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- वीर विनोद छाबड़ादूर एक समृद्ध देश है। उसका राजा बहुत प्रतापी है। आदर्श पुरुष भी है। उसकी पत्नी अप्सरा समान है और  दो प्यारे बच्चे हंस समान। राजा शुचिता की मिसाल हैं। उनके नाम की पूजा भी होती है।राजा के कुछ विरोधी भी हैं। उसके विरुद्ध रोज़ नए खुलासे करते हैं। लेकिन पब्...
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  March 27, 2017, 2:13 am
- वीर विनोद छाबड़ा सिर्फ परदे पर ही नहीं असल में भी वो होता है जिसकी हसीन से हसीन सपने में भी कल्पना नहीं की गयी होती। 'आराधना'फिल्म के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। शम्मी कपूर के साथ शक्ति सामंत 'जाने-अंजाने'बना रहे थे। फिल्म आधी से ज्यादा शूट हो चुकी थी कि बेसमय शम्मी की पत्न...
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  March 25, 2017, 11:56 pm
- वीर विनोद छाबड़ाकभी हम मीट बड़े शौक से खाते थे। कहीं पार्टी-शॉर्टी में जाते थे तो नॉन-वेज सूँघा करते थे। कभी कभी किसी दोस्त की पत्नी मायके गयी होती थी तो उसके घर हम दोस्त मिल कर नॉन-वेज बना कर दावत उड़ाते थे। लेकिन ऐसा भी नहीं मीट खाने के लिए मरे जा रहे हों। अक्सर होता था कि म...
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  March 25, 2017, 12:10 am
- वीर विनोद छाबड़ा बरसों पहले की बात है। एक मित्र बड़े गदगद दिखे। यों हमें ख़ुशगवार चेहरे अच्छे भी लगते हैं। हमने जानना चाहा -  मित्र, माज़रा क्या है? वो बोले - आज मैं खुद पर फ़ख्र महसूस कर रहा हूं। मैंने...योगी बाबा का हफ्ते भर का कोर्स ज्वाइन कर लिया है। पूरे बीस हज़ार जमा ...
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  March 23, 2017, 11:55 pm
- वीर विनोद छाबड़ाहिंदी फिल्मों की खूबसूरत नायिकाओं के इतिहास का जब ज़िक्र होता है तो नंदा की गिनती टॉप पांच में होती है। उनकी ज़िंदगी बहुत ट्रैजिक रही। पिता मास्टर विनायक मराठी फिल्मों के एक्टर थे। लेकिन महज़ ४१ साल की उम्र में वो परलोकवासी हो गए। तब वो महज आठ साल की थी। ब...
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  March 23, 2017, 2:08 am
-वीर विनोद छाबड़ाDrinking is not good for healthकोई ४५ बरस पहले की बात है। हम अपने के मित्र के घर गए। देखा, वो खरगोश को बीयर पिलाने को कोशिश कर रहे थे। हमने पूछा - ऐसा क्यों कर रह हो? वो बोले - यार, ये बिल्ली से डरता है। बीयर पिला कर इसे मुकाबले के लिए तैयार कर रहा हूं। वो दिन है और आज का। हमने दुनि...
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  March 22, 2017, 2:08 am
-वीर विनोद छाबड़ापंजाब के किसी आदमी को दावत पर बुलायें। एक से बढ़ कर एक बढ़िया परोसें। लेकिन अगर सरसों का साग, मक्के की रोटी और लस्सी नहीं है तो दावत बेकार है।  लेकिन हमारे लिए बिना चाय बढ़िया से बढ़िया पार्टी या प्रोग्राम निरर्थक है। उस दिन मित्र का ड्रामा देखते हुए सरदर्द...
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  March 20, 2017, 11:51 pm
-वीर विनोद छाबड़ायाद आते हैं वो दिन। लगभग २२ साल तक रहे लखनऊ के उत्तर रेलवे स्टेशन के सामने मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में। इसमें उत्तर रेलवे के ही कर्मचारी रहते थे। आइस-पाइस खेलते खेलते हम अक्सर स्टेशन पहुंच जाया करते थे। थोड़ी देर बाद खेलना भूल कर ए.एच.व्हीलर के बुकस्टाल पर ...
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  March 20, 2017, 3:42 am
- वीर विनोद छाबड़ाआज़ादी के बाद जो फिल्म राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रस्तुतिकरण के कारण चर्चा का विषय बनी थी वो 'दो बीघा ज़मीन'थी। कहते हैं बिमल रॉय को यह फिल्म बनाने के प्रेरणा वित्तोरियो की 'बाईसाइकिल थीफ'से मिली थी। बिमल दा चाहते थे कि फिल्म का शीर्षक कुछ ऐ...
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  March 18, 2017, 11:46 pm
-वीर विनोद छाबड़ासैकड़ों साल पहले की बात है। यूनान के जंगल में उस लड़के ने चुपचाप लकड़ियां काटीं। उन्हें इस इतना कायदे से बांधा कि चाहे कुछ भी हो जाए एक भी लकड़ी गिर नहीं सकती थी और न ही कोई निकाल सकता था। मजे की बात यह थी कि बांधने की कला भी बड़ी आकर्षक थी। वो प्रतिदिन ऐसा ही कर...
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  March 18, 2017, 12:13 am
- वीर विनोद छाबड़ाहमारे एक मित्र हैं। जब भी मिलने आते हैं तो कोई न कोई नेक सलाह ज़रूर दे कर जाते हैं। आज अभी थोड़ी देर पहले रुख़सत हुए हैं। बता रहे थे - आजकल सहालग का सीज़न है। न्यौते खूब आ रहे हैं। कई लोगों के हाथ में बड़े बड़े आकर्षक पैक वाले गिफ्ट होते हैं। लेकिन ज्यादतर लोग नक़द ...
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  March 17, 2017, 12:56 am
- वीर विनोद छाबड़ाहिंदी फिल्मों का इतिहास स्टंट फिल्मों के ज़िक्र के बिना अधूरा है। वस्तुतः आज़ादी से पहले तक का युग स्टंट, पौराणिक और कॉस्ट्यूम फिल्मों का ही रहा है। उसके बाद इनका महत्व शनै: शनै: कम होता गया। लेकिन सन १९६३ में एक सी-ग्रेड फिल्म के गीत-संगीत, हैरतअंगेज जादु...
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  March 16, 2017, 3:47 am
-वीर विनोद छाबड़ानए बॉस आये थे। हम उन दिनों हम एक छोटे-मोटे अफ़सर थे। औपचारिकतावश हम उनसे मिलने गए। अपना परिचय दिया।  वो प्राण स्टाईल में बोले - अच्छा तो आप हैं मिस्टर फलां। हमें अचरज हुआ और ख़ुशी भी कि बॉस हमें पहले से ही जानते हैं। हमने बाअदब से जवाब दिया - जी सर।  बॉस इस ...
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  March 15, 2017, 12:11 am
-वीर विनोद छाबड़ाउस दिन सुबह एक दुखद ख़बर मिली। एक रिश्तेदार स्वर्गवासी हो गए। हम जब पहुंचे तो मिट्टी उठने की तैयारी चल रही थी। मृत देह को नहलाया-धुलाया जा रहा था। हमने देखा एक साहब पतली नोक वाला प्लास लेकर भीतर जा रहे थे। हम कारण समझ गए। यह भी एक रस्म है। मृतक के हाथ से घड़ी,...
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  March 13, 2017, 11:58 pm
-वीर विनोद छाबड़ावो बेहद दुष्ट और सनकी राजा था। किसी को भी नहीं बख्शता था। ज़रा सी गलती हुई नहीं कि बहुत कड़ी सजा दी। जांच भी नहीं कराई। न्यूनतम सजा थी - बारह घंटे शून्य से नीचे डिग्री पानी में खड़े रहो।राजा का मंत्री बहुत दयालु और बुद्धिमान था। उसने राजा को कई बार समझाया था - ...
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  March 13, 2017, 12:00 am
-वीर विनोद छाबड़ासत्तर अस्सी का दशक। हम एक स्वायत्तशासी सरकारी विभाग में काम करते थे। अंग्रेज़ी का बोलबाला था वहां। हिंदी का प्रयोग सिर्फ़ सरकार को उत्तर देने के लिए ही किया जाता था।वहां वेतन और अन्य सुविधायें राज्य सरकार के उच्चतम कार्यालय से भी बढ़ कर थीं। हमारे एक ...
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  March 12, 2017, 12:23 am
-वीर विनोद छाबड़ाझांसी की रानी लक्ष्मी बाई ने जब उसे देखा तो अवाक रह गयीं। उन्हें महसूस हुआ कि वो आईने के सामने खड़ी हैं। बिलकुल उनकी हुबहू प्रतिलिपि। ऐसा संयोग तो विरले ही होता है। रानी ने नाम पूछा तो पता चला कि उसका नाम झलकारी बाई है। उसका पति पूरन कोरी रानी की फ़ौज़ में सि...
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  March 10, 2017, 11:51 pm
- वीर विनोद छाबड़ाहिंदी फिल्म जगत में जितनी परदे पर जोड़ियां मशहूर हैं, उतनी ही परदे के पीछे भीं हैं। इनमें सबसे टॉप पर कदाचित सुनील दत्त-नरगिस की जोड़ी है। इनमें  मन-मुटाव की कभी खबरें नहीं उड़ी। बल्कि सदभाव की मिसाल बनी। धर्म अलग थे, लेकिन एक-दूसरे का बहुत श्रद्धा के साथ आ...
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  March 9, 2017, 11:48 pm
- वीर विनोद छाबड़ाडॉ राजेंद्र प्रसाद (०३ दिसंबर १८८४ से २८ फरवरी १९९३ तक) का जन्म बिहार के जिला सारन के एक छोटे से गांव जिरादेई में हुआ था। वो भारत के प्रथम राष्ट्रपति (१९५० से १९६२) रहे। १९६२ में उन्हें भारत रत्न से नवाज़ा गया। डॉ राजेंद्र प्रसाद ने उच्च श्रेणी में वक़ालत प...
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  March 8, 2017, 3:06 am
-वीर विनोद छाबड़ाहमारे एक रिश्तेदार हैं। हर साल वो अपने जन्मदिन पर देवी-जागरण का आयोजन करते हैं और तत्पश्चात विशाल भंडारा। भंडारा दो किस्म का होता है। एक, भिखारियों के लिए और दूसरा, स्वजनों के लिए। दोपहर में भिखारी और शाम को स्वजन। भिखारियों की संख्या २५१ तक लिमिट है। औ...
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  March 6, 2017, 11:53 pm
- वीर विनोद छाबड़ासुबह का वक़्त है। एक सीनियर सिटिज़न सुबह घर से बाहर निकलते हैं बल्कि बाहर ठेले जाते हैं। आगे बढ़ते हैं। उन्हें अपने जैसे आठ-दस और बुढ़ऊ मिलते हैं। कारवां बनता जाता है। सब मिल कर पार्क में घुसते हैं। वहां एक कोना है। वहां उनके जैसे कई बुढ़ऊ पहले से ही मौजूद हैं...
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  March 6, 2017, 1:32 am
- वीर विनोद छाबड़ापचास और साठ का दशक, संगीत की दुनिया का गोल्डन ईरा और इसी दौर की मुबारक़ बेगम। मखमली आवाज़। पिता को प्रतिभा दिखी। बेटी बड़ी होके बड़ा नाम करेगी। किराना घराने के शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण दिला दिया।वो आकाशवाणी में गाने लगीं। नाशाद (नौशाद नहीं) ने सुना तो द...
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  March 4, 2017, 11:48 pm
- वीर विनोद छाबड़ाकई लोगों को हमसे मिलने की इच्छा होती है। लेकिन हम थोड़ा कतराते हैं। इसलिए कि वास्तविक दुनिया में हमें देख कर उसका दिल न टूटे। अरे यह तो हाड़-मांस का साधारण आदमी है। हमें याद है कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया के हिंदी साप्ताहिक 'धर्मयुग'में एक बंदे के लेख हम बहुत चाव ...
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  March 4, 2017, 12:44 am
-वीर विनोद छाबड़ायों तो महिलाओं से उनकी उम्र पूछना तहज़ीब के दायरे में नहीं है। लेकिन डॉक्टर की तो मज़बूरी है। गंगा-जमनी तहज़ीब और इल्मो-ओ-अदब के मरकज़ लखनऊ में पढ़े उस नौजवान डॉक्टर ने चेकअप के लिए एक दिलकश भद्र महिला से उसकी उम्र नहीं पूछी। अंदाज़ से उम्र लिखी - ४५ साल। लेकिन ...
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  March 3, 2017, 12:10 am
- वीर विनोद छाबड़ामुकम्मल मनोरंजक फिल्मों के इतिहास में बीआर चोपड़ा की 'वक़्त'मील का पत्थर है। पहले शॉट से लेकर अंतिम शॉट तक दर्शक सीट से चिपका रहा। लाला केदारनाथ शहर के जाने माने रईस हैं। यह रईसी उन्हें विरासत में नहीं मिली है। कड़ी मेहनत मशक्त्त से कमाई है। उन्हें बड़ा गुर...
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  March 2, 2017, 1:51 am
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