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विचार सागर म़ंथन

विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाPost.no.701--जली लंका को लोग याद करते है-पथिक अनजानाhttps://pathic64.blogspot.comबादमरनेकेमेरेकलमोंके निशानों काहश्रक्याहोगा छिपे छिपे उदगार छपने लगे हम बेनकाब होने लगेसामना जमाने का हौसला हम जीते जी कर न सकेबाद मरने के ऊदगारों की इज्जत लोग खाक करेंगेंअजीब रा...
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  November 4, 2014, 10:07 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाPost.no.700—यकीं कहां से लाँउगा—पथिकअनजानाhttps://pathic64.blogspot.com चतते कदम थमे नही जाने कैसेमैंनेअनजानीराहकोचुनाराह सही या नही किस पर कर यकीन हम हल पा जायेंगेंसंदेहप्रद हैं जानकारियाँ रहनुमां यकीन कहां से कैसे लायेंगेंकहते हर समस्या का हल जोड हाथ कर इ...
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  November 3, 2014, 10:52 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाPost.no.699--हक किस पर इंसा का हैं--- पथिक अनजानाhttps://pathic64.blogspot.comनियम,नियंत्रण,निरोगता निर्विचारता,निश्चितता    न जाना कभी मैंने  इन पर इंसानी हक भी होता हैंपरिवार,दरबार,समाचार, बाजार ,व्यापार, प्रकृतिके साथ प्यार पक्ष में यहाँ किस्मत  से मिलता...
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  November 2, 2014, 10:24 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाpost.no.679        दोस्तों , मेरे प्रिय पाठकों आज की कविताविशेष रूप से मैंने अपनी सहेली जो हिन्दी फिल्मोंसीरियलों  की तरह मेरे हर जन्मयात्रा के अंत मैं न केवल मुझे मिल ही जाती अपितु साथ ले जातीहैं मगर फिर अब तक के कर्म—लेखा का किसी समा...
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  October 31, 2014, 9:58 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाPost.no.697---कर विचार सागर मंथन----पथिक अनजानाhttps://pathic64.blogspot.comजो  प्रस्तुतकर्ता दिग्दर्शकप्रदर्शक  एंवनिर्णायक हें जहाँ मेंहम सब ही उसे जानते पहचानते किसी भी रूप में नही हैंअपने अंदाज में अपने विवेकाधार पर माना गयाअस्तित्व हैंथोपे गये सच को म...
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  October 30, 2014, 10:23 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानासमूहजीवी का समूहों पर शासन----पथिकअनजाना==687समूहजीवी का समूहों पर शासन होता हैंइंसान जो अधिकाश करे सम हू सम हूविचारक व विनाशक बनता साथ शासनकरने की मंशा उसकीतो बनी रहती हैंइंसानों की जमात बुद्धिजीवियों के फैसलेये कभी एक से जाने क्यों नही ह...
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  October 28, 2014, 10:17 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाPost.no.---697----समाज सुधारक बनजातीहैँ –पथिकअनजाना       https://pathic64.blogspot.comचलकरकेकुचालेंतोडदिलोंकोवक्तियाँकुछ  हस्तियाँ   अपने बनाये खुशियाँकेसागरमेंयेखुद गोतेखातीहैँउजाड व छीनकरहंसीखुशीसुखीपरिवारजनोंकीयेखुदको सुखी  बुद्धिमा...
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  October 28, 2014, 10:16 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाहंसता पथिक अनजाना कैसे वक्त का वह गवाह हुआसमझने आदि में समर्थ इंसान को मिली कैसी बद्दआजिन्दगी के हर कदम पर मिले आगे खाई पीछे कुआंगुमान इतना भय इतना सलाह न किसी से ले ये मुआपात्र जगहंसाई का न बन जावे सो रहता सदा अनछुआपूछने हालेदिल बयान करन...
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  October 28, 2014, 10:09 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानालिखना वही जो पाठक की पसन्द हो---पथिकअनजाना----   684https://pathic64.blogspot.comइंसान बहुत हैं पर इंसानियत बहुतेरे जानते नहीधार्मिक बहुत हैं पर धर्म परिभाषा पहचानते नहीसामाजिक बहुत हैं पर समाज उद्धेश्य मानते नहीनेता बहुत हैं पर नेतृत्व गुणों को वे अपनात...
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  October 28, 2014, 10:09 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानासुहाना सफर---पथिकअनजाना—673-http://pathic64.blogspot.comऐ इंसान सिर अपना सुकर्म की गोद में रख दोनियंत्रण पैरों का मां धरती व आत्मा के सुपुर्द कर शांति धैर्य के दोनों पंखों के सहारे मस्त हवाओं मेंफिर पावोगे सफर जमी का कितना सुहाना सफर हैंपथिक अनजाना...
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  October 27, 2014, 10:46 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाPost.no.696--तुम मानवता को तरस जाओ—पथिक अनजानाhttp://pathic64.blogspot.comइंसानविवश वही होता हैजोनहीमौजूदअपनेवशमेंअपयश वही बनताजो आत्मासे  छिपाकियाजाता हैंजिसनेअपनीलगाया मोलआत्मा का नही वह वश में हैंमानेंकैसेउसेजीवित जिनका नहीअस्तित्वजगमें हैंकहता इ...
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  October 26, 2014, 11:13 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानारहनुमा दिखावटी हैं यार---पथिक अनजाना—672http://pathic64/blogspot.comकहा जाता आशान्वित खुशियों का नाम हैंकहा जाता निराशा तो मायूसी कीआग हैंजबइंसान खुशनुमां चेहरे की नकाबओढेखुश जमाने के साथ महफिल में शरीक होजब निराशावादी हकीकत की नकाब में रहवो जमाने की मह...
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  October 26, 2014, 9:58 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानास्वहित युग लायेंगें--पथिकअनजाना    695http://pathic64.blogspot.comबैठ किसी शाम पथिक कुछ आहटें बुजर्गों से सुन रहारहे डरी डरीजोनकरेतेजपुकारकभीअपनेस्वामीसेअटल  हैँ  उसका  चरित्रचूंकि वहसत्य पथगामीहैजोचाहे पुरूष  पुचकारे  दे ध्यान,  क...
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Tag :स्वहित युग लायेंगें --पथिकअनजाना
  October 25, 2014, 5:06 pm
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानातब  कहानी आती  हैं –पथिक अनजाना----671http://pathic64.blogspot.comविगत  दिनों प्राप्त जी मेल से काव्य रचना पढने को मिलीउदगार हैं कि पत्नियाँ गुलामों की तरह रहती यहाँ घरों मैं हैंशायद आस-पास कुछ के यह वातावरण हैं जो उभरे विचार हैंवस्तुत: यह कि अब रहती पत्न...
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  October 25, 2014, 12:22 pm
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाशंका क्यों होती है---पथिक अनजाना----670http://pathic64.blogspot.comभावी अनजानी जीवनसंगनी परविश्वास यह पहली शर्त ताउम्र विश्वास हर मोड व सीढी से हो गुजरना दूजी शर्त फिर हमें खुदा पर विश्वास करने में ही शंका क्यों होती हैउत्तर नहीं देखा खुदा को किसी ने पर एहसास ...
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  October 24, 2014, 9:51 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाशुक्रिया यारों का ---पथिकअनजाना----669http://pathic64.blogspot.comबेहद शुक्रगुजार उनका जो मेरी पोस्ट चोरी करते हैंये बेहत्तर उन लोगों से जो पा पोस्ट पन्ने पलटते हैंकर चोरी गर भेजते अपने नाम से प्रचारित तो करतेपढ समझ कुछ चेहरे कही दुनिया मे मुस्करा जाते हैंपा...
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  October 23, 2014, 11:12 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानापडोसी के सामने कहकहे—पथिकअनजाना—694दीप दीप दीप दिखा रहे राह दीप जग कोमनाते हर वर्ष दीपावली मालुम कहानी भीनगर डगर भवन पुराने पर नया लेप पातेलक्ष्मी लुभाते बारूद जलाते दीप सरहाते हैंयाद करते राम को रावण क्यों बन जाते हैंन पूजने को सिक्का ...
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  October 23, 2014, 11:06 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाखोया गर तुम्हें---पथिकअनजाना--693https://pathic64.bl;ogspot.comमिलाएगारहबरकभी कोईऔरहमें जिन्दगीकीराहपरखोया गर तुम्हेंक्योंनजेहनमेंआये विचार  ,हमारीदुनिया में हर शै का वक्त जो होता हैंखो जाते राह के नजारे हमारे प्यारेयहाँयादें रहती पथिक पथ से जुडा रहत...
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  October 22, 2014, 5:00 pm
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानामेरा मैं खो रहा ---पथिकअनजाना—692https://pathic64.blogspot.comघनीरात्रि अज्ञानतावअंहकारकीचादरतलेइंसा सो रहा सुना सत्यता का प्रकाश स्तंभ कही नजरों से ओझल हो रहाअनुभव बताते हमें कि कुहरा घना सदैव नही बना रहता  हैंजब होती हैं आहट सूर्य की तब अंधेरे को भ...
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  October 21, 2014, 10:57 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानापहचान शक्ति बढती ---पथिकअनजाना ----688 जीवन का प्रतिदिन परीक्षाओ के अनेक झरोखे बन परीक्षा लेता हैंइस राह की परीक्षायें मानवीय दानवीय अवरोध स्वरूप हो सकती मानो प्रशिक्षित होने हेतू परीक्षाऔं से हो इंसा को गुजरना होता हैंहर उर्त्तीणता के बाद ...
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  October 13, 2014, 11:14 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाभार सहा हर इंच ने वर्ना----पथिक अनजाना---658http://pathic64.blogspot.comन भुलाना कभी एहसान सीढी काजिसने बुलन्दी पर तुम्हें पहुँचा दियाहर इंच बेजान सीढी का तुम्हारी उनगर्म सांसों व महक का मूक गवाह हैंसाथ दिया भार सहा हर इंच ने वर्नाकही गिर कर तुम कराह रहे होते ...
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  October 12, 2014, 11:47 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाहंसता पथिक अनजाना कैसे वक्त का वह गवाह हुआसमझने आदि में समर्थ इंसान को मिली कैसी बद्दआजिन्दगी के हर कदम पर मिले आगे खाई पीछे कुआंगुमान इतना भय इतना सलाह न किसी से ले ये मुआपात्र जगहंसाई का न बन जावे सो रहता सदा अनछुआपूछने हालेदिल बयान करन...
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  October 12, 2014, 10:09 am
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानामधुमेह की दीवार में ----पथिक अनजाना -680https://pathic64.blogspot.comतुम अपना प्यार अपनों या समूह खास मे न बांटोबांटो  प्यार वहाँ तक जहाँ  प्यार तुम्हारा  जा  सकेसूर्य  की  किरणों  के समक्ष  हम रखे अगर आईनाप्रतिबिम्बित  किरणें  चहुँओर एक  सी बि...
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  October 11, 2014, 3:02 pm
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानासोच से हजारों युद्ध---पथिक अनजाना---674---http://pathic64.blogspot.comइस दुनिया का एक अकाटय सत्य देखा मैंनेजिन पति पत्नी में येन केन प्रकारेण जहाँ वालेमतभेद लाने में लोग सदैव असफल हो जाते हैंउन पति –पत्नी के बीच उनकी जाई हुई संतानेंहंसते हुये वह मतभेद लाने में...
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  October 11, 2014, 1:28 pm
विचार सागर मंथन -----पथिक अनजानाजब तक वे अपने है---पथिक अनजाना-660http://pathic64.blogspot.comअपने तो अपने ही हैं यारोंध्यान रहे जब तक वे अपने हैप्यार उनकी आंखों में बसता दिलों में हमारे हितार्थ सपने हैंअपने विषैले तब होते हैं जब स्वार्थ के रोग से ग्रस्त होते हैं जब चालें बसे आंखों में दिलो...
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  October 11, 2014, 12:08 pm
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