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Blog: Journey

Blogger: PAWAN KUMAR
उत्तम-प्रवेश--------------खुली आँखों से स्वप्न देखना, तंद्रा से किंचित बाहर आनाबस यूँ नेत्र खोलें, मन में कितनी संभावनाऐं हो सकती।  शिकायतें कई तुमसे ओ जिंदगी, न खिलती, न रूप दिखाती कहाँ छुपी बैठी रूबरू न हो, तड़प रहा तुममें रहकर भी।  जल में रहकर भी प्यासा, यह तो&n... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   11:56am 31 May 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
विपुल परिचय------------------प्रतिदिन अनेकानेक घटित सर्वत्र, नर एक समुद्र-बूंद से भी अल्प हर पल अति महद निर्मित, कायनात के कितने क्षुद्र-कण हैं हम। कुछ पढ़ा-देखा, पृथ्वी व सूर्य की आयु बताई जाती ५ खरब वर्ष  ब्रह्मांड-वय को बिगबैंग से १५ खरब वर्ष हुआ हैं मानते लगभग... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   4:30am 15 May 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
स्व-उत्थान ---------------स्व-उत्थान लब्ध किस श्रेणी तक, नर मन का चरम विकास क्या अनुपम मार्ग अनुभवों का, स्वतः स्फूर्त परम-उल्लास। भरण-पोषणार्थ तन नित्य-दिवस, माँगता आवश्यक कार्य  ऊर्जा-बल प्राप्त अवयवों से, जग-कार्य संपादन में सहयोग। उससे मन-रक्त संचारित रहता, उचित क... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   6:27pm 26 Apr 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
कवि-उदय --------------कैसे नर-उपजित कलाकार-कवि रूप में, प्रायः तो सामान्य ही देव-दानव वही, एक स्वीकार दूजे से भीत हो कोशिश दूरी की। यह क्या है जो अंतः पिंजर-पाशित, छटपटाता मुक्ति हेतु सतत मुक्ति स्व-घोषित सीमाऐं लाँघन से, कितनी दूर तक दृष्टि संभव? दूरियों से डरे, किनारे ख... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   12:48am 16 Apr 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
नर-प्रगति ------------कर्मठों को व्याज न जँचते, स्वानुरूप काम की वस्तु कर ही लेते अन्वेषण प्रखर-ऋतु से भी न अति प्रभावित, कुछ उपाय ढूँढ़ लेते, निरंतरता न भंग। बाह्य-दृश्य अति-प्रिय, चहुँ ओर घने श्वेत कुहरे की चादर से नभ-भू आवरित  स्पष्ट दृष्टि तो कुछ दूर तक ही, तथापि प... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   1:19pm 15 Mar 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
कालिदास परिचय ----------------------चलो कालिदास विषय में कुछ चिंतन, स्रोत कुछ पूर्वलिखित से ही संभवउनका समकक्ष तो न कि देखा सुना हो, हाँ अध्ययन से कुछ ज्ञानार्जन। मेरे द्वारा कालिदास परिचय जैसे किसी महानर का मूढ़ द्वारा व्याख्यान या अंधों समक्ष गज खड़ा कर दिया, उनसे विवेचना हे... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   6:29pm 9 Feb 2020 #परिचय
Blogger: PAWAN KUMAR
प्रजा खुशहाल ------------------एक गहन चिंतन वर्ग-उद्भव का, दमित भावना कुछ कर सी गई घर समाज में अन्यों प्रति अविश्वास दर्शित, सत्य में वे परस्पर-सशंकित। व्यक्तिगत स्तर पर नर विकास मननता, कुछ श्रम कर अग्र भी वर्धित सामाजिक तो न एकसम वृद्धि, अनेक विकास के निचले पायदान पर।&nb... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   6:50am 28 Jan 2020 #चाहत
Blogger: PAWAN KUMAR
खुशहाल प्रजा ------------------एक गहन चिंतन वर्ग-उद्भव का, दमित भावना कुछ कर सी गई घर समाज में अन्यों प्रति अविश्वास दर्शित, सत्य में वे परस्पर-सशंकित। व्यक्तिगत स्तर पर नर विकास मननता, कुछ श्रम कर अग्र भी वर्धित सामाजिक तो न एकसम वृद्धि, अनेक विकास के निचले पायदान पर।&nb... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   6:15pm 27 Jan 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
खुशहाल प्रजा ------------------एक गहन चिंतन वर्ग-उद्भव का, दमित भावना कुछ कर सी गई घर समाज में अन्यों प्रति अविश्वास दर्शित, सत्य में वे परस्पर-सशंकित। व्यक्तिगत स्तर पर नर विकास मननता, कुछ श्रम कर अग्र भी वर्धित सामाजिक तो न एकसम वृद्धि, अनेक विकास के निचले पायदान पर।&nb... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   6:15pm 27 Jan 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
जीवन-कोष्टक----------------एक वृहद दृश्यमान समक्ष हो, मन के बंद कपाट सके पूर्ण खुल अनावश्यक बाधाओं से न ऊर्जा-क्षय, निपुणता अंततः जीवन-लक्ष्य। व्यवसायी-मन में अनेक गुत्थी स्थित, एक-२ कर कुरेदती रहती सब  मन तो सदैव चलायमान, पर आवश्यक तो न सब बाधा हों विजित। ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   7:33pm 4 Jan 2020 #काव्य
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जीवन-कोष्टक----------------एक वृहद दृश्यमान समक्ष हो, मन के बंद कपाट सके पूर्ण खुल अनावश्यक बाधाओं से न ऊर्जा-क्षय, निपुणता अंततः जीवन-लक्ष्य। व्यवसायी-मन में अनेक गुत्थी स्थित, एक-२ कर कुरेदती रहती सब  मन तो सदैव चलायमान, पर आवश्यक तो न सब बाधा हों विजित। ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   7:33pm 4 Jan 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
जीवन-कोष्टक----------------एक वृहद दृश्यमान समक्ष हो, मन के बंद कपाट सके पूर्ण खुल अनावश्यक बाधाओं से न ऊर्जा-क्षय, निपुणता अंततः जीवन-लक्ष्य। व्यवसायी-मन में अनेक गुत्थी स्थित, एक-२ कर कुरेदती रहती सब  मन तो सदैव चलायमान, पर आवश्यक तो न सब बाधा हों विजित। ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   7:33pm 4 Jan 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
 महद तंतु-------------अवकाश दिन संध्या काल, कुछ मनन प्रयत्न से सुविचार आए आविर्भूत हो मन-देह, सर्वत्र विस्तृत दृष्टिकोण से सुमंगल होए। बहु श्रेष्ठ-मनसा नर जग-आगमित, समय निकाल निर्मल चिंतन  उन कृत्यों समक्ष मैं वामन, अत्यंत क्षुद्र-सतही सा ही निरूपण। कोई तुलना&n... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   5:02pm 7 Dec 2019 #आत्म-अभिव्यक्ति
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 महद तंतु-------------अवकाश दिन संध्या काल, कुछ मनन प्रयत्न से सुविचार आए आविर्भूत हो मन-देह, सर्वत्र विस्तृत दृष्टिकोण से सुमंगल होए। बहु श्रेष्ठ-मनसा नर जग-आगमित, समय निकाल निर्मल चिंतन  उन कृत्यों समक्ष मैं वामन, अत्यंत क्षुद्र-सतही सा ही निरूपण। कोई तुलना&n... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   5:02pm 7 Dec 2019 #आत्म-अभिव्यक्ति
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 महद तंतु-------------अवकाश दिन संध्या काल, कुछ मनन प्रयत्न से सुविचार आए आविर्भूत हो मन-देह, सर्वत्र विस्तृत दृष्टिकोण से सुमंगल होए। बहु श्रेष्ठ-मनसा नर जग-आगमित, समय निकाल निर्मल चिंतन  उन कृत्यों समक्ष मैं वामन, अत्यंत क्षुद्र-सतही सा ही निरूपण। कोई तुलना&n... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   5:02pm 7 Dec 2019 #आत्म-अभिव्यक्ति
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संभव उदय--------------कितना ऊर्ध्व शिशु उदय संभव, इस मनुज के अल्प वय-काल चेष्टा से ही संपूर्ण कार्य परिणत, अनुरूप परिस्थिति मात्र सहाय। देश-काल में एक समय अनेक जन्म, आवागमन का ताँता सतत सबका तो निज समय व्यतीत, पर क्या उच्च स्तर से भी संपर्क ?  मानसिक-भौतिक की उच्च श्र... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   1:03pm 21 Nov 2019 #आत्म-चिंतन
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संभव उदय--------------कितना ऊर्ध्व शिशु उदय संभव, इस मनुज के अल्प वय-काल चेष्टा से ही संपूर्ण कार्य परिणत, अनुरूप परिस्थिति मात्र सहाय। देश-काल में एक समय अनेक जन्म, आवागमन का ताँता सतत सबका तो निज समय व्यतीत, पर क्या उच्च स्तर से भी संपर्क ?  मानसिक-भौतिक की उच्च श्र... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   1:03pm 21 Nov 2019 #आत्म-चिंतन
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संभव उदय--------------कितना ऊर्ध्व शिशु उदय संभव, इस मनुज के अल्प वय-काल चेष्टा से ही संपूर्ण कार्य परिणत, अनुरूप परिस्थिति मात्र सहाय। देश-काल में एक समय अनेक जन्म, आवागमन का ताँता सतत सबका तो निज समय व्यतीत, पर क्या उच्च स्तर से भी संपर्क ?  मानसिक-भौतिक की उच्च श्र... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   1:03pm 21 Nov 2019 #आत्म-चिंतन
Blogger: PAWAN KUMAR
ऊर्ध्व-जिजीविषा ------------------अजीब सी हैं ये सुबहें भी, ख़ामोशी से बैठने ही देती न कुछ पढ़ो, प्रेरक लोगों में बाँटो, बैठो जैसा हो दो लिख। यह निज संग सिलसिला पाने-बाँटने का, कुछ करने का अन्य साधु उपयोग थे संभव, पर अभी वैसा जैसा भी बने।बकौल रोबिन शर्मा प्रातः ५ बजे व... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   2:13pm 4 Nov 2019 #आत्म-चिंतन
Blogger: PAWAN KUMAR
जननी-कार्य-------------- प्रकृति से एक मूर्त मिली, सब अंग-ज्ञानेन्द्रियाँ, बुद्धि से युक्त खिलौना तो है सुनिर्मित, पर अज्ञात कैसे हो रहा है प्रयोगित। विधाता-बुद्धि है सशक्त, एक अच्छा कलाकार इतनी सामग्री अपनी ओर से न कसर, सब चर-चराचर उसी की कलाकृति। माना पूर्ण-निर्मा... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   12:22pm 19 Oct 2019 #आत्म-चिंतन
Blogger: PAWAN KUMAR
कलम-यात्रा --------------चिंतन-पूर्व भी चिंतन, एकजुट देह-आत्मा समर्पित महद-लक्ष्य समय-ऊर्जा भुक्त, पर यथाशीघ्र मंजिल-प्राप्ति हेतु हो तत्पर।  मनन-विषय अहम प्रारंभ-नियम, पर यावत न तिष्ठ कुछ न निकसएक चित्तसार, सुखासन-प्रकाश, देह-मन सहज, एकांत-निरुद्ध। अहं-त्याग, वृहद-... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   1:07am 30 Sep 2019 #आत्म-चिंतन
Blogger: PAWAN KUMAR
यह जग मेरा घर------------------हर पहलू का महद प्रयोजन, ऐसे ही तो जिंदगी में न कहीं बसते नव-व्यक्तित्वों से परिचय, नया परिवेश शनै निज-अंश बन जाता। कुछ लोग जैसे हमारे हेतु ही बने, मिलते ही माना प्राकृतिक मिलन जैसे अपना ही कुछ बिछुड़ा सा रूप, मात्र मिलन की प्रतीक्षा-चिर। ... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   6:10pm 15 Sep 2019 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
नवीन-भाव ---------------एक नवीन-भाव पल की आवश्यकता, स्थापन्न कागज-पटल लेखनी माध्यम, मन-विचार डायरी में, बहिर्गमन से विस्तृत। चलो आज नवीनता-वार्ता करते, माना सनातन को पुनरुक्त वे ही विचार पुनः-२ उदित, चाहे शब्द-लेखन में कुछ भिन्न। नव-साहचर्य से मन-उदय, अनुभव खोले प्र... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   1:03pm 2 Sep 2019 #आत्म-अभिव्यक्ति
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नवीन-भाव ---------------एक नवीन-भाव पल की आवश्यकता, स्थापन्न कागज-पटल लेखनी माध्यम, मन-विचार डायरी में, बहिर्गमन से विस्तृत। चलो आज नवीनता-वार्ता करते, माना सनातन को पुनरुक्त वे ही विचार पुनः-२ उदित, चाहे शब्द-लेखन में कुछ भिन्न। नव-साहचर्य से मन-उदय, अनुभव खोले प्र... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   1:03pm 2 Sep 2019 #आत्म-अभिव्यक्ति
Blogger: PAWAN KUMAR
 युग-द्रष्टा------------एक युग-द्रष्टा निमित्त अनुशासन जरूरी, बहु-आयाम साक्षात्कार सर्व मनुजता एकसूत्रीकरण दुरह, सुधैर्य-श्रम व दृढ़ता ही सखा। उच्च-लक्ष्यी ऊर्ध्व-पश्यी, स्वप्न संभावनाओं का मूर्तरूप-परिवर्तन न आत्म-मुग्धता अपितु स्व-स्थित, ज्ञात गंतव्य निम्नता ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   6:27pm 15 Aug 2019 #आत्म-चिंतन
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