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अंतर्मंथन

यह मानव जाति का दुर्भाग्य ही है कि एक ओर जहाँ लगभग आधी शताब्दी पूर्व मानव चरण चाँद पर पड़े थे , मंगल गृह पर यान उतर चुके हैं और अंतरिक्ष में भी मनुष्य तैरकर , चलकर , उड़कर वापस धरती पर सफलतापूर्वक उतर चुका है , वहीँ दूसरी ओर आज भी हमारे देश में विवाहित महिलाओं पर न सिर्फ दहेज़ क...
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Tag :नारी
  April 22, 2017, 9:25 am
बाघ जो देखन मैं चला, बाघ मिला ना कोय,जो तुमको देखा प्रिये , याद आया न कोय । जिन लोगों के पास फालतु पैसा होता है , वो शादी की सालगिरह पर विदेश जाते हैं या जश्न मनाने कम से कम फाइव स्टार होटल में जाते हैं । जिनके पास काम ज्यादा और पैसा कम होता है , उनके लिए सालगिरह भी बस एक और दिन ...
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Tag :मरचुला गाँव
  April 15, 2017, 12:16 pm
प्रस्तुत है , श्री गोपाल प्रसाद व्यास जी की एक हास्य कविता की पैरोडी : एक बिलकुल नया प्रयोग --जो भी मित्र मिलते हैं , बोलते हैं , भई आजकल क्या करते हो ,इस महंगाई के दौर में बिना जॉब के कैसे गुजर करते हो !क्या रखा है बेवज़ह घूमने में , कुछ तो शर्म लिहाज़ करो ,कब तक खाली घर बैठोगे , अब ...
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Tag :पैरोडी
  April 10, 2017, 1:13 pm
लोग पैट पालने का शौक तो पाल लिया करते हैं ,लेकिन पैट का पेट फुटपाथ पर साफ़ कराते हैं जिस पर खुद चला करते हैं। फिर कहीं पैर में पैट का पेट त्याग न लग जाये ,इस डर से इस शहर में लोग सर उठाकर नहीं , सर झुकाकर चला करते हैं। लोग गऊ को गौ माता तो कह कर बुलाया करते हैं ,लेकिन कूड़ा कचरा खा...
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Tag :
  March 14, 2017, 1:13 pm
चिकित्सा के क्षेत्र में अक्सर कहा जाता है -- we treat , he cures . यानि डॉक्टर्स का कहना होता है कि हम सिर्फ इलाज़ करते हैं , रोगी को ठीक तो वो ऊपरवाला ही करता है। यह सच है कि एक डॉक्टर केवल इलाज़ कर के एक सीमा तक ही स्वास्थ्य लाभ में रोगी की सहायता कर सकता है। इसलिए डॉक्टर भगवान नहीं होता...
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Tag :प्रकृति
  January 30, 2017, 2:18 pm
भाग १ :गुजर गया एक और साल , जाते जाते कर गया क्या हाल। कल तक जो मालामाल थे , वो एक पल में हो गए कंगाल। नीले नोटों का रंग बदला , लोगों के जीने का ढंग बदला। नींद उड़ गई अमीरों की , पर मौज करने लगा हर कंगला। लोग रिक्शा छोड़ कतार में लग गए , पैसे के व्यापार में लग गए।दिन भर खड़े रहे बै...
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Tag :
  January 9, 2017, 10:47 am
जो लोग नोटबंदी से अत्यंत दुखी हैं , उनका ग़म भुलाने के लिए एक दर्द भरा गीत ( पैरोडी ) :जाने वो कैसे, लोग हैं जिनको, नोटों का भंडार मिला ,हमने तो जब , लाखों मांगे तो , बस दो हज़ार मिला।  बैंकों की राहें ढूंढी तो , लम्बी  कतार मिली ,अपना जब नंबर आया तो, खिड़की बंद मिली।जेब को कर गया ख...
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Tag :
  December 27, 2016, 12:01 pm
सोच बदल रही है , देश बदल रहा है , आप माने या ना माने। हम यह जानते थे और रोज देखते थे कि कैसे हमारे देखते देखते युवा वर्ग की सोच बदल रही है।देश की लगभग आधी आबादी युवा वर्ग से बनती है। हम चाहे जितना मर्ज़ी जोर लगा लें , सोशल मीडिया पर बहस करते रहें , मोदी जी समेत नेताओं को भला बुरा ...
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Tag :संस्कार
  December 19, 2016, 10:30 am
गीतानुसार दुनिया में तीन तरह की प्रवृति के लोग होते हैं -- सात्विक , राजसी और तामसी। यदि नोटबंदी के दौर में पैसे की दृष्टि से देखा जाये तो पैसे वाले अमीरों को इस तरह से परिभाषित किया जा सकता है :१ ) सात्विक : व्यक्ति वे होते हैं जो अपने मेहनत से गुजर बसर करने के लिए पैसा कमात...
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Tag :मानव प्रवृति
  December 16, 2016, 11:30 am
यूँ ही बैठे ठाले , एक फोन के बाद :मोबाईल पर जानी पहचानी रिंग टोन के बाद -- हैलो !"हेल्लो , टी एस द -- र --ल जी बोल रहे हैं ? "-- जी। "जी मैं स्टेट बैंक से बोल रहा हूँ।"यह सुनते ही कान खड़े हो गए , मन में बिजली सी कौंधी और हम चौकन्ने हो गये।  फिर शरारत सूझी तो हमने कहा -- हाँ भैया , का होयो । "जी...
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Tag :मोबाइल
  December 6, 2016, 6:49 pm
इंसान यदि गरीब घर में पैदा होता है तो इस बात की अत्यधिक सम्भावना रहती है कि वह जिंदगी भर रोजी रोटी कमाने में ही लगा रहेगा। यदि अमीर व्यवसायी घर में पैदा होता है तो इस बात की सम्भावना होती है कि वह जिंदगी भर कुछ न करते हुए भी ऐशो आराम में जिंदगी काटता रहेगा। लेकिन यदि आप आम ...
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Tag :
  November 17, 2016, 10:00 am
एक बेहद ख़तरनाक़ यात्रा वृतांत :यह इत्तेफ़ाक़ ही रहा कि दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदुषण वाले दिन हमें किसी काम से चंडीगढ़ / मोहाली जाना पड़ा। यूँ तो हमें लॉन्ग ड्राइव पर जाना सदा ही पसंद रहा है और गए हुए भी डेढ़ साल हो गया था।  लेकिन दिल्ली और हाइवेज पर फैली धुएं की चादर को देखक...
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Tag :धुंध
  November 7, 2016, 11:07 am
सलफास ( celphos ) पॉइज़निंग :एलुमिनियम फास्फाइड अनाज को कीड़ों और चूहों से बचाने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।  लेकिन यह आत्महत्या करने का सबसे सस्ता और आसान तरीका भी है। इसका कारण हैं आसानी से इसकी उपलब्धता।  शायद यही एक ऐसा ज़हर है जिसके लिए आपको न किसी डॉक्टर की प्रेस्क्रि...
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Tag :ज़हर
  November 4, 2016, 1:00 pm
पिछले एक सप्ताह से हम दीवाली पर ही लिखे जा रहे हैं। बेशक दीवाली एक ऐसा हर्ष उल्लास का पर्व है जिसे छोटे बड़े , गरीब अमीर और हर जाति और धर्म के लोग बड़े शौक और चाव से मनाते हैं। दशहरा से लेकर दीवाली तक बाज़ारों की रौनक , घरों की साफ़ सफाई और लोगों का आपस में मिलना और मिलकर उपहारों...
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Tag :प्रदुषण
  November 2, 2016, 10:47 am
किसी को तो धर्म की लड़ाई मार गई ,किसी को गौ रक्षा की दुहाई मार गई।किसी को प्याज की महंगाई मार गई ,हमको तो दीवाली की सफाई मार गई !हमको तो दीवाली की सफाई मार गई ! -----तीन तीन नौकरों की मेहनत लगी थी ,साथ में मशीनों की मशक्कत लगी थी ।वक्त की पाबन्दी की दिक्कत सच्ची थी ,नौकरों को भी भा...
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Tag :हास्य कविता
  October 26, 2016, 1:07 pm
यह आधुनिक और विकसित जीवन की ही देन है जो बच्चे स्कूल की शिक्षा ख़त्म होते ही घर छोड़ने पर मज़बूर हो जाते हैं , और फिर कभी घर नहीं लौट पाते।अक्सर सुशिक्षित समाज में मात पिता बुढ़ापे में अकेले ही रह जाते हैं। आज विश्व बुजुर्ग दिवस पर एक रचना , पिता का पत्र पुत्र के नाम : जीवन के चम...
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Tag :
  October 1, 2016, 11:14 am
शाम के समय लोकल मार्किट के सामने मेंन रोड के फुटपाथ पर खड़े रेहड़ी और खोमचे वाले तरह तरह के पकवान बनाये जाते हैं जिनकी खुशबु वहां से गुजरने वाले लोगों को बेहद आकर्षित करती है। विशेषकर घी में तलती टिक्कियां , पकौड़े और चाऊमीन देखकर ही मुँह में पानी आने लगता है।  खाने वाले ...
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Tag :रेहड़ी
  September 27, 2016, 12:30 pm
किसी की पाक मोहब्बत की दास्ताँ है ये , या कुछ हट कर ख़ास कर दिखाने का ज़नून , यह हम नहीं जानते। लेकिन इतना ज़रूर जानते हैं कि विश्व के सात अज़ूबों में यूँ ही नहीं शामिल कर लिया गया है ताज़महल को। ताज़ का अनुपम सौन्दर्य  सिर्फ अंदर ही नहीं ,  बल्कि बाहर से भी देखने वाल...
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Tag :ताजमहल
  September 8, 2016, 12:00 pm
जब काली घटायें छाती हैं ,और टिप टिप बारिश आती है।  मौसम भीगा भीगा होता है ,सब गीला गीला सा होता है।जब भोर के उजाले होते हैं ,कुछ नन्हे शेर निकलते हैं।  जो नंगे हाथों की चमड़ी में ,अपना तीखा डंक घुसेड़ते हैं। फिर वो खून तुम्हारा पीते हैं ,और गिफ्ट में वायरस देते हैं। जब ये र...
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Tag :
  July 28, 2016, 12:41 pm
सावन का महीना यूँ तो बड़ा रोमांटिक होता है , सभी बारिश का इंतज़ार बड़ी बेसब्री से कर रहे होते हैं। छोटे छोटे जीव जंतुओं से लेकर , मेढक , मयूर यहाँ तक कि इंसानों का भी मन हिलोरें लेने लगता है। लेकिन दुनिया के सबसे सूक्ष्म जीव वायरस भी इन दिनों बहुत सक्रीय होकर मनुष्यों पर हल्ल...
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Tag :सावन
  July 18, 2016, 9:00 am
जम्मू से करीब ३० -३५ किलोमीटर दूर सियालकोट पाकिस्तान को जाने वाली सड़क पर बना है सुचेतगढ़ बॉर्डर। यहाँ से सियालकोट मात्र ११ किलोमीटर दूर है। सुचेतगढ़ भारतीय सीमा में हमारा एक गांव है जो बिलकुल सीमा से लगा हुआ है और सैनिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि जब भी भारत ...
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Tag :भारत
  July 3, 2016, 10:00 am
जब बात कश्मीर की आती है तो श्रीनगर की डल लेक , पहलगाम , और गुलमर्ग की खूबसूरती ही ज़ेहन में आती है। लेकिन जम्मू से मात्र १०० किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर १ पर एक वर्णनातीत जगह है पटनीटॉप। विशेषकर सर्दियों में यह जगह बर्फ से ढकी होती है , इसलिए स्कीइंग और बर्फ म...
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Tag :पटनीटॉप
  June 30, 2016, 10:00 am
माता वैष्णो देवी यात्रा पर सबसे पहले हम १९८१ में  गए थे। तब नए नए डॉक्टर बने थे और पूर्ण मस्ती में थे। उस समय १४ किलोमीटर का ट्रैक पैदल तय करना पड़ता था , हालाँकि पोनी तब भी उपलब्ध होते थे।  लेकिन रास्ते में अर्धक्वाँरी पर ही कुछ खाने पीने की दुकाने होती थी।  बाकि रास्...
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  June 28, 2016, 11:04 am
तीन दिन और चार रातें घर से बाहर बिताकर आज घर वापस लौट आये। इन तीन दिनों में रेल यात्रा , हेलीकॉप्टर यात्रा , तीर्थ यात्रा , टैक्सी यात्रा , पहाड़ों की यात्रा और भारत पाकिस्तान बॉर्डर की यात्रा कर डाली। बेशक यदि दो तीन दिन के लिए भी घर छोड़कर निकल जाओ तो यह बहुत रिफ्रेशिंग होत...
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Tag :रेल यात्रा
  June 26, 2016, 8:10 pm
1)गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहता है ,जो जैसा करता है , वो वैसा भरता है। जन्म से हिन्दू हो, सिख या मुस्लमान,इंसांन तो मनुष्य कर्म से ही बनता है। वो मंदिर जाये , मस्जिद , या गुरुद्वारे ,बंदा हर हाल में इबादत ही तो करता है। जन्नत आखिर में उसी को मिलती है ,जो अंतकाल तक अच्छे कर्...
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Tag :
  June 14, 2016, 12:47 pm
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