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एक ग़ज़लसलामत पाँव है जिनके वो कन्धों पर टिके हैंजो चल सकते थे अपने दम ,अपाहिज से दिखे हैकि जिनके कद से भी ऊँचे "कट-आउट’ हैं नगर मेंजो भीतर झाँक कर देखा बहुत नीचे गिरे हैंबुलन्दी आप की माना कि सर चढ़  बोलती  हैमगर ये क्या कि हम सब  आप को बौने  दिखे हैंये "टुकड़े गैंग"वाल...
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  July 6, 2019, 11:31 am
चन्द माहिया : क़िस्त 60:1:हूरों की जीनत मेंडूबा है ज़ाहिदकुछ ख़्वाब-ए-जन्नत में:2:घिर घिर आए बदराबादल बरसा भीभींगा न मेरा अँचरा:3:ग़ैरों की बातों कोमान लिया तूनेसच,झूठी बातों को:4:इतना ही फ़साना हैफ़ानी दुनिया मेजाना और आना है:5:तुम कहती, हम सुनतेबीत गए वो दिनजब साथ सपन बुनते-आनन्द.प...
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  June 28, 2019, 10:46 am
कल जो मैं सोयाबंद कमरा देख बहुत रोया ।आंखें ना खुलती थी गर्मी भी कुछ भिगोती थी ।हवा की थी आस लगती थी बहुत प्यास ।ना आवाज़ ना शोरथी शांति चहुँ ओर ।हाथ कहीं बंधे से थेपैर भी खुलते न थे ।थी बहुत निराशामिली ना कोई आशा। एक कतरा अमृत काकुछ जीवन सा दे गयाआंखें तो खुली नहीं...
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  June 25, 2019, 9:02 pm
एक ग़ज़ल : हुस्न हर उम्र में  जवां देखा---हुस्न हर उम्र में जवाँ देखाइश्क़ हर मोड़ पे अयाँ  देखाएक चेहरा जो दिल में उतरा हैवो ही दिखता रहा जहाँ देखाइश्क़ तो शै नहीं तिजारत कीआप ने क्यों नफ़ा ज़ियाँ  देखा ?और क्या देखना रहा बाक़ीतेरी आँखों में दो जहाँ देखाबज़्म में थे सभी ,मगर कि...
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  June 21, 2019, 10:38 am
चन्द माहिया : क़िस्त 59:1:सब क़स्में खाते हैंकौन निभाता हैकहने की बाते हैं:2:क्या हुस्न निखारा हैजब से डूबा मनउबरा न दुबारा है:3:इतना न सता माहियाक्या थी ख़ता मेरीसच,कुछ तो बता माहिया:4:बेदाग़ चुनरिया मेंदाग़ लगा बैठेआकर इस दुनिया में:5:धरती रह रह तरसीबदली आई तोआ कर भी नहीं बरसी-आन...
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  June 15, 2019, 12:04 pm
मत्त सवैया मुक्तकमाला (2019 चुनाव)हर दल जो टुकड़ा टुकड़ा था, इस बार चुनावों ने छाँटा;बाहर निकाल उसको फेंका, ज्यों चुभा हुआ हो वो काँटा;जो अपनी अपनी डफली पर, बस राग स्वार्थ का गाते थे;उस भ्रष्ट तंत्र के गालों पर, जनता ने मारा कस चाँटा।इस बार विरोधी हर दल ने, ऐसा भारी झेला घाटा;चित...
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Tag :मत्त सवैया
  June 9, 2019, 11:45 am
एक ग़ज़ल : जब भी ये प्राण निकले---जब भी ये प्राण निकलें ,पीड़ा मेरी  घनी होइक हाथ पुस्तिका  हो .इक हाथ  लेखनी होसूली पे रोज़ चढ़ कर ,ज़िन्दा रहा हूँ कैसेआएँ कभी जो घर पर,यह रीति  सीखनी होहर दौर में रही है ,सच-झूठ की लड़ाईतुम ’सच’ का साथ देना,जब झूठ से ठनी होबेचैनियाँ हों दिल में ,...
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  June 8, 2019, 10:47 am
प्रेम एक शब्द -एक नाद हैएक ऊर्जा हैउसे माध्यम चाहिएपृथ्वी पेपनपने  के लिए ...जैसे मैं और तुम ! प्रेम काआह्लाद काकोई स्वरूप नहीं होताये निर्गुण निराकार होता  हैॐ के उस शब्द की तरहशुद्ध और . सात्विक !सुनो....हमारा प्रेम ...हमारा नेह आह्लाद  ..शाश्वत हैपरमब्रह्म की तरह ...य...
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  May 30, 2019, 12:33 am
चन्द माहिया : क़िस्त 58:1:सदचाक हुआ दामनतेरी उलफ़त मेंबरबाद हुआ ’आनन’:2:क्यों रूठी है ,हमदमकैसे मनाना हैकुछ तो सिखा जानम:3:दिल ले ही लिया तुमनेजाँ भी ले लेतेक्यों छोड़ दिया तुमने ?:4:गिर जाती है बिजलीरह रह कर दिल परलहरा के न चल पगली:5:क्या पाना क्या खोनाजब से गए हो तुमदिल का खाली को...
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  May 29, 2019, 4:27 pm
ग़ज़ल   :  सपनों को रखा गिरवी--सपनों को रखा  गिरवी, साँसों पे उधारी हैक़िस्तों में सदा हमने ,यह उम्र  गुज़ारी  हैहर सुब्ह रहे ज़िन्दा , हर शाम रहे मरतेजितनी है मिली क़िस्मत ,उतनी ही हमारी हैअबतक है कटी जैसे, बाक़ी भी कटे वैसेसदचाक रही हस्ती ,सौ बार सँवारी  हैजब से है उन्ह...
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  May 18, 2019, 11:43 am
एक ग़ज़ल : वो रोशनी के नाम से --वो रोशनी के नाम से डरता है आजतकजुल्मत की हर गली से जो गुज़रा है आजतकबढ़ने को बढ़ गया है किसी ताड़ की तरहबौना हर एक शख़्स को समझा है आजतकसब लोग हैं कि भीड़ का हिस्सा बने हुए"इन्सानियत’ ही भीड़ में तनहा है आजतकहर पाँच साल पे वो नया ख़्वाब बेचताजनता को बेवक़...
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  May 13, 2019, 11:14 am
लक्ष्मीरंगम - Laxmirangam: अंतस के मोती: पुस्तक ऑर्डर करने के लिए निचली लाइन पर क्लिक करें. पूरा लिंक खुलेगा. उस पर क्लिक कीजिए तो खरीदने का पोर्टल खुल जाएगा फिर View cart, Go to c......
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  May 7, 2019, 9:32 pm
एक ग़ज़ल : झूठ का है जो फैला धुआँ---झूठ का है जो  फैला  धुआँसाँस लेना भी मुश्किल यहाँसच की उड़ती रहीं धज्जियाँझूठ का दबदबा  था जहाँचढ़ के औरों के कंधों पे वोआज छूने चला  आसमाँतू इधर की उधर की न सुनतू अकेला ही  है  कारवाँजिन्दगी आजतक ले रहीहर क़दम पर कड़ा इम्तिहाँबेज़ुबाँ...
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  May 7, 2019, 10:02 am
एक व्यंग्य : बड़ा शोर सुनते थे-----’बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का ’ ।ख़बर गर्म थी ।उनकी नाक उनकी दादी जैसी है। वह आँधी हैं ’आँधी"। अगर बनारस से उठ गई तो ’कमल’ की तमाम पँखुड़ियां उड़ जाएँगी ।हाथी साथी सब हवा हो जायेगे। उनके कार्यकर्ताओं मे गजब का उत्साह था जब वो बार बार पूछती थ...
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  May 1, 2019, 11:38 am
एक ग़ज़ल : कहाँ आवाज़ होती है--कहाँ आवाज़ होती है कभी जब टूटता है दिलअरे ! रोता है क्य़ूँ प्यारे ! मुहब्बत का यही हासिलमुहब्बत के समन्दर का सफ़र काग़ज़ की कश्ती मेंफ़ना ही इसकी क़िस्मत है, नहीं इसका कोई साहिलमुहब्बत का सफ़र आसान है तुम ही तो कहते थेअभी तो इब्तिदा है ये ,सफ़र आगे का है मु...
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  April 19, 2019, 11:07 am
एक ग़ज़ल : जब भी शीशे का इक मकां देखा---जब भी शीशे का इक मकां देखापास पत्थर की थी दुकां,  देखादूर कुर्सी पे  है नज़र जिसकी उसको बिकते जहाँ तहाँ  देखावादा करता वो कस्में खाता हैपर निभाते हुए कहाँ   देखाजब कभी ’रथ’ उधर से गुज़रा हैबाद  बस देर तक धुआँ  देखाकल तलक जो भी त...
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  April 13, 2019, 11:13 am
चिड़िया: मानव, तुम्हारा धर्म क्या है ?: धर्म चिड़िया का, खुशी के गीत गाना  ! धर्म नदिया का, तृषा सबकी बुझाना । धर्म दीपक का, हवाओं से ना डरना ! धर्म चंदा का, सभी का ताप हरना......
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  April 13, 2019, 8:50 am
एक व्यंग्य :आम चुनाव और नाक2019। चुनाव का मौसम और मौसम का अपना मिजाज।आजकल चर्चा मुद्दों पर नहीं, नाक पर चल रही है । मुद्दे तो अनन्त है --हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता -जैसा ।कुछ मुद्दे तो शाश्वत हैं,-जैसे ग़रीबी,बेरोज़गारी,महंगाई,भ्रष्टाचार,महिला सुरक्षा,कानून-व्यवस्था। ये तो हर च...
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  April 12, 2019, 11:34 am
एक व्यंग्य : हिन्दी सेवा उर्फ़ फ़ेसबुक सेवा- भाई साहब ! सोचता हूँ कि अब मैं भी कुछ हिन्दी की सेवा कर लूँ।" -मिश्रा जी ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा-"क्यों ? अब कितनी सेवा करोगे हिन्दी की ? सरकारी नौकरी में 30-साल तक ’हिन्दी-पखवारा"में हिन्दी की सेवा ही तो की है ।हर साल बड़े साहब की ’...
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  March 27, 2019, 5:29 pm
चिड़िया: होली: होली के अवसर पर सारे, रंगों को मैं ले आऊँ, और तुम्हारे जीवन में मैं, उन रंगों को बिखराऊँ... लाल रंग है गुलमोहर का, केशरिया पलाश का ह......
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  March 19, 2019, 6:30 am
भीषण ग्रीष्मधरती छूकर जलते पैरबड़ी कठीनाई से पहुचता थाबिना चप्पलों केतालाब के किनारेउस पेड़ के नीचे ।एक गौरैया गर्मी से बेहालकिनारे पानी मेंहो रही थी लोटपोट।फिर पानी से बाहर रही थी फूदक ।फरफरा रही थी पंखझाड़ रही थी पांखों की बूंदेंअल्हड़ता के साथआसपास से अनभिगव स...
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  March 8, 2019, 1:16 am
कुछ और नहीं हमी की तरह हैये जिंदगी जिंदगी की तरह हैयो न झुका सर हर चैखटों परये आदत बंदगी की तरह हैक्यूं जां लेके घूमता है हथेली पेये जूर्रत आशिकी की तरह हैरात ख्वाबों में उससे मुलाकात हुईउसकी हर बात मौसिकी की तरह हैळो अब ख्याल गजल बनने ळगेहर खुशी गम, गम खुशी की तरह हैयूॅ ...
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  March 8, 2019, 1:12 am
गुरुवासरीय गोष्ठी संपन्न =================प्रत्येक माह के प्रथम गुरूवार को होने वाली गुरुवासरीय काव्यगोष्ठी दिनांक ७ मार्च २०१९ गुरूवार को डा श्यामगुप्त के आवास सुश्यानिदी, के-३४८, आशियाना , लखनऊ पर संपन्न हुई |\डा श्यामगुप्त ने माँ सरस्वती वन्दना प्रस्तुत करते हुए पढ़ा---हे म...
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  March 7, 2019, 11:06 pm
Laxmirangam: ब्लॉग पर पोस्ट की सूचना.: कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर ही करें. गूगल + की टिप्पणियाँ अस्वीकार्य कर दी गई हैं. प्रिय पाठकगण, हाल ही में गूगल प्लस से एक संदेश आया कि...कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें....
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  February 15, 2019, 2:12 pm
इन्द्रवज्रा/उपेंद्र वज्रा/उपजाति छंद"शिवेंद्रवज्रा स्तुति"परहित कर विषपान, महादेव जग के बने।सुर नर मुनि गा गान, चरण वंदना नित करें।।माथ नवा जयकार, मधुर स्तोत्र गा जो करें।भरें सदा भंडार, औघड़ दानी कर कृपा।।कैलाश वासी त्रिपुरादि नाशी।संसार शासी तव धाम काशी।नन्दी सवा...
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  February 4, 2019, 5:07 pm
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