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अंतर्मंथन

'आप'ने झाड़ू को कचरे से उठाकर गली गली में पहुंचा दिया ,झाड़ू हाथ में लेकर दिल्ली को 'हाथ'के हाथ से झटका लिया।मोदी जी को भी जब झाड़ू के चमत्कार का अहसास हो गया ,तो भ्रष्टाचारी गंदगी पर झाड़ू लगाने का प्रस्ताव पास हो गया। नेता , अफसर , मंत्री , संतरी , सब के हाथों में झाड़ू आ गई ,हाथ मे...
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  June 20, 2017, 2:49 pm
'आप'ने झाड़ू को कचरे से उठाकर गली गली में पहुंचा दिया ,झाड़ू हाथ में लेकर दिल्ली को 'हाथ'के हाथ से झटका लिया।मोदी जी को भी जब झाड़ू के चमत्कार का अहसास हो गया ,तो भ्रष्टाचारी गंदगी पर झाड़ू लगाने का प्रस्ताव पास हो गया। नेता , अफसर , मंत्री , संतरी , सब के हाथों में झाड़ू आ गई ,हाथ मे...
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  June 20, 2017, 2:49 pm
योगी के हाथ में झाड़ू देख कर पत्नी बोली ,अज़ी इस मुए फेसबुक से नज़रें हटाओ।यू पी को योगी और देश को मोदी जी संभाल लेंगे , आज कामवाली बाई नहीं आएगी,आप तो आज घर में झाड़ू लगाओ।हमने कहा प्रिये ज़रा ध्यान से देखो ,योगी जी कहाँ अकेले हैं !दाएं बाएं देखो, हाथ में झाड़ू पकड़े कितने चेले हैं...
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Tag :लहंगा
  May 24, 2017, 2:30 pm
हमने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर लोगों से सिगरेट और शराब में कौन ज्यादा ख़राब विषय पर सबका जवाब माँगा था।  अधिकांश लोगों ने सिगरेट को ज्यादा ख़राब बताया , हालाँकि जैसा कि अपेक्षित था, कई महिला मित्रों ने शराब को ज्यादा ख़राब बताया।  आइये देखते हैं क्यों सिगरेट ज्यादा ख़राब...
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Tag :सिगरेट
  May 19, 2017, 11:33 am
जब हम नए नए डॉक्टर बने थे , और हमारा शारीरिक व्यायाम का शौक पुनर्जीवित हुआ , तब हमने जे एन यू में देश में पहली बार आयोजित होने वाली ताइकोंडो ट्रेनिंग में भाग लेना शुरू कर दिया। करीब दो महीने तक बन्दर की तरह हा हू करते हुए बड़ा अच्छा लगने लगा था और हम खुद को ब्रूस ली का छोटा भा...
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Tag :डॉक्टर्स
  May 9, 2017, 10:13 am
कितने गंदे होते हैं शहर मे बहने वाले गंदे नाले !जाने कैसे रहते हैं नाले के पडोस मे रहने वाले !!इक अजीब सी दुर्गंध छाई रहती है फिजाओं मे ,जाने कौन सी गैस समाई रहती है हवाओं मे !!!.यह बहुत ही दुःख की बात है कि एक विकासशील देश होने के बाद भी हमारे शहरों में अभी भी घरों और व्यवसायि...
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Tag :दुर्गन्ध
  May 6, 2017, 7:28 pm
यह मानव जाति का दुर्भाग्य ही है कि एक ओर जहाँ लगभग आधी शताब्दी पूर्व मानव चरण चाँद पर पड़े थे , मंगल गृह पर यान उतर चुके हैं और अंतरिक्ष में भी मनुष्य तैरकर , चलकर , उड़कर वापस धरती पर सफलतापूर्वक उतर चुका है , वहीँ दूसरी ओर आज भी हमारे देश में विवाहित महिलाओं पर न सिर्फ दहेज़ क...
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Tag :नारी
  April 22, 2017, 9:25 am
बाघ जो देखन मैं चला, बाघ मिला ना कोय,जो तुमको देखा प्रिये , याद आया न कोय । जिन लोगों के पास फालतु पैसा होता है , वो शादी की सालगिरह पर विदेश जाते हैं या जश्न मनाने कम से कम फाइव स्टार होटल में जाते हैं । जिनके पास काम ज्यादा और पैसा कम होता है , उनके लिए सालगिरह भी बस एक और दिन ...
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Tag :मरचुला गाँव
  April 15, 2017, 12:16 pm
प्रस्तुत है , श्री गोपाल प्रसाद व्यास जी की एक हास्य कविता की पैरोडी : एक बिलकुल नया प्रयोग --जो भी मित्र मिलते हैं , बोलते हैं , भई आजकल क्या करते हो ,इस महंगाई के दौर में बिना जॉब के कैसे गुजर करते हो !क्या रखा है बेवज़ह घूमने में , कुछ तो शर्म लिहाज़ करो ,कब तक खाली घर बैठोगे , अब ...
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Tag :पैरोडी
  April 10, 2017, 1:13 pm
लोग पैट पालने का शौक तो पाल लिया करते हैं ,लेकिन पैट का पेट फुटपाथ पर साफ़ कराते हैं जिस पर खुद चला करते हैं। फिर कहीं पैर में पैट का पेट त्याग न लग जाये ,इस डर से इस शहर में लोग सर उठाकर नहीं , सर झुकाकर चला करते हैं। लोग गऊ को गौ माता तो कह कर बुलाया करते हैं ,लेकिन कूड़ा कचरा खा...
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  March 14, 2017, 1:13 pm
चिकित्सा के क्षेत्र में अक्सर कहा जाता है -- we treat , he cures . यानि डॉक्टर्स का कहना होता है कि हम सिर्फ इलाज़ करते हैं , रोगी को ठीक तो वो ऊपरवाला ही करता है। यह सच है कि एक डॉक्टर केवल इलाज़ कर के एक सीमा तक ही स्वास्थ्य लाभ में रोगी की सहायता कर सकता है। इसलिए डॉक्टर भगवान नहीं होता...
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Tag :प्रकृति
  January 30, 2017, 2:18 pm
भाग १ :गुजर गया एक और साल , जाते जाते कर गया क्या हाल। कल तक जो मालामाल थे , वो एक पल में हो गए कंगाल। नीले नोटों का रंग बदला , लोगों के जीने का ढंग बदला। नींद उड़ गई अमीरों की , पर मौज करने लगा हर कंगला। लोग रिक्शा छोड़ कतार में लग गए , पैसे के व्यापार में लग गए।दिन भर खड़े रहे बै...
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  January 9, 2017, 10:47 am
जो लोग नोटबंदी से अत्यंत दुखी हैं , उनका ग़म भुलाने के लिए एक दर्द भरा गीत ( पैरोडी ) :जाने वो कैसे, लोग हैं जिनको, नोटों का भंडार मिला ,हमने तो जब , लाखों मांगे तो , बस दो हज़ार मिला।  बैंकों की राहें ढूंढी तो , लम्बी  कतार मिली ,अपना जब नंबर आया तो, खिड़की बंद मिली।जेब को कर गया ख...
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  December 27, 2016, 12:01 pm
सोच बदल रही है , देश बदल रहा है , आप माने या ना माने। हम यह जानते थे और रोज देखते थे कि कैसे हमारे देखते देखते युवा वर्ग की सोच बदल रही है।देश की लगभग आधी आबादी युवा वर्ग से बनती है। हम चाहे जितना मर्ज़ी जोर लगा लें , सोशल मीडिया पर बहस करते रहें , मोदी जी समेत नेताओं को भला बुरा ...
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Tag :संस्कार
  December 19, 2016, 10:30 am
गीतानुसार दुनिया में तीन तरह की प्रवृति के लोग होते हैं -- सात्विक , राजसी और तामसी। यदि नोटबंदी के दौर में पैसे की दृष्टि से देखा जाये तो पैसे वाले अमीरों को इस तरह से परिभाषित किया जा सकता है :१ ) सात्विक : व्यक्ति वे होते हैं जो अपने मेहनत से गुजर बसर करने के लिए पैसा कमात...
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Tag :मानव प्रवृति
  December 16, 2016, 11:30 am
यूँ ही बैठे ठाले , एक फोन के बाद :मोबाईल पर जानी पहचानी रिंग टोन के बाद -- हैलो !"हेल्लो , टी एस द -- र --ल जी बोल रहे हैं ? "-- जी। "जी मैं स्टेट बैंक से बोल रहा हूँ।"यह सुनते ही कान खड़े हो गए , मन में बिजली सी कौंधी और हम चौकन्ने हो गये।  फिर शरारत सूझी तो हमने कहा -- हाँ भैया , का होयो । "जी...
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Tag :मोबाइल
  December 6, 2016, 6:49 pm
इंसान यदि गरीब घर में पैदा होता है तो इस बात की अत्यधिक सम्भावना रहती है कि वह जिंदगी भर रोजी रोटी कमाने में ही लगा रहेगा। यदि अमीर व्यवसायी घर में पैदा होता है तो इस बात की सम्भावना होती है कि वह जिंदगी भर कुछ न करते हुए भी ऐशो आराम में जिंदगी काटता रहेगा। लेकिन यदि आप आम ...
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  November 17, 2016, 10:00 am
एक बेहद ख़तरनाक़ यात्रा वृतांत :यह इत्तेफ़ाक़ ही रहा कि दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदुषण वाले दिन हमें किसी काम से चंडीगढ़ / मोहाली जाना पड़ा। यूँ तो हमें लॉन्ग ड्राइव पर जाना सदा ही पसंद रहा है और गए हुए भी डेढ़ साल हो गया था।  लेकिन दिल्ली और हाइवेज पर फैली धुएं की चादर को देखक...
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Tag :धुंध
  November 7, 2016, 11:07 am
सलफास ( celphos ) पॉइज़निंग :एलुमिनियम फास्फाइड अनाज को कीड़ों और चूहों से बचाने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।  लेकिन यह आत्महत्या करने का सबसे सस्ता और आसान तरीका भी है। इसका कारण हैं आसानी से इसकी उपलब्धता।  शायद यही एक ऐसा ज़हर है जिसके लिए आपको न किसी डॉक्टर की प्रेस्क्रि...
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Tag :ज़हर
  November 4, 2016, 1:00 pm
पिछले एक सप्ताह से हम दीवाली पर ही लिखे जा रहे हैं। बेशक दीवाली एक ऐसा हर्ष उल्लास का पर्व है जिसे छोटे बड़े , गरीब अमीर और हर जाति और धर्म के लोग बड़े शौक और चाव से मनाते हैं। दशहरा से लेकर दीवाली तक बाज़ारों की रौनक , घरों की साफ़ सफाई और लोगों का आपस में मिलना और मिलकर उपहारों...
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Tag :प्रदुषण
  November 2, 2016, 10:47 am
किसी को तो धर्म की लड़ाई मार गई ,किसी को गौ रक्षा की दुहाई मार गई।किसी को प्याज की महंगाई मार गई ,हमको तो दीवाली की सफाई मार गई !हमको तो दीवाली की सफाई मार गई ! -----तीन तीन नौकरों की मेहनत लगी थी ,साथ में मशीनों की मशक्कत लगी थी ।वक्त की पाबन्दी की दिक्कत सच्ची थी ,नौकरों को भी भा...
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Tag :हास्य कविता
  October 26, 2016, 1:07 pm
यह आधुनिक और विकसित जीवन की ही देन है जो बच्चे स्कूल की शिक्षा ख़त्म होते ही घर छोड़ने पर मज़बूर हो जाते हैं , और फिर कभी घर नहीं लौट पाते।अक्सर सुशिक्षित समाज में मात पिता बुढ़ापे में अकेले ही रह जाते हैं। आज विश्व बुजुर्ग दिवस पर एक रचना , पिता का पत्र पुत्र के नाम : जीवन के चम...
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  October 1, 2016, 11:14 am
शाम के समय लोकल मार्किट के सामने मेंन रोड के फुटपाथ पर खड़े रेहड़ी और खोमचे वाले तरह तरह के पकवान बनाये जाते हैं जिनकी खुशबु वहां से गुजरने वाले लोगों को बेहद आकर्षित करती है। विशेषकर घी में तलती टिक्कियां , पकौड़े और चाऊमीन देखकर ही मुँह में पानी आने लगता है।  खाने वाले ...
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Tag :रेहड़ी
  September 27, 2016, 12:30 pm
किसी की पाक मोहब्बत की दास्ताँ है ये , या कुछ हट कर ख़ास कर दिखाने का ज़नून , यह हम नहीं जानते। लेकिन इतना ज़रूर जानते हैं कि विश्व के सात अज़ूबों में यूँ ही नहीं शामिल कर लिया गया है ताज़महल को। ताज़ का अनुपम सौन्दर्य  सिर्फ अंदर ही नहीं ,  बल्कि बाहर से भी देखने वाल...
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Tag :ताजमहल
  September 8, 2016, 12:00 pm
जब काली घटायें छाती हैं ,और टिप टिप बारिश आती है।  मौसम भीगा भीगा होता है ,सब गीला गीला सा होता है।जब भोर के उजाले होते हैं ,कुछ नन्हे शेर निकलते हैं।  जो नंगे हाथों की चमड़ी में ,अपना तीखा डंक घुसेड़ते हैं। फिर वो खून तुम्हारा पीते हैं ,और गिफ्ट में वायरस देते हैं। जब ये र...
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  July 28, 2016, 12:41 pm
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