली ठंडी हवा कमरे से कहीं अधिक मेरे मन के अंदर प्रवेश कर रही है! मा...
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Tag :बरसात
  March 12, 2014, 1:51 am
पिछले दिनों वार्षिक ब्लॉग मीट-2014 यानि "Annual Bloggers Meet, 2014" में जाना हुआ, जहां एक बहुत ही अनोखा और उत्सावर्द्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। अनोखा इसलिए था कि इस बार हम ‘ब्लॉग मीट’ में हम ब्लॉग या किसी वैकल्पिक मीडिया के बारे में चर्चा करने के लिए इकटठे नहीं हुए थे ज...
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  February 23, 2014, 11:47 pm
प्रेम जानने के लिएखरीद लाईप्रेम विशेषांकप्रेम के सभी महाविशेषांकप्रेम में पकी कविताएंप्रेम पर लिखी सभी कहानियों केहर शब्द कोपढ़ा मैंनेगुना मैंनेचखा मैंने----------------फिर भीपैदा नहीं  कर पाईकोई प्रेम विज्ञान-----------------पर आजएक बच्चे कीमासूम मुस्कान नेफूलों से सिंचे र...
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Tag :प्रेम
  February 14, 2014, 4:46 pm
कहने को आज बीत गयाएक पूरा साल... 2013कामोवेश......इस साल भी थेबारह महीनेवही जनवरी, फरवरी ...नवंबर, दिसबंरसात-सात दिन मिलाकर हफ्तेऔर हफ्ते मिलकर महीनाकोई तीस दिन का,कोई इक्तीस दिन का।हर साल की तरहइस साल भी थे तीन सौ पैसठ दिनअंतर दिखा तो बसकलैंडर मेंपिछले वर्ष जब था सोमवार...
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Tag :कलैंडर
  December 31, 2013, 11:21 pm
आईटीओ के पुल सेगुजरते हुए देखा मैंनेएक आदमी को।हाथ में दो थैलेतैयार था पुल से नीचेयमुना नदी में फेंकने कोउस ‘पवित्र कूड़े’ कोजिसे अपने घर मेंअपनी धर्मिक मान्यताएंनिभाने के बादझाड़-पोछकरपानी में विर्सजन हेतुतत्पर था पूरी धर्मनिष्ठा सेफेकने के लिए इसपुल से।000सर,...
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Tag :धर्मिक
  September 23, 2013, 11:10 pm
इन दस महीनों मेँकभी भी मैंनेतुम्हारा वास्तविक नाम जानने कीकोशिश नहीं कीतुम कहाँ की रहने वाली होइसमे भी मेरी कोई दिलचस्पी नहीं बनीतुम्हारे भाई बहन कितने है ?यह भी जानने की इच्छाकभी नहीं पनपीमन मेँ अगर कोई इच्छा थीतो, बस यहीकि इंसाफ होतुम्हें इंसाफ मिले,भरपूर इंसाफउस ...
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Tag :दामनी
  September 14, 2013, 12:27 am
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