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चिड़िया: बूँद समाई सिंधु में !: प्रीत लगी सो लगि गई, अब ना फेरी जाय । बूँद समाई सिंधु में, अब ना हेरी जाय ।। हिय पैठी छवि ना मिटे, मिटा थकी दिन-रैन । निर्मोही के ......
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  November 26, 2017, 8:21 pm
चिड़िया: पुस्तक समीक्षा - "मन दर्पण": पुस्तक समीक्षा रचना – मन दर्पण. रचनाकार – माड़भूषि रंगराज अयंगर. प्रकाशक – बुक बजूका पब्लिकेशन्स, कानपुर. मूल्य – रु. 175 मात्र ......
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  November 13, 2017, 3:09 pm
चिड़िया: जब शरद आए !: ताल-तलैया खिलें कमल-कमलिनी मुदित मन किलोल करें हंस-हंसिनी ! कुसुम-कुसुम मधुलोभी मधुकर मँडराए, सुमनों से सजे सृष्टि,जब शरद आए !!! ......
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  November 7, 2017, 11:34 am
चिड़िया: जीवन - घट रिसता जाए है...: जीवन-घट रिसता जाए है... काल गिने है क्षण-क्षण को, वह पल-पल लिखता जाए है... जीवन-घट रिसता जाए है । इस घट में ही कालकूट विष, अमृत है इस......
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  November 5, 2017, 2:10 pm
चिड़िया: आनंद की खोज: आनंद की खोज आओ साथी मिलकर खोजें, जीवन में आनंद को, क्रोध, ईर्ष्या, नफरत त्यागें पाएँ परमानंद को... जीवन की ये भागादौड़ी, लगी रही ह......
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  November 2, 2017, 11:23 am
Laxmirangam: डिजिटल इंडिया - मेरा अनुभव.: डिजिटल इंडिया – मेरा अनुभव. उस दिन मेरे मोबाईल पर फ्लेश आया. यदि आप जिओ का सिम घर बैठे पाना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें. मैंने क्लिक क......
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  October 31, 2017, 2:34 pm
चिड़िया: रहिए जरा सँभलकर: रहिए जरा सँभलकर  मंजिल है दूर कितनी,  इसकी फिकर न करिए बस हमसफर राहों के,  चुनिए जरा सँभलकर... काँटे भी ढूँढते हैं,  नजदीकियों के ......
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  October 28, 2017, 9:46 am
चिड़िया: खामोशियाँ गुल खिलाती हैं !: रात के पुर-असर सन्नाटे में जब चुप हो जाती है हवा फ़िज़ा भी बेखुदी के आलम में हो जाती है खामोश जब ! ठीक उसी लम्हे, चटकती हैं अनगिनत कलि......
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  October 23, 2017, 11:53 pm
Laxmirangam: साजन के गाँव में.: साजन के गाँव में. आज मत रोको मुझे, साजन के गाँव में, सुनो मेरी छम छम, बिन पायल के पाँव में. आलता मँगाऊँगी मैं, मेंहदी  रच......
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  October 22, 2017, 4:26 pm
Laxmirangam: धड़कन: धड़कन संग है तुम्हारा आजन्म, या कहें संग है हमारा आजन्म. छोड़ दे संग परछाईं जहाँ, उस घनेरी रात में भी, गर तुम नहीं हो सा......
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  October 15, 2017, 11:04 pm
 ग़ज़ल : मिलेगा जब भी वो हमसे---मिलेगा जब भी वो हम से, बस अपनी ही सुनायेगामसाइल जो हमारे हैं  , हवा  में  वो   उड़ाएगाअभी तो उड़ रहा है आस्माँ में ,उड़ने  दे उस कोकटेगी डॊर उस की तो ,कहाँ पर और जायेगा ?सफ़र में हो गया तनहा ,तुम्हारे  साथ चल कर जोवो यादों के चरागों को  जलाये...
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  October 14, 2017, 6:08 pm
एक ग़ज़ल : छुपाते ही रहे अकसर--छुपाते ही रहे अकसर ,जुदाई के दो चश्म-ए-नमजमाना पूछता गर ’क्या हुआ?’ तो क्या बताते हममज़ा ऐसे सफ़र का क्या,उठे बस मिल गई मंज़िलन पाँवों में पड़े छाले  ,न आँखों  में  ही अश्क-ए-ग़मन समझे हो न समझोगे ,  ख़ुदा की  यह इनायत हैबड़ी क़िस्मत से मिलता है ,मुहब...
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  October 6, 2017, 6:30 pm
ग़ज़ल : बहुत अब हो चुकी बातें------बहुत अब हो चुकी बातें तुम्हारी ,आस्माँ कीउतर आओ ज़मीं पर बात करनी है ज़हाँ कीमसाइल और भी है ,पर तुम्हें फ़ुरसत कहाँ हैकहाँ तक हम सुनाएँ  दास्ताँ  अश्क-ए-रवाँ कीमिलाते हाथ हो लेकिन नज़र होती कहीं परकि हर रिश्ते में रहते सोचते  सूद-ओ-जियाँ कीसभ...
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  October 3, 2017, 5:09 pm
[ 2--अक्टूबर -- गाँधी जयन्ती के अवसर पर ---]डायरी के पन्नों से-----------------------एक व्यंग्य : अनावरण एक गाँधी मूर्ति का-------......नेता जी ने अपनी गांधी-टोपी सीधी की।रह रह कर टेढी़ हो जाया करती है। विशेषत: जब वह सत्ता सुख से वंचित रहते हैं।धकियाये जाने के बाद टेढी़-मेढ़ी ,मैली-कुचैली हो जाती है।...
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  October 2, 2017, 6:35 pm
Laxmirangam: मेरा जिन्न: मेरा जिन्न                     कल सुबह अचानक ही मेरी मौत हो गई.                मैं लाश लिए काँधे किसी दर निकल पड़ा,      ......
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  September 29, 2017, 8:11 pm
 एक लघु कथा  : ----रावण का पुतला ---- आज रावण वध है । 40 फुट का पुतला जलाया जायेगा । विगत वर्ष 30 फुट का जलाया गया था } इस साल बढ़ गया रावण का कद। पिछ्ले साल से से इस साल बलात्कार अत्याचार ,अपहरण ,हत्या की घटनायें बढ़ गई तो ’रावण’ का  कद भी बढ गया।रामलीला की  तैयारियाँ पूरी हो चुक...
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  September 29, 2017, 10:39 am
जिन्दगीविवसता में  हाथ  कैसे  मल रही  है जिन्दगीमनुज से ही मनुजता को छल रही है जिन्दगीएक  छोटे  से  वतन  के  सत्य  में आभाव मेंरास्ते की पटरियों  पर  पल  रही  है जिन्दगी//0//फूल  है  जिन्दगी  शूल  है  जिन्दगीभटकने पर  कठिन भूल है जिन्दगीजो समझत...
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  September 25, 2017, 4:03 pm
एक ग़ैर रवायती ग़ज़ल :---ये गुलशन तो सभी का है----ये गुलशन तो सभी का है ,तुम्हारा  है, हमारा हैलगा दे आग कोई  ये नही   हमको गवारा  हैतुम्हारा धरम है झूठा ,अधूरा है ये फिर मज़हबज़मीं को ख़ून से रँगने का गर मक़सद तुम्हारा हैयक़ीनन आँख का पानी तेरा अब मर चुका होगाजलाना घर किसी का क्यू...
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  September 24, 2017, 12:42 pm
चिड़िया: बस, यूँ ही....: नौकरी, घर, रिश्तों का ट्रैफिक लगा,  ज़िंदगी की ट्रेन छूटी, बस यूँ ही !!! है दिवाली पास, जैसे ही सुना, चरमराई खाट टूटी, बस यूँ ही !!! ड......
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  September 23, 2017, 12:44 pm
Laxmirangam: हिंदी दिवस 2017 विशेष - हमारी राष्ट्रभाषा: हमारी राष्ट्रभाषा. परतंत्रता की सदियों मे स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों को एक जुट करने के लिए राष्ट्रभाषा शब्द का शायद प्रथम प्रयोग......
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  September 16, 2017, 8:10 pm
चिड़िया: पाषाण: पाषाण सुना है कभी बोलते, पाषाणों को ? देखा है कभी रोते , पाषाणों को ? कठोरता का अभिशाप, झेलते देखा है ? बदलते मौसमों से, जूझते द......
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  September 13, 2017, 3:32 pm
Laxmirangam: दीपा: दीपा हर दिन की तरह मुंबई की लोकल ट्रेन खचाखच भरी हुई थी. यात्री भी हमेशा की तरह अंदर बैठे , खड़े थे. गेट के पास कुछ यात्री हेंडल पकड़े ......
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  September 12, 2017, 4:52 pm
Laxmirangam: आस्था : बहता पानी: आस्था : बहता पानी                 तैरना सीखने की चाह में,                 वह समुंदर किनारे                  अठखेलियाँ करन......
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  September 7, 2017, 11:13 am
चिड़िया: नुमाइश करिए: दोस्ती-प्यार-वफा की, न अब ख्वाहिश करिए ये नुमाइश का जमाना है नुमाइश करिए । अब कहाँ वक्त किसी को जनाब पढ़ने का, इरादा हो भी, खत लिखने का,......
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  September 3, 2017, 6:52 pm
चिड़िया: शब्द:शब्दमानव की अनमोल धरोहरईश्वर का अनुपम उपहार,जीवन के खामोश साज परसुर संगीत सजाते शब्द !!!अनजाने भावों से मिलकरत्वरित मित्रता कर लेते,और कभी परिचित पीड़ा केदुश्मन से हो जाते शब्द !!!चुभते हैं कटार से गहरेजब कटाक्ष का रूप धरें,चिंगारी से बढ़ते बढ़तेअग्निशिखा ह...
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  September 3, 2017, 4:29 pm
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