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शीराज़ा [Shiraza] : View Blog Posts
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शीराज़ा [Shiraza]

[आज इस 'ब्लॉग' के चार वर्ष पूरे हो गए। इन चार वर्षों में आप लोगों का जो स्नेह और सहयोग मिला, उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया और आभार। यूँही आप सभी का स्नेह और मार्गदर्शन मिलता रहे यही चाह है। इस मौक़े पर एक ग़ज़ल आप सब के लिए। सादर,]   ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  November 3, 2017, 4:45 pm
सामने   आप   मेरे   रहा   कीजिएमुझको मुझसे न ऐसे जुदा कीजिएहै मुहब्बत अगर तो कहा कीजिएबात दिल की हमेशा सुना कीजिए क्या ख़ता है मेरी आप क्यूँ हैं ख़फ़ागर गिला हो कोई तो कहा कीजिएकब बदल जाए नीयत किसी की यहाँहर किसी से न  हँस के मिला कीजिएमैंने अहसास दिल का बयाँ कर दियायूँ  न  ...
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Tag :
  October 10, 2017, 3:08 pm
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शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  September 9, 2017, 4:14 pm
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शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :ग़ज़ल
  August 16, 2017, 7:33 pm
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शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :ग़ज़ल
  May 14, 2017, 5:13 pm
चंचल मोहक तितलियाँ, रंग-बिरंगे पंखकरती थी अठखेलियाँ, जो फूलों के संगबगिया में रौनक नहीं, उपवन है बेरंगकहाँ तितलियाँ गुम हुईं, लेकर सारा रंग   ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :कविता
  March 14, 2017, 11:01 pm
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शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :इनकार
  February 14, 2017, 4:21 pm
यकीनन नज़र में चमक आरज़ी है  महज़ चार दिन की यहाँ चाँदनी है जिधर  देखिए  हाय तौबा मची है हथेली पे सरसों भला कब उगी है चराग ए मुहब्बत बचायें  तो  कैसे यहाँ नफ़रतों की हवा चल पड़ी है फ़क़त आंकड़ों में नुमायाँ तरक्की यहाँ मुफलिसी दर-बदर फिर रही है कहाँ तितलियाँ हैं, हुए गुम परिंदे फ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :नया साल
  January 2, 2017, 12:00 am
[आज इस 'ब्लॉग' के तीन वर्ष पूरे हो गए। इन तीन वर्षों में आप लोगों का जो स्नेह और सहयोग मिला, उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया और आभार। यूँही आप सभी का स्नेह और मार्गदर्शन मिलता रहे यही चाह है। इस मौक़े पर एक ग़ज़ल आप सब के लिए। सादर,]  ज़िंदगी तुझसे निभाना आ गया हौसलों को आज़मा...
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Tag :
  November 3, 2016, 9:38 pm
शरद पूनो कौमुदी अमी धारा झड़ते परिजात अमानी कृष्ण महारास की बेला   मनमोहक निशा  © हिमकर श्याम (चित्र गूगल से साभार) ...
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Tag :शरद पूर्णिमा
  October 15, 2016, 11:22 pm
हवाओं में तरन्नुम  है,  चमन गाने लगा  देखो फुहारें  गुनगुनाती  हैं, शज़र भी झूमता देखो घटाएँ झूम कर  बरसीं, छमाछम नाचतीं  बूँदें गुलाबी ये फ़ज़ा देखो, नशा बरसात का देखो बुझाती तिश्नगी धरती, दिखातीं बिजलियाँ जल्वा किसानों  की  ख़ुशी  देखो, मयूरा  नाचता  देखो जमीं लगती नहाई सी...
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Tag :बरसात
  September 17, 2016, 4:51 pm
वही हालात हैं अब तक पुराने  न कुछ बदला न आए दिन सुहाने  किसे मतलब है ज़ख़्मों से हमारे  कोई आता नहीं मरहम लगाने  हमारी आँख के आँसू न सूखे चले आए नये ग़म फिर रुलाने कोई वादा नहीं उसने निभाया उसे अब याद आते सौ बहाने लिए उम्मीद हम बैठे अभी तक वो लायेंग...
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Tag :
  August 15, 2016, 7:33 pm
अक्सर ही  ऐसा  होता है सुकरात यहाँ पे मरता है बूढ़ा दरख़्त यह कहता हैदिन  जैसे तैसे  कटता है पाँवों  में  काँटा  चुभता  है लेकिन चलना तो पड़ता है मोल नहीं  है सच का  कोई पर खोटा सिक्का चलता है सपने सारे  बिखरे जब से दिल चुपके चुपके रोता है आया है पतझड़ का मौसम  शाखों  से  पत्ता...
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Tag :दरख्त़
  July 14, 2016, 1:27 pm
हमसफ़र भी नहीं है न है राहबर चल सको तो चलो साथ मेरे उधर मेरे हालात से तुम रहे बेख़बर हाल कितना बुरा है कभी लो ख़बरसाथ कुछ देर मेरे जरा तो ठहरमान जा बात मेरी ओ जाने ज़िगरयाद तेरी सताती हमें रात भरजागते जागते हो गयी फिर सहरदिल पे करते रहे वार पे वार तुमऔर चलाते रहे अपनी तीरे नज़र...
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Tag :ग़ज़ल. राहबर
  July 1, 2016, 4:58 pm
हरे जंगल जो कटते जा रहे हैंयहाँ मौसम बदलते जा रहे हैं किधर जाएँ यहाँ से अब परिंदेनशेमन सब उजड़ते जा रहे हैं नयेपन की हवा ऐसी चली हैउसी रंगत में ढ़लते जा रहे हैं नयी तहज़ीब में ढलता ज़मानारिवायत को बदलते जा रहे हैं सिखाते हैं सलीका हमको दीयेहवाओं में जो जलते जा रहे हैं ...
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Tag :ग़ज़ल
  June 5, 2016, 6:53 pm
दिल की बातें पढ़तीं माएँ दर्द भले हम लाख छुपाएँ रहती हरदम साथ दुआएँ हर लेती सब कष्ट बलाएँ नाम कई एहसास वही है इक जैसी होती सब माएँ फ़ीके लगते चाँद सितारे माँ के जैसा कौन बताएँ सारी पीड़ा हँस के सहती कर देती माँ माफ़ ख़ताएँ माँ का रिश्ता सबसे प्यारा रब  से  ऊपर होतीं माएँ ...
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Tag :मातृ-दिवस
  May 8, 2016, 8:03 pm
मिटाना हर बुराई चाहता  हूँ  ज़माने की भलाई चाहता हूँ तेरे दर तक रसाई चाहता हूँ मैं  तुझसे आशनाई चाहता हूँ लकीरों से नहीं हारा अभी मैं  मुक़द्दर से लड़ाई  चाहता  हूँ दिलों के दरमियाँ बढ़ती कुदूरत मैं थोड़ी अब  सफाई चाहता हूँ हुआ जाता हूँ मैं मुश्किल पसंदी नहीं  अब  रहनुमा...
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Tag :बुराई
  April 24, 2016, 6:56 pm
[नव संवत्सर और सरहुल पर दोहे ] नव संवत्, नव चेतना, नूतन नवल उमंग। साल पुराना ले गया, हर दुख अपने संग।। चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा, वासन्तिक नवरात। संवत्सर आया नया, बदलेंगे हालात।। जीवन में उत्कर्ष हो, जन-जन में हो हर्ष। शुभ मंगल सबका करे, भारतीय नव वर्ष।। ढाक-साल सब ख...
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Tag :नव संवत्सर
  April 8, 2016, 1:43 pm
भुला कर नफ़रतें सारी गले मिल यार होली मेंमिटा दे अब दिलों की रंजिशें, तक़रार होली में मिटे हर रंज दुनिया से, चमन गुलज़ार होली मेंसभी  के  वास्ते  हो  खुशनुमा  संसार होली में खिली सरसों, हँसे टेसू, पलाशी मन हुआ देखोभरा है रंग कुदरत में अजब गुलकार होली में नज़ारा है बड़ा दिल...
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Tag :तकरार
  March 24, 2016, 12:47 pm
तमाशा जात मज़हब का, खड़ा करना बहाना हैसभी  नाकामियाँ अपनी  उन्हें  यूँ  ही छुपाना है ढ़ले सब एक  साँचे में, नहीं  कोई अलग लगतामुखौटों  में  छुपे  चेहरे,  ज़माने को  दिखाना है है सारा खेल कुरसी का, समझते क्यूँ नहीं लोगोलगा के आग नफ़रत की, उन्हें बस वोट पाना है बदल ज...
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Tag :तमाशा
  March 13, 2016, 10:45 am
मुहब्बत की हक़ीक़त आज़मा कर देखते हैं किसी की चाह सीने में जगा कर देखते हैं ज़मीनों आसमा के फासले मिटते न देखा चलो हम आज ये दूरी मिटा कर देखते हैं ये कैसी आग है जिसमे फ़ना होते हैं कितने कभी इस आग में खुद को जला कर देखते हैं बड़ी बेदर्द दुनिया है बड़ा खुदसर जमाना किसी के दर्द को ...
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Tag :मुहब्बत
  February 14, 2016, 9:01 pm
गुज़र रहा है लम्हा-लम्हा उड़ा जा रहा हाथों से क्षण। थमतीं नहीं   चलती रहीं   घड़ियाँ सँभलतीं नहीं  मजबूरियाँ रीत रहा मन। क्यूं बैठ रोता सूख रहा समय का सोता छीन रही उमर  शेष है स्वपन। © हिमकर श्याम (चित्र गूगल से साभार) ...
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Tag :मन. स्वप्न. वर्ल्ड कैंसर डे पर
  February 4, 2016, 11:34 pm
दिल में हिंदुस्तान है, सांसों में हिंदुस्तान है ऐ वतन तेरे लिए यह जान भी क़ुरबान है हर किसी को नाज़ गंगो जमन तहज़ीब पर अम्न का पैगाम अपनी  खूबियाँ पहचान है हिन्द  की  माटी  में  जन्मे  सूर, मीरा जायसी मीर, ग़ालिब की जमीं ये, भूमि ये रसख़ान की धर्म, भाषा, वेशभूषा है अलग फिर भी  मगर...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :तिरंगा
  January 26, 2016, 4:24 pm
खिड़कियों से झाँकती है रोशनी नए साल की आ गयी फिर वो घड़ी है शाम इस्तकबाल की चार दिन की चाँदनी यह फिर अँधेरी रात है ज़िंदगी की राह मुश्किल, फ़िक्र आटे दाल की याद बन के रह गयीं घड़ियाँ पुराने साल की धड़कने  गिन- गिन के रखिए हर साल की आँकड़े कुछ और कहते पर हकीकत  कुछ अल...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :खूँटियों
  January 5, 2016, 6:25 pm
अहसास न होते तो, सोचा है कि क्या होता ये अश्क़ नहीं होते,  कुछ भी न मज़ा होता तक़रार भला  क्यूँकर,  सब लोग यहाँ अपने साजिश में जो फँस जाते, अंजाम बुरा होता बेख़ौफ़  परिंदों   की, परवाज़  जुदा  होती उड़ने का हुनर हो तो, आकाश झुका होता अख़लाक़ जरूरी है, छोड़ो  न  इसे  लोगो तहज़ीब बची हो तो, क...
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Tag :अख़लाक़
  December 24, 2015, 2:45 pm
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