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आवारगी

  “मीना” हिंदी फ़िल्मों की “ट्रेजेडी क़्वीन”. “मीना” जैसे रब की सबसे मुकम्मल तख्लीक. “मीना” जैसे स्याह आसमान की क़िस्मत में आया कोई चौहदवीं का चांद;“मीना” जैसे बारिश की भीगी शाम ख़िडकी पर गूंजता बूंदों का जलतरन्ग. लिल्लाह! एक नाम और ख्वाहिशों का इतना लम्बा भीगता सा जंग...
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  August 1, 2018, 12:47 pm
      बरोडा,ग़ुजरात के पास एक छोटा सा गांव अमरोली;उसके नन्हे से क़स्बे की बडी सी हवेली का ज़नाना,जिसमे दर्दे ज़ेह से करहाती “फ़रीदा बेगम” और पेहलौठी के बच्चे का इंतेज़ार करते मुम्बई से वकालत पढ कर आये जनाब मुस्तफ़ा शेख़. दोनो ही इस बात से अंजान कि अल्लाह एक के बाद एक पांच औलाद...
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  March 25, 2018, 6:08 pm
      कल ही लम्बे चौडे भाषणों का सिलसिला तारी हो गया था,सभी को इस दिन का महत्व भली भांति समझा दिया गया था...खूबसूरती से बताया था कि सभी को आना है,और गणतन्त्र दिवस के कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान देना है.       मैं! जो भाषा के साथ नैतिक शिक्षा भी पढाती...
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  January 26, 2017, 2:49 pm
                         सुबह सुबह दरख्तों में पानी डालने गयी, क्या देखती हूँ, नंन्हे से गुलाबी गुलाब में ताज़ा मोतिया फूल अपनी ख़ुशबू बिखेर रहा है. पूरी बगिया रोशन हो गयी उसकी महक और खूबसूरती से.  दो पल को लगा परिस्तान से कोईं शहज़ादी उतर आयी हो, और मेरे फ...
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  January 22, 2017, 5:03 pm
अंजाम से  आग़ाज़  करउठ कर ज़रा परवाज़ कररख दे  परे   मायूसियांतू ज़िंदगी को साज़ करख़ामोशियां सरगम पे होंनाकामियां परचम पे होंतो ज़ीस्त भी खिलती नहीऔर मौत भी मिलती नहीउठ! तू ख़ुद की ख़ाक से ही ‘तामीर-ए-ख़ुद’  जांबाज़ कर सेहबा  ...
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  December 31, 2016, 10:06 pm
             बहिनो! क्या  बताऊं,तुमसे बांट बूंट कर हल्की होना चाहती हूं: मियां मौलवी साहब की पांच बेटियां अस्मां,सीमा,रेशमा,गुड्डी,मुन्नी. अगले दिन ईद और मियां मौलवी साहब के पाजामे को टेलर मास्टर ने लम्बा कर दिया. मियां साहब ने अस्मा को बुला ताक़ीद की “ बिटीया!!! ज़रा...
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  July 5, 2016, 10:45 pm
    याद नही उम्र कितनी थी,पांचवे का इम्तेहान दिया था और अब तक रमज़ान में इफ्तारी खाने का ही लुत्फ उठया था कि रमज़ान के छट्वें रोज़े के दिन अम्मा दादी अम्मा के साथ लोगों की फेह्रिस्त बनाती बरामद हुईं. अप्रैल का महिना,ऐन मेरी सालगिरह के एक दिन पहिले. स्कूल अभी खुले नही थे,लि...
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  June 25, 2016, 3:17 am
मेरे फाग भरे गीतों को,अपने राग भरे स्वर देनामीत! मेरे मीठे सपनों को अपनी प्रीत का घर देनाबासंती मौसम में बहकी मधुमासी सी हलचल मेंमेरी सांसों के उपवन को प्रीत पवन से भर देना हर धडकन में बिछे पलाश के स्वागत आतुर आलिंगन को अपने हाथों मंथन कर के प्रेम पलाश सा कर देना प्रिय...
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  March 24, 2016, 1:31 pm
एक के बाद एक मेरी देह पर पड़तेतुम्हारे गहरे नीले चुम्बनजैसे ख़ुदा का  यक-ब -यक किसी गर्म दिन को गले लगा लेनाऔर उन्हें महसूस कर झरते मेरे आंसूजैसे गर्मियों के बाद की निहायत पहली बारिश -  लोरी ...
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  February 8, 2016, 8:47 pm
सेहबा जाफ़री      लिल्लाह! यह गोपाल भाई हैं!! मैंने देखा और खूब ग़ौर से देखा,बचपन से लगा जवानी तक जिन गोपाल भाई की,अपने भाई सी ही सहचरी रही उन्हे इनती- गिनती के पांच सालों मे ही कैसे भूल सकती हूँ! पलकें झपकायी,दुहरा-दुहरा और तिहरा-तिहरा कर;मगर दुविधा है कि मस्तिष्क का स...
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  January 17, 2016, 10:57 pm
अपनी रुस्वाई तेरे नाम का चर्चा देखूँ एक ज़रा शेर कहूँ , और मैं क्या क्या देखूँ नींद आ जाये तो क्या महफिलें बरपा देखूँ आँख खुल जाए तो तन्हाई का सहारा देखूँ शाम भी हो गयी धुंधला गयी आँखें मेरीभूलने वाले, कब तक मैँ  तेरा  रास्ता देखूँ सब ज़िदें उसकी मैं  पूरी करू...
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  October 11, 2015, 6:01 pm
एक मुलाकातमैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जाने क्या ख्याल आया उसने तूफान की एक पोटली सी बांधी मेरे हाथों में थमाई और हंस कर कुछ दूर हो गयाहैरान थी…. पर उसका चमत्कार ले लिया पता था कि इस प्रकार की घटना&nb...
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  August 30, 2015, 9:11 pm
           "अल्लाहो बाक़ी!" न ना !! ये उसका वहम  नहीं था , देख ही तो रहा था वह !!!  नाज़िश बेबाकी से उसके यों  घूरने को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, एक सवा घंटा तो हो ही गया था उसे यूं  घूरते घूरते! कभी  दरवाज़े  डेवढ़ी  की ओंट  से देखे , तो कभी थम्बेली-चम्बेली  की ओं...
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  June 18, 2015, 10:33 pm
बारिश हुई तो फूलों के तन  चाक हो गए मौसम के हाथ भीग के सफ्फाक हो गएबादल को क्या ख़बर है की बारिश की चाह में कैसे बुलंद-ओ -बाला  शजर ख़ाक हो गए  जुगनू को दिन के वक़्त परखने की ज़िद करें बच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए लहरा रही है , बर्फ की चादर हठा  के घांस सूरज क...
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  June 13, 2015, 2:58 pm
​हे ईश्वर !अगर तुम "ही " हैतो पुरुषों के लिए हर्ष का विषय होअगर "शी "हो तोऔर भी अच्छा किजीवन और जीवन शक्ति दोनोंतुम से हैंदेखो!मैं  तो डरती हूँनपुंसकता से, कायरता से तुम्हारे कुछ नहीं रहने सेऔर उन बदलते ढंगों सेजिससे तुमआहिस्ते -आहिस्ते"इट "हो रहे हो           - ल...
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  June 2, 2015, 1:34 pm
जगह जगह परछांई  सी है      अपने घर अँगनाई सी है              न होने के बाद भी अपने                        पूरे घर पर छाई सी है हल्दी-मिर्ची , तेल -शकर सी,        गंध में महके पूजा घर सी               पिछवाड़े से अगवाड़े  तक           &nbs...
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  May 10, 2015, 4:49 pm
मोज़े  बेचती, जूते बेचती औरत  मेरा नाम नहीं मैं  तो वही हूँ जिसको तुम दीवार में चुन कर मिस्ले सबा बेख़ौफ़ हुए ये नहीं जाना पत्थर से आवाज़ कभी भी दब नहीं सकती मैं  तो वही हूँ रस्म व रिवाज़ के बोझ  तले जिसे तुमने छुपाया ये नहीं जाना रोशनी घोर अंधेरों से&nb...
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  May 7, 2015, 10:48 am
मौसम -ए -वीरां का , बहक कर यूं शराबी होना तेरी आमद पे 'फ़ज़ा  का ,       यूं गुलाबी होना  शहर का शहर ही , रक्साँ  है , तेरे इश्क़ में यूं तो उसपे पाँवों  में मेरे यार !         यूं गुर्गाबी  होना इश्क़ सचमुच  ही खुदा ही की रज़ा से है  रोशन सब पे अफ्ज़ा   नहीं ...
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  April 12, 2015, 4:03 pm
कमरे में हर चीज़ अपनी जगह मौजूद थी सब ठीक ठाक था फिर भी यूं लग रहा था जैसे कोई चीज़ चोरी हो गयी है मैंने एक बार फिर कमरे का जायज़ा लिया अल्मारी और मेज़ के खानों में हर चीज़ ज्यों की त्यों रखी हुई थी लेकिन केलेंडर से अट्ठाइस के बाद की तारीख़ें चोरी हो गयी थ...
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  February 28, 2015, 9:28 am
कितनी मुद्द्त बाद मिले हो, वस्ल का कोई भेद तो खोलो कैसे  कटे दिन हिज्र की धूप में, कैसे गुज़री रात तो बोलो क्या अब भी, इन रातों में ख़्वाबों के लश्कर आते हैंक्या अब भी नींदों से नींदों पुल जैसे बन जाते हैंक्या अब भी पुरवा कानो में गीत सुहाने गाती है ​​क्या अब...
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  February 19, 2015, 5:38 pm
सहरा सहरा, गुलशन गुलशन गीत हमारे सुनियेगा याद बहुत जब आएंगे हम, बैठ के सर को धुनियेगा आज हमारे अश्क़ों से दामन को बचा लें आप मगर ये वह मोती हैं कल जिनको शबनम शबनम चुनियेगा हमसे सदा दिल लोगों पर ज़ौक़े असीरी १ ख़त्म हुआ हम न रहे तो किसकी ख़ातिर , जाल सुनहरे बुनियेगा ...
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  February 13, 2015, 7:19 pm
आँखों में  अब न नींद है, सोएं किधर से हम ख्वाबों की रहगुज़र में , खोएं किधर से हम ख़ुशियों के जो शजर थे, ख़ाली थे, बेसमर थेइस रुत में नए आसरे , बोयें किधर से हम टूटे हैं इस क़दर कि, खाली हैं अब तो आँखें आंसू में तेरा दामन, भिगोएं किधर से हम चाँद के बरक्स ख़्वाब, बढ़ते ही ढल ग...
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  February 4, 2015, 9:56 am
कपूर तालाब वक़्त कैसा भी हो इसकी ख़ासियत  है, यह ठहरता नहीं, गुज़र जाता है. गुज़र कर कभी अफ़साने की शक्ल ले लेना , कभी गीत हो जाना, कभी एक ठंडी सी सांस लेकर, किसी अनकहे जज़्बे सा ही चमक कर बुझ जाना इसकी तासीर है.  इसी तासीर को हवा देने के लिए शायर गज़लें लिखते हैं और मुसव्विर अप...
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  January 25, 2015, 4:49 pm
जब झूम के उट्ठे सावन तो, तुम याद हमें भी कर लेनाजब टूट के बरसे बादल तो, तुम याद हमें भी कर लेना जब रात की पलकों पर कोई ग़मगीन सितारा चमक उठे और दर्द की शिद्दत से दिल भी जब रेज़ां -रेज़ां  हो जाएजब छलक उठे बेबात नयन ,तुम याद हमें भी कर लेना पूरे चाँद    की    रातो...
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  January 17, 2015, 10:01 pm
वह जब से शहर-ए -ख़राबात को रवाना हुआ बराहे रास्त मुलाक़ात को ज़माना हुआ वह शहर छोड़ के जाना तो कब से चाहता था यह नौकरी का बुलावा तो एक बहाना हुआ ख़ुदा  करे तेरी आँखें हमेशा रहें ये आँखें जिनको कभी दुःख का हौंसला न हुआ कनारे सहने चमन सब्ज़ बेल के नीचे वह रोज़ सुबह का ...
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  January 8, 2015, 11:52 pm
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