Deprecated: mysql_connect(): The mysql extension is deprecated and will be removed in the future: use mysqli or PDO instead in /home/hamariva/public_html/config/conn.php on line 13
उलूक टाइम्स : View Blog Posts
Hamarivani.com

उलूक टाइम्स

किस लिये इतना बैचेन होता है देखता क्यों नहीं है रात पूरी नींद लेने के बाद भी वो दिन में भी चैन की नींद सोता है उसकी तरह का ही क्यों नहीं हो लेता है सब कुछ पर खुद ही कुछ भी सोच लेना कितनी बार कहा जाता है बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है नयी कुछ लिखी गयी हैं किताबें उनमें अब ये सब भ...
उलूक टाइम्स...
Tag :कानून
  December 10, 2017, 10:17 pm
जब भी कभीसैलाब आता है लिखना भी चाहो अगर कुछनहीं लिखा जाता है लहरों के ऊपर से उठती हैं लहरें सूखी हुई सी कईबस सोचना सारापानी पानी सा हो जाता है इसकी बात से उठती है जरा सोच एक नयी उसकी याद आते ही सब  पुराना पुराना सा हो जाता है अचानक नींद से उठी दिखती है सालों से सोई हुई क...
उलूक टाइम्स...
Tag :नयी
  December 9, 2017, 7:48 pm
सब कुछ लिख देने की चाह में नकली कुछ लिख दिया जाता है बहुत कुछ असली लिखा जाने वाला कहीं भी नजर नहीं आता है कहीं नहीं लिखा जाता है वो सब जो लिखने के लिये लिखना शुरु करने से पहले तैयार करलिया जाता हैसारा सब कुछ शुरु में ही कहीं छूट जाता है दौड़ने लगता हैउल्टे पाँँवजैसे लिखने ...
उलूक टाइम्स...
Tag :चाह
  December 8, 2017, 11:16 pm
बकवास का हिसाब रखने वाले को पता होता है उसने कब किस समय कहाँ और कितना कुछ कहा होता है इस जमाने के हिसाब से कुछ भी कहीं भी कभी भी कितना भी कह कर हवा में छोड़ देना अच्छा होता है पकड़ लेते हैं उड़ती हवाओं में से छोड़ी गयी बातों को पकड़ लेने वाले बहुत सारे धन्धों के चलने में इन्ही स...
उलूक टाइम्स...
Tag :नशा
  December 7, 2017, 10:22 pm
ऐसा नहीं है कि नहीं लिखे गये कभी कुछ शब्द इश्क पर भी ऐसा भी नहीं है कि इश्क अब लिखने का मौजू रहा ही नहीं है इश्क बुढ़ाता है कहा जाना भी ठीक नहीं है हाँ बदल लेता है इश्क नजरिया अपना उम्र ढलने के साथ कमजोर होती जाती है जैसे आँख दिखता नहीं है चाँद भी उतना सुन्दर तारे गिने भी नही...
उलूक टाइम्स...
Tag :नजर
  December 6, 2017, 10:32 pm
थोड़े से कुछ बेवकूफ भी होते हैं कुछ लोग समझना चाहिये नहीं समझे को दूसरों के समझने के लिये अगर लिख कर छोड़ भी देते देते हैं कुछ लोग सबके घर अलग अलग होते हैं रिवाज अलग होते हैं आदते अलग होती हैंसब को सब दिखाई दे जरूरी नहीं होता है चश्में अलग अलग होते हैं कुछ देखते हैं अपने हिस...
उलूक टाइम्स...
Tag :कुछ लोग
  December 5, 2017, 9:11 pm
कभी सम्भाल भी लिया कर फुरसतें जरूरी नहीं है लिखना ही शुरु हो जाना खाली पन्नों को खुरच कर इतना भी कुरेदना ठीक नहीं महसूस नहीं होता क्या बहुत हो गया लिखना छोड़ कभी कुछ कर भी लिया जाये पन्ने के ऊपर पन्ना पन्ने के नीचे पन्ना आगे पन्ना पीछे पन्ना कोई नहीं पूछने वाला कितने कित...
उलूक टाइम्स...
Tag :उत्तर
  December 3, 2017, 4:28 pm
कितना कुछ यूँ ही छूट जाता है समय पर लिखा ही नहीं जाता है चलते चलते सड़क पर अचानक कुछ पक पका जाता है कहाँ रखो सम्भाल कर कलम कापी रखने का जमाना याद आता है लकीरें खींचना आने ना आने का सवाल कहाँ उठता है लकीरें खींचने वाला शिद्दत के साथ हर पेड़ की छाल पर उसी की शक्ल खोद जाता है किस...
उलूक टाइम्स...
Tag :उधर
  December 1, 2017, 10:47 pm
कभी तो छोटा सा कुछ लिख लिखा कर बात खत्म कर लिया कर बहुत समझदार होते हैं समझने वाले इतनी सी बात रोज ना भी सही कम से कम किसी एक मंगलवार के दिन ही सही समझ लिया कर सब समझते हैं समझने वाले नहीं समझ में आती है जो भी बात समझ में लिखता है उसी को खुद समझने के लिये लिख लिख कर एक नहीं बा...
उलूक टाइम्स...
Tag :आचमन
  November 28, 2017, 8:33 pm
मजबूरियाँ 'आह'से लेकर 'आहा'तक की होती हैं कोशिश करने वाले भवसागर पार कर ही जाते हैं खबर रोज का रोज छपेताजी छपे तभी तकठीक है कुछ आदत से मजबूर होते हैं ठंडी भी करते हैं फिर धूप भी दिखाते हैं लिखना मजबूरी होती है पढ़ना नहीं होती है रास्ते में लिखे संदेश आने जाने वालों से ना चा...
उलूक टाइम्स...
Tag :आह
  November 24, 2017, 8:39 pm
पीछे लौटते हैं लिखने वाले लिखते लिखते कई बार पुराने लिखे लिखाये की कतरनों में चिपके शब्दों की खुरचनों के लोग मुरीद हो रहे होते हैं चल देते हैं ढूँढने मायने हो रहे बहुत कुछ केजमाने में काम हो रहे होते हैं जब बहुत सलीके से मगर अजीब से कुछ हो रहे होते हैं नींद में नहीं होत...
उलूक टाइम्स...
Tag :काम
  November 19, 2017, 9:39 pm
अजीब सी बात है पर पता नहीं सुबह से दिमाग में एक शब्द घूम रहा है टट्टी तेरी टट्टी मेरी टट्टी से खुशबूदार कैसे या तेरी टट्टी मेरी टट्टी से ज्यादा असरदार कैसे पाठकों को भी लग रहा होगा टट्टी भी कोई बात करने का विषय हो सकता है सुबह उठता है आदमी खाता है शाम होती है फिर से खाता ह...
उलूक टाइम्स...
Tag :गू
  November 18, 2017, 8:19 pm
सुबह से कुछ याद जैसा आ रहा है नवम्बर का महीना चौदहवाँ दिन धीरे धीरे रोज की तरह खिसकता जा रहा है याद करते करते भी जैसे कुछ भूला जा रहा है गूगल का डूडल एक सौ इकतीसवीं साल गिरह कागज में छेद करने वाले उपकरण की मना रहा है सब कुछ छूटता चला गया हो जैसे बचपन अब बच्चों में भी जब नजर न...
उलूक टाइम्स...
Tag :चाचा
  November 14, 2017, 10:29 pm
किसी दिन तो सब सच्चा सोचना छोड़ दिया कर कभी किसी एक दिन कुछ अच्छा भी सोच लिया कर रोज की बात कुछ अलग बात होती है मान लेते हैं छुट्टी के दिन ही सही एक दिन का तो पुण्य कर लिया कर बिना पढ़े बस देखे देखे रोज लिख देना ठीक नहीं कभी किसी दिन थोड़ा सा लिखने के लिये कुछ पढ़ भीलिया कर सभी लि...
उलूक टाइम्स...
Tag :थोपने
  November 12, 2017, 9:21 pm
सौ में से निनानवे शरीफ होते हैंउनको होना ही होता है होता वही है जो वो चाहते हैं बचा हुआ बस एक ही होता है जो नंगा होता है उसे नंगा होना ही होता है उसके बारे में निनानवे ने सबको बताया होता है समझाया होता है बस वो ही होता है जो उनका जैसा नहीं होता है निनानवे सब कुछ सम्भाल रहे ह...
उलूक टाइम्स...
Tag :नंगे
  November 9, 2017, 9:11 pm
कई दिनों तक एक रोज लिखने वाला अपनी कलम और किताब को रोज देखता है रोज छूता है बस लिखता कुछ भी नहीं है लिखने की सोचने तक नींद के आगोश में चला जाता है सो जाता है कब्ज होना शुरु होता है होता चला जाता हैबहुत कुछ होता है रोज की जिन्दगी में बाजार नहीं होता है आसपास कहीं भी दूर दूर त...
उलूक टाइम्स...
Tag :उल्लू का पट्ठा
  November 5, 2017, 8:46 pm
ठीक बात नहीं होती है कह देना अपनी बात किसी से भी कुछ बातें कह देने की नहीं होती हैं छुपायी जाती हैं बात के निकलने और दूर तक चले जाने की बात पर बहुत सी बातें कही और सुनी जाती हैं सुनाई जाती हैं कुछ लोग अपनी बातें करना छोड़ कर बातों बातों में ही बहुत सारी बात कर लेते हैं बातों ...
उलूक टाइम्स...
Tag :जलाई
  November 4, 2017, 8:14 pm
ऊपर वाला भी भेज देता है नीचे सोच कर भेज दिया है उसने एक आदमी नीचे का आदमी चढ़ लेता है उस आदमी के ऊपर से उतरते ही उसकी सोच पर सोचकर समझकर समझाकर सुलझाकर बनाकर उसको अपना आदमी आदमी समझा लेता है आदमी को आदमी खुद समझ कर पहले ये तेरा आदमी ये मेरा आदमी बुराई नहीं है किसी आदमी के कि...
उलूक टाइम्स...
Tag :उलूक
  November 1, 2017, 10:19 pm
कल का नहीं खाया है पता है आज फिर सेपकाया है वो भी पता है कल भी नहीं खाना था पता था आज भी नहीं खाना है पता है कल भी पकाया था कच्चा था पता था पूरा पक नहीं पाया था वो भी पता था किसी ने कहाँ कुछ बताया था बताना ही नहीं था आज भी पकाया है पक नहीं पाया है कोई नहीं खायेगा जैसा था रह जायेग...
उलूक टाइम्स...
Tag :घन्टी
  October 25, 2017, 8:38 pm
गरम होता है उबलता है खौलता है कभी किसी दिन अपना ही लहू खुद की मर्दानगी तोलता है अपना ही होता है नजदीक का घर का आईना रोज कब कहाँ कुछ बोलता है तीखे एक तीर को टटोलता है शाम होते ही चढ़ा लेता है प्रत्यंचा सोच के धनुष की सुबह सूरज निकलता है गुनगुनी धूप में ढीला कर पुरानी फटी खूँट...
उलूक टाइम्स...
Tag :कौआ
  October 24, 2017, 11:58 pm
कुछ दिन अच्छा होता है नहीं देखना कुछ भी अपनी आँखों से दिख रहे सब कुछ में कुछ दिन अच्छा होता है देखनावो सब कुछ जो सब को दिखाई दे रहा होता है उनके अपने चारों ओर उनकी अपनी आँखों से रोज अपने अपने दिखाई दे रहे को दिखाने की होड़ में दौड़ लगा रहे देखे गये बहुत कुछ में आँखें बन्द कर द...
उलूक टाइम्स...
Tag :कुत्ता
  October 21, 2017, 8:33 pm
सारे शिव डरपोक हलाहल गटके हुऐ गले गले नीले पड़े दिखा रहे हैं साँपों को समझा रहे हैं साँपों को शाँत रहें साँप बने रहें सारे साँप मौज में हैं शिव के गले में माला डाले हुए हैं हर जगह शिव ही शिव हैं हर जगह साँप ही साँप हैं डस कोई किसी को नहीं रहा है साँप साँप के साथ है और रह रहा ह...
उलूक टाइम्स...
Tag :फार्वर्ड
  October 11, 2017, 9:59 pm
हिदायतें दे रहें हैं चिकित्सक बहुत सारे मुफ्त में ही बेहिसाब और दिन का लिखना अलग बात है बहुत जरूरी है लिखनी आज मन की बात उधर वो बात दिमागी सेहत की बता रहे हैं खाने पीने को ठीक रखना है समझा रहे हैं अकेलेपन से निपटना है भीड़ में घर की ही सही हिल मिल कर कुछ इस तरह से रहना है बच्...
उलूक टाइम्स...
Tag :विश्व मानसिक स्वास्थ दिवस
  October 10, 2017, 11:06 pm
यूँ हीं देख लिया कर कुछ कभी भी बस देखने के लिये जिंदगी कट जाती है उसकी भी जिसने आँखे ताड़ कर पूरे को पूरा ही घूरा हो अपनी आँखे सेकने के लिये यूँ हीं कह दिया कर कुछ भी कभी भी बस फेंकने के लिये पता कर ही लेता है पता करने वाला अन्दर की बातें सारी सामने वाले की खुद समेटने के लिये ...
उलूक टाइम्स...
Tag :पंद्रह लाख
  October 9, 2017, 11:42 pm
शेरो शायरी बहुत हो गयी मजा उतनानहीं आ रहा है सुना है फिर से चिट्ठियाँ लिखने का चलन लौट कर वापस आ रहा है कागज कलम दवात टिकट लिफाफे के बारे में पूछ रहा है कोई कई दिनों से इधर और उधर के डाकखानों के चक्कर लगा रहा है चिट्ठियाँ लिखना भेजना डाकिये का पता देख कर किसी का घर ढूँढना क...
उलूक टाइम्स...
Tag :कागज
  October 5, 2017, 7:19 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3712) कुल पोस्ट (171544)