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हालात-ए-बयाँ/Halat-E-Bayaan : View Blog Posts
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हालात-ए-बयाँ/Halat-E-Bayaan

रामबुधन जी के तीन बच्चे हुआ करते थे। वैसे हैं तो अब भी, मगर नहीं के बराबर। अब वो क्यों नहीं के बराबर हैं, ये जानते हैं :बात उस समय की जब रामबुधन जी का बड़ा बेटा 14 साल का, मझला बेटा 12 और छोटा क़रीब 9 साल का था। ये उम्र ऐसी है, जिसमें हर माँ-बाप को अपने बच्चों पे निगरानी रखनी पड़ती ह...
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  August 24, 2014, 1:09 pm
एक था 'रामबुधन्वा', बेरोज़गार गाँव का नौजवान। एक दिन उसके गाँव में आ गए नेता जी। नेता जी के ठाठ-बाठ देखकर रामबुधन्वा भौंचक्का हो गया। नेता जी भी एक दम से चमचमाती बी.ऍम.डब्लू कार से उतरे, एक दम सफ़ेद चक्का-चक लिबास में, हाथ में दो ठो मुआइल लिए, लेफ़्ट और राइट में दो सुन्दर कन्य...
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  August 22, 2014, 1:36 pm
एक सपना जो पिछले कई वर्षों से मन में पल रहा था, वो अब जाके अपने सफ़ल होने के कगार पर है। जी हाँ ! मेरे सभी स्नेही मित्रों, शुभचिंतकों और गुरुजनों, ''पुस्तकाभारती प्रकाशन''के नाम से प्रकाशन के क्षेत्र में क़दम रख रहा हूँ।''पुस्तकाभारती प्रकाशन''का पंजीकरण प्रमाण पत्र आज ही ...
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  August 17, 2014, 12:25 pm
हो गए हैं सरसठ साल दिन दिन बढ़ती आबादी है जश्ने आज़ादी जारी हैजश्ने आज़ादी जारी हैभूख से कितने ही लाचार हैं गली गली में फिरता भिखारी है जश्ने आज़ादी जारी हैजश्ने आज़ादी जारी हैपढ़ लिख के घूमे बिना कामफ़ैली यहाँ बेरोज़गारी हैजश्ने आज़ादी जारी हैजश्ने आज़ादी जारी हैमाँ क...
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  August 14, 2014, 3:02 pm
इतना बता दे उनको, जाके तू ऐ पवनउनके बिना व्याकुल, अब ये मेरा जीवनहरपल ही आस में बैठी, भूखी और प्यासीवो छोड़ मुझे क्यूँ दूर, बनके जैसे सन्यासीप्रीत में उनके जोगन बन फिरती वन में हूँ उनके बिन सुना सुना है, ये मेरा घर आँगनइतना बता दे उनको, जाके तू ऐ पवनउनके बिना व्याकुल, अब ये...
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  August 13, 2014, 10:30 am
धीर-गम्भीर समुद्र में ये भीषण चक्रवात क्यों, अडिग-अटल पर्वतों पे ये भू-स्खलन क्यों,वर्षों से भार ढ़ो रही है ये वसुंधरा और अब भू-कम्पन क्यों?देवी-देवताओं को भी दौलत के तराजू में तौलने की ये होड़ क्यों, आदि-अनंत काल से चली आ रही अनेक परम्पराओं का दिन-प्रत...
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  August 8, 2014, 1:30 pm
बहुत गुमसुम हो ऐसे तुम कभी रहते नहीं थे कभी हमसे ख़फ़ा होके कहीं टिकते नहीं थेजरा सी बात क्या कह दी कि रिश्ता तोड़ बैठेमेरी आवाज़ सुने जो बिन रहा करते नहीं थेसफ़र के बीच में यूँ साथ क्यूँ छोड़ा है तुमनेकहीं जो बिन हमारे साथ के चलते नहीं थेअदावत ये है कैसी जो निभा तुम अब रहे हो...
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  July 30, 2014, 4:04 pm
ख़ुदा की बंदगी करनी तो रोते को हँसाना होगाहमें हर एक दिन को ईद के जैसा मनाना होगाजहाँ में ख़ार ही बोई हुई है हर तरफ ही अब तोहटा के इन सभी को अब गुलाबों को खिलाना होगा गले मिलके यहाँ दस्तूर को न अब निभाएँ हम सबदिलों से नफ़रतों के बीज को पहले मिटाना होगान कोई धर्म कोई जात कोई ...
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  July 29, 2014, 3:54 pm
तुम्हारे होने के एहसास नेवर्षों ज़िंदा मुझे रख्खा है तुम्हारे खोने के एहसास नेजिस्म से जाँ जुदा रख्खा हैदूर जो एक पल को भीतुम कभी न रह पाते थेबिन हमारे साथ कहीं तुम कभी न जा पाते थेकैसे रह पाते हो अबइक बार बतला जाओकैसे मुस्कुराते हो अब इक बार दिखला जाओवीरान सी ज़िन...
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  July 27, 2014, 1:35 pm
मौन जो थी, वो मुखर हो, रही दिल मेंआज फिर तुम्हीं, विचर हो रही दिल मेंभूल बैठे थे जिसे, एक मुद्दत सेयाद उसकी, कैसे घर, हो रही दिल मेंचैन ऐसे में, कहाँ को, मिले हमको आग के जैसे, असर हो, रही दिल मेंबात जो उसकी, भली सी, कभी लगतीआज वो ज़हरे, असर हो रही दिल मेंया ख़ुदाया, इश्क़ तूने, बनाया...
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  June 23, 2014, 9:18 pm
ज़िन्दगी में उसूल उन उसूलों पे चलना सबके बस की बात कहाँ। ये मेरा सौभाग्य है ऐसे इंसान को मैंने देखा यहाँ। न कोई साज न कोई सज्जा सादा जीवन जी कर। ख़ुशियों की बारिश की ग़म के आँसू पी पी कर।मेरे मन की अब यही हसरत आप सा मैं भी बन पाऊँ।हाँ पिताजी आपके रा...
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  June 16, 2014, 9:11 pm
सफ़र कितना भी मुश्किल होनज़र में सिर्फ़ मंज़िल होअता इतनी सी कर मौलाजो दे हमदर्द आदिल होमिला उससे न, जो समझेन कोई हमसे क़ाबिल होमुझे मंज़ूर वो हर दुश्मनजो दुश्मन हो, न जाहिल होमैं दिल तो दे किसी को दूँनज़र में वो तो दाख़िल हो गिला कोई न शिकवा कर'अभी'ज़िंदा सदा दिल हो-अभिषेक कुमा...
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  June 4, 2014, 6:09 pm
वो ज़ख़्म देते हम मुस्कुराते रहे अहले वफ़ा हम यूँ भी निभाते रहेकुछ इस तरह रिश्ता दर्द से जोड़ लियाहम चोट खाकर भी गुनगुनाते रहेये ज़िंदगी इक शतरंज सा है बिछा  प्यादे भी आके आँखें दिखाते रहे क़िस्मत हमेशा ही गर्दिशों में रहीअपना बना के सभी आजमाते रहेबस इक&n...
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  May 31, 2014, 10:24 pm
रंग बिरंगे सपने हमने देखे हैंकुछ अपने जो बने बेगानेकुछ बेगाने बने जो अपने देखे हैंरंग बिरंगे सपने हमने देखे हैंसाथ साथ की कसमें खा करबीच भंवर में हमें गिरा कर गिर के सम्भले, फिर चल निकलेकाँटों को भी हमने आख़िर कुचले हैंरंग बिरंगे सपने हमने देखे हैंमुख पे ओढ़े लिबास हँ...
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  May 26, 2014, 10:21 pm
कहाँ वीराने में कोई, सफ़र पे साथ चलता हैजहाँ का साथ तो हरदम, उजालों में ही पलता है  बहुत से यार ने हमको, दिया है प्यार ख़ुशियों मेंदुःखों में साथ जब कोई, न दे तो प्यार खलता हैकली से फूल बनते हैं, महक कर टूट जाते हैंजिसे भी ज़िंदगी ये है मिला, इक रोज़ ढ़लता हैसभी को पास रखने ...
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  May 20, 2014, 6:21 pm
वो फिज़ाएँ रौनकें, वो बहारेंआज फिर लगता वो पुकारेंउनके पहलू में एक एक पल जो बिता हैउस एक पल में सदियों को हमने जिया हैवो जज़्बात एहसास वो उनका अपनापनकानों में धुन रह रह के आती आरे आरे  वो फिज़ाएँ रौनकें, वो बहारेंआज फिर लगता वो पुकारेंदिल का हर रिश्ता ही ...
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  May 9, 2014, 5:47 pm
भोलू जैसा की नाम से ही प्रतीत होत है/ बहुत ही भोला-भाला सा नौजवान। जो गाँव की मिठ्ठी में पला बढ़ा और पढ़ा-लिखा साथ ही मेहनतकश इन्सान बना। पर अब भोलू के सभी मित्र शहरी हो गये थे/ और जब वो गाँव आते तो भोलू उनके ठाट-बाट से मोहित हो जाता/ जिस से उसका मन गाँव से उचटने लगा। शहर...
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  April 24, 2014, 9:27 pm
बात जो भी है ज़ुबाँ से आप कहियेइश्क़ गर है तो किसी से भी न डरियेरात दिन जलना नहीं होता सही हैगर जले तो आफ़ताबी बन चमकिये राह कोई भी कहाँ आसान अब हैसाथ चलके ही सफ़र आसान करियेजो किसी को भी ज़ुबाँ दे गर दिया होसर कटे तो भी न हरगिज़ फिर मुकरिये   किस ज़माने की अभी ह...
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  April 24, 2014, 4:48 pm
अब निभाएँ धर्म अपना, माँ को बचाएँ अब हमींकर हरित क्रांति से हम, सब सजाएँ अपनी जमींइस धरा को हम सम्भालें, ये ना खो जाये कहींरक्षा करना कर्म अपना, क्यूंकि रहते हम यहीं--अभिषेक कुमार ''अभी''Ab nibhayen dhrm apna, maa ko bachayen ab hminKar harit kraanti se ham, sab sajaayen apnee jamin.Is dhra ko ham sambhalen, ye naa kho jaye kahin.Raksha karna karm apna, kyunki rahte ...
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  April 22, 2014, 12:07 pm
न हिंदू बने, न मुसल्मान बनेइक सच्चा सिर्फ़, इंसान बनेकरें ख़ात्मा, हर बुराई कासदा साथ दें, सच्चाई काइंसानियत न भूलें कभीअब मन से हम, महान बनेन हिंदू बने, न मुसल्मान बनेइक सच्चा सिर्फ़, इंसान बनेदेखें आफ़ताब से, महताब तकहम चुने आब से, ग़ुलाब तकइन्क़िलाब करें, इंतिख़ाब करेंहम ज़िं...
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  April 19, 2014, 7:40 pm
हम वीर धीर हम नहीं रुकें अत्याचारों को सह के बढ़ेंतुम चाहे कर लो लाख़ जतनहोना तुम्हरा ही है अब पतनये झुंझलाहट बतलाती हैतुमको अब दहशत ये सताती हैकुर्सी के तुम उन्माद में जोज़हर घोल रहे इस समाज में जोभाषण से तुम्हारी कायरता झलकती हैसाम्प्रदायिक राजनी...
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  April 8, 2014, 7:14 pm
भूल कर भी, अब तुम यकीं, नहीं करनाबात सच हो, जो अब कहीं, नहीं करनासामने जो, मुँह मियाँ, बनते हों मिठ्ठूसोच, जाँ देने की वहीँ, नहीं करनालाख चाहे, आये यहाँ, मुसीबत गर तुम कभी भी, गिरवी ज़मीं, नहीं करनालूट के बिख़रे, हम, यहाँ ज़माने मेंमश्'वरा अब, ऐसा अभी, नहीं करनाभूल कर भी, अब तुम यक...
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  April 3, 2014, 6:54 pm
प्यार को खेल तुमने समझ लिया हैइसलिए आज रुस्वा हमें किया हैरह्'मतों से ख़ुदा की मिले मुहब्बतये रिवायत है तुमने बदल दिया हैमार डाला हमें जग हँसाई ने अबहर सुबह शाम हमने ज़हर पिया हैइस शहर में मिलेंगे बहुत ही ऐसेमार के ख़ुद को जिसने यहाँ जिया हैसांस लेना ही ज़िंदा नहीं है रहना...
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  March 31, 2014, 10:05 am
इस ज़िंदगी को, हम यहाँ, अकेले ही गुज़ारे हैंकोई न आए साथ को, यहाँ जब जब पुकारे हैंहालात ऐसे आज हैं, कि सब, शब में समाए हैंदेखे सहर मुद्दत बिता, सुबह भी निकले तारे हैंकुश्ती मची इक-दूजे में,हराए कौन अब किसकोघूमा नज़र, देखो जहाँ, वहीं दिखते अखाड़े हैंदोनों जहाँ जिसने बनाय...
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  March 27, 2014, 6:03 pm
मैं उनके राह, आने की, खड़ा ख़ामोश तकता हूँन सोता हूँ, न जगता हूँ, पड़े हरपल तड़पता हूँकहीं ये दिल न पाये चैन, है कैसी अदावत येरहूँ मैं दूर जितना, और उतना ही उलझता हूँइनायत कर के तुमने ये, न छोड़ा अब कहीं का हैदुआएँ दे, मगर तुमको, बड़ा बेचैन, रहता हूँपता है, दौर कैसा ये, यहाँ ...
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  March 25, 2014, 5:35 pm
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