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एक ग़ज़ल : छुपाते ही रहे अकसर--छुपाते ही रहे अकसर ,जुदाई के दो चश्म-ए-नमजमाना पूछता गर ’क्या हुआ?’ तो क्या बताते हममज़ा ऐसे सफ़र का क्या,उठे बस मिल गई मंज़िलन पाँवों में पड़े छाले  ,न आँखों  में  ही अश्क-ए-ग़मन समझे हो न समझोगे ,  ख़ुदा की  यह इनायत हैबड़ी क़िस्मत से मिलता है ,मुहब...
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  October 6, 2017, 6:30 pm
ग़ज़ल : बहुत अब हो चुकी बातें------बहुत अब हो चुकी बातें तुम्हारी ,आस्माँ कीउतर आओ ज़मीं पर बात करनी है ज़हाँ कीमसाइल और भी है ,पर तुम्हें फ़ुरसत कहाँ हैकहाँ तक हम सुनाएँ  दास्ताँ  अश्क-ए-रवाँ कीमिलाते हाथ हो लेकिन नज़र होती कहीं परकि हर रिश्ते में रहते सोचते  सूद-ओ-जियाँ कीसभ...
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  October 3, 2017, 5:09 pm
[ 2--अक्टूबर -- गाँधी जयन्ती के अवसर पर ---]डायरी के पन्नों से-----------------------एक व्यंग्य : अनावरण एक गाँधी मूर्ति का-------......नेता जी ने अपनी गांधी-टोपी सीधी की।रह रह कर टेढी़ हो जाया करती है। विशेषत: जब वह सत्ता सुख से वंचित रहते हैं।धकियाये जाने के बाद टेढी़-मेढ़ी ,मैली-कुचैली हो जाती है।...
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  October 2, 2017, 6:35 pm
Laxmirangam: मेरा जिन्न: मेरा जिन्न                     कल सुबह अचानक ही मेरी मौत हो गई.                मैं लाश लिए काँधे किसी दर निकल पड़ा,      ......
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  September 29, 2017, 8:11 pm
 एक लघु कथा  : ----रावण का पुतला ---- आज रावण वध है । 40 फुट का पुतला जलाया जायेगा । विगत वर्ष 30 फुट का जलाया गया था } इस साल बढ़ गया रावण का कद। पिछ्ले साल से से इस साल बलात्कार अत्याचार ,अपहरण ,हत्या की घटनायें बढ़ गई तो ’रावण’ का  कद भी बढ गया।रामलीला की  तैयारियाँ पूरी हो चुक...
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  September 29, 2017, 10:39 am
जिन्दगीविवसता में  हाथ  कैसे  मल रही  है जिन्दगीमनुज से ही मनुजता को छल रही है जिन्दगीएक  छोटे  से  वतन  के  सत्य  में आभाव मेंरास्ते की पटरियों  पर  पल  रही  है जिन्दगी//0//फूल  है  जिन्दगी  शूल  है  जिन्दगीभटकने पर  कठिन भूल है जिन्दगीजो समझत...
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  September 25, 2017, 4:03 pm
एक ग़ैर रवायती ग़ज़ल :---ये गुलशन तो सभी का है----ये गुलशन तो सभी का है ,तुम्हारा  है, हमारा हैलगा दे आग कोई  ये नही   हमको गवारा  हैतुम्हारा धरम है झूठा ,अधूरा है ये फिर मज़हबज़मीं को ख़ून से रँगने का गर मक़सद तुम्हारा हैयक़ीनन आँख का पानी तेरा अब मर चुका होगाजलाना घर किसी का क्यू...
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  September 24, 2017, 12:42 pm
चिड़िया: बस, यूँ ही....: नौकरी, घर, रिश्तों का ट्रैफिक लगा,  ज़िंदगी की ट्रेन छूटी, बस यूँ ही !!! है दिवाली पास, जैसे ही सुना, चरमराई खाट टूटी, बस यूँ ही !!! ड......
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  September 23, 2017, 12:44 pm
Laxmirangam: हिंदी दिवस 2017 विशेष - हमारी राष्ट्रभाषा: हमारी राष्ट्रभाषा. परतंत्रता की सदियों मे स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों को एक जुट करने के लिए राष्ट्रभाषा शब्द का शायद प्रथम प्रयोग......
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  September 16, 2017, 8:10 pm
चिड़िया: पाषाण: पाषाण सुना है कभी बोलते, पाषाणों को ? देखा है कभी रोते , पाषाणों को ? कठोरता का अभिशाप, झेलते देखा है ? बदलते मौसमों से, जूझते द......
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  September 13, 2017, 3:32 pm
Laxmirangam: दीपा: दीपा हर दिन की तरह मुंबई की लोकल ट्रेन खचाखच भरी हुई थी. यात्री भी हमेशा की तरह अंदर बैठे , खड़े थे. गेट के पास कुछ यात्री हेंडल पकड़े ......
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  September 12, 2017, 4:52 pm
Laxmirangam: आस्था : बहता पानी: आस्था : बहता पानी                 तैरना सीखने की चाह में,                 वह समुंदर किनारे                  अठखेलियाँ करन......
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  September 7, 2017, 11:13 am
चिड़िया: नुमाइश करिए: दोस्ती-प्यार-वफा की, न अब ख्वाहिश करिए ये नुमाइश का जमाना है नुमाइश करिए । अब कहाँ वक्त किसी को जनाब पढ़ने का, इरादा हो भी, खत लिखने का,......
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  September 3, 2017, 6:52 pm
चिड़िया: शब्द:शब्दमानव की अनमोल धरोहरईश्वर का अनुपम उपहार,जीवन के खामोश साज परसुर संगीत सजाते शब्द !!!अनजाने भावों से मिलकरत्वरित मित्रता कर लेते,और कभी परिचित पीड़ा केदुश्मन से हो जाते शब्द !!!चुभते हैं कटार से गहरेजब कटाक्ष का रूप धरें,चिंगारी से बढ़ते बढ़तेअग्निशिखा ह...
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  September 3, 2017, 4:29 pm
गीत : कुंकुम से नित माँग सजाए---कुंकुम से नित माँग सजाए ,प्रात: आती कौन ?प्राची की घूँघट अधखोलेअधरों के दो-पट ज्यों डोलेमलय गन्ध में डूबी डूबी ,तुम सकुचाती कौन?फूलों के नव गन्ध बिखेरेअभिमन्त्रित रश्मियां सबेरेकरता कलरव गान विहग जब, तुम शरमाती कौन ?प्रात समीरण गाता आताआशा...
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  September 1, 2017, 11:39 am
Laxmirangam: संप्रेषण और संवाद:संप्रेषण और संवादआपके कानों में किसी की आवाज सुनाई देती है. शायद कोई प्रचार हो रहा है. पर भाषा आपकी जानी पहचानी नहीं है. इससे आप उसे ......
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  August 25, 2017, 12:48 am
               एक गीत : --------तो क्या हो गयातेरी खुशियों में शामिल सभी लोग हैं ,एक मैं ही न शामिल तो क्या हो  गया !ज़िन्दगी थी गुज़रनी ,गुज़र ही गईबाक़ी जो भी बची है ,गुज़र जाएगीदो क़दम साथ देकर चली छोड़ करज़िन्दगी अब न जाने किधर जाएगी तेरी यादों का मुझको सहारा बहुत ,एक तू ही न ...
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  August 16, 2017, 11:46 am
एक ग़ज़ल : वो जो चढ़ रहा था----वो जो चढ़ रहा था सुरूर था ,जो उतर रहा है ख़ुमार हैवो नवीद थी तेरे आने की , तेरे जाने की ये पुकार हैइधर आते आते रुके क़दम ,मेरा सर खुशी से है झुक गयाये ज़रूर तेरा है आस्ताँ ,ये ज़रूर तेरा दयार हैन ख़ता हुई ,न सज़ा मिली , न मज़ा मिला कभी इश्क़ काभला ये भी है कोई ज़िन्दग...
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  August 12, 2017, 11:19 am
Now that you pamper  the soulful me  Why won't  you pamper the bodily me You are the  he and I am the  she Why won't you love the she in me I am the nectar that feeds your soul Why won't you be my honey bee The fire, desires in the ember me Why won't you be my inferno spree The touch that renaissance the bodily me Why won't you be Leonardo da Vinci ...
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  August 6, 2017, 11:35 am
गीत रूप तुम्हारा खिला कँवल है हिरनी जैसी चाल हैमन्द मन्द मुस्कान तुम्हारीमुख पर लगा गुलाल हैनैनों से नैना टकरायेदिल में मचा धमाल हैरूप तुम्हारा खिला कँवल हैहिरनी जैसी चाल हैबोल तुम्हारे मिश्री जैसेमुखड़ा कोमल लाल हैअंग अंग कुंदन सा दमकेलगा सोलवाँ साल हैरूप तुम...
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  July 26, 2017, 3:52 pm
Laxmirangam: इस गली में आना छोड़ दो:                                 इस गली में आना छोड़ दो                             रे चाँद ,                  हर रात , इस गली......
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  July 24, 2017, 7:07 pm
एक ग़ज़ल :  दिल न रोशन हुआ-----दिल न रोशन हुआ ,लौ लगी भी नही, फिर इबादत का ये सिलसिला किस लिएफिर ये चन्दन ,ये टीका,जबीं पे निशां और  तस्बीह  माला  लिया किस लिए सब को मालूम है तेरे घर का पता ,हो कि पण्डित पुजारी ,मुअल्लिम कोईतू मिला ही नहीं लापता आज तक ,ढूँढने का अलग ही मज़ा  क...
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  July 17, 2017, 5:59 pm
दिल्ली से चेन्नई : एक लम्बी ट्रेन यात्रा4 महीने से जिस दिन का इंतज़ार कर रहा था आख़िरकार वो दिन आ गया। आज रात 10 बजे तमिलनाडु एक्सप्रेस से चेन्नई के लिए प्रस्थान करना था। मम्मी पापा एक दिन पहले ही दिल्ली पहुंच चुके थे। यात्रा की सारी तैयारियां भी लगभग पूरी हो चुकी थी। मैं ...
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  July 17, 2017, 11:05 am
एक क़ता-----भला होते मुकम्मल कब यहाँ पे इश्क़ के किस्सेकभी अफ़सोस मत करना कि हस्ती हार जाती हैपढ़ो ’फ़रहाद’ का किस्सा ,यकीं आ जायेगा तुम कोमुहब्बत में कभी ’तेशा’ भी बन कर मौत आती हैजो अफ़साना अधूरा था विसाल-ए-यार का ’आनन’चलो बाक़ी सुना दो अब कि मुझको नीद आती है-आनन्द.पाठक-...
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  July 15, 2017, 12:45 pm
एक लघु चिन्तन : --"देश हित में"जिन्हें घोटाला करना है वो घोटाला करेंगे---जिन्हें लार टपकाना है वो लार टपकायेगें---जिन्हें विरोध करना है वो विरोध करेंगे--- सब अपना अपना काम करेगे ।ख़ुमार बाराबंकी साहब का एक शे’र हैन हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी हैदिया जल रहा है , हवा चल रही  है&nb...
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  July 12, 2017, 10:52 am
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