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Blog: kabhee - kabhee ~~~~ कभी - कभी

Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
उसे देखकर जबचाँद मुस्कुरा रहा था ...तभी चाँदनी रात मेंएक कुत्ता गुर्रा रहा थाबारम्बार ... लगातार ...उसे देखकर...कैक्टस मुस्कुराया ..और फिर 'जय'एक नन्हा सा रुमाल ..उस बच्ची काकफ़न बना नज़र आया !!http://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   7:40am 6 Nov 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
नदी के बीच मे खड़ा एक दरख़्त ..   जिसने अनेकों सैलाबों और      तूफानों को अपनी छाती पर सहा था ..उसे कल  एक नन्ही सी लहर ने गिरा दिया ..     क्योंकि अब वह बूढ़ा जो हो गया था ..http://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   7:38am 6 Nov 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
27-10-2018आज सौभाग्य-पर्व के उपलक्ष्य परसच्ची में ..आज आप बहुत याद आ रहे हैं ..यूँ तो हम प्रतिदिन बात करते हैंघण्टों मोबाइल से पर आज की बात कुछ अलग हैसच्ची में ..आप दिलासा देते हैं मुझे हर त्योहारघर आने की और हर बारकोई न कोई अड़चन सामने आ जाती और ठिठक जाते हैं पैर आपके वहीं पर ... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   7:28am 27 Oct 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
लहरों से  सजे  सागर का मुख, बदली से  निखरता है सावनचन्दा से सजता नील गगन, कलियों  से  सजे प्यारा उपवनयौवन से निखरती है तरुणी,  चंचल  होती है गति  से पवनदु:खों से मन धरती बनता, वनस्पतियों से 'जय'जल पावनhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   5:16pm 7 May 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
नाहक गर्व स्वयं पर करिये, सबल तो समय-परिंदा हैपरोपकर से बड़ी खुशी नहिं, दुःख वृहद पर - निंदा हैमेरे संग परिवार खड़ा है, जीवन के इस काल-खंड मेंमरा नहीं है अभी भी मित्रों! मत भूलो, 'जय'ज़िंदा हैhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   5:31pm 2 May 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
ज़िन्दगी भर इसे पीते, होता न असर देखोकभी तोला, कभी लोटा, कभी तीनों पहर देखोअगर रुसवा ये हो जाये, जरा सी बूँद से ही 'जय'हमारी जान ले लेता, बड़ा बेदर्द ज़हर देखोhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   6:27am 1 May 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
सपने सुहाने देखो और  आँखों में  बसाओ तुमइन्हें साकार करने का साहस  भी दिखाओ तुमपंजों के बल खड़े होकर हाथों को उठाओ 'जय'गगन से तोड़ के इनको कदमों पर बिछाओ तुमhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   6:25am 1 May 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
मैं   देखता  रहा  उस  जनाजे  को  देर  तकहोने को  जा  रही  थी  नष्ट  वही शख्सियतजिसके नुमाया होने से दुनिया थी मुस्कुरायीकन्धों पे जा रहा है 'जय'चुपचाप  बेहरकतनुमाया होने = प्रकट होने/ सामने आनेhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   1:58pm 30 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
(1)अब भी हमारी साँसों में एक साँस घुली हैजैसे कि जन्नतों की कोई खिड़की खुली हैमेरे  नसीब में नहीं 'जय'जिसकी  यारियाँकुदरत उसी से आज मिलाने को तुली है (2)'जय'वो हमारे  जिगरोदिल टटोल रहे हैंजबरन  हमारे  बोल  हमसे  बोल  रहे हैंबेशर्त  हमने  चाहा  था उन्हें टूट ... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   4:35pm 29 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
जब भी हकीकतों से हुआ दूर है कोईना जाने कैसे  हो  गया मशहूर है कोईफलसफा हमें भी तो समझोगे ये 'जय'नज़दीक हम चले तो चला दूर है कोईhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   6:31am 29 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
पिघली है चाँदनी, चलो कुछ बात करें हममौसम न फागुनी, चलो कुछ बात करें हमजीवन में ऐसे रंग क्यों उभरे न आज तकचन्दा है जामुनी, चलो 'जय'बात करें हमhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   5:12pm 28 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
तुम्हारा अपनी बंदिश से निकल पाना बहुत मुश्किलहमारा  खुद  उसूलों  से   उबर   पाना   नहीं   आसां तुम अपने घर से निकलो तो मन्दिर तक हम आएंगेअकेला 'जय'लड़े  जग  से,  इतना  भी  नहीं  नादां http://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   6:04pm 26 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
पहाड़ की चोटियों पर फैला सुनहरा उजाला सूरज के ढलने का उदघोष करने लगा है ।पक्षियों ने पंख फैलाये और नीड़ की तरफ उड़ चले हैं। कोयल की कूक में व्यग्रता सी है। बाजारों में चहल पहल बढ़ गयी है । होटल के काउंटर ओर भीड़ बढ़ने लगी हैं। टैक्सी स्टैंड पर जमावड़ा बढ़ गया है। सचमुच में शाम ढल... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   1:49pm 25 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
सुबह अचानक नींद खुली और दरवाजा खोला तो सूरज की पहली किरण को सुनहरी साड़ी में सामने खड़ा पाया जो मुस्कुरा कर सुबह के दृश्य देखने का संकेत कर रही है। उनींदी आँखों से देखा तो चीड़ की झुकी डाल पर बैठी एक चिड़िया सुमधुर पहाड़ी धुन सुना रही है । ढलानदार शान्त सड़क अँगड़ाई ले रही है। न... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   1:45pm 25 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
मेरी नैनीताल यात्रावो भूली दास्ताँ लो फिर याद आ गयीये रानीबाग है, कभी एचएमटी घड़ियों का कारखाना होता था यहाँकिन्तु अब शेष हैं कुछ निशानियाँ  बुज़ुर्गों की जुबानी कुछ कहानियाँयहाँ से शुरू होता है इक सर्पिणी सी सड़क का एक छोरयहीं है मचलती, मटकती, बहकती हुई गाड़ियों का&... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   5:58pm 24 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
मेरी नैनीताल यात्रा - गरीब रथविशाल पुल के नीचे सिकुड़ी, सिमटी, लाजवन्ती सी गंगामटमैले-काले पानी में स्नान-आचमन करते भक्त व पण्डाआँखे बंद कर धीरे धीरे सरकती हुई गरीब रथ ।।कानपुर से ही एक माल गाड़ी के पीछे सरकती हुई सवारी गाड़ियाँसाथ में बैठे ढेरों पुलिस वालों के मुँह से छू... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   5:52pm 24 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
भानु के शोलों से तपते पत्थरों की छातियों में, बीज हम बोते रहेसागरों की चीख और कहकहे इन आँधियों के, रात भर होते रहेठान ही हमने लिया जब मेघ, सूरज, तारे, चन्दा क्या करें तब ?बिजलियों के बिस्तरे, नम मेघों की चादर तले, 'जय'बेधड़क सोते रहेhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   5:37am 23 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
मैं मनुज हूँ, मनुजता को  आज भी सहला रहा  हूँ इस जगत के एक ही सच, मृत्यु को बहला रहा हूँ 'जय'स्वयं  को  दर्पणों के बीच रख कर कह रहा न  डरा  हूँ, न  गिरा  हूँ, ना  ही  मैं  घबरा  रहा  हूँhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   5:32am 23 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
है नेकी जो भी ज़माने में, था उन्हीं  का हुक्मरां मैंदोस्तों की  जुबानी में, प्रकृति  का था कहकशां मैंसमय ने  करवटें  बदली, हवा भी रुख बदल बैठी'जय'अपनी उम्मीदों का, रुका सा अब कारवाँ मैंहुक्मरां - शासककहकशां - कहकहाhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   5:30am 23 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
मैं पूर्णिमा का चन्द्र बन चमकता रहा रात्रि भर अमावस की रात 'जय'जुगनू भी न मिले मुझेhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   8:44am 22 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
उन्हें होंठों का तिल लगता बहुत प्यारा, बहुत न्याराकिसी का साँवला रंग हो तो उन्हें लगता नहीं प्यारानयन ही हैं जो आकर्षण के जालों  को स्वयं बुनते, स्वयं ही 'जय'उलझते और स्वयं बन  जाते बेचाराhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   8:40am 22 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
तीन छणिकाएँ ( 1 )उखड़ी हुयी हैं साँसे, है जकड़ा हुआ शरीर बदले हालात में 'जय'है अकड़ा हुआ ज़मीर ( 2 )कुछ ख्वाब उड़ चले हैं, साँसों के आसमां परमंज़िल कहाँ, किधर 'जय'तय है दुआ हवा पर( 3 )छेड़छाड़ और बलात्कार के मसले आँखों और ज़ेहन में ही होते हैं वरना वही कपडे और वही अंग खुद की बेटी-बहन ... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   5:50pm 21 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
पाँच प्रश्न और कक्षोन्नतिहमारे पडोसी गाँव से पंडित राम भरोसे दीक्षित बचपन में हमें प्रारम्भिक शिक्षा देने के लिए आते थे. शाम को पाँच बजे वे आते और बाहर छप्पर के नीचे पड़े तख़्त पर बैठ कर एक हाँक लगाते : चलौ रे . और हम जहाँ भी होते अपना अपना बस्ता पाटी लेकर भागते हुए उनके पास ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   11:48am 19 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
रुधिर जब  मुक्त होता है तो धमनी रोक  ना पाती सहज ही बह निकलते अश्रु, विरहणी रोक ना पाती भले  ही  फेंक  दो  इसको, तले  पत्थर  शिलाओं के अंकुरित  हो  गया 'जय'तो, ये धरणी रोक  ना पाती http://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   11:27am 19 Apr 2018
Blogger: जय भारद्वाज jai bhardwaj
वो  देखो  उसकी  मुट्ठी में, एक दाना भुना सा हैलंगोटी उसके तन पर  है, माथा कुछ तना सा हैभले ही काया श्यामल हो, हृदय में गंग - धारा हैन जाने क्यों फिर से 'जय', अनजाना बना सा हैhttp://kadaachit.blogspot.in/ ... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   11:15am 19 Apr 2018
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