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मन का दर्पण,मन की बात.

आज के दिन दो फूल खिले थेजिनसे महका सारा हिन्दुस्तानसिर्फ चौराहों और दीवारों मे नहीअपने दिल मे दो इनको स्थानएक ने अहिंसा को अपनाकर वापस लाया हिन्द का मानदूजे ने दिल से आवाज लगाई जय जवान जय किसान गाँधीजी व शास्त्रीजी ने दिलवाईहिन्दूस्तान को जग मे पहचानसुरेश राय 'सुरS'(...
मन का दर्पण,मन की बात. ...
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  October 2, 2013, 11:49 pm
पुरखों का ॠण पितृपक्ष मे यूं उतार दोकागों को भोज अर्घ मे जल की धार दोमिलेगी संतृप्ति उनको आशीष आपकोगर घर के जिन्दा बुजुर्गों को भी प्यार दोसुरS(चित्र गूगल से साभार )...
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  October 2, 2013, 2:00 pm
यह एक अजन्मी बेटी भ्रूण की अपनी माँ से पुकार है. . . मुझको भी जीवन का अधिकार दे हे माँममता की मूरत का मुझे दीदार दे हे माँमुझमे तेरा अंश है मैं तेरी ही परछाई हूंमुझको तू अपना सा ही आकार दे हे मांअपने सपनों को माँ तो बेटी मे जीती हैअपने सपने अब तू साकार कर ले माँमैं तो हूं तन्...
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  September 25, 2013, 11:13 am
मन की बातें सुने जो, वो कान कहाँ से लाऊं?ख्बाहिशें पूरी करे, वो वरदान कहाँ से लाऊं?हो गये हैं कातिल अब, बागवान ही फूलों केजो तुझे दे पनाह, वो गुलदान कहाँ से लाऊं?जो था बेसकीमती कभी, जीने का उसूल थाकोंडियों मे बिक गया,वो ईमान कहाँ से लाऊं?बढ़ रहे हैं आदमी मगर, इंसान हो गये हैं ...
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  September 21, 2013, 10:48 am
व्यवस्था मे कमी को सदा हम क्यों कोसा करें?नवनिर्माण के स्वप्न दिल मे क्यो न पोसा करें?साकार होते हैं स्वप्न खुली आँख से जो देखेजरूरी है सर्वप्रथम अपने आप पर भरोसा करेंहालात की क्यों सदा हम शिकायत करें? उनको बदलनें के लिये क्यों न बगावत करें? परिवर्तन की लहर उठेगी दरिय...
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  September 19, 2013, 10:05 pm
मान चिंगारी मुझे तुम,हौसलों की हवा देनापर बेरुखी की धूल से,मुझको न दबा देनादूर है मंजिल मेरी,रास्ते सूनसान हैरहनुमा हर कदम,तुम साथ सदा देनालंबा है ये सफ़र,साथी सभी अनज़ान हैगर फिसल जाऊं कहीं,तुम हाथ सदा देनाजख़्म देगा ये जमाना,इसका यही उसूल हैजख़्म ये भरता रहे,हाथों स...
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  September 17, 2013, 3:30 pm
"हिन्दी दिवस की शुभकामनायें"हिन्दी को समर्पित मेरी कविता :पूछो न कब, कैसे कहाँ, यार हुआ है ?मुझको तो हिन्दी से बहुत प्यार हुआ हैक्यों न मैं इसे माथे पे सजा लूं ?बिन्दी रुप इसका जब स्वीकार हुआ हैसुन्दर, मनोरम और ओजस्विनी हैजनगण पर इसका अधिकार हुआ हैतुलसी, कबीर और मीरा की आत...
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  September 14, 2013, 9:05 am
जीते जी न कर सके, फॉसले मिटाने के हौसलेनफरत के रूप मे हमें, सियासत से जो थे मिलेपास पास लेटे हुए है , लेकिन लाश के रूप मेशवगृह ने पाट दिए, आपस के वो सभी फॉसलेसुरS...
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  September 13, 2013, 6:04 pm
पथरा गई सूख के आँखे, घरवाले इतना रोये हैजाने कितने जिगर के टुकडे शय्या मौत की सोये हैफ़सल से काटे गये बंदे , दोनो ही संप्रदाय केनफरत के बीज़ देश मे ,हुक्मरानों ने ऐसे बोये हैंसुरS...
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  September 13, 2013, 6:02 pm
उन्माद मे न बहको यूं शाज़िशों मे फसहो सके तो बाँटों सभी मे सौहार्द का मधुरससांप्रदायिकता की डोरी को कसो न तुम ऐसेफूट पडे लहूधार जो फट जायें नस नससुरS...
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  September 13, 2013, 6:01 pm
जाने कितनी निर्भया कीआत्मा न्याय की है प्यासीमोक्ष इन्हे दिलाने कोदोषियों को जरूरी है फांसीदुष्कर्म,हत्या का साहसफिर नाबालिग की दलील क्यों?जुर्म नही है ये छोटाफिर सज़ा मे इनकी ढील क्यों ?ऐसे घिनौने कृत्य परमौत की सज़ा है नाकाफीभरोसा कानून से न उठे हरगिज मिले न इन्ह...
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  September 12, 2013, 12:37 pm
जन गण मे अनुराग बढाओसब मे सौहार्द्र भाव जगाओशिव गौरा के लालश्री गण राजदयालदेश से संकट सारे मिटाओमन मे नवचेतना उपजाओहर लो हमारे कालश्री गण राजदयालदेवों के देव तनयआप हो मंगलमुर्तीदर्शन मात्र से होतीसब मनोकामनापुर्तीनमन तुम्हे हर हालश्री गण राजदयालविघ्नहरण मंगलक...
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  September 9, 2013, 3:36 pm
देखा हमने एक दीवाना ऐसा, बेपनाह रोते हुयेएक आश दिल मे लिये, अश्रु मोती खोते हुयेपूछा हमने सबब रोने का, उसे मनाते हुयेराज़ खोला उसने, हमको ये समझाते हुयेवादा किया है सनम ने, आज आने का ख्वाब मेभीग न जाये दामन उनका, अश्कों के तालाब मेअश्कों की किश्मत है, आज नही तो कल बहना हैबह...
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  September 8, 2013, 3:16 pm
मुद्रा बाजार मे है गिर रही, भारतीय रुपये की साख,बैठे है अर्थशास्त्री सरकार संग, बंद किये हुये आँख,“सोने” की चिडियाँ को, “गिरवी” के जाल से न पकडा जायेगुलामी की जंजीर मे, देश को फिर से न जकड़ा जायेघौटालों की रकम पर फिर ,जरा गौर फरमाया जायेठण्डी अर्थव्यवस्था को, उन पैसों से ...
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  September 6, 2013, 10:50 pm
पेंशन के पेड़ को सींचा अंशदान सेफल मिलेंगे मीठे इसी अरमान सेसेवानिवृत्ति के बाद मिलेगी हमको पेंशनतब भी होंगे आत्मनिर्भर, फिर कैसी टेंशनबुढ़ापे मे भी न रहेगी कोई तंगीपास पैसा तो तबियत भी चंगीबेटा रखेगा सदा हमे अपने पासपरिवार मे बने रहेंगे तब भी खासहो जायेंगे बृद्धआ...
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  September 5, 2013, 4:09 pm
श्रध्दा का हुआ है शोषण,शर्मिन्दा हुई है जन आस्था,पथभ्रष्ट हुआ फिर एक संत,भूला नैतिकता का रास्तामर्यादा सिखाने वाला, स्वयं मर्यादा गया भूल,फूलों से तौला जिसको,चुभ गया बन कर शूलभगवान सा पुजने वाला,बन गया जग उपहासस्तब्ध है भक्त सभी,टूटा है उनका विश्वाससंत के व्याभिचार क...
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  September 4, 2013, 10:58 am
डालर तो बढ़ रहा,देश मे भ्रष्टाचार की तरहरुपया गिर रहा, संसद मे शिष्टाचार की तरहविदेशों मे काला धन हुआ,आचार की तरहसरकार अभिनय कर रह, लाचार की तरहबात दूर तक जानी थी, प्रचार की तरहमन मे ही दब के रह गई,विचार की तरहनेताओ का संग,रुपया को इतना भायागिरने मे ना हिचका, और न ही शर्मा...
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  September 2, 2013, 1:46 pm
बनुं मे उनके सुख का कारण, मुझसे कोई भूल न होउन बिन जीवन ऐसी बगिया, जहाँ एक भी फूल न होजिस दुआ मे नही वो शामिल, वो दुआ मेरी कबूल न होकलियों को उनकी राह बिछाउं, जिसमे एक भी शूल न होउनके लिये वहाँ घर बनाउं, जहाँ गली मे उडती धूल न होकर्ज सा हो उन पर मेरा प्यार, ब्याज बढ़े, कम मूल न ह...
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  September 2, 2013, 10:30 am
धर्म का कोयला झोक , सांप्रदादिकता की भट्टी जलाते हैआराम से बैठकर फिर, उसमे वोट की रोटी पकाते है जात पात का नमक मिल, नफरत का आचार बनाते हैधर्मनिरपेक्षिता की चादर ओढ़,सत्ता का घी खाते हैंदेखो सुरेश, ये फिर भी सेक्युलर कहलाते हैंसुरS...
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  September 1, 2013, 3:14 pm
अवसरों की बंदरबाँट, ऐसे तो न कीजियेमौका बराबर सभी को दीजिये जनाबनफरत का जहर ,देश को ऐसे न दीजियेहर धर्म का सम्मान आप कीजिये जनाबचूमा है फांसी जिन्होने, खातिर-ए-वतनशहीदों मे उन्हे शामिल तो कीजिये जनाबमंथन मे मिला बिष हमें, अमृत सदा आपकोएक बार अमृत हमें , स्वयं बिष पीजिये...
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  August 31, 2013, 4:16 pm
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