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उलूक टाइम्स

1947- 22/09/2018शब्द नहीं होते हैं सब कुछ बताने के लिये किसी के बारे में थोड़ा कम पड़ जाते हैं थोड़े से कुछ लोग भीड़ में होते हुऐ भी भीड़ नहीं हो जाते हैं समुन्दर के पानी में मिल चुकी बूँद होने के बावजूद भी दूर से पहचाने जाते हैं जिंदगी भर जन सरोकारों के लिये संघर्ष करने वालों के चेहरे ह...
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Tag :जन सरोकार
  September 23, 2018, 12:24 pm
होता है निगाहें कहीं और को लगी होती हैं और निशाना कहीं और को लगा होता है इस सब के लिये आँखों का सेढ़ा होना जरूरी नहीं होता है ये भी होता है बकवास को पढ़ना नहीं होता है बढ़ती आवत जावत की घड़ी की सूईं पढ़ने पढ़ाने का पैमाना नहीं होता है ये मजबूरी होता है हरी भरी कविताओं से भरी क्या...
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Tag :चूहों
  September 20, 2018, 11:12 pm
मानना तो पड़ेगा ही इसको उसको ही नहीं पूरे विश्व को तुझे किसलिये परेशानी हो जा री टापू से दूरबीन पकड़े कहीं दूर आसमान में देखते हुऐ एक गुरु को और बाढ़ में बह रहे मुस्कुराते हुऐ उस गुरु के शिष्य को जब शरम नहीं थोड़ा सा भी आ री एक बुद्धिजीवी के भी समझ में नहीं आती हैंं बातें बहुत ...
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Tag :उलूक
  September 18, 2018, 8:32 pm
कितनी शरमा शरमी से यहाँ तक पहुँच ही गयी कितनी बेशरमी से कहीं बीच में ही छूट गयी कुछ कबाड़ सी महसूस हुयी फाड़ कर बेखुदी में फेंक भी दी गयी कुछ पहाड़ सी कही जानी ही थी बहुत भारी हो गयी कही ही नहीं गयी कुछ आधी अधूरी सी रोज की आवारा जिन्दगी सी पिये खायी हुयी सीकिसी कोने में उनींदी...
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Tag :छलक
  September 14, 2018, 11:04 pm
साहित्यकार कथाकार कवि मित्र फरमाते हैं भाई क्या लिखते हो क्या कहना चाहते हो समझ में ही नहीं आता है कई बार तो पूरा का पूरा सर के ऊपर से हवा सा निकल जाता है और दूसरी बला ये ‘उलूक’ लगती है बहुत बार नजर आता है है क्या ये ही पता नहीं चल पाता है हजूर साहित्यकार अगर बकवास समझना शु...
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Tag :उलूक
  September 12, 2018, 7:08 pm
चल फिर से ढूँढें नयी कुछ किताबें पढ़ना पढ़ाना लिखना लिखाना पुराना हो चुका सुना है आगे से अब नहीं काम आयेगा किसका लिखा है कब का लिखा है किसका पढ़ाया है किसने पढ़ा है लिखकर बताना बस कुछ ही दिनों में जरूरी हो जायेगा लिखने लिखाने की पढ़ने पढ़ाने की सीखने सिखाने की दुकानों के इश्त...
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Tag :किताबें
  September 9, 2018, 10:41 pm
अपनी आँखों से देखता है कुछ भी समझ लेता है और भी होती हैं आंखें देखती हुई आसपास में उन आँखों में पहले क्यों नहीं देख लेता है किसी को कुछ भी समझ में नहीं आया हर कोई कह देता है तेरे देखे हुऐ में उनका देखा हुआ कभी भी कुछ कहाँ होता है सब की समझ में सब की कहीं बातें आती भी नहीं हैं ...
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Tag :उलूक
  September 7, 2018, 7:41 pm
नमन उन सीढ़ियों को जिस पर चढ़ कर बहुत ऊपर तक कहीं पहुँच लिया जा रहा होता है नमन उन कन्धों को जिन को सीढ़ियों को टिकाने के लिये प्रयोग किया जा रहा होता है नमन उन बन्दरों को जिन्हेंं हनुमान बना कर एक राम सिपाही की तरह मोर्चे पर लगा रहा होता है नमन उस सोच को जो गाँधी के तीन बन्दर...
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Tag :गुरु
  September 5, 2018, 10:22 pm
किसी को लग पड़ कर कहीं पहुचाने की बात करेंरास्ते काम चलाऊ उबड़ खाबड़ बनाने की बात करेंकौन सा किसी को कभी कहीं पहुँचना होता है पुराने रास्तों के बने निशान मिटाने की बात करेंबात करने में संकोच भी नहीं करना होता है पुरानी किसी बात को नयी बात पहनाने की बात करेंबात है कि छुपती ...
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Tag :गफलत
  September 3, 2018, 10:23 pm
लिखे लिखाये में ना तेरे होता है ना मेरे होता है सब कुछ उतार के खड़ा होने वाले के सामने कोई नहीं होता है जिक्र जरूर होता है डरे हुऐ इंसानो के बीच  शैतान की बात ही अलग होती है वो सबसे अलग होता है आदमी तो बस किसी का एक कुत्ता होता है आप परेशान ना होवें कुत्ता होने से पहले आदमी ...
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Tag :देश
  September 1, 2018, 8:00 pm
जरूरत नहीं है अब किसी कोर्ट कचहरी वकील की जनाब जजों को भी कह दिया जाये कुछ नया काम ढूँढ लिजिये अब अपने लिये भी किसी झण्डे के नीचे आप तुरत फुरत में होने लगा है फटाफट जब अपने आप सारा सब कुछ बहुत साफ साफ खबर के चलते ही छपने छपाने तक पहुँचने से पहले ही जिरह बहस होकर फैसला सुनान...
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Tag :गिरफ्तारी
  August 30, 2018, 9:09 pm
आओ खत लिखें जमाना हो गया पोस्टमैन को देखे आओ कुछ कोशिश करें देखने की भी आओ कुछ देखें तू मुझ को लिख मैं तुझे लिखूँ शब्द वाक्य सब रहने दें कुछ रेखायें ही खींचें कौन लिखेगा किसको लिखेगा कौन किसका लिखा खत किसके लिये पढ़ देगा ये सब छोड़े बस ज्यादा नहीं कुछ थोड़ा सा घड़ी की सूईं क...
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Tag :चिट्ठियाँ
  August 27, 2018, 8:23 pm
ये फीड बैक भी एक गजब का काँसेप्ट होता है अपने बारे में वैसे भी कौन किसी से कुछ पूछता हैफीड बैक का मतलब प्रतिक्रिया होता है गूगल बाबा आसानी से समझा जाता है पर हिन्दी रूपाँतरण में मजा नहीं आता है कहाँ पता होता है कौन क्या होता है देखने से कुछ पता नहीं चल पाता है साथ रहने पर भ...
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Tag :कामवाली
  August 21, 2018, 8:35 pm
एक आदमी भूगोल हो रहा होता आदमी ही एक इतिहास हो रहा होतापढ़ने की जरूरत नहीं हो रही होती सब को रटा रटाया अभिमन्यु की तरह एक आदमी पेट से ही पूरा याद हो रहा होता एक आदमी हनुमान हो रहा होता एक आदमी राम हो रहा होताबाकि होना ना होना सारा आम और बेनाम हो रहा होताचश्मा कहीं उधड़ी हुई ध...
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Tag :एक आदमी
  August 20, 2018, 8:25 pm
कई दिन से थोड़ा थोड़ा फटे हुऐ शब्दों को एक रफूगर रफू कर रहा है पूछने पर बोला बहुत धीमे से बस फुसफुसा कर बहुत दिनों में मिला है काम बाबू एक पागल दे गया है कह रहा था पन्द्रह अगस्त नजदीक है आजादी लिखने का बहुत मन कर रहा है फटे कपड़े के कुछ टुकड़े उसी गली के अगले छोर का एक दर्जी मन ल...
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Tag :आजादी
  August 15, 2018, 9:27 pm
एक पट्टा गले में पहन लूँ कई दिन से विचार आ रहा है रंग उसका क्या होना चाहिये  बस यही समझ में नहीं आ रहा है जमाने में रहकर जमाने से कितना पिछड़ गया हूँहर पट्टा पहना हुआ जैसे मुझे ही चिढ़ा रहा है किसम किसम के हैं सारे इंद्रधनुषी हैं सभी पहने हुऐ हैं एक रंग के पट्टे हैं आभासी ज...
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Tag :जादू
  August 10, 2018, 8:00 pm
ख्वाब पर लिखना है जनाब  लिख और बेहिसाब लिख फेहरिस्त छोटी सी लेकर एक जिन्दगी के पूरे हिसाब पर लिखरोज लिखता है कुछ देखे हुऐ कुछ पर कुछ भी अटपटा बिना सोचे सोच कर जरा लिख कर दिखा थोड़ा सा कुछ सुरखाब पर लिख बना रहा है ख्वाब के समुन्दर कोई पास में ही डूब कर ख्वाबों में उसके ही ...
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Tag :आग
  August 4, 2018, 4:00 pm
वो अपनी रोटियाँ सेकता है किसी और की आग में चारों तरफ लगी आग है कुछ रोटियों के ढेर हैं और कुछ राख है ऐसा नहीं है कि भूखा है वो और उसे खानी हैं रोटियाँगले तक पेट भर जाने के बाद कुछ देर खेलने की आदत है उसे लकड़ियाँ सारे जंगल की यूँ ही जला देता है हमेशादिल जला कर पकायी गयी रोटी का...
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Tag :खाने
  August 2, 2018, 8:45 pm
दूर करें अकेलापन बहुत आसानी से किसी भी भीड़ में एक कहीं घुसकर खो जायें आओ एक चोर हो जायें मुश्किल है बचाना सोच को अपनी बहुत दिनों तक क्या परेशानी है आओ जंगल में नाचता हुआ एक मोर हो जायें कारवाँ भटकने लगे हैं रास्ते पहुचने की किसने ठानी है खोने का डर निकालें दिल से आओ निडर ...
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Tag :डोर
  July 31, 2018, 10:10 pm
उसकी बात करना सीख क्यों नहीं लेता है भीड़ से थोड़ी सी नसीहत क्यों नहीं लेता है सोचना बन्द कर के देख लिया कर कभी दिमाग को थोड़ा आराम क्यों नही देता है तेरा मकसद पूछता है अगर उसका झण्डा झण्डा नहीं हूँ कहकर जवाब क्यों नहीं देता हैआइना नहीं होता है कई लोगों के घर मेंअपने घर में ...
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Tag :झण्डा
  July 29, 2018, 7:00 pm
गुरुआइन को सुबह से क्रोध आ रहा है कह कुछ नहीं रही है बस छोटी छोटी बातों के बीच मुँह कुछ लाल और कान थोड़ा सा गुलाल हो जा रहा है गुरु के चेले पौ फटते ही शुरु हो लिये हैं कहीं चित्र में चेला गुरु के चरणों में झुका कहीं गुरु चेले की बलाइयाँ लेता नजर आ रहा है चेले गुरु को भेज रहे ह...
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Tag :गुरु पूर्णिमा
  July 27, 2018, 7:34 pm
बहुत लिख लिया एक ही मुद्दे पर पूरे महीने भर इस सब से ध्यान हटाते हैं शेरो शायरी कविता कहानी लिखना लिखाना सीखने सिखाने की किसी दुकान तक हो कर के आते हैं कई साल हो गये बकवास करते करते एक ही तरीके की कुछ नया आभासी सकारात्मक बनाने दिखाने के बाद फैलाने का भी जुगाड़ अब लगाते हैं...
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Tag :आभासी
  July 25, 2018, 10:10 pm
(21/07/2018 की पोस्ट:‘शरीफों की बस्ती है  कुछ नहीं होना है एक नंगे चने की बगावत से’ की अगली कड़ी है ये पोस्ट। इसका देश और देशप्रेम से कुछ लेना देना नहीं है। उलूक की अपनी दुकान की खबर है जहाँ वो भी कुछ सरकारी बेचता है )पहले से पता था कुछ नया नहीं होना थाखाली टूटी मेज कुर्सियाँ सर...
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Tag :खुजली
  July 23, 2018, 5:55 pm
शरीफों ने तोड़ी कुर्सियाँ शरीफों की लात मार कर शराफत के साथमेज फेंकी शराफत से दी भेंट में कुछ गालियाँ शरीफों की ही दी इजाजत से काँच की बोतलें रंगीन पानी खुश्बू शराफत की और मुँह शरीफों केसाकी छिड़क रही थी अल सुबह से वीरों पर थोड़ी सी बस कुछ नफासत से शरीफों ने इजहार किया शरा...
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Tag :कुर्सी
  July 21, 2018, 9:25 pm
दो और दो जोड़ कर चार ही तो पढ़ा रहा है किसलिये रोता है दो में एक इस बरस जोड़ा है उसने एक अगले बरस कभी जोड़ देगा दो और दो चार ही सुना हैऐसे भी होता है एक समझाता है और चार जब समझ लेते हैं किसलिये इस समझने के खेल में खोता है अखबार की खबर पढ़ लिया कर सुबह के अखबार में अखबार वाले का भी जो...
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Tag :खबर
  July 15, 2018, 9:13 pm
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