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उलूक टाइम्स

लिखना जरूरी है पढ़ने वालों के लिये मत रुक नालिख कुछ भी काम तमाम कर नाचल शुरु होजा जाड़े निकल चुके हैं गरमी शुरु हो चुकी है अब फैल कर लिख ना चल शुरु हो जा जितना सिकुड़ना था जिसको वो सिकुड़ चुका है जितना उखड़ना था जिसको वो उखड़ चुका है मन करता है तेरा उड़ने का तो किसने रोका है उड़ ना च...
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Tag :कर ना
  March 29, 2017, 8:26 pm
शायद पता नहीं होता हैदूर देखने की आदत नहीं डाल रहा होता है देख भी नहीं रहा होता है गिद्ध होने का बहुत ज्यादा फायदा हो रहा होता है आस पास के कूड़े कचरे को सूँघता हीफिर रहाहोता है खुश्बुओं की बात कभी थोड़ी सी भी नहीं कर रहा होता है लाशों के बारे में सोचता फिर रहा होता है कहीं भ...
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Tag :बेशरम. बेशर्मी
  March 22, 2017, 8:29 pm
कभी कभी सब कुछ शून्य हो जाता है सामने से खड़ा नजर आता है कुछ किया नहीं जाता है कुछ समझ नहीं आता है कुछ देर के लिये समय सो जाता है घड़ी की सूंइयाँ चल रही होती है दीवार पर सामने की हमेशा की तरह जब कभी डरा जाता है उस डर से जो हुआ ही नहीं होता है बस आभास दे जाता है कुछ देर के लिये ऐसे ...
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Tag :कृष्ण
  March 18, 2017, 11:21 pm
अब छोड़ भी दे नापना इधर और उधर अपने खुद के पैमाने से  कभी पूछ भी लिया कर अभी भी सौ का ही सैकड़ा है क्या जमाने से लगता नहीं है कल ही तो कहा था किसी ने शराब लाने के लिये घर के अन्दर से लड़खड़ाता हुआ कुछ ही देर पहले ही शायद निकल के आया था वो मयखाने से ना पीना बुरा है ना पिलाने में ही ...
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Tag :कब्रगाह
  March 16, 2017, 10:58 pm
अब होली तो होली ठैरी सालों साल से होरी ठैरी होली पर ध्यान लगाओ ठैरा क्या ठैरा ठैरी क्या ठैरी से दिमाग हटाओ हर साल आने वाली ठैरी हर बार चली जाने वाली ठैरी रंग उड़ाने रंग मिलाने वाली ठैरी कबूतर कौए हो जाने वाले ठैरे रंग मिलाओ मिलाकर इंद्रधनुष बनाओ ये क्या ठैरा सब हरा पीला ल...
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Tag :ठर्री
  March 12, 2017, 8:59 pm
सीधी बोतल उल्टी कर खाली करना फिर खाली बोतल में फूँक मार कर कुछ भरना रोज की आदत हो गयी है देखो तो खाली बोतलें ही बोतलें चारों ओर हो गयी हैं कुछ बोतलें सीधी पड़ी हुई हैं कुछ उल्टी सीधी हो गयी हैं बहुत कुछ उल्टा सीधा हुआ जा रहा है बहुत कुछ सीधा उल्टा किया जा रहा है पूछना मना है ...
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Tag :गधा
  March 8, 2017, 8:10 pm
चल बटोरें रंग बिखरे हुऐ इधर उधर यहाँ वहाँ छोड़ कर आ रहा है आदमी आज ना जाने सब कहाँ कहाँ सुना है फिर से आ गयी है होलीबदलना शुरु हो गया है मौसम चल करें कोशिश बदलने की व्यवहार को अपने ओढ़ कर हंसी चेहरे पर दिखाकर झूठी ही सही थोड़ी सी खुशी मिलने की मिलाने की सुना है फिर से आ गयी है ह...
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Tag :नंगा
  March 6, 2017, 10:48 pm
बड़े दिनों के बाद आज अचानक फिर याद आ पड़े सियार कि बहुत अच्छे उदाहरण के रूप में प्रयोग किये जा सकते हैं समझाने के लिये बेतार के तार रात के किसी भी प्रहर शहर के शहर हर जगह मिलते हैं मिलाते हुऐ सुर में सुर एक दूसरे के जैसे हों बहुत हिले मिले हुऐ एक दूसरे में यारों के हो यार और आ...
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Tag :तार
  February 28, 2017, 10:34 pm
कब किस को देख कर क्या और कैसी पल्टी खाना शुरु कर दे दिमाग के अन्दर भरा हुआ भूसा भरे दिमाग वालों से पूछने की हिम्मत ही नहीं पड़ी कभी बस इसलिये पूछना चाह कर भी नहीं पूछा उलझता रहा उलटते पलटते आक्टोपस से यूँ ही खयालों में बेखयाली से यहाँ से वहाँ इधर से उधर कहीं भी किधर भी घुसे ...
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Tag :आठ
  February 22, 2017, 8:59 pm
बहुत कुछ कहना है कैसे कहा जाये नहीं कहा जा सकता है लिखना सोच के हिसाब से किसने कह दिया सब कुछ साफ साफ सफेद लिखा जा सकता है सब दावा करते हैं सफेद झूठ लिखते हैं सच लिखने वाले शहीद हो चुके हैं कई जमाने पहले ये जरूर कहा जा सकता है लिखने लिखाने के कोर्ट पढ़े लिखे वकील परिपक्व जज ...
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Tag :उलूक. रायता
  February 16, 2017, 8:35 pm
बस चार दिन की है बची बैचेनी फिर बजा लेना बाँसुरी लगा कर आग रोम को पूरे सब कुछ बदल जायेगा जब बनेगी राख देख लेना मिचमिचाती सी अगर बन्द भी होगी तब भी आँख धुआँ खाँसेगा खुद बूढ़ा होकर जले जंगल का बहेगी नाक आपदा के पानी की बहुत जोरों से सारा हरा भूरा और सारा भूरा हरा हो लेगा यूँ ह...
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Tag :जंगल
  February 11, 2017, 9:31 pm
युद्ध हो रहा है बिगुल बज रहा है सारे सिपाही हो रहे हैं अपने अपने हथियारों के साथ सीमा पर जा रहे हैं देश के अन्दर की बात हो रही है कुछ ही देश प्रेमी हैं बता रहे हैं बाकी सबदेश द्रोही हैं देश द्रोहियों से आह्वान कर रहे है देश प्रेमियों को चुनने को क्यों नहीं आगे आ रहे हैं देश...
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Tag :खुजली
  February 9, 2017, 8:17 pm
एकदम अचानक अनायसपरिपक्व हो जाते हैं कुछ मासूम चेहरे अपने आस पास के फूलों के पौंधों को गुलाब के पेड़ में बदलता देखना कुछ देर के लिये अचम्भित जरूर करता है जिंदगी रोज ही सिखाती है कुछ ना कुछ इतना कुछ जितना याद रह ही नहीं सकता है फिर कहीं किसी एक मोड़ पर चुभता है एक और काँटा नि...
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Tag :आदमी
  February 8, 2017, 7:49 pm
(कृपया बकवास को कवि, कविता और हिंदी की किसी विधा से ना जोड़ेंं और टुकड़ों को ना जोड़ें, अभिव्यक्ति कविता से हो और कवि ही करे जरूरी नहीं होता है ) सोच खोलना बंद करना भी आना चाहिये सरकारी दायरे में ज्यादा नहीं भी कम से कम कुछ घंटे ही सही >>>>>>>>>>>>बेहिसाब रेत में बिखरे...
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Tag :कविता
  February 1, 2017, 8:04 pm
रोज के नौ और पाँच बजे के सायरन के अलावा आज ग्यारहऔर ग्यारह बज कर दो मिनट पर दो बार बजे सायरन के बीच के दो मिनट सायरन मौन रहा श्रद्धांजलि देता रहा हर वर्ष की तरह सड़क पर दौड़ती गाड़ियाँ करती रही चुनाव प्रचार बजाती रही भोंपू चीखता रहा भाड़े का उद्घोषक श्रद्धा के साथ अपने गाँ...
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Tag :ग्यारह बजे
  January 30, 2017, 8:38 pm
चेहरे दिखा करते थे कभी आज झंडे हो रहे हैं उग रहे हैं झंडे बेमौसम बिना पानी झंडे ही झंडे हो रहे हैं चल रहे हैं लिये हाथ में डंडे ही डंडे कपड़े रंगीले हरे पीले गेरुए हो रहे हैं धनुष है ना तीर है निशाने सपनों में लिये अपने अपने जगह जगह गली कोने अर्जुन ही अर्जुन हो रहे हैं शक्ल ...
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Tag :झंडे
  January 27, 2017, 8:16 pm
गण हैं तंत्र है सिपाही हैं झंडा है एक है तिरंगा है आजाद हैं आजादी है शहनाई हैं देश है जज्बा है सेवा है मिठाई है मलाई है मेवा है चुनाव हैं जरूरी हैं लड़ना है मजबूरी है दल है बल है कोयला है कोठरी हैं काजल है धुलाई है निरमा हैसफेद है जल है सफाई है दावेदारी है दावेदार हैं कई हैं ...
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Tag :छब्बीस जनवरी
  January 25, 2017, 10:04 pm
चोर सिपाही खेल खेलते खेलते समझ में आना शुरु हो जाते हैं चोर भी सिपाही भी थाना और कोतवाल भी समझ में आ जाना और समझ में आ जाने का भ्रम हो जाना ये अलग अलग पहलू हैं इस पर अभी चलो नहीं जाते हैं मान लेते हैं सरल बातें सरल होती हैं सब ही सारी बातें खास कर खेल की बातें खेलते खेलते हीब...
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Tag :ऑडिट
  January 12, 2017, 9:56 pm
क्रमंचय संचयकितने लोगजानते हैं कितने समझ ले जाते हैं क्रमंचय संचय उच्च गणित में प्रयोग किया जाता है गणित विषय पढ़ने और समझने वाला भी दिमाग में जोर लगाता है जब क्रमंचय संचय के सवालों को हल करने पर आता है किताबों को छोड़ दिया जाये अपने आसपास के लोग और समाज को देखा जाये नही...
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Tag :विश्व हिन्दी दिवस
  January 10, 2017, 9:35 pm
कसमसाहट नजर आना शुरु हो गयी है त्योहार नजदीक जो आ गया है अन्धों का ज्यादा और बटेरों का कम अपने अपने अन्धों के लिये लामबन्द होना शुरु होना लाजिमी है बटेरों का तू ना अन्धा है ना हो पायेगा बड़ी बड़ी गोल आखें और उसपर इस तरह देखने की आदत जैसे बस देखेगा ही नहीं मौका मिले तो घुस भ...
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Tag :आदत
  January 8, 2017, 9:28 pm
जैसे ही सोचो नये किस्म का कुछ नया करने की कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ ऐसा हो जाता है जो ध्यान भटकाता है और लिखना लिखाना शुरु करने से पहले ही कबाड़ हो जाता है बड़ी तमन्ना होती है कभी एक कविता लिख कर कवि हो जाने की लेकिन बकवास लिखने का कोटा कभी पूरा ही नहीं हो पाता है हर साल नये सा...
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Tag :कबाड़
  January 4, 2017, 7:24 pm
प्रतियोगिता झूठ बोलने की ही हो रही है हर तरफ आज के दिन पूरे देश में किसी एक झूठेके बड़े झूठ ने ही जीतना है झूठों में सबसे बड़े झूठे को मिलना है ईनाम किसी नामी बेनामी झूठे ने ही खुश हो कर अन्त में उछलना है कूदना है झूठे ने ही देना है झूठे को  सम्मान सारे झूठे नियम बन चुके ...
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Tag :खेल
  December 30, 2016, 7:50 pm
बड़ी सोच का बड़ा कबीर खुद को दिखा दिखा कर ही बड़ा फकीर हुआ जाता है छोटी सोच बता कर प्रतिद्वन्दी की अपने जैसों के गिरोह के गिरोहबाजोंको समझाकर आज किसी की भी एक बड़ी लकीर को बेरहमी के साथ खुले आम पीटा जाता है लकीर का फकीर होना खुद का फकीर को भी बहुत अच्छी तरह से समझ में आता है फ...
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Tag :गिरोह
  December 26, 2016, 8:34 pm
गुंडे की गुंडई होनी ही चाहिये अब गुंडा गुंडई नहीं करेगा तो क्या भजन करेगा वैसे ऐसा कहना भी ठीक नहीं है गुंडे भजन भी किया करते हैं बहुत से गुंडे बहुत अच्छागाते हैं कुछ गुंडे कवि भी होते हैं कविता करना और कवि होना दोनो अलग अलग बात हैंं गुंडई कुछ अलग किस्म की कविता है गुंडई ...
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Tag :गुंडा
  December 20, 2016, 7:26 pm
नये जमाने के साथ बदलना सीखें कुछ उद्योग धन्धे नये धन्धों से अलग खींच कर धन्धों के खेत में खींच तान कर अकलमंदी के डंडे से सींचें पनपायें आओ धमकायें धमकाने के धन्धे से किसी की किस्मत चमकायें आओ बुद्ध बन जायें ऊपर कहीं बैठ कर ऊँचाई अपनी लोगों को समझायें नये नये उद्योगों क...
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Tag :गलियाएं
  December 15, 2016, 7:27 pm
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