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Blog: आपका ब्लॉग

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
लक्ष्मीरंगम - Laxmirangam: ऐसे सिखाएँ हिंदी: कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें. G+ की टिप्पणियाँ अस्वीकार्य कर दी गई हैं. ऐसे सिखाएँ हिंदी मैं, मेरे हिंदी की शिक्षिका के सा...कृपया टिप्पणियाँ ब्लॉग पर करें. G+ की टिप्पणियाँ अस्वीकार्य कर दी गई हैं.https://laxmirangam.blogspot.com/2019/09/blog-post.htmlऐसेसिखाए... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   5:48pm 13 Sep 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल मैं अपना ग़म सुनाता हूँ ,वो सुन कर मुस्कराते हैंवो मेरी दास्तान-ए-ग़म को ही नाक़िस बताते हैंबड़े मासूम नादाँ हैं  ,खुदा कुछ अक़्ल दे उनकोकिसी ने कह दिया "लव यू" ,उसी पर जाँ लुटाते हैंख़ुशी अपनी जताते हैं ,हमें किन किन अदाओं सेहमारी ही ग़ज़ल खुद की बता, हमको सुनाते हैंतुम्... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   6:19am 13 Sep 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
14-सितम्बर , हिंदी दिवस के अवसर पर विशेष-----]एक व्यंग्य : हिंदी पखवारा और मुख्य अतिथि "अरे भाई मिश्रा जी ! कहाँ भागे जा रहे हो ? " ---आफिस की सीढ़ियों पर मिश्रा जी टकरा गए’भई पाठक ! तुम में यही बुरी आदत है है । प्रथमग्रासे मच्छिका पात:। तुम्हें मालूम नहीं कि आज से ’हिन्दी पखवारा"शुर... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   5:39am 10 Sep 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
तुमने देखा तो होगा मेरा घर मैं मेरे घर में अपनों के बीच अपनेपन से रहती हूँ ..‘मेरे ’  घर में तीन बेडरूम एक हॉल और किचन के अलावा एक स्टोररूम और पूजा का एक कोना है ..और हाँअपनी हैसियत के हिसाब से सजा रखा है मैंने  घर अपना ..हर रोज़ बाई आती हैमेरे  घर&n... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   11:54am 5 Sep 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
“मत लिखो !”‬-चार्ल्ज़ बुकोवस्की ने कहा था,तब तक किजब तक लिखने कीहवस नहीं होती -यही कहा था उन्होंने !!और भी बहुत कुछ !कहा था किहोते है करोड़ों लेखकमुझ से जो ख़यालों मेंस्वमैथुन करते हैऔर बन जाते हैसवघोषित लेखक !मगर चार्ल्ज़,मैं क्या करूँ ?जब लार सेटपकने लगते है ये शब्द,क़ल... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   11:50am 10 Aug 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
लड़कियाँ अनाज के आटे सी होती है ..गाँव की लड़की बाजरा मक्का या जवारहोती है शहरी लड़कियाँ मैदे या गेहूँ सा ग़ुबार होती है ...बेली ही जाती है सब रोटी पराँठा लिट्टी क़ुल्चे सी और खाई जाती है बस भूख (!) मिटाने के लिए ..... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   3:16pm 3 Aug 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
तुम्हें खोजते हुएपहुँच जाना मेरा हर बार उस क्षितिज पेजहाँ कदाचितआदम हौवा पहली दफ़े  मिले थे ...अथक  प्रयास करना मेरा हम दोनों के अस्तित्व के jigsaw puzzle से ख़यालों के और रूह के  टुकड़े जो कदाचित एक दूसरे में फ़िट बैठने के लिए बने थे मगर ये तुम्हारे... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   1:42pm 3 Aug 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : साज़िश थी अमीरों की--साज़िश थी अमीरों की ,फाईल में दबी होगीदो-चार मरें होंगे  ,’कार ’ उनकी  चढ़ी  होगी’साहब’ की हवेली है ,सरकार भी ताबे’ मेंइक बार गई ’कम्मो’ लौटी न कभी  होगीआँखों का मरा पानी , तू भी तो मरा होगाआँगन में तेरे जिस दिन ’तुलसी’ जो जली होगीपैसों की गवा... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   5:16am 29 Jul 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़लसलामत पाँव है जिनके वो कन्धों पर टिके हैंजो चल सकते थे अपने दम ,अपाहिज से दिखे हैकि जिनके कद से भी ऊँचे "कट-आउट’ हैं नगर मेंजो भीतर झाँक कर देखा बहुत नीचे गिरे हैंबुलन्दी आप की माना कि सर चढ़  बोलती  हैमगर ये क्या कि हम सब  आप को बौने  दिखे हैंये "टुकड़े गैंग"वाल... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   6:01am 6 Jul 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
चन्द माहिया : क़िस्त 60:1:हूरों की जीनत मेंडूबा है ज़ाहिदकुछ ख़्वाब-ए-जन्नत में:2:घिर घिर आए बदराबादल बरसा भीभींगा न मेरा अँचरा:3:ग़ैरों की बातों कोमान लिया तूनेसच,झूठी बातों को:4:इतना ही फ़साना हैफ़ानी दुनिया मेजाना और आना है:5:तुम कहती, हम सुनतेबीत गए वो दिनजब साथ सपन बुनते-आनन्द.प... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   5:16am 28 Jun 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
कल जो मैं सोयाबंद कमरा देख बहुत रोया ।आंखें ना खुलती थी गर्मी भी कुछ भिगोती थी ।हवा की थी आस लगती थी बहुत प्यास ।ना आवाज़ ना शोरथी शांति चहुँ ओर ।हाथ कहीं बंधे से थेपैर भी खुलते न थे ।थी बहुत निराशामिली ना कोई आशा। एक कतरा अमृत काकुछ जीवन सा दे गयाआंखें तो खुली नहीं... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   3:32pm 25 Jun 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : हुस्न हर उम्र में  जवां देखा---हुस्न हर उम्र में जवाँ देखाइश्क़ हर मोड़ पे अयाँ  देखाएक चेहरा जो दिल में उतरा हैवो ही दिखता रहा जहाँ देखाइश्क़ तो शै नहीं तिजारत कीआप ने क्यों नफ़ा ज़ियाँ  देखा ?और क्या देखना रहा बाक़ीतेरी आँखों में दो जहाँ देखाबज़्म में थे सभी ,मगर कि... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   5:08am 21 Jun 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
चन्द माहिया : क़िस्त 59:1:सब क़स्में खाते हैंकौन निभाता हैकहने की बाते हैं:2:क्या हुस्न निखारा हैजब से डूबा मनउबरा न दुबारा है:3:इतना न सता माहियाक्या थी ख़ता मेरीसच,कुछ तो बता माहिया:4:बेदाग़ चुनरिया मेंदाग़ लगा बैठेआकर इस दुनिया में:5:धरती रह रह तरसीबदली आई तोआ कर भी नहीं बरसी-आन... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   6:34am 15 Jun 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
मत्त सवैया मुक्तकमाला (2019 चुनाव)हर दल जो टुकड़ा टुकड़ा था, इस बार चुनावों ने छाँटा;बाहर निकाल उसको फेंका, ज्यों चुभा हुआ हो वो काँटा;जो अपनी अपनी डफली पर, बस राग स्वार्थ का गाते थे;उस भ्रष्ट तंत्र के गालों पर, जनता ने मारा कस चाँटा।इस बार विरोधी हर दल ने, ऐसा भारी झेला घाटा;चित... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   6:15am 9 Jun 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : जब भी ये प्राण निकले---जब भी ये प्राण निकलें ,पीड़ा मेरी  घनी होइक हाथ पुस्तिका  हो .इक हाथ  लेखनी होसूली पे रोज़ चढ़ कर ,ज़िन्दा रहा हूँ कैसेआएँ कभी जो घर पर,यह रीति  सीखनी होहर दौर में रही है ,सच-झूठ की लड़ाईतुम ’सच’ का साथ देना,जब झूठ से ठनी होबेचैनियाँ हों दिल में ,... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   5:17am 8 Jun 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
प्रेम एक शब्द -एक नाद हैएक ऊर्जा हैउसे माध्यम चाहिएपृथ्वी पेपनपने  के लिए ...जैसे मैं और तुम ! प्रेम काआह्लाद काकोई स्वरूप नहीं होताये निर्गुण निराकार होता  हैॐ के उस शब्द की तरहशुद्ध और . सात्विक !सुनो....हमारा प्रेम ...हमारा नेह आह्लाद  ..शाश्वत हैपरमब्रह्म की तरह ...य... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   7:03pm 29 May 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
चन्द माहिया : क़िस्त 58:1:सदचाक हुआ दामनतेरी उलफ़त मेंबरबाद हुआ ’आनन’:2:क्यों रूठी है ,हमदमकैसे मनाना हैकुछ तो सिखा जानम:3:दिल ले ही लिया तुमनेजाँ भी ले लेतेक्यों छोड़ दिया तुमने ?:4:गिर जाती है बिजलीरह रह कर दिल परलहरा के न चल पगली:5:क्या पाना क्या खोनाजब से गए हो तुमदिल का खाली को... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   10:57am 29 May 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
ग़ज़ल   :  सपनों को रखा गिरवी--सपनों को रखा  गिरवी, साँसों पे उधारी हैक़िस्तों में सदा हमने ,यह उम्र  गुज़ारी  हैहर सुब्ह रहे ज़िन्दा , हर शाम रहे मरतेजितनी है मिली क़िस्मत ,उतनी ही हमारी हैअबतक है कटी जैसे, बाक़ी भी कटे वैसेसदचाक रही हस्ती ,सौ बार सँवारी  हैजब से है उन्ह... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   6:13am 18 May 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : वो रोशनी के नाम से --वो रोशनी के नाम से डरता है आजतकजुल्मत की हर गली से जो गुज़रा है आजतकबढ़ने को बढ़ गया है किसी ताड़ की तरहबौना हर एक शख़्स को समझा है आजतकसब लोग हैं कि भीड़ का हिस्सा बने हुए"इन्सानियत’ ही भीड़ में तनहा है आजतकहर पाँच साल पे वो नया ख़्वाब बेचताजनता को बेवक़... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   5:44am 13 May 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
लक्ष्मीरंगम - Laxmirangam: अंतस के मोती: पुस्तक ऑर्डर करने के लिए निचली लाइन पर क्लिक करें. पूरा लिंक खुलेगा. उस पर क्लिक कीजिए तो खरीदने का पोर्टल खुल जाएगा फिर View cart, Go to c...... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   4:02pm 7 May 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : झूठ का है जो फैला धुआँ---झूठ का है जो  फैला  धुआँसाँस लेना भी मुश्किल यहाँसच की उड़ती रहीं धज्जियाँझूठ का दबदबा  था जहाँचढ़ के औरों के कंधों पे वोआज छूने चला  आसमाँतू इधर की उधर की न सुनतू अकेला ही  है  कारवाँजिन्दगी आजतक ले रहीहर क़दम पर कड़ा इम्तिहाँबेज़ुबाँ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   4:32am 7 May 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक व्यंग्य : बड़ा शोर सुनते थे-----’बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का ’ ।ख़बर गर्म थी ।उनकी नाक उनकी दादी जैसी है। वह आँधी हैं ’आँधी"। अगर बनारस से उठ गई तो ’कमल’ की तमाम पँखुड़ियां उड़ जाएँगी ।हाथी साथी सब हवा हो जायेगे। उनके कार्यकर्ताओं मे गजब का उत्साह था जब वो बार बार पूछती थ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   6:08am 1 May 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : कहाँ आवाज़ होती है--कहाँ आवाज़ होती है कभी जब टूटता है दिलअरे ! रोता है क्य़ूँ प्यारे ! मुहब्बत का यही हासिलमुहब्बत के समन्दर का सफ़र काग़ज़ की कश्ती मेंफ़ना ही इसकी क़िस्मत है, नहीं इसका कोई साहिलमुहब्बत का सफ़र आसान है तुम ही तो कहते थेअभी तो इब्तिदा है ये ,सफ़र आगे का है मु... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   5:37am 19 Apr 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक ग़ज़ल : जब भी शीशे का इक मकां देखा---जब भी शीशे का इक मकां देखापास पत्थर की थी दुकां,  देखादूर कुर्सी पे  है नज़र जिसकी उसको बिकते जहाँ तहाँ  देखावादा करता वो कस्में खाता हैपर निभाते हुए कहाँ   देखाजब कभी ’रथ’ उधर से गुज़रा हैबाद  बस देर तक धुआँ  देखाकल तलक जो भी त... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   5:43am 13 Apr 2019
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
चिड़िया: मानव, तुम्हारा धर्म क्या है ?: धर्म चिड़िया का, खुशी के गीत गाना  ! धर्म नदिया का, तृषा सबकी बुझाना । धर्म दीपक का, हवाओं से ना डरना ! धर्म चंदा का, सभी का ताप हरना...... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   3:20am 13 Apr 2019
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