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कुछ सोचा कुछ बाकी है

मजबूरियाँ ही है एक को एक से मिलाती हैं मजबूरियाँ ही है , एक को एक दूसरे से दूर ले जाती हैं समझ नहीं आता मजबूरियाँ ये कहाँ से आती हैं हर किसी को स्वयं में  उलझाए इतनी ऊर्जा वह और कहाँ से पाती है संतो के गलियारों से बधिक के हथियारों से गुजरती हुई टकराती ...
कुछ सोचा कुछ बाकी है...
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  March 5, 2013, 5:31 pm
प्यारजो पलता रहा ह्रदय मेंदिये सा जलता रहालौ आशा कीसजाती रही स्वप्न भूमिऔरयथार्थ बराबर खलता रहासमयदिन दोपहर  घंटेबदलता रहा बदलता रहाबढ़ता रहा विश्वासबांधती रही आशऔरह्रदय मचलता रहातुम जो तुम रहेमै  जो मै  रहाभेद न सका दीवार यहधीरे धीरे दूर तुम दूर मै एक दूसरे स...
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  February 28, 2013, 4:36 pm
(हिंदी साहित्य सम्मलेन , प्रयाग , और हिंदी साहित्य अकादेमी दिल्ली के सयुंक्त प्रयास से बीते दिनों इलाहबाद में ''केदारनाथ अग्रवाल के जन्मशती वर्ष पर'' पर आयोजित दो दिवशीय सम्मलेन पर पठित कविता .)ओ कविएक बार तुम फिर आओहै रो रहा मानव जहां परहै सो रहा मानव जहा परजो खो रहा विश्...
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  October 10, 2012, 6:06 pm
मानव जीवन , एक रहश्यात्मक पहलू होता है . यथार्थता मात्र एक आवरण भर . यही कारन  है कि समझना चाहा है सभी ने इसे . कोई किसी रूप में तो किसी रूप में . पर गति सब की वही . सत्य सबकी वही खड़ा रहता है सबके सामने जीवन एक धुंधले क्षितिज  का सा पर्दा लटकाए . पहनाये हर किसी को एक बुर्का , जिस...
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  September 19, 2012, 6:49 pm
आता नही समझ करें क्या  हिंदी दिवस आज हैहैं पूर्ण ना स्वतंत्र हम  न पूर्णतः स्वराज हैअँधेरे में ही बीता कल  अँधेरे में ही आज हैंकल का कुछ पता नहीं शंकाओं का सरताज हैभाषा वहीं समृद्धि है   जनता जहां प्रबुद्ध हैहै नवीनता वहीं जहां  पुरातनता विशुद्ध हैअवरुद्...
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  September 12, 2012, 5:34 pm
हम सा भला न कोय है , ना हममे कोई दोष  .लक्ष्य एक हिंदी समृद्धि , सबतों बढ संतोष ..यह बसत सब ह्रदय में  सब इसमे ही समायसुगम मृदुल शुभ सरिस यह , सद्रिस न दूजा भाय ..जन-मन-हृदय जे बसतु , जानत यहू संसारसकल समृद्धि सुवासिनी , हिंदी अभिव्यक्ति सार ..देखहु जगत में देखि के , भाषा कै  व्...
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  September 12, 2012, 5:17 pm
उठो, बढ़ो , ऐ युवा साथियोंन  समय और बर्बाद करोघिरे हुए किस विचार-कुञ्ज मेंजन जीवन हित कुछ काज करोहै जरूरी आज उठसमय को पहचानकरदे बदल समाज तुमस्वयं को कुछ मानकरसोते रहे , गर जागे नहींपीछे बहुत रह जाओगेबढ़ जाएगा दुनिया जहांमुंह की वहां तुम खाओगेसोच लो फिर क्या मिलेगावह स्...
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  September 12, 2012, 4:56 pm
जीवन मानवीय पृष्ठभूमि की एक ऐसी कड़ी  है जिसमें प्रकृति ने जो कुछ भी दिए है मानव को मानवीयता के सन्दर्भ में , आवश्यक हो जाता है . उसमे से किसी एक की कमी या अभाव जहां उस जीवन को नारकीय बना देती है वहीं यह प्रश्न चिन्ह भी लगा देती है , क्या वह मानव कहलानें का अधिकारी है ? क्यो...
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  March 23, 2012, 5:32 pm
सुबह चला सूरज उगा कलियाँ खिलकर छा गयीतेजस्विनी किरणे  दिनकर कीमन मंदिर तक आ गयीउठो प्रिये ! प्रात पुण्य काप्रेमपूर्ण  संवाद  करो पुष्पित हो पल्लवित धरा येन समय और बर्बाद करो ...... . ...
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  March 15, 2012, 6:31 pm
ये दुनिया अजीब हैसब कुछ होता है नयासिवाय पुराने के बगैरबदलती है रोज तस्वीर नगर कीबनती एक दीवाल जब घर कीछत की चाहत ने किया मटियामेटनगरीकरण की अभिलाषा को सिवाय किसी अच्छा के बगैर .....    ...
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  March 15, 2012, 6:24 pm
क्यों चिढ गयेनाराज क्यों हो गये मुझसेपरंपरा को वहन नहीं करना थानहीं किया हमनेलीक से हटकरन सिमटकर बचपना तकयुवापन का मार्ग वरण किया हमनेबुरा क्या किया ?रोज ही तो चला थामाना था अभी तक कहा तुम्हाराआज नहीं चला उस मार्ग परलगा कोई और रास्ता प्याराकाट लिया क्यों दुखी हो मुझ...
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  March 15, 2012, 6:21 pm
इन फूलों की कौन कहेंजो पा मौसम मदमाते हैंअपनी सुन्दर काया सेमानव मन हरसाते हैंलोभ रूप संवरण का ऐसालालच पुष्प की भंवर को जैसाफिर चिंता कैसी डर और कैसापाओ जैसी खींचो वैसारूप रहे न मिलेगी कायायहि जीवन  का नाम ही माया ऐसा ही कुछ नियम सृष्टि काभाग्य सभी आजमाते हैंदेख र...
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  March 13, 2012, 4:53 pm
याद आता हैबतलाना उनकाव्यवहार भाव आदर काखाट छोड़ धीरेगोड्वारी से  सिरहाने तकसरक जाना उनकायाद आता हैपूछना हाल चालढंग से मुस्कुराना ,हँसना, नत नयन कर पाय लागी पंडित जी कहनाहलके से सिर को झुकाकर      रूप उनका आ जाता हैसामने पूरा का पूराऔर मैं .....सोचता रह जाता हूँ तबक्...
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  March 13, 2012, 4:45 pm
मुबारक , शुभकामनाएंतरुण , वृद्ध , जवानों कोसफल किए अभियान चुनावीउन मेहमान जान अनजानों कोसाफ रखा सब स्वच्छदूर किए जो दानव कोकोटि कोटि धन्यवाद् उसआयोग रुपी मानव कोसमझ बूझ दृढ सत्य संकल्पितशिष्ट क्लिष्ट प्रण पूर्ण समर्पितलोभ मोह लालच कर खंडितभ्रष्ट नष्ट जो अवनीति अवल...
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  March 13, 2012, 4:34 pm
हिन्तित मत हो परिवर्तन का दौर हैकल कोई और था आज कोई और  हैहैयही क्रम बराबर हो जीवन में हमारेगया जो और था आया जो और हैरखना जरुर ख्याल इतनी सी बात काकभी सुबह दोपहर तो कभी शाम होगापलटकर देखोगे अपने जीवन के पन्ने कोसबसे पहले दर्ज वहां मेरा नाम होगा ........
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  March 2, 2012, 5:02 pm
कोई चले मोटर पर कार , ऑटो, स्कूटर किसी को प्यारी है कोई ढोता रिक्शे पर दिन भर सवारी हैबैठ शाम घर कोई कहता युग की मंहगाई ने हमको मारी है कोई बैठ फूटपाथ पर रोता दुनिया में एक बुरी किस्मत हमारी है प्रबुद्ध जन नारे देता मिट गयी असमानता अब,समानता की बरी ह...
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  March 2, 2012, 4:37 pm
जिंदगी के उहापोह में सुख के चाहत और दुःख के टोह मेंनिकला हुआ घर से रजिस्टर्ड आवारा हूँ मैं घूमा करता हूँ दिन भर टहला करता हूँ समझे न कोई फ़ालतू मुझे किसी गली में सम्हलकरप्रायः निकला करता हूँ मैं कोई समझे न समझे यहाँ सबका प्यारा हूँ मैं चमकते सितारों क...
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  September 29, 2011, 12:34 pm
फिर वही रास्ते मिले मोड़ वही गुजरते थे जहां से कुछ दिनों पहेले भी वही दूबकंकर वही भूमि वही बंजर परीवही रास्ते ईंटो के खडंजे मिट्टियों की बनी दिख रहे हैं वही का वही पर हम बदल गये विचार हमारेव्यवहार हमारेजो रहा करते थे नहीं रहे वही क्या बदल...
कुछ सोचा कुछ बाकी है...
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  September 29, 2011, 12:20 pm
गम किसे नहीं है दुःख कहाँ नहीं है कौन है सुखी कह नहीं सकता सम्पन्नता आखिर कहाँ है कह नहीं सकता समझ सकता हु पर दुखी सब हैं कोई दुःख को दूर करने के लिए सुख के सुखत्व से परसान होकर कोई दुखी है सब जन सब जगह सब तरीके से इस धरती पर रहने के लिए पाने के लिए कमाने के लिए एक दुनिया बसा...
कुछ सोचा कुछ बाकी है...
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  September 28, 2011, 5:28 pm
चुप हूँ , मौन हूँ, बेबसी है मेरी इस छोटे से जीवन में विपदा घनेरी घनेपन में निकालूँगा रास्ता एक ऐसा मिट जायेगी एक दिन ये काली  अँधेरी निकलेगा चाँद अभिनव रोशनी को संग ले टिमटिमाते तारों से धरती ये जगमगा जायेगी दौड़ता हुआ आएगा सूरज भी एक दिनबजेगी   संवादों   की...
कुछ सोचा कुछ बाकी है...
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  July 31, 2011, 9:45 am
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