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मेरे अर्थ

हमारा समाज दरअसल एक बदलाव के दौर से गुज़र रहा है। कोई भी समाज गुज़रता है। हर दौर में गुज़रता है। दरअसल इतिहास कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो गुज़र चुकी है। हम अपनी-अपनी ज़िंदगियों को जोड़-जोड़ कर जो एक समाज बनाते हैं उसकी अपनी एक ज़िंदगी होती है। और इस समाज की ज़िंदगी की घटनाओं को ही हम इति...
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  March 1, 2017, 10:17 am
एक बार फिर उसने बाइक की किक पर ताकत आज़माई.  लेकिन एक बार फिर बाइक ने स्टार्ट होने से मना कर दिया. चिपचिपी उमस तिस पर हेलमेट जिसे वो उतार भी नहीं सकता था. वो उस लम्हे को कोस रहा था जब इस मोहल्ले का रुख़ करने का ख़याल आया. यादें उमस मुक्त होतीं हैं और शायद इसलिए अच्छी भी लगती है...
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  February 18, 2017, 12:13 pm
Last year I read 43 books. Below are those books. Starred are recommended ones. The target for 2017 is of 60 books. Lets see how the year goes. Here goes the list:1Ba-ByeKrishn Bihari2MadhushalaBachchan*3Mere Manch Ki SargamPiyush Mishra4Gunahon Ka DevtaDharmveer Bharti5Kitne PakistanKamaleshwar*6Kathghare Mein LoktantraArundhati Roy*7Kai Chand The Sar-e-AasmanShamsurrahman Farooqi8Ek Sahityik Ke PrempatraPushpa Bharti9Death Under the DeodarsRuskin Bond10Relativity: The Special and the General TheoryAlbert Einstien11Loser Kahin KaPankan Dubey12The Glass CastleJeanette Walls*13MetamorphosisFranz Kafka14Khushwantnama (Mere Jeevan ke Sabak)Khushwant Singh15CarolPatricia Highsmith16Hum Tum aur w...
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  January 1, 2017, 1:48 pm
सितंबर में 'The Home and the World'के बाद दफ़्तर के काम में दिन कुछ यूं मसरूफ़ हुए कि पढ़ने का वक़्त निकालना मुश्किल होने लगा. फिर इधर फ़ैमिली को भी सिंगापुर शिफ्ट करने की जुगत थी जिसने लम्हों की खुरचन भी समेट डाली. दो महीने बाद दिसंबर में चार किताबों का लक्ष्य अंततः रखा:1. बा-बॉय (कृष्ण बिहा...
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  December 24, 2016, 4:09 pm
सितंबर महीने की पहली किताब थी - रबिन्द्रनाथ टैगोर की लिखी 'द होम एंड द वर्ल्ड'। यूं तो टैगोर का नाम सभी ने सुना है। गीतांजली के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला था। उनका लिखा गीत 'जन गण मन'हमारा राष्ट्रगान बना और उन्हीं का लिखा एक और गीत 'आमार शोनार बांग्ला'पाकिस्तान के विभ...
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  September 12, 2016, 10:47 am
अगस्त महीने की आखिरी किताब थी जीनेट वॉल्स की लिखी 'द ग्लास कैसल'। जीनेट वॉल्स एक अमरीकी जर्नलिस्ट हैं और ये उनका लिखा संस्मरण है। एक किताब जो उनके और उनके पिता के रिश्ते के बीच कुछ तलाश करती हुई सीधे दिल में उतरती है और कुछ हद तक उसे तोड़ भी देती है।इंसान एक परिस्थितिजन्य ...
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  September 4, 2016, 1:07 pm
अगस्त के लिए चार किताबों का लक्ष्य था और ये किताबें सोचीं थीं:1. Metamorphosis (फ्रैंज काफ्का)2. गुनाहों का देवता (धर्मवीर भारती)3. मेरे मंच की सरगम (पीयूष मिश्रा)4. Home and the World (रबिन्द्रनाथ टैगोर)इनमें से 'मेरे मंच की सरगम'और 'Home and the World'की delivery ही नहीं हो पाई। इसलिए इन दो किताबों की जगह ली ट्विं...
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  August 28, 2016, 5:24 pm
अगस्त महीने की तीसरी किताब थी - गुनाहों का देवता। किताब के लेखक हैं धर्मवीर भारती। बहुत कुछ सुना था इस किताब के बारे में। इस किताब को मेरे जान-पहचान के बहुत लोगों ने recommend भी किया था। ये हिन्दी रोमैंटिक उपन्यासों में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय उपन्यासों में एक है। इसके कई भाषा...
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  August 21, 2016, 9:16 am
अगस्त महीने की दूसरी किताब थी - "मिसेज़ फनीबोन्स"। किताब की लेखिका हैं ट्विंकल खन्ना। ट्विंकल खन्ना, जिन्हें ज़्यादातर लोग कई रूप में जानते हैं - राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया की बेटी, अक्षय कुमार की बीवी और एक फ्लॉप एक्ट्रेस। लेकिन इनके अलावा इनकी एक शख्सियत और है। ये बात ...
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  August 12, 2016, 6:17 pm
किसी भी देश के द्वारा चुनी गई आर्थिक नीतियाँ केवल वहाँ के नागरिकों की सामाजिक और आर्थिक ज़िंदगियों पर ही असर नहीं डालतीं बल्कि उन ज़िंदगियों की पारिवारिक और नैतिक बुनियादें भी तय करतीं हैं। ग्रेगोर साम्सा नाम का एक आदमी एक दिन सुबह-सुबह नींद से जागता है और अपने आप को एक ...
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  August 9, 2016, 8:57 am
पाकिस्तान क्या है? क्या सिर्फ एक देश जिसने भारत से अलग हो कर अपना वजूद तलाशने की कोशिश की? या फिर पाकिस्तान एक सोच है? एक सोच जिसमें कि एक ही देश के लोग अपने बीच एक सेकटेरियन मानसिकता को पहले उपजाते हैं, फिर उसको सींचते हैं और फिर हाथों में हंसिये और कुदाल ले कर उसी फसल को क...
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  July 31, 2016, 12:47 pm
खुशवंत सिंह की एक उपन्यास 'ट्रेन टु पाकिस्तान'मैंने अपने कॉलेज के समय पढ़ी थी। वो उपन्यास आज भी मेरे पसंदीदा उपन्यासों में एक है। हाल ही में इंटरनेट सर्फ करते हुए मैं उनकी लिखी खुशवंतनामा तक पहुंच गया। यह किताब आत्मकथा नहीं है, निबंध भी नहीं हैं, न ही कोई दर्शन, लेख या चुट...
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  July 16, 2016, 9:24 am
अभी हाल में राजदीप सरदेसाई की किताब '2014 दि इलेक्शन दैट चेंज्ड इंडिया'पढ़ी। एक ही शब्द है लाजवाब। 2014 में हुए इलैक्शन का इससे अच्छा ब्यौरा दे पाना मुश्किल है। किताब में 10 चैप्टर हैं और इनके अलावा एक भूमिका और एक एपिलॉग भी है। राजदीप सरदेसाई मीडिया में एक जाना पहचाना नाम हैं...
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  July 13, 2016, 8:46 pm
अभी हाल ही में जो क़िताब ख़तम की वो है मनु शर्मा की लिखी 'नारद की भविष्यवाणी'। मनु शर्मा ने कृष्ण की कहानी को आत्मकथात्मक रूप में लिखा है। ये क़िताब 'कृष्ण की आत्मकथा'सिरीज़ का पहला भाग है। लिखने का तरीका मौलिक है। कृष्ण की कहानी टीवी सीरियलों में कई बार देख चुके हैं। लेकिन ए...
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  June 29, 2016, 4:54 am
धड़! धड़! धड़! धड़!ज़ोर से दरवाज़ा पटकने की आवाज़ हुई. 102 डिग्री बुखार में तपता नीलेश अकेला भीतर कंबल में घुसा लेटा था. रात के कोई साढ़े बारह बज रहे होंगे. बत्ती भी गुल थी. बाहर मॉनसून की झड़ी लगी थी. तीन दिन से बादल थमने का नाम नहीं लेते थे. रूममेट भी घर गया था.धड़! धड़! धड़! धड़!"कौन है?""पंकज! पी...
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  June 4, 2016, 9:24 pm
ऐ अक्स मेरे! क्यूँ मुझसे मुलाक़ात नहीं करते?रहते हो अनमने से, कोई बात नहीं करते!वक़्त तो ला खड़ा करता है हमें दोराहे पे लेकिनइंतिख़ाब*हमारी राहों का, क्या हालात नहीं करते?हर फैसला मुताहिद* होगा ज़िंदगी में, ये उम्मीद ही बेमानी हैहै सुबूत कोई, मुखौटे सारे तब भी यूं फसादा...
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  April 3, 2016, 7:08 am
"दवा टाइम पर लेती है कि नहीं?", बुधिया ने डपटकर पूछा. "ले तो रही हूँ.", मुंह से रुमाल हटाते हुए भीमा बोली."तो फिर ये खांसी बहनचोद बंद काहे नहीं होती?", कहते हुए बुधिया दरवाज़े से बाहर बीडी फूंकने चला गया.भीमा चुप रह गयी. क्या कहती? खांसी नहीं टीबी है! जैसे बुधिया जानता न हो! बुधिया ...
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  March 31, 2016, 12:45 pm
"तू जूस लेगी?", जसप्रीत ने जूस काउंटर से खड़े-खड़े चिल्ला कर पूछा."नहीं रे. आज रूम पे ही ठूस ठूस के खा लिया था", तनूजा अपनी कुर्सी से उठकर जसप्रीत की तरफ बढ़ती हुई बोली. "नेहा की मम्मी आयीं है न. सुबह से उठ गयीं. पराठे-शराठे. आलू की सब्जी... दही... तो उसके चक्कर में अपना भी दांव लग गया.""ने...
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  March 30, 2016, 1:39 pm
नाव बनाने वाले पश्चिम में समुन्दर किनारे ही व्यापार करते, जबकि लकड़ी के अन्य कारोबारी जंगल के पास ही अपना काम करते थे। पत्थर के कारोबारी भी समन्दर किनारे ही बैठते। झामी को पानी में नीचे ले जाने के लिए उसके चारों ओर पत्थर बांधने पड़ते थे। सारे पत्थर एक वजन के होते ताकि झ...
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  November 23, 2015, 6:39 am
नीपल समुदाय का पूरा ताना-बाना नीपों ही से जुड़ा था। हम सागर की गहराइयों में नीप तलाशते, उन्हें तराशते, उन पर तरह तरह की नक्काशियाँ उकेरते, उन्हें रंगते। उनसे मालाएँ, गहने, मूर्तियाँ, खिलौने, गोटियाँ बनाते। उन्हें पीस कर उनसे रंगोली बनाते। रंगोली के लिए लेकिन खंडित नीपो...
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  November 22, 2015, 1:32 pm
नियतिक्याहै? क्यायेमहत्त्वपूर्णहै? क्योंकिजबआपनियतिकीबातकरतेहैंतोकिरदारगौणहोजातेहैं।लेकिनवेकिरदारहीहैंजोअपनी-अपनीज़िंदगियोंकेसिरोंकोजोड़करनियतिकोगढ़तेहैं।शब्दोंसेइतरकहानीक्याहै? अगरनुक्ते  औरलकीरें, मात्राओं, हलन्तोंऔरअक्षरोंकीशक्लेंअख़्तियारना...
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  November 19, 2015, 3:23 am
सीधी सही पर बड़ी पेचीदा होती हैं कभी कच्ची तो कभी गाढ़ी होती हैं लकीरें वो जो कच्ची होती हैं खिंचती हैं काली सी स्लेट पर और फिर जब स्लेट को छोड़ दो रख दो कहीं बस यूं ही ख़ुद-ब-ख़ुद धुंधला जाती हैं लकीरें कुछ लकीरें जब उकरतीं हैं रेत के अखाड़े &n...
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  February 21, 2015, 10:31 pm
मेरे सामने वाली दिल्ली में मेरे देश का PM रहता है अफ़सोस ये है कि वो हरदम बस गुजरात गुजरात रटता है MRS Srisena भी चली गयी बराक भी आकर चला गया जब सूट की controversy बढ़ी  सारा उद्योग जगत भी उमड़ गया अब आया जा के समझ मेरी जो दिखता है वो बिकता है तीस्ता के पीछे पुलिस पड़ी ...
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  February 20, 2015, 8:31 pm
खुद की ही इमारत में वो क़ैद होकर रह गयाझाँकता अब किस तरफबस कसमसाकर रह गयातराशा था उसने कभीमुहब्बतों से इक निशांआखिरी लम्हों में वो खुदनफ़रतों से ढह गयापिंजरे में है उसके लेकिनखिड़की भी एक छोटी सीअपनी क़बर से अपनी क़बर कोदेखता वो बह गयादेखता वो बेड़ियों कोकभी जहांआरा कोम...
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  February 17, 2015, 10:03 pm
दिल का हाल कहे दिलवाला सीधी सी बात न मिर्च मसाला कह के रहेगा कहने वाला दिल का हाल कहे दिलवाला दोनों हाथों से सब्सिडी दे दी ऐसी तैसी सारे बजट की खाली हुआ जब सारा खज़ाना भागना पड़ गया कर के बहाना भाग के जब लेकिन वापस आया कांग्रेस ने अब की ठेंगा दिखाया डेमोक...
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  February 8, 2015, 12:43 pm
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