POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: Journey

Blogger: PAWAN KUMAR
यह जग मेरा घर------------------हर पहलू का महद प्रयोजन, ऐसे ही तो जिंदगी में न कहीं बसते नव-व्यक्तित्वों से परिचय, नया परिवेश शनै निज-अंश बन जाता। कुछ लोग जैसे हमारे हेतु ही बने, मिलते ही माना प्राकृतिक मिलन जैसे अपना ही कुछ बिछुड़ा सा रूप, मात्र मिलन की प्रतीक्षा-चिर। ... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   6:10pm 15 Sep 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
नवीन-भाव ---------------एक नवीन-भाव पल की आवश्यकता, स्थापन्न कागज-पटल लेखनी माध्यम, मन-विचार डायरी में, बहिर्गमन से विस्तृत। चलो आज नवीनता-वार्ता करते, माना सनातन को पुनरुक्त वे ही विचार पुनः-२ उदित, चाहे शब्द-लेखन में कुछ भिन्न। नव-साहचर्य से मन-उदय, अनुभव खोले प्र... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   1:03pm 2 Sep 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
नवीन-भाव ---------------एक नवीन-भाव पल की आवश्यकता, स्थापन्न कागज-पटल लेखनी माध्यम, मन-विचार डायरी में, बहिर्गमन से विस्तृत। चलो आज नवीनता-वार्ता करते, माना सनातन को पुनरुक्त वे ही विचार पुनः-२ उदित, चाहे शब्द-लेखन में कुछ भिन्न। नव-साहचर्य से मन-उदय, अनुभव खोले प्र... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   1:03pm 2 Sep 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
 युग-द्रष्टा------------एक युग-द्रष्टा निमित्त अनुशासन जरूरी, बहु-आयाम साक्षात्कार सर्व मनुजता एकसूत्रीकरण दुरह, सुधैर्य-श्रम व दृढ़ता ही सखा। उच्च-लक्ष्यी ऊर्ध्व-पश्यी, स्वप्न संभावनाओं का मूर्तरूप-परिवर्तन न आत्म-मुग्धता अपितु स्व-स्थित, ज्ञात गंतव्य निम्नता ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   6:27pm 15 Aug 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
काव्य-उदयन ----------------क्या होंगे अग्रिम पल व गाथा जो इस कलम से फलित मन तो शून्य है पर लेखनी लेकर आती है भाग्य निज। कैसे निर्मित हो वह काव्य-इमारत, मन तो अभी अजान मात्र कलम व कागज हाथ में, शेष सामग्री का है अभाव।फिर कुछ यूहीं तो चलता जाता और भर जाते हैं कई पृष्ठ निरुद... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   4:13pm 10 Aug 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
काव्य-उदयन ----------------क्या होंगे अग्रिम पल व गाथा जो इस कलम से फलित मन तो शून्य है पर लेखनी लेकर आती है भाग्य निज। कैसे निर्मित हो वह काव्य-इमारत, मन तो अभी अजान मात्र कलम व कागज हाथ में, शेष सामग्री का है अभाव।फिर कुछ यूहीं तो चलता जाता और भर जाते हैं कई पृष्ठ निरुद... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   4:13pm 10 Aug 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
एकाकीपन --------------विशाल विश्व नर अकेला, बाह्य-शरण भी अल्प-अवधि तकतन्हाईयों में खुद ही डूबना, बहुदा प्रश्न कैसे काटें समय। कदाचित बोरियत-सीमा तक यह नितांत एकाकी पाता स्वयंकिसके पास जाकर व्यथा बाँटें, अपने में संसार जी रहें सब। अंतः-स्थिति सबकी एक सी, कुछ कह ल... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   3:03pm 21 Jul 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
एकाकीपन --------------विशाल विश्व नर अकेला, बाह्य-शरण भी अल्प-अवधि तकतन्हाईयों में खुद ही डूबना, बहुदा प्रश्न कैसे काटें समय। कदाचित बोरियत-सीमा तक यह नितांत एकाकी पाता स्वयंकिसके पास जाकर व्यथा बाँटें, अपने में संसार जी रहें सब। अंतः-स्थिति सबकी एक सी, कुछ कह ल... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   3:03pm 21 Jul 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
आत्म-निरूपण ------------------क्या है आत्म-निरूपण जीव का, कालजयी सम संवाद सर्वांग-रोम हर्षोन्मादित हर विधा से सफल साक्षात्कार। पूर्ण-विकास मानस-पटल का, कैसे लघु जीवन में संभवसीमाऐं विजित हों, अश्वमेध-यज्ञ तुरंग सा स्वछंद विचरण। कोई सुबली पकड़ लेगा साहस से, प्रतिकार रा... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   7:01pm 7 Jul 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
वहम-भग्न---------अद्भुतमन-प्रणाली, उत्तंगचेष्टा, चित्तिवृहत्कायाकास्वरूपज्ञानसक्षमसंभाव्य, सर्वब्रह्मांड-कणसमाहित, तबक्यूँअल्प-विकास।मन-विचारक्याक्षणोंमें, नरकासुंदररूपहोस्वयंमेंप्रादुर्भावनिम्नसेउच्चसभीइसीचेष्टामें, कैसेनिखरेरूप, होगर्वासक्त।सभीतोभरपू... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   5:45pm 29 Jun 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद– १३ यहकथासुनानेकेबाद, मुनिजाबालिनेएकतिरस्कार-पूर्णस्मितसंगअपनेपुत्र हरितवअन्यतपस्वियोंसेकहा : 'तुमसबदेखचुकेहोंकिकैसेइसकथामेंहमसबकोऔरहमारेउरोंको इतनादीर्घबाँधनेकीशक्तिहै।औरयहकाम-पीड़ितजीवहैजोअपनेदोषकारणस्वर्ग-पतितहुआ, औरपृथ्वीपरश... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   5:37pm 16 Jun 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
स्वतंत्र-विचरण-----------------स्वतंत्र मन-विचरण की, साइबेरिया हंस से दीर्घ डयन सी  सर्व-दिशा आत्मसात की, विद्युत्तरंगें सर्वत्र विकिरण की। मन-जिजीविषा उत्तंग करने की, सागर सम उछाल भरने की नदी सम लहरने-मटकने की, हिरणी सम कुलाँचे भरने की। कोयल सम नाद करने की, गायक सम राग ... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   11:29am 2 Jun 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद– १०इसपरिशेषकथाकेअति-कठिनश्रमहेतुमैंसृष्टि-गुरु (अभिभावक) गिरिसुतापार्वतीवपरमेश्वरदोनोंकीवन्दनाकरताहूँ, जिनकीदोअर्ध-देहोंकीएकवपु रचना बनतेहुएनतोसन्धिनभेदकोलक्षितहोतीहै। मैंविश्वस्रजानारायणकोनमनकरताहूँ, जिनकेद्वारानर्सिंह-रूपहर्षसेआ... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   9:10am 26 May 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ९ (भाग -२)-----------------------------"उसकेकुछदिवसबीतजानेपर, मेघनादपत्रलेखासहितआयाऔरउसकोअंतः-कक्षअंदरलाया; औरजगहदूरसेहीनमस्कारकरचुकी, चंद्रापीड़नेस्मितसेप्रीतिप्रकाशितकी, औरउठकरअतिशयदर्शितआदरसहितपत्रलेखाकोआलिंगन-बद्धकरलिया; क्योंकियद्यपिस्वभावसेप्रिय... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   11:38am 11 May 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
 बाप ------दिखता रूखा-सूखा, सख़्त-डाँटता, कदाचित सुस्त-अनावश्यक भीकभी भोला, विश्व-व्यवहारिकता से परे, अबल-असहाय सा कभी। कभी अन्य उसपर हँसते भी दिखते, उड़ाते लोग सादगी का व्यंग कभी किसी दबंग की खुशामद करता, कभी शेखी भी कमतर पर। कभी अर्धांगिनी से झगड़ता, कभी सं... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   5:52pm 4 May 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ९ (भाग -१)----------------------------"गंधर्व-पार्थिवोंकोविदाकहकर, पूर्णहर्ष, उत्सुकतावविस्मय-पूरितउसनेअपनीसेना-मध्यअपनेकक्षमेंप्रवेशकिया; औरशेषराजसदोंकोप्रणामकरके, उसनेवैशम्पायनवपत्रलेखाकेसंगअधिकतरदिवसबिताया, कहतेहुए, 'महाश्वेतानेऐसाकहा, ऐसाकादम्बरीने, ऐसाम... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   12:00pm 20 Apr 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
दौर्बल्य-निवारण -------------------कैसे सिखाऐं-बढ़ाऐं, अधिकार अहसास, सीधा खड़ा होना सीखभाई लोग निपट मूढ़-दमित, कैसे हों दीप्त ओर चरण प्रसारित। प्राणी-स्वरूप किस साँचे में ढ़ला, परिवेश-मिट्टी में पल-बढ़ घड़ा जीने के तरीके, कहना-सुनना, व्यवहार करना वहीं से सीखा। परिष्कृतों क... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   2:32pm 14 Apr 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
दौबल्य-निवारण -------------------कैसे सिखाऐं-बढ़ाऐं, अधिकार अहसास, सीधा खड़ा होना सीखभाई लोग निपट मूढ़-दमित, कैसे हों दीप्त ओर चरण प्रसारित। प्राणी-स्वरूप किस साँचे में ढ़ला, परिवेश-मिट्टी में पल-बढ़ घड़ा जीने के तरीके, कहना-सुनना, व्यवहार करना वहीं से सीखा। परिष्कृतों को न... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   2:32pm 14 Apr 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
चिरंतन विवेचन-------------------एक स्वाभाविक सा प्रश्न आज मेरे मन में आया  शनै-२ आयु बढ़ रही, जीवन यूँ बीता जा रहा।   क्या जीवन मात्र है प्रातः-अपराह्न-निशा ही मध्यहम जीते इन क्षणों में ,जैसे यही है शाश्वत सत्य। कार्यालय में काम, सहकर्मियों से संवाद-विवाद  कुछ कहना, स... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   6:35pm 6 Apr 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ८ (भाग -२)----------------------------"उसकीविदाईपरचन्द्रापीड़किशोरियोंद्वाराअनुसरितहुआचलागया, जोउसकेविनोदहेतुकादम्बरीकेआदेशपरप्रतिहारीद्वाराभेजीगईथी, वीणावबाँसुरी, गायन-निपुण, पाँसेवचित्रकारीकीक्रीड़क, अनुभवीचित्रकारवश्लाघ्यकाव्यकेगवैयी; उसेपूर्व-परिचितकेयूर... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   11:39am 30 Mar 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
Journey: लेखन-संस्मरण: लेखन-संस्मरण  -------------------- लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता  कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी ...... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   5:09pm 22 Mar 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
Journey: लेखन-संस्मरण: लेखन-संस्मरण  -------------------- लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता  कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी ...... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   5:09pm 22 Mar 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
Journey: लेखन-संस्मरण: लेखन-संस्मरण  -------------------- लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता  कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी ...... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   5:09pm 22 Mar 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
लेखन-संस्मरण --------------------लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी को न पता। यह भी मंदता का शिकार होता, स्वतः तो न सक्रिय, करना पड़ता मस्तिष्क को क्रियाशीलता में जोड़ना, एकांत में ही कुछ बन पड़ता। बस हिम्मत करके ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   5:08pm 22 Mar 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
लेखन-संस्मरण --------------------लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी को न पता। यह भी मंदता का शिकार होता, स्वतः तो न सक्रिय, करना पड़ता मस्तिष्क को क्रियाशीलता में जोड़ना, एकांत में ही कुछ बन पड़ता। बस हिम्मत करके ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   5:08pm 22 Mar 2019
[ Prev Page ] [ Next Page ]


Members Login

Email ID:
Password:
        New User? SIGN UP
  Forget Password? Click here!
Share:
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3911) कुल पोस्ट (191547)