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Blog: कुछ ख़याल मेरे..

Blogger: parul chandra
ख़्वाबों के समंदर में एक टुकड़ा उम्मीदों काजब फेंकती हूँ शिद्दत से,कुछ बूँदें आस की छलक आती हैं मेरे चेहरे पर भी...तुम.. उन बूंदों की ठंडक हो,ताज़गी भरते हो रगों में हर पल,हर रोज़ नया करते हो जीवन..हर रोज़ मुझमे माँ नई जगाते हो।... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   5:37pm 10 Sep 2015
Blogger: parul chandra
कोसती नहीं वक़्त को,जानती हूँ इम्तिहान लेता है।रोती नहीं वक़्त पर,जानती हूँ जीना सिखा देता है।वक़्त अपनी ताक़त का अंदाज़ा,पल भर में करा देता है।मैं आगे निकलना चाहती हूँ,वो मुझको हरा देता है।लड़ती नहीं हूं वक़्त से अब..बस बाँध लेती हूँ कलाई पर,और यही बात कहती हूँ..तू मेरा साथ दे, ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   6:42pm 25 Jul 2015
Blogger: parul chandra
घिर आये हैं बादल,     आज यादें बरसेंगी।तुझे देखने को आँखें,     फिर से आज तरसेंगी।आंसू और बूँदें आज,      हो जाएंगी एक जैसी।मिल जाएंगी ख़ाक में     काँधे को तेरे तरसेंगी।घिर आये हैं बादल,     आज यादें बरसेंगी..।।... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   7:41pm 18 Jul 2015
Blogger: parul chandra
सुनो ..तुम सखी सी लगने लगी हो।हर पल पास बैठी रहती हो,अपने आप में उलझाये रखती हो,मुझे करने ही नहीं देती कुछ भी।तुम इतने करीब क्यों आ जाती हो मेरे..जानती भी हो..?मैं तुम्हें पसंद नहीं करती।कितनी झिड़कियां देती हूँ तुम्हें,पर फिर भी..नाराज़ नहीं होतीं तुम,रूठकर जाती ही नहीं..कब र... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   12:37pm 8 Jul 2015
Blogger: parul chandra
मैं..तेरी आँखों का प्यारा सा..अदना ख़्वाब सही,मैं..तेरी नज़्मों कारूठा हुआ हिस्सा कोई,न गीत..न कहानी..बस  किस्सा कोई,मैं..तेरी बिखरी हुई माला का एक मोती सहीमैं हूँ माथे की शिकन में..मैं..तेरे जेहन में भी..मैं हूँ काजल में लिपटा आँख का आंसू वहीबहता था तब भी जब साथ थे..बहता ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   7:45pm 16 May 2015
Blogger: parul chandra
दो जोड़ी पलकों पर टिके एक ख़्वाब जैसा है,जैसे चमकता है जुगनू.. वैसा हैमां की एक सिमटी सी उम्मीद जैसा ..पापा की आंखों से छलकती खुशी जैसा है,सन्नाटे के बाद बिखरी खिलखिलाहटों जैसाजीवन संघर्ष के बाद चैन की एक सांस जैसा है,बाज़ुओं की ताक़त..और मन के सुकून जैसा त्यौहार में चखी... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   1:02pm 5 May 2015
Blogger: parul chandra
घर की दीवारें, खिड़कियां और दरवाज़ेआँगन, छत और सीढियांकरीने से सजे गमले..फूल पत्तियां ..वो छोटे पौधे..मिटटी..पानीसब वैसा ही हैपर इतने रोज़ बीतेइतनी परवाह से इन्हें किसी ने न देखा..इतने प्यार से न ही इनको सहलाया।तुम न हो तो दीवारों के रंग फीके दिखते हैं.. खिड़की दरवाज़ों से ठ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   6:26pm 16 Apr 2015
Blogger: parul chandra
दुखों के नाम नहीं होतेपर होते हैं कई सारेकुछ सहे जाते हैं..कुछ नहीं..कुछ अप्रत्याशित...कुछ अपेक्षितकुछ का आना तय हैकुछ दुख नियति होते हैंये नियत दुख ह्रदय में जीते हैंजीवन भर..जिनकी भरपाईकर ही नहीं सकताकोई भी सुख..                                         ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:10pm 9 Mar 2015
Blogger: parul chandra
''अच्छा ये बताओ ..कि तुम्हें मैं ज़्यादा पसंद हूं...या चॉकलेट्स ??''मैंने यूं ही कह दिया था.. चॉकलेट्स!!और फिर उसके बाद तुम जब भी आये.. चॉक्लेट्स के साथ ही आये..वक़्त गुज़र गया..पर मैंने उन चॉक्लेट्स के रैपर्स आज भी सहेज रखे हैंउनमें चॉकलेट्स तो नहीं हैं..पर रैपर्स पर तुम्हार... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   1:55pm 9 Feb 2015
Blogger: parul chandra
थोड़ा भारी था..तुम्हारे शब्दों का बोझ..जिसके तले दबकर रह गयाप्रेम..जितना भी तुमने दियाऔर जितना मैंने तुमसे कियाशायद हल्का पड़ गयाक्योंकि थोड़ा भारी था तुम्हारे शब्दों का बोझज़िद, अहंकार और नासमझी की परतों में लिपटा तुम्हारा प्रेमदिल संभाल नहीं पायाहैरान हूँ की दिल... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   5:09pm 5 Feb 2015
Blogger: parul chandra
बिखर जाने दो.. कि फूल हैं ये..रिश्ते नहीं हैं..रंग फूलों का भी वही है जो इस रिश्ते का है बसंती..खिलता भी बहुत हैपक्का भी है, बेहदइसने बांधे रखा है तुझे~मुझेएक डोर से...खुशबू वो भी बेपनाह देता है,महकाए ये भी रखता है..पल पल को..उससे रिश्ता खिलता है यारिश्ते से वो..पता नहीं... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   7:53pm 25 Jan 2015
Blogger: parul chandra
आज चाय की चुस्कियों के साथ अचानक वो घर आई..कई साल पहले मुझसे रूठकर गई थी..मिलकर लगा मानो कब से इसी की तलाश थीमेरी ज़िन्दगी में फिर से तुम्हारा स्वागत है..अब आई हो तो कुछ दिन साथ रहना..सर्दी की धूप..... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   6:35pm 3 Jan 2015
Blogger: parul chandra
तुम कहते हो "तुम्हें प्यार करता हूं..बेवजह,प्यार करने के लिए क्या वजह होना ज़रूरी है?''पर जानते हो...एक भी वजहजो तुम मुझे बताओगेमैं सच कहती हूं..मेरी आंखों में प्यार ही पाओगेथोड़ी सी शरमा जाउंगीथोड़े से गुगूर में भी रंग जाउंगीपर सच कहती हूंजी उठूंगी.. थोड़ा सा और ख... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   2:20pm 27 Dec 2014
Blogger: parul chandra
तू भोर मेरीतू ही रौशनीतू हंसी मेरी तू सुकून भीतू रगों में बहते रक्त सातू सांसे मेरी..धड़कन मेरीसब हारी मैंतू जीत मेरीकितना सुखद जो तूने कहा'मां'तू सबकुछ मेरी..सबकुछ मेरी..                                                                     ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   3:47pm 7 Dec 2014
Blogger: parul chandra
क्यूं कहते हो..कि मैं अपना ख़्याल नहीं रखती?जानते हो... मेरे पास कुछ ख़ास है..हर पल साथ रहता है साये की तरह..ढाँके रखता है मुझेधूल के थपेड़ों में..सेकता है मेरे हर कंपकंपाते पल को..ताज़ा रखता है तुमसे साझा किये हर लम्हे को..तुम्हारे प्रेम..परवाह और फ़िक्र से बुना वो मख... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   2:28pm 4 Dec 2014
Blogger: parul chandra
मेरी सफलताएं मेरी कोशिशों की कहानी बयां करें न करें..मेरे हौसले कभी कम नहीं होते।असफ़लता और सफ़लता के बीच जो छोटी सी रेखा है...तमाम कोशिशों के बाद सहीधुंधला ही जाती है।मंज़िलें मेरी भी बुलाती हैं मुझेमैं हर पल उस ओर बढ़ता हूंगिरता हूं..संभलता हूं..संभलकर फिर गिर जात... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   3:19pm 3 Dec 2014
Blogger: parul chandra
मैं बाती..और तुम दिए समान गहन,तुम्हारे प्रेम में डूबी मैं हरती..अपने रिश्ते काहर अंधियारा कोनारौशन करती मुस्कुराहटें ...मुझको खुद में समेटेसशक्त तुम..ताप सहकर भी देते सहनशक्ति।मिलन से हमारेये जो है प्रकाशिततेज ये अलौकिक परिणाम हमारे तप कानिरंतर जलकर भी तपत... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   4:47pm 24 Oct 2014
Blogger: parul chandra
तेरी शैतानियों परकभी गुस्सा..तो कभी प्यार आता है,संग तेरे..मेरा बचपन भी मुस्कुराता है,भीग जाती हूँ मैं..अन्दर तलक..जब गले लगकर तू मुझको 'माँ'बुलाता है!... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   4:59am 14 Oct 2014
Blogger: parul chandra
कोशिशें जारी हैंउसपर विजय पाने की,लडते आ रहे हैं उससे..जिद है उसे हराने की,पर और विशाल हो जाता है वोहर वार के बादसवाल हर बरस मन में कहीं रह जाता है..मन का रावण क्यों कभी जल नहीं पाता है..?                                                           Photo courtesy: ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   5:12am 3 Oct 2014
Blogger: parul chandra
अपने कांधों पर हमने भी उठा रखी हैं जिम्मेदारियां,हम भी बच्चों के भविष्य के लिए फिक्रमंद हैं,हम कहते नहीं कभी कि दर्द हमको भी होता है,जबकि कोल्हू के बैल की तरह हम भी पिसते हैं,बहाते हैं पसीना..दिनभर और रात को अपनी आह्ह दबाकर सो जाते हैं।सुबह से फिर जिन्दगी हाथों में दबा... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   4:20pm 28 Sep 2014
Blogger: parul chandra
एक बालक जो अक्षम है, कल ही मिला मुझे। कुछ कहना चाह रहा था इस दुनिया के लोगों से। मैं उसकी भाषा जानती हूँ..तो उसके मन के सवालों को सबके सामने रख रही हूँ। क्या पार की हैं मैंने हदें तुम्हारे कर्मक्षेत्र में प्रवेश कर..?या फिर तोड़ दिया है खिलौना तुम्हारा..प्यारा कोई..?जिन ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   3:54pm 27 Sep 2014
Blogger: parul chandra
कितनी सुनहरी थीं वो सुबहजब साथ में हम-तुम होते थे, ताज़गी भरे वो घूँट..हम साथ-साथ भरते थे,चाय के प्याले दो..तब पास-पास रहते थे,मिठास से जिसकी..मुस्कराहटें सजती थी,ताज़गी ऐसी की..रग-रग में बस्ती थी।तुम गये तो संग..सुहानी सुबह भी ले गयेअलसाई सी मैं..तब अलसाई ही रहती चाय के प्या... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   2:00pm 19 Sep 2014
Blogger: parul chandra
देखो..मेरे चेहरे पे मत जानाकभी-कभी रंगकर्मी की तरहबदल लेती हूँ भाव अपने चेहरे केसीख रही हूँ न..जीवन जीने की कलादुनिया भी तो ऐसी ही है नशक्ल देखकर..मन पढ़ लेती हैपर मैं..अब बदल लेती हूँअपने माथे की सिलवटों को मिला देती हूँ उन्हें उन लकीरों मेंजो हंसते हुए चेहरे पर उभर आती ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   4:49pm 13 Sep 2014
Blogger: parul chandra
कितने रंग निखर आये हैंतेरे प्यार के मुझपर,कभी दिन में सुरमई,रातों में अक्सर सियाह सी,तेरी यादों में पीली..और तेरे पास होने सेलाल हो गई हूँ..तेरे प्यार में यारमैं गुलाल हो गई हूँ.. ... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   5:19pm 27 Aug 2014
Blogger: parul chandra
तुम्हारी यादें सहेज रखी हैं मैंने,मन के गागर से छलकती जा रही हैं।कुछ तो बहुत नर्म हैं..ठंडी आहों जैसी ,और कुछ सीली पड़ी हैं..गीले आंसू की तरह।कुछ को तो मैंने बहला कर अभी सुलाया है...और कुछ मेरे दिलासों पर यकीन नहीं करती हैं।देखो..ये यादें तुम्हारी..अब मुझसे नहीं संभलती ह... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   8:45pm 19 Jul 2014
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