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चन्द माहिया: क़िस्त 41:1:सदक़ात भुला मेराएक गुनह तुम कोबस याद रहा मेरा:2:इक चेहरा क्या भायाहर चेहरे में वोमख़्सूस नज़र आया;3:कर देता है पागल जब जब साने सेढलता है तेरा आँचल:4:उल्फ़त की यही ख़ूबीपार लगी उसकीकश्ती जिसकी  डूबी:5:इतना ही समझ लेनामै हूँ तो तुम होक्या और सनद देना-आनन्द....
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  June 11, 2017, 6:15 pm
♥कुछ शब्‍द♥: तलाश___|||: वह बेज़ान पड़ी घूर रही है घर की दीवारों को कभी छत को कभी उस छत से लटक रहे पंखे को उसकी नजरें तलाश रहीं है आज  उन नजरों में परवाह जरा सी अपने ......
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  June 10, 2017, 11:55 am
♥कुछ शब्‍द♥: इक सफर___|||: मासूम सा प्रेम मेरा  परिपक्य हो गया  वक़्त के थपेड़ो से  सख्त हो गया  किया न गया तुमसे कदर इस दिल का  आंखे देखों मेरी  सुखकर बंजर हो ग......
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  June 3, 2017, 6:23 pm
एक ग़ज़ल : ज़िन्दगी ना हुई बावफ़ा आजतक------ज़िन्दगी   ना  हुई  बावफ़ा आज तकफिर भी शिकवा न कोई गिला आजतकएक चेहरा   जिसे  ढूँढता  मैं  रहाउम्र गुज़री ,नहीं वो मिला  आजतकदिल को कितना पढ़ाता मुअल्लिम रहाइश्क़ से कुछ न आगे पढ़ा  आजतकएक जल्वा नुमाया  कभी  ’तूर’ पेबाद उसके क...
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  June 1, 2017, 8:03 pm
Laxmirangam: निर्णय ( भाग 2): निर्णय (भाग 2)                                                   (भाग 1 से आगे) रजत भी समझ नहीं पा रहा था कि कैसे अपनी भावना संजना ......
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  May 31, 2017, 4:32 pm
ज्वालादेवी से धर्मशाला (Jwaladevi to Dharamshala)कल पूरे दिन के सफर की थकान और बिना खाये पूरे दिन रहने के बाद रात को खाना खाने के बाद जो नींद आयी वो एक ही बार 4:30 बजे मोबाइल में अलार्म बजने के साथ ही खुला। बिस्तर से उठकर जल्दी से मैं नहाने की तैयारी में लग गया। फटाफट नहा-धोकर तैयार हुआ और स...
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  May 30, 2017, 11:27 am
♥कुछ शब्‍द♥: छोड़ चली हूँ___|||: मैं छोड़ चली हूँ अब तुम्हें हृदय में तुम्हारी याद लिए अनुराग के मधुर क्षणों संग वियोग की पीड़ा अथाह लिए कप्पन लिए पैरों में अपने अवशेष प्......
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  May 27, 2017, 1:42 pm
Laxmirangam: निर्णय: निर्णय ( भाग -1) बी एड में अलग अलग कॉलेजो से आए हुए अलग अलग विधाओं के विद्यार्थी थे । सबकी शैक्षणिक योग्यताएँ भी समान नहीं थीं । रजत ......
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  May 26, 2017, 8:16 pm
           एक मज़ाहिका ग़ज़ल :---ज़रा हट के ---ज़रा बच के---मेरे भी ’फ़ेसबुक’ पे कदरदान बहुत हैंख़ातून भी ,हसीन  मेहरबान  बहुत हैं"रिक्वेस्ट फ़्रेन्डशिप"पे हसीना ने ये कहा-"लटके हैं पाँव कब्र में ,अरमान बहुत हैं"’अंकल’ -न प्लीज बोलिए ऎ मेरे जान-ए-जाँ’अंकल’, जो आजकल के हैं ,शैतान ...
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  May 24, 2017, 4:46 pm
♥कुछ शब्‍द♥: #बसयूँही: सदियों से वो लिखती आई प्रेम आंधी में तूफान में बाढ़ में सैलाब में लेकिन कभी देख न पाई वक़्त के थपेड़ों ने उस स्याही को कर दिया था फ......
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  May 24, 2017, 12:21 pm
♥कुछ शब्‍द♥: युद्ध: छिड़ चूका है युद्ध भयानक और मैं अबकी इंतजार में हूँ अपनी आत्मा के हार जाने का अपनी इस घुटी हुई परिस्थितियों से उबरने के लिए______ मैंने......
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  May 23, 2017, 10:15 pm
Laxmirangam: पुस्तक प्रकाशन: पुस्तक प्रकाशन हर रचनाकार , चाहे वह कहानीकार हो, नाटककार हो या समसामयिक विषयों पर लेख लिखने वाला हो, कवि हो या कुछ और , चाह......
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  May 23, 2017, 5:49 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 40:1:जीवन की निशानी हैरमता जोगी हैऔर बहता पानी है;2:मथुरा या काशी क्यामन ही नहीं चमकाघट क्या ,घटवासी क्या:3:ख़ुद को देखा होतामन के दरपन मेंक्या सच है ,पता होता:4:बेताब न हो , ऎ दिल !सोज़-ए-जिगर तो जगाफिर जा कर उन से मिल:5;ये इश्क़ इबादत हैदैर-ओ-हरम दिल मेंऔर एक ज़ियार...
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  May 21, 2017, 5:37 pm
हौसला है ,दो हथेली है , हुनर हैकिस लिए ख़ैरात पे तेरी नज़र हैआग दिल में है बदल दे तू ज़मानातू अभी सोज़-ए-जिगर से बेख़बर हैसाजिशें हर मोड़ पर हैं राहजन केजिस तरफ़ से कारवाँ की रहगुज़र हैडूब कर गहराईयों से जब उबरतातब उसे होता कहीं हासिल गुहर हैइन्क़लाबी मुठ्ठियाँ हों ,जोश हो तोफिर न ...
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  May 13, 2017, 12:28 pm
एक व्यंग्य गीत : मैं तेरे ’ब्लाग’ पे आऊँ------[संभावित आहत जनों से क्षमा याचना सहित]-----मैं तेरे ’ब्लाग’ पे आऊँ ,तू मेरे ’ब्लाग’ पे आमैं तेरी पीठ खुजाऊँ  , तू मेरी  पीठ  खुजातू क्या लिखता रहता है , ये  बात ख़ुदा ही जानेमैने तुमको माना है  , दुनिया  माने ना मानेतू इक ’अज़ीम श...
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  May 11, 2017, 12:15 pm
Laxmirangam: एक पुस्तक की प्रूफ रीडिंग: एक पुस्तक की प्रूफ रीडिंग सबसे पहली बात: “ प्रूफ रीडर का काम पुस्तक में परिवर्तन करना नहीं है , केवल सुझाव देने हैं कि पुस्तक......
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  May 8, 2017, 1:15 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 38:1: उनका हूँ दीवानादेख रहें ऐसेजैसे मैं  बेगाना:2:कोरी न चुनरिया हैकैसे मैं आऊँ ?खाली भी गगरिया है;3:कुछ भी तो नही लेतीख़ुशबू ,गुलशन सेफूलों का पता देती:4:दुनिया का मेला हैसब तो अपने हीदिल फिर भी अकेला है:5:मुझको अनजाने मेंलोग पढ़ेंगे कलतेरे अफ़साने में-आ...
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  May 8, 2017, 11:18 am
चन्द माहिया : क़िस्त 39 [ अहवाल-ए-कश्मीर पर]:1:वो ख़्वाब दिखाते हैंजन्नत की ख़ातिरजन्नत ही जलाते हैं:2;नफ़रत ,शोले ,फ़ित्नेबस्ती जली किस कीरोटी सेंकी ,किसने ?:3:ये कैसी सियासत है ?धुन्ध ,धुँआ केवलये किस की विरासत है?;4:रहबर बन कर आतेकलम छुड़ा तुम सेपत्थर हैं चलवाते ;5:केसर की क्यारी में...
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  April 28, 2017, 11:02 am
FaceBook और  Whatsup के ज़माने में और U CHEAT.......U SHUT UP----UUUUUU SHUT UP के दौर में एक ’क्लासिकल’ युगल  शिकायती :   गीत कैसे कह दूँ कि अब तुम बदल सी गईवरना क्या  मैं समझता नहीं  बात क्या !एक पल का मिलन ,उम्र भर का सपनरंग भरने का  करने  लगा  था जतनकोई धूनी रमा , छोड़ कर चल गयालकड़ियाँ कुछ है...
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  April 22, 2017, 6:43 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 37:1:सद ख़्वाब ,ख़यालों मेंजब तक  है परदाउलझा हूँ सवालों में ;2:शिकवा  न शिकायत हैमैं ही ग़लत ठहराये कैसी रवायत है:3:तुम ने ही बनाया है ख़ाक से जब मुझ को फिर ऎब क्यूँ आया है ?:4:सच है इनकार नहीं’तूर’ पे आए ,वोलेकिन दीदार नहीं :5;कहता है कहने दोबात ज़हादत कीज़...
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  April 20, 2017, 5:29 pm
उर्दू बह्र पर एक बातचीत :क़िस्त 30 [ बह्र-ए-हज़ज [ सालिम बह्र-1]Discliamer clause -वही जो क़िस्त 1 में है फिछली क़िस्त में हमने बहर मुतक़ारिब और बहर मुतदारिक की सालिम , मुज़ाहिफ़ और इसकी  ’मुज़ाअफ़’  पर चर्चा कर चुके है । हालाँ कि उसके बाद भी  चर्चा की और भी गुंजाइश थी मगर ज़रूरी नहीं थी।ये दोन...
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  April 17, 2017, 4:24 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 36:1:दुनिया को दिखाना क्या !दिल से नहीं मिलनाफिर हाथ मिलाना क्या !:2:कुछ तुम को ख़बर भी हैमेरे भी दिल मेंइक ज़ौक़-ए-नज़र भी है:3:गुरबत में हो जब दिलदर्द अलग अपनाकहना भी है मुश्किल:4;जितनी  भी हो अनबनतुम पे भरोसा हैरूठो न कभी , जानम !:5:मेरी भी तो सुन लेतेमैं जो ग़लत ह...
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  April 8, 2017, 11:45 am
चन्द माहिया : क़िस्त 35:1:सजदे में पड़े हैं हमलेकिन जाने क्यूँ दिल है दरहम बरहम;2;जब से है तुम्हें देखादिल ने कब मानीकोई लक्ष्मन  रेखा:3:क्या बात हुई ऐसीतेरे दिल में अबचाहत न रही वैसी:4:समझो न कि पानी है क़तरा आँसू काख़ुद एक कहानी है:5:वो शाम सुहानी हैजिसमें है शामिलकुछ याद पु...
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  March 28, 2017, 7:55 pm
मंच के सभी सदस्यों /मित्रों को इस अकिंचन का होली की बहुत बहुत शुभकामनायें ---इस गीत के साथलगा दो प्रीति का चन्दन मुझे इस बार होली में महक जाए ये कोरा तन-बदन इस बार होली में ये बन्धन प्यार का है जो कभी तोड़े से ना टूटेभले ही प्राण छूटे पर न रंगत प्यार की  छूटेअकेले मन नही...
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  March 12, 2017, 12:40 pm
                                                   "बिखरीं पड़ीं हैं"   "बिखरीं पड़ीं हैं"संवेदनाओं के शब्द भारित नेत्र में टिकतें नहीं हैंआसमां के स्वप्न रंजित धूल में बिखरें पड़ें हैं,विश्वास की पराकाष्ठा हो चली निराशा  दिखतें मुझको नहीं ...
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Tag :कड़ियाँ
  March 7, 2017, 11:36 pm
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