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उलूक टाइम्स

बिल्लियों के अखबार में बिल्लियों ने फिर छ्पवाया सुबह का अखबार रोज की तरह आज भी सुबह सुबहउसी तरह से शर्माता हुआ जबर्दस्ती घर के दरवाजे से कूदता फाँदता हुआ ही आया खबर शहर के कुछहिसाब की थीकुछ किताब की थी शरम लिहाज की थीशहर के पन्ने में ही बस दिखायी गयी थी चूहों की पढ़ाई को ...
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Tag :खबर
  April 30, 2018, 11:44 pm
लिखना पड़ जाता है कभी मजबूरी में इस डर से कि कल शायद देर हो जाये भूला जाये बात निकल कर किसी किनारे से सोच के फिसल जाये जरूरी हो जाता है लिखना नौटंकी को इससे पहले कि परदा गिर जाये ताली पीटती हुई जमा की गयी भीड़ जेब में हाथ डाले अपने अपने घर को निकल जाये कितना शातिर होता है एक श...
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Tag :ताली
  April 18, 2018, 10:26 pm
बहाने मत बना सही बात साफ साफ बता कलम बीमार है कागज का पेट आज बहुत खराब है जैसा जुमला अब रहने भी दे किसी पुराने पीतल या ताँबे के गमले में दे सजा कुछ भी लिख देने वाले के साथ ऐसा ही है होता कितने साल हो गये लिखते बकते अब तो समझ ले अभी भी समय है एक बार फिर से समझाया जा रहा है सुधर ...
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Tag :कब्र
  April 17, 2018, 8:14 pm
जिन्दगी शुरु होती है और गिनतियाँ शुरु हो जाती है शून्य कहीं भी किसी को नहीं सिखाया जाता है एक से शुरु की जाती हैं गिनतियाँ सारा सब कुछ पैदा होते ही एक हिसाब किताब हो जाता है बताया ही नहीं जाता है समझाया भीनहीं जाता है फिर भी गिनतियाँ खुद उसी तरफ उसी रास्ते पर अँगुली पकड़ ...
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Tag :1000
  April 11, 2018, 9:38 pm
एक भीड़ से दूसरी भीड़ दूसरी भीड़ से तीसरी भीड़ भीड़ से भीड़ में खिसकता चलता है मतलब को जेब में रुमाल की तरह डाल कर जो वो हर भीड़ में जरूर दिखाई दे जाता है भीड़ कभी मुद्दा नहीं होती है मुद्दा कभी मतलबी नहीं होता है मतलबी भीड़ भी नहीं होती है भीड़ बनाने वाला भीड़ नचाने वाला कहीं किसी भी...
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Tag :दंगे
  April 2, 2018, 11:18 pm
खोला तो रोज ही जाता है लिखना भी शुरु किया जाता है कुछ नया है या नहीं है सोचने तक खुले खुले पन्ना ही गहरी नींद में चला जाता है नींद किसी की भी हो जगाना अच्छा नहीं माना जाता है हर कलम गीत नहीं लिखती है बेहोश हुऐ को लोरी सुनाने में मजा भी नहीं आता है किस लिये लिख दी गयी होती हैं...
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Tag :घर
  March 31, 2018, 10:54 pm
समझदारी समझदारों के साथ मेंरहकर समझ को बढ़ाने की है पकाने की है फैलाने की है नासमझ कभी तो कोशिश कर लिया कर समझने की नासमझी की दुनियाँ आज बसपागल हो चुके किसी दीवाने की है कुछ खेलना अच्छा होता हैसेहत के लिये कोई भी हो एक खेल खेल खेल मेंखेलों की दुनियाँ में खेलनाकाफी नहीं ...
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Tag :कलम
  March 25, 2018, 11:25 pm
आदतें बदलती नहीं हैं छोटे से अंतराल में सिमट जाती हैं खोल में किसी खुद के बनाये हुऐ आभास देने भर के लिये बस अस्तित्व होने से लेकर नहीं होने की जद्दोजहद जारी रहती है हमेशा मजबूरियाँ जकड़ लेती हैं अँगुलियों को लेखनी के आभास भर के साथ भींच कर लिखता चला जाता है समय रेंगता हु...
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Tag :ना होना
  March 20, 2018, 9:35 pm
काँव काँव कर्कश होती है कभी कह भी दिया होता है किसी ने तो ऐसा भी तो नहीं होता है कि मुँडेर पर आना ही छोड़ दो निर्मोही मोह होता ही है भंग होने के लिये चल लौट आ और बैठ ले सुबह सवेरे पौ फटते ही मेरे ही दरवाजे के सामने के पेड़ की किसी एक डाल पर कर लेना जैसी मन चाहे आवाज एक नहीं कई हो...
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Tag :आदतें
  February 22, 2018, 9:54 pm
दरवाजा खोल कर निकल लेना बेमौसम बिना सोचे समझे सीधे सामने के रास्ते को छोड़ कर कहीं मुड़ कर पीछे की ओर ना चाहते हुऐ भी जरूरी हो जाता है कभी कभी जब हावी होने लगती है सोच आस पास की उड़ती हवा की यूँ ही जबर्दस्ती उड़ा ले जाने के लिये अपने साथ लपेटते हुए अपनी सोच के एक आकर्षक खोल में ...
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Tag :किताब
  February 13, 2018, 10:01 pm
बहुत दिन हो गये सफेद पन्ने को छेड़े हुऐ चलो आज फिर से कोशिश करते हैं पिचकारियॉ उठाने की गलत सोच का गलत आदमी होना बुरा नहीं होता है प्यारे सही आदमी की संगत से कोशिश किया कर थोड़ा सा दूर जाने की जन्नत उन्हीं की होती है जहॉ खुद के होने का भी नहीं सोचना होता है मर जायेगा एक दिन ज...
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Tag :कागज
  February 8, 2018, 11:45 pm
कहाँ जरूरत है किसे जरूरत है पढ़ने याद करने या समझने की संविधान को कुछ दिन होते हैं बस करने को सलाम दूर ऊपर देखते हुऐ फहराते हुऐ तिरंगे को और नीले आसमान को किसने कह दिया चलते रहिये बने हुऐ रास्तों पर पुराने बना कर पंक्तियाँ मिला कर कदम बचा कर अपने स्वाभिमान को उतर कर तो देख...
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Tag :गणतंत्र
  January 25, 2018, 10:28 pm
बहुत देर से कोशिश कर रहा होता है कोई एक तितली सोच कर उसे उड़ाने की तितली होती है कि नजर ही नहीं आती है तितली को कहाँ पता होता है उसपर किसी को कुछ लिखना है हरे भरे पेड़ पौंधे फूल पत्ती खुश्बू या कुछ भी जिसपर तितली उड़ान भरती है लिखने वाला लगा होता है तितली को उड़ाने की सोच जगाने...
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Tag :तितली
  January 24, 2018, 11:04 pm
एक वबाल है कुछ पूछने वाला आज इनकी उनकी सबकी नजरों में इनकी नजर है कि एक सवाल है हमेशा इसकी उसकी सबकी नजरों में नजर उठती नहीं है वबाल होती है अपने लिये ही अपने नखरों में लावबाली होती है बड़ी वबाल होती है उठती है तो ठहर जाती है नजरों में वबाल और भी होते हैं कुछ बह जाते हैं समय...
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Tag :बोझ
  January 23, 2018, 8:17 pm
कभी अखबार को देखते हैं कभी अखबार में छपे समाचार को देखते हैं पन्ने कई होते हैं खबरें कई होती हैं  पढ़ने वाले अपने मतलब के छप रहे कारोबार को देखते हैं सीधे चश्मे से सीधी खबरों पर जाती है सीधे साधों की नजर केकड़े कुछ टेढ़े होकर अपने जैसी सोच पर असर डालने वाली टेढ़ी खबर के टेढ़े...
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Tag :खबर
  January 21, 2018, 11:12 pm
कुछ में बहुत कुछ लिख देते हैं बहुत से लोग बहुत से लोग बहुत कुछ लिख देते हैं कुछ नहीं में भी कुछ शराब पर लिख देते हैं बहुत कुछ बिना पिये हुऐ भी कुछ पीते हैं शराब लिखते कुछ नहीं हैं मगर नशे पर कभी भी कुछ दूसरों के लिखे को अपने लिखे में लिख देते हैं पता नहीं चलता हैं पढ़ने वाले क...
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Tag :रोटी
  January 18, 2018, 8:16 pm
तेरह के नाशुक्रे नामुराद अंक पर ना जाइये इतनी तो झेल चुके हैं पुरानी कई आज की ताजी नयी पर इरशाद फरमाइये कहने का बस अन्दाज है एक नासमझ का जनाब अब तो समझ ही जाइये हिन्दी और उर्दू से मिलिये इस गली की इस गली में उस गली की अंगरेजी उस गली में रख कर आइये किसलिये बतानी हैं दिल की...
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Tag :तेरह
  January 16, 2018, 9:20 pm
लकड़ियों से उठ रही लपटें धीरे धीरे एक छोटे से लाल तप्त कोयले में सो जाती हैं रात भर में सुलग कर राख हो चुकी कोयलों से भरी सिगड़ी सुबह बहुत शांत सी नजर आती है बस यादों में रह जाती हैं ठंडी सर्द शामें जाड़ों के मौसम की धीमे धीमे अन्दर कहीं सुलगती हुई आग बाहर की आग से जैसे जान पह...
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Tag :आग
  January 14, 2018, 9:54 pm
वृन्द के दोहे ‘करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’ के याद आते ही याद आने शुरु हो जाते हैं हिन्दी के मास्टर साहब श्यामपट चौक हिन्दी की कक्षा याद आने लगता है ‘मार मार कर मुसलमान बना दूँगा मगर हिन्दी जरूर सिखा दूँगा’ वाली उनकी कहावत में मुसलमान शब्द का प्रयोग और जब भी याद ...
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Tag :जड़मति
  January 10, 2018, 10:50 pm
मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है करने में  मेरा कुत्ता तेरे कुत्ते से सफेद कैसे तेरा कुत्ता सफेद है पॉमेरियन है मेरा कुत्ता ढटुआ है भूरा है ये भी कोई बात है कुत्ते भी कभी नापे जाते हैं कुत्ते कुत्ते होते हैं होते हैं तो होते हैं इसमें कौन सी बुराई है एक कुत्ते को लेकर काहे इत...
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Tag :घर
  January 8, 2018, 10:36 pm
खुली रखें खिड़कियाँ पूरी नहीं तो आधी ही इतने में भी संकोच हो तो बना लें कुछ झिर्रियाँ नजर भर रखने के लिये बाहर चलती हवाओं के रंग ढंग पर बस खयाल रखें इतना हवायें आती जाती रहें खिड़कियों से बना कर गज भर की दूरी चलें सीधे मुँह मुढ़ें नहीं कतई खिड़कियों की ओर देखनेसमझने के लिये र...
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Tag :पर्दे
  January 6, 2018, 11:23 pm
कोई बुरी बात नहीं है ढूँढना लिखे हुवे के चेहरे को कुछ लोग आँखें भी ढूँढते हैं कुछ की नजर लिखे हुवे की कमर पर भी होती है कुछ पाजेब और बिछुओं को देख भर लेने की ललक के साथ शब्दों से ढके हुऐ पैरों की अँगुलियों के दीदार भर के लिये नजरें तक बिछा देते हैं सबके लिये रस्में हैं अपने...
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Tag :बकवास
  January 4, 2018, 9:41 pm
दो दिन निकल लिये कौन से कैलेण्डर के निकले पता नहीं है सोमवार मंगलवार की चीर फाड़ कब शुरु होगी कौन करेगा अभी तो किसी ने कुछ कहा नहीं है दो दिन पहले घर पर लटके कैलेण्डर में चढ़ी तारीख उछल रही थी देखा था सपने में सपने देखने पर अभी तक तो कोई पैसा लगा नहीं है पूना में हुई है मारपी...
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Tag :चाँद
  January 2, 2018, 10:48 pm
आईये फिर से शुरु हो जायें गिनती करना उम्मीदों की उम्मीदें किसकी कितनी उम्मीदें कितनी किससे उम्मीदें हर बार की तरह फिर एक बार मुड़ कर देखें कितनी पूरी हो गई कितनी अधूरी खुद ही रास्ते में खुद से ही उलझ कर कहीं खो गई आईये फिर से उलझी उम्मीदों को उनके खुद के जाल से निकाल कर एक...
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Tag :कुर्सी
  December 31, 2017, 7:32 pm
कविता करते करते निकल पड़ा एक कवि  हिमालयों सेहिमालय की कविताओं को बोता हुआ हिमालयी पहाड़ों के बीच से छलछल करती नदियों के साथ लम्बे सफर में दूर मैदानों को साथ चले उसके विशाल देवदार के जंगल उनकी हरियाली साथ चले उसके गाँव के टेढ़े मेढे‌ रास्ते साथ चली उसके गोबर मिट्टी से स...
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Tag :पुण्यतिथी
  December 28, 2017, 10:28 pm
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