Hamarivani.com

कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में

तुमको लिखी वो तुमने पढ़ी खयालो से कभी ना आगे बढ़ी अक्सर किताबों में दबकर रही मुझ जैसी तनहा मेरी चिट्ठियाँ ...किसी पंक्ति पर खुलकर हंसी किसी शब्द से झलकी बेबसी खुलके ना कह पाई बात कभी मर्यादा से बंधी मेरी चिट्ठियाँ ...देने से पहले कई बार पढ़ी हज़ार टुकडो में कई बार फटी मैं...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :
  December 17, 2013, 8:22 pm
बहुत काम है मुझको लाल सूरज उगाना है नया सा राग गाना है  सितारे बाँध रख छोड़े ओस बिंदु उठाना है संवरने की कहाँ फुर्सतअभी दिन भी सजाना है जुगनू को सुलाना है कलियों को जगाना है भोर से रूठ छिप बैठी उसे अब खींच लाना है तुम्हारे जागने से पहले दुनिया को सजाना है ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :सोनल रस्तोगी
  December 5, 2013, 10:51 am
बावरी मैं (बीस नवम्बर )(बावरों का कोई ठिकाना नहीं,अपने रिस्क पर पढ़े )जानेमन सुनो गए तो हो हज़ार मील दूर पर जाने नहीं दिया मैंने तुम्हारे साथ तुमको, करवट की सलवट अभी भी वही है बचाकर रखूंगी अपनी बेचैन सलवट के साथ, ताकि तुम आओ तो मिलान कर सकूं, यूँ तो तुम्हारा बंजारापन जाहिर था ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :
  November 20, 2013, 5:15 pm
बेतरतीब मैं  उन्तीस अक्टूबर अनावृत रहना कुछ का फैशन कुछ की मजबूरी और कुछ का व्यवसाय ... जिन कपड़ो को मौसम का सामना करने के लिए रचा गया था आज वो शालीनता ,मर्यादा ,धर्म ,रिवाज़ और अनुशासन ..ना जाने किन किन रूपों बाँट दिए गए है, कपडे सिर्फ कपडे नहीं रह गए है -------- “आप आओ फिर तय कर ल...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :
  October 29, 2013, 12:55 pm
बेतरतीब मैं (सोलह अक्टूबर)बीते दशहरे रावण जला ,जिनको जलना था वो इस बार भी बच गए अंतत: सिद्ध हुआ सतयुग में की गई एक गलती आपको जन्म-जन्मान्तर तक अपराधी घोषित करवा सकती है , कलयुग में अपराध को अपराध और अपराधी को अपराधी सिद्ध करना आम मनुष्य के बस की बात नहीं .----------------------------- कन्या...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :
  October 16, 2013, 3:19 pm
बेतरतीब मैं ( नौ अक्टूबर )ऊपर वाला हमेशा एक के बाद नई कसौटी कर कस रहा है, एक दम खरा सोना बनाकर मानेगा जितनी चोट पड़ेगी उतना खूबसूरत आभूषण बनकर निकलूंगी, हर दर्द के साथ बेहद लचीली बन रही हूँ ,बहुत पहले सुनी कहानी याद आ गई“सोने ने लोहे से पूछा तुम एक चोट में टूट जाते हो और मैं ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :
  October 9, 2013, 6:19 pm
बेतरतीब मैं (तेईस सितम्बर )तुम सोचते हो ज़हर मुझे मार देगा  गलत हो मैं ज़हर गले से उतरने नहीं देती मैंने मासूम दिल को बचा रखा है, नीलकंठ हूँ ,मेरा पीला पड़ता चेहरा पतझड़ की आमद का अंदेसा देता है फ़िक्र मत करो मैं अगली बहार के लिए तैयार हूँ---छिछिली नीयत वाले और ओछी सोच वाले ज्या...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :
  September 23, 2013, 12:21 pm
कितना बंजारा जीवन जीते है ,अलग परवरिश अलग बोली कई बार अलग देस ..हर बार अलग सांचे में उतरना होता है ..पर ये भी इतना सहज कहाँ है ..गंगा किनारे फर्रुखाबाद में पली बढ़ी दुनिया बड़ी आसान थी  पैदल पूरे कसबे का चक्कर लगा लेते ..हर दूसरी दूकान पर कोई ना कोई पहचान वाला होता जो गर्म...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :gurgaon
  September 21, 2013, 12:39 pm
बेतरतीब मैं २०.०९.२०१३आज बरसों बाद हाँथ में कलम उठाई तो लगा लिखना फिर सीखना पडेगा लैपटॉप के कीबोर्ड पर टकटक चलने वाली उंगलिया ऐसे बिहेव कर रही थी जैसे कभी कलम थामी ना थी ,जिस राइटिंग पर नोटबुक पर सितारे जड़े होते थे आज वो बेहूदी और अजीब लग रही थी ,पहचान में नहीं आ रही थी -- ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :
  September 20, 2013, 12:10 pm
बैलट बुलेट की छावन मेंमेला लगेगा गांवन में राह हमारी जो पाहुन भूले नित पधारेंगे आँगन में भोपू जोर जोर  बजेंगे हांथी के दूजे दांत दिखेंगे बरसाती मेढक निकलेंगे बिन बारिश इस सावन में भोरे भोरे आन घुसेंगे देहरी देहरी नाक घिसेंगे मिश्री वाले बोल बोलकर आन गिरेंगे पाँवन म...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :election-2014
  September 13, 2013, 12:47 pm
दो दिन जुटेंगे मज़ार परतेरे चाहने वाले दिन चार चक्कर लगायेंगे दुआ मांगने वालेसूखे फूल और सूखे अश्कफकत बाकी रहेंगे कुछ कबूतर के सुफेद जोड़ेतेरे साथी रहेंगे होकर पत्थरो की कैद में तू आज़ाद रहेगा मंज़र यही तेरी कब्र परतेरे बाद रहेगा जीतेजी जो एक दिल भी रोशन किया तूनेवो नूर ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :sonal
  September 2, 2013, 5:42 pm
तुम सरहद की बात करो वो संसद में चिल्लायेंगे तुम प्याज के आंसू रोओगे वो मस्त बिरयानी खायेंगे तुम केदारनाथ में बिलखोगेवो दिल्ली में जश्न मनाएंगे तुम आज़ादी की बात करो तुम पर लाठी बरसाएंगे वो चार साल अय्याशी कर पांचवे साल फिर आयेंगे वो हरी गड्डियां फेकेंगे सारे जनमत बिक ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :चुनाव
  August 14, 2013, 12:36 pm
बादलों की मंडी थी पानियों का सौदा था सैलाब के क़दमों ने फिर ज़मीं को रौंदा था हवा बहुत रूठी थी डालियों से झगडा था नदियों के धारों को किनारों ने पकड़ा था सब्र उसका छूटा जो बिफर के निकल गई उफनती नदी उस पल किनारों पर चढ़ गई चीखती लहरों में आंसू थे पहाड़ों के जंगल की कब्र थी अवशेष द...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :nature
  July 9, 2013, 12:39 pm
इन आफतों को भुला दो यार इस हालत में मुस्कुरा दो यार दुनिया चाहती है मायूस देखना तुम ज़रा खिलखिला दो यार सर पर सवार है फतूर बनके हिलाकर गर्दन गिरा दो यार अकड़ है आसमान सी जिनकी धूल  उनको चटा दो यार कमज़ोर कहा करते है अक्सर कुर्सियां उनकी हिला दो यार निबट लेंगे जुल्म-ज़माने स...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :poem
  June 28, 2013, 11:52 am
  सोचकर बैठे थे इस बार बारिश का ना इंतज़ार करेंगे ना बारिश को याद करेंगे ..पर कमबख्त दिल है जो बार बार बादलों के साथ उड़ चलता है और बचपन सामने आकर खडा हो जाता है कैसे दूर रहेगी इस चौमासे की दीवानगी से नहीं रहने देंगे ...तब से अबतक क्या बदला कुछ भी नहीं ... नहीं मानते तो सुनो रेनी ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :Monsoon
  June 15, 2013, 1:51 pm
वो चमन के खात्मे की साजिश थी,चमन में ज़िन्दगी नागवार थी उनको ,चाहते थे मुस्कुराहटें बंद हो जाएँ और चमन में सिर्फ अफ़सोस का मौहोल रहे , और चेहरे पर सफ़ेद मातम लपेटे परिंदे , आँखों में लहू लिए एक दुसरे को नफरत से घूरा करें बस यही तो था उनका मकसद दरअसल वो जब चमन में पहली बार आये त...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :
  June 7, 2013, 10:42 am
बवाल है बवाल है बड़ा अजब हाल है लापता से तंत्र में ये कौम बेहाल है पटरी से उतर गई मालामाल कर गई मामा की रेल है भांजा निहाल है राष्ट्र के गले पड़े राष्ट्रीय दामाद है मौन है सारे देवता  खुजली है खाज है नेता भी भीतर है अभिनेता भी जेल में भारतीय कारागार अब राष्ट्रीय ससुराल है...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :सोनल रस्तोगी
  May 21, 2013, 1:00 pm
मैंने कभी नहीं सोचा था मैं ये रचनाएँ पोस्ट करुँगी, जिन मासूम चेहरों पर सिर्फ बेफिक्री होनी चाहिए उनके साथ हर जगह वेहशीपन हो रहा है,चाहें अपने हो या पराये, घरों में अनाथालयों में सब जगह वही हाल है, इस पोस्ट पर कमेंट बंद रख रहीं हूँ  :-((१ )काबुलीवाले !अब मत आना तुम्हारी पोटली ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :
  April 23, 2013, 1:27 pm
बड़ी बड़ी इमारतों से गुज़रते हुए ...गमलों में मुहं उठाये नन्हे पौधे अक्सर रास्ता रोक लेते है ..मनो कह रहे हो पनपने के लिए पूरी ज़मीन नहीं थोड़ी मिटटी की दरकार है ...हां अगर और बढ़ना  है तो अपनी ज़मीन खुद  पानी होगी ....  हाइवे पर तेज रफ़्तार गाडी दौडाते हुए ....डिवाइडर पर डटे गुलाबी फूलो...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :सोनल
  April 1, 2013, 6:38 pm
जिरह-ए-जुल्फ में उलझा हुआ हूँ बेवजह शानो पर बिखरा हुआ हूँ पास होकर भी दूरियां मीलों की हूँ अश्क़, आँख से फिसला हुआ हूँअधूरी ग़ज़ल का मिसरा हुआ हूँ कहीं ख़याल में अटका हुआ हूँ किस लम्हा मुकम्मल हो जाऊं हूँ ग़ज़ल, बहर से भटका हुआ हूँ यूँ अपने आप से बिगड़ा हुआ हूँ छोड़ दुनिया आज तनहा ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :सोनल
  March 28, 2013, 4:47 pm
काका बौराते फिरेकाले करके बालकोई नवयौवनारंग दे अबके सालबत्तीसी सेट कियेकाकी रही मुसकायफागुन सजी फुहारदेवर नाही आयससुराल साली बसेवे जीजा मालामालपास पडोसी ताक रहेदिल में बड़ा मलालफ़गुआये भये  बावरे खूब चढ़ाई भांग चुनर ओढ़ बाबा रचे नार नवल का स्वांग जो रोये सो रो ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :सोनल
  March 26, 2013, 12:06 pm
शोर था साँसों का दिल में सन्नाटा तेरे जाने के बादतू उग रही है यहाँ जम रही है काई सी आईने पे लगी बिंदी में टेबल पर चूड़ियों में पड़े सूखे गजरे में छोड़ गई हो जानकर चादर के आगोश में बालों के नर्म  गुच्छे कुछ टूटे लाल नाखून  दुपट्टे से बिछड़े मोती पायल से खफा घुँघरू कप पर गुलाबी न...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :सोनल
  March 20, 2013, 3:11 pm
सुनो !भारत भाग्य विधाताओ शहीदों की चिताओं से दूर रखना काले हाँथ कलंकित करेंगे शहादत ,तुम्हारे शरीर से उठती सड़ांध दम घोट देगी उनकी आत्माओ का तुम तुष्टिकरण में रहो देसी विदेसी आकाओं के ना तुम्हारा आँगन रोया ना सूनी हुई तुम्हारी देहरी तुम बस गिनो गिन्नियां बंद आँखों से ल...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :युद्ध
  March 14, 2013, 4:17 pm
होरी नाही खेलूंगी श्याम सांवरे सांवरिया बिगत बरस फागुन में  तैने कारो रंग लगायो चन्द्रबदन ते श्यामा कीन्ही तोरे मन को भायो  अलकन में उलझायो तैने पलकन में अट्कायो  बारह मास मैं रही बावरी दूजो फागुन आयो तोरी सूरत नाही देखूंगी श्याम सांवरे सांवरिया ललिता रंगी गुलाबी  ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :सोनल
  March 12, 2013, 1:13 pm
(1) श्याम सजे ज्यो गोपिका धरा अनूठा रूप सांवल तन घूँघर मुखपर लीला रची अनूप (2)टेसू भिगोया केसर भिगोई और पिसाई भांगमोरपंख धर राधा सजी ज्यों मोहन घनश्याम (3)नित्य नवल रास रचाएराधे तेरो श्याम फाग चढ़े बौरा गया सबरा गोकुलधाम (4)श्याम छवि निरख राधे सांवरी होय सांवरे के  तन पे  रंग ...
कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में...
Sonal Rastogi
Tag :सोनल
  March 7, 2013, 12:58 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3652) कुल पोस्ट (163829)