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कुछ नई, कुछ पुरानी और कुछ दिल की बातें ……… : View Blog Posts
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कुछ नई, कुछ पुरानी और कुछ दिल की बातें ………

अर्थ निरर्थक हो जाते हैं।यदि तुम इसको ना समझो तो।।शब्द निरर्थक हो जाते हैं।यदि तुम इसको ना जानो तो।।धर्म निरर्थक हो जाता है।यदि तुम इसको ना मानो तो।समय निरर्थक हो जाता है।यदि तुम इसको ना आंको तो।।सीख निरर्थक हो जाती है।यदि तुम इसको ना धारो तो।।...
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  July 29, 2014, 3:46 pm
किस दौर में बैठे हैं हम।न तुमको पता है न हमको पता है।समय का मुसाफिर कहाँ जा रहा है।न तुमको पता है न हमको पता है।छिड़ी है बहस किस तरफ जा रहे हैं।न तुमको पता है न हमको पता है।समय की ये धारा कहाँ जा रही है।न तुमको पता है न हमको पता है।कहाँ से चले थे कहाँ आ गए अब।न तुमको पता है न ...
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  July 29, 2014, 3:42 pm
"थूकिये भाइयों और बहनों को सादर समर्पित"थूक थूक थूक थूकथूक थूक थूक थूकइधर थूक उधर थूकयहाँ थूक वहां थूकजहाँ दिल करे और  जहाँ मुंह भरेवहीँ पर तू थूकथूक थूक थूक थूकथूक थूक थूक थूकये कोनेये सडकेंये सरकारी बिल्डिंगये सुंदर से गमलेतुम्हारे लिए हैंजहाँ दिल करे और  जहाँ म...
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  July 29, 2014, 3:27 pm
हे परम शिवम हे नाथरूप हे जगन्नाथ हे महाबली हे सत्यरूप हे परम शिवम हे रुद्ररूप हे महाकाल हे भद्ररूप हे अभयरूप हे परम शिवम हे प्रेमरूप हे शान्तरूप हे ज्ञानरूप हे शक्तिरूप हे परम शिवम हे करुणरूप हे क्षमारूप हे दयारूप हे मातृरूप हे बि...
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  May 31, 2014, 11:15 am
अहंकार की थी पराकाष्ठाउन्मत्त थे बोल शासन बना था कुशासन  मेढ़ खाती थी खेत रखवाला बना था सेंधमार सीमाएं थी असुरक्षित शत्रु हो रहे थे प्रबल सर ऊंचे हो रहे थे बागिओं के। प्रजा थी परेशां एक आंधी सी आई छंटा तब कुहाषा काली बदली से निकला आशाओं का स...
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  May 31, 2014, 11:14 am
यात्रा वृतांत - हास्य कथा वृतांतआज कल चुनावी राजनीति की गहमा गहमी चल रही है, धड़ा धड़ राजनीतिक विषयों पे आर्टिकल पे आर्टिकल छप रहे हैं , ले तेरे की, दे तेरे की , धत तेरे की का सा वातावरण बना हुआ है। तलवारें अपने प्रतिद्वंदियों पर खिंची हुई हैं, ये अलग बात है कि भांजते भांज...
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  April 17, 2014, 5:06 pm
कुछ समय पहले जब नमो ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की थी तभी ये रचना दिमाग में आई थी, चारों तरफ (ब्लॉग्स पे ) बड़ा गंभीर चिंतन का माहौल है तो मैंने सोचा इस माहौल को थोड़ा नरम किया जाए और फिर थोड़ा दिमाग पे जोर मार के ये चुहलबाजी लिखी मारी। लीजिये प्रस्तुत है:चाय पे चर्चाख...
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  April 10, 2014, 12:40 pm
पुलिस की मार से….दोधारी तलवार से…. रेलवे स्टेशन के पाकिट मार से.... बचते रहो.… घोड़े की अगाडी से.… गधे की पिछाड़ी से.… नज़र की कटारी से….. बचते रहो.... कोसी (नदी) के प्रकोप से.... संतो (ऋषियों) के कोप से.... बोफोर्स तोप से…. बचते रहो.… नशेड़ी की गाड़ी से.… कंटीली झाडी से…. तिब्बत की पहाड़ी से ...
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  March 24, 2014, 10:54 am
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