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Blog: Yaadein

Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाआज हमें एक मित्र ने काम की बात बताई है। वो मेरे घर नहीं आये थे। मैं ही उनके घर गया। भयानक उलझन हो रही थी। बात करने कोई पात्र व्यक्ति मिला ही नहीं। हमारी नज़र में ढंग के आदमी की पहचान वो होती है जो विधिवत चाय के लिए पूछे नहीं, बल्कि चाय ले आये। लेकिन प्रॉब्लम ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   4:11am 14 Aug 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाक़रीब महीना भर होने को आया है। भूख नहीं लगती है। पहले रोटी की भूख गायब हुई और अब चावल नहीं अच्छे लगते। वज़न भी कम हो गया है।यार दोस्त तो देखते ही कृपालू हो जाते हैं - अरे, क्या हो गया? इतने मुरझाये हुए दिखते? डॉक्टर को दिखाया? क्या कहा?हम जैसे टाल जाते हैं - आज स... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   1:29pm 13 Aug 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-Vir Vinod Chhabraहमें याद है कि हमारे परिवार में एक बच्चे को 'पंडत'अर्थात पंडित कहा जाता था। कारण यह था कि न वो मीट-मच्छी खाता था और न ही अपशब्द बोलता था। और इन सबसे दूर रहने वाली बच्ची'ब्राह्मणी'कहलाती थी। खराब काम करने पर हमें 'मलिच्छ'की उपाधि से विभूषित किया जाता था।हमारे सीनियर ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   8:04pm 12 Aug 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबरा हमारे एक अस्सी वर्षीय मित्र को खराब लगा जब एक सोसाइटी ने एक हमारे ८२ वर्षीय मित्र को न सिर्फ वयोवृद्ध घोषित किया गया बल्कि इसी नाते बाक़ायदा सम्मानित भी कर दिया। उन्हें बहुत खराब भी लगा। हम होते तो हमें भी बेहद बुरा लगता। भाड़ में सम्मान /मित्र कहते हैं ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   10:35am 12 Aug 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाबिमल रॉय 'दो बीघा ज़मीन' (१९५३) बनाने की योजना बना रहे थे। कहानी कुछ यों थी। लगातार दो साल सूखा पड़ा। एक किसान शंभू महतो को दो बीघे का खेत ज़मीदार के पास गिरवी रखने को मजबूर होना पड़ा। शंभू पर ज़मींदार दबाव बनाता है कि या तो खेत बेच दे या फिर क़र्ज़ चुकाओ। पुरखों की ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   8:41pm 11 Aug 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाआज सुबह सुबह ही आ धमके हमारे एक बड़े भाई। दद्दा कहते हैं हम उन्हें। बोले - क्या लिख पढ़ रहे हो? हमने कहा - फेस बुक भर रहा हूं और उसी में से कुछ चुनींदा लेख और ज़िंदगी से उठाये किस्से-कहानियां ब्लॉग में भी डालते चलता हूं। दद्दा भन्नाये - बस यही करते रहना। किसी दि... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   6:30pm 10 Aug 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ा अरब देश में बुखारी नाम के एक ज्ञानी-ध्यानी रहते थे। वो अपने ईमानदारी और साफगोई के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध थे। रोज़ सैकड़ों लोग उनसे सलाह-मशविरा करने आते थे। एक बार बुखारी को समुंदर पार मुल्क से बुलावा आया कि अपने नेक ख्यालात और तजुर्बों से इस मुल्क के बं... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   10:56am 9 Aug 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाबरसों से देख रहा हूं। सुबह-सुबह बाथरूम में घुस गए। घंटों लगाए। जम कर पानी बहाया। १०८ दफे ओम नमो शिवाय किया। पता नहीं नहाये भी कि नहीं। सर्दी के दिन हुए तो निसंदेह नहीं नहाया। मुंह-हाथ धोना ही पर्याप्त रहा। शीशा देखा। माथे पर लंबा और गहरा लाल-सिंदूर वाला ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   10:35am 9 Aug 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाचूंकि मैं बहुत बड़ा व्यापारी नहीं हूं। प्रशासनिक अधिकारी या वरिष्ठ लेखक नहीं हूँ और न नेता हूं। इसलिए मुझे अपना हेल्थ बुलेटिन खुद जारी करना पड़ता है।आगे खबर यह है कि सेहत में सुधार के लक्षण हूं। चल-फिर रहा हूं। स्कूटी - कार चला लेता हूं। अब यह बात दूसरी है ... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   5:11am 8 Aug 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ा कल दोपहर खाना खाने के बाद जो नींद आयी तो शाम को ही टूटी। टूटी नहीं बल्कि तोड़ी गयी। मेमसाब 'चाय चाय'करती हुईं आयीं और एक झटके में तोड़ कर गयीं। कोई हसीन ख्वाब देख रहे थे। यूं तो 75% ख्वाब मेमोरी से गायब हो जाते हैं और बचे हुए दो घंटे बाद वाश आउट। लेकिन अपवाद स... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   1:38pm 26 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाकई साल पहले की बात है। हमारे पेट में बहुत दर्द उठा। डॉक्टर से मिले। वो सिगरेट फूंक रहे थे। हमें देख कर सिगरेट बुझा दी। हमें सर से पांव तक देखा। कायदे से परीक्षण किया। दवा लिख दी और साथ में एडवाइस किया - बरखुरदार, सिगरेट पीना बंद कर दो। यह कह कर उन्होंने बुझ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   2:39am 26 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ायूं तो हमें दिलो जान से चाहने वालों की कमी नहीं है। लेकिन एक हैं रवि प्रकाश मिश्रा मेरे पक्के भाजपाई दोस्त। लेकिन दोस्ती पहले और पॉलिटिक्स बाद में। मुझसे महीने भर ही बड़े होंगे। कहीं खाया-पीया और पेमेंट का नंबर आया तो इन्होंने मुझे कभी जेब में हाथ नही... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   1:41pm 25 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ा कई साल पहले की बात है। मैं नया-नया अफ़सर के पद पर प्रमोट हुआ था। हमारे ख़ानदान हम पहले थे.जो क्लास वन अफसर के लेवल पर पहुंचे थे। इससे पहले क्लास टू आधा दर्जन धक्के खाते रहे हैं। वो कहते हैं कि ख़ुदा जब हुस्न देता है, नज़ाकत आ ही जाती है। कुछ ऐसा ही हाल अपना भी हु... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   3:53pm 24 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाहर साल का ०४ अक्टूबर मेरे लिए महत्व का दिन होता है। नहीं, नहीं। न मेरा जन्मदिन है और न पत्नी का। न बच्चों का। न विवाह का दिन है। न माता-पिता या भाई-बहन का जन्मदिन। न ही साली-साडू या साल साले की पत्नी  का जन्मदिन। प्रेमिका कोई थी नहीं। एक जो थी भी तो वो एकतरफ... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   3:56am 23 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ा अंग्रेज़ी में हाथ तंग होना कोई शर्म की बात नहीं है। हम खुद इसके मरीज़ रहे हैं। अंग्रेज़ी अख़बारों और फ़िल्मी रिसालों को पढ़ कर हमने अंग्रेज़ी सीखी। बाकी कसर बड़े बुज़ुर्गों ने ठीक कर दी। नौकरी के शुरुआती १५ साल तो अंग्रेज़ी में ही काम करना पड़ा। यों सरकारी कार्... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   11:05am 22 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ातकरीबन 20 साल पहले मैंने अपने मरहूम पिता जी- राम लाल, उर्दू के मशहूर अफ़सानानिगार- की पहली बरसी पर एक लंबा-चौड़ा लेख लिखा -अब यहां कोई नहीं आता। मेरे दोस्त आनंद रोमानी ने इस पर एक ख़त लिखा। इसे हर्फ़-ब-हर्फ़ मैं पेश कर रहा हूं -हैलो, विनोद!इसमत ने अपने भाई अज़ीम बेग च... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   9:17am 21 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाएक ज़माना था जब हिंदू बच्चे अपने पिता को पिताजी कह कर पुकारते थे और मुस्लिम बच्चे अब्बा। हमें याद है एक बच्चे के पिता को स्कूल बुलाया गया। बच्चे ने अपने पिता का परिचय टीचर से कराया - सर, यह मेरे फादर हैं। टीचर ने बच्चे को डांट दिया - घर में पिताजी को फादर पुक... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   9:54am 20 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीरविनोदछाबड़ाग्यारहसालकारिंकूपढ़ाईऔरखेलकूदमेंबेहदहोशियारहोनेकेसाथ-साथबेहदसुशीलभीथा।इसीवजहसेस्कूलमेंउसकीबहुततारीफ़होतीथी।कालोनीमेंतोसभीमम्मी-पापाअपनेबच्चोंकोरिंकूकीतरहनेकबननेकीसलाहदेतेथे।बालहोशियारसुशीलशानशैतानशर्तमगरपिछलेदोमहीनोंमेंसबकु... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:29pm 19 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाकिसी मॉडल या सिनेमा की नायिका के हाथ बना अचार! नहीं, मैं तो कतई नहीं लूंगा। क्योंकि मुझे मालूम है कि इनके पास आउटडोर के इतने ज्यादा काम हैं कि दम मारने की फुरसत नहीं। यह तो सिर्फ बेचने के लिए खड़ी है। इसके लिए इन्हें ढाई-तीन लाख से कम नहीं मिलेंगे। फिर खतरे ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   9:11pm 18 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाउस दिन मुद्दत के बाद उषा को उसकी सहेली स्नेहा मिलने आई। दस साल पहले वो उसकी शादी में आई थी। दोनों ने ज़िंदगी के खट्टे-मीठे अनेक पल शेयर किये। उषा बेहद उत्साहित है - दस मिनट रुक। ऑफिस का टाइम ओवर होने ही वाला है। घर चलते हैं। अपने हस्बैंड से भी तुझे मिलाउंगी... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   8:04am 18 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ासन १९४७ की तक़सीम की वज़ह से पैदा हुए फसादों में लाखों हिन्दू- मूसलमानों की जानें गयीं। यह वाक्या मामूली नहीं है । दुनिया की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों में शुमार है। लाखों परिवार उधर से उजड़ कर इधर आये और इधर से उधर गए। तिजारत अर्श से फर्श पर आ गिरी। लेकिन इ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   6:50am 17 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाअभी कुछ माह पहले की बात है। एक रिटायर चीफ़ इंजीनयर साहब पेंशन की मद में प्राप्त भुगतान का विवरण लेने ऑफिस गए। बाबू ने कोड नंबर पूछा। चीफ़ साहब ने अपना नाम बताया। बाबू ने फिर कोड पूछा। चीफ़ साहब ने फिर नाम बताया। बाबू झल्ला गया - नाम नहीं कोड बताएं। बात बढ़ गयी... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   7:56am 15 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाआज बहुत बारिश हुई है। अभी थोड़ी देर पहले ही थोड़ी कम हुई है। बरसात से इतना डर नहीं लगता। मैं डरता हूं तो उसके साईड और ऑफ्टर इफेक्ट्स से। जैसे आज हुआ। बरसात शुरू हुई कि बत्ती चली गई। मोहल्ले के सब-स्टेशन और शहर कंट्रोल फ़ोन मिलाया। कई जानने वालों को भी फोनिया... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   11:36am 14 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाकिसी भी समय मुझे तैयार होने में कुल जमा पांच-सात मिनट लगते हैं। वो भी चेंज करने में, सिर्फ पार्टी में जाने के लिए। कभी-कभी वो भी नहीं। जूता पहना और चल दिए। मुझे लगता है ज्यादा वक़्त आईना देख कर कंघी करने में जाया होता है। मैं वही नहीं करता। सर पर गिने चुने त... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   6:42am 13 Jul 2017
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ा बिजली विभाग का एक मामला फंसा था माननीय हाई कोर्ट में। मुद्दा बहुत गंभीर था। विभागीय वकील के साथ शहर का एक नामी वक़ील भी इंगेज किया   गया। एक दिन हमारे वकील ने सचेत किया कि आपके ऑफिस के स्तर से ठीक से पैरवी नहीं हो रही है। केस हारने की प्रबल संभावना है... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   10:13am 12 Jul 2017
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