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Blog: Hindi Kavita Manch(हिन्दी कविता मंच)

Blogger: rishabh shukla
मेरे सपनो का घर,सुन्दर तो नही लेकीन,मेरे सपनो कि एक उम्मीद है !चन्द ईटो से बना,ये आशियानायह मेरे सपनो कि मजबूत नीव है !!चन्द तस्वीर थे सालों पुरानेजिसपे चढी थी धुल कि परत !एक छोटी चारपायी,जिस पर कटती थी सर्द !!एक छोटा सा,टुटा हुआ पन्खाजो है वर्षो पुराना !जो कभी भी ना चला,हवा ज... Read more
clicks 254 View   Vote 0 Like   12:23am 7 Nov 2015 #dream home
Blogger: rishabh shukla
मै कल ही,अपने एक मित्र से मिलापेशे से वह बिमा एजेंट है,मिलते ही उसनेबिमा की रपट लगायी |मैंने पूछा कीक्या कोई नयी स्कीम है आयी,वे मुस्कुराकर बोलेसबसे बड़ी स्कीम,तो है लुगाई |मै चकराया,तो उन्होंने समझाया,घबराओ मत भाई,मै भी था कंगाल हो गया मालामाल,जब से तय हुई है मेरी सगाई |शा... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   6:14pm 1 Nov 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
जब माँ के नर्म हांथो का हुआ था स्पर्श,रोम-रोम खिल उठा मेरा,बहूत खुश हुआ था मैं|जब भी किसी की डाट मिली,हमेशा मेरे सामने दीवार सी अडिग,हमेशा दुलारा, पुचकारा मुझे,बहूत खुश हुआ था मैं||जब पापा का हाँथ सर पर पड़ा,लगा जैसे मुझे हिम्मत मिल गयी,जब उंगली पकड़कर हिम्मत से चलना सीखा,ब... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   1:18pm 10 Jul 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
थोड़ी गुमसुम, उदास सी रोनी सूरत बनाये हुये, अरे कभी हँस भी लिया करो|कभी बेटी,बहन, पत्नी और माँ,और भी ना जाने कितने रूप तेरे,कभी खुद को भी जी लिया करो|अरे कभी हँस भी लिया करो||हर गली-कुचो,रास्ते और चौराहे पर मिलती है,कई क्रूर सी घूरती आंखे,अरे कभी इन पर गुस्सा भी किया करो|अरे कभ... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   12:28pm 10 Jul 2015 #कभी हँस भी लिया करो
Blogger: rishabh shukla
हरीयालीजब आता है सावन और चलती है पुरवाई,ऐसे मेघ बरसते जैसे हरीयाली आयी !शान्त पेङ पर बैठी कोयल करती है गान ,नाचता हुआ मोर करता अपनी सुन्दरता पर अभीमान !!संध्या जब है आती तो प्रकती लगती सुहावनी,तो फुलो का रंग लगती मन भावनी !गर्मी मे पेङ से पत्ते ऐसे टुटे,जैसे शरीर से आत्मा छ... Read more
clicks 299 View   Vote 0 Like   10:50am 4 Jun 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
मै था माँ के गर्भ में एकदम महफूज,लिये एक सुन्दर एहसास |मै था उतावला आने को बाहर ,माँ के पास ||वो भी थी मन ही मन,प्रसन्न और पुलकित |वो थी मेरे बारे में जानने को,जिज्ञासु  और उत्कंठित ||वो मुझे बिना छुए ही,एक अलग स्पर्श का अनुभव करती थी |और मुझको लेकर दिन में ही,न जाने क्या सपने द... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   12:50am 3 Jun 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
मै था माँ के गर्भ में एकदम महफूज,लिये एक सुन्दर एहसास |मै था उतावला आने को बाहर ,माँ के पास ||वो भी थी मन ही मन प्रसन्न और पुलकित |वो थी मेरे बारे में जानने को ,जिज्ञासु और उत्कंठित ||वो मुझे बिना छुए ही ,एक अलग स्पर्श का अनुभव करती थी |और मुझको लेकर दिन में ही ,न जाने क्या सपन... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   9:55pm 30 May 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
दुःख की नही कोई  परीभाषा,वह है पत्तो की तरह !आता है बसन्त की तरह,जाता है पतझण की तरह !!होता ये धुप छाव की तरह,अपनो के प्यार की तरह !कभी घटता कभी बढता,राजाओ के राज की तरह !!वे कैसे सहते होंगे जो है,निःशब्द निष्प्राण की तरह !वे कैसे सहते होंगे जो,सहते है अंजान की तरह !!दुनिया मे ... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   6:01am 29 May 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
I am sharing my #MemoriesOfMotherhood with Bio Oil and BlogAdda. This Mother’s Day check out the Yummy Mummy calendar and  make a similar calendar of your own using the Bio Oil App.http://godrejexpert.com/single_used_pack.phpजब हुआ मेरा सृजन,माँ की कोख से|मैं हो गया अचंभा,यह सोचकर||कहाँ आ गया मैं,ये कौन लोग है मेरे इर्द-गिर्द|इसी परेशानी से,थक गया मैं रो-रोकर||तभी एक कोमल हाथ,लिये हुये ममता का एहसास|... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   7:53am 13 May 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
तुम ना आती ना आओ, बस तेरी याद आ जाए,तेरे जाने से रोशन जिंदगी मे शाम हो जाए।मैं तुझे नापसंद, तू चाहे चली जाए,मगर जाने से पहले एक अदद जाम हो जाए।।मगर मेरी जिंदगी से इस तरह जाने से पहले,तेरी इक आखिरी शाम मेरे नाम हो जाए।जी लूंगा पूरी जिंदगी इसी तरह तेरी यादों मे,... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   3:55am 8 May 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
मैं और मेरे खटमल मित्र,हमेशा साथ मे रहते है|जब मैं घर पर होता हू,तो सुख दुख की बाते करते है||मेरे खटमल मित्र,मुझसे बहुत प्यार करते है।और मेरे साथ मजे से,मेरी खोली मे ही रहते है।।जब घर पर मैं ना होऊ,हो जाते है अकेले।घंटों बैठकर दरवाजे पर,मेरी ही राह तकते है।।मेरे ना होने पर,... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   4:40am 11 Apr 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
मेरा भारत महान है,एकता देश की शान है।अखण्डता, अविरलता और संस्कृति,इस भारत देश की पहचान है ।।कभी हिंदू की पूजा,तो कभी ईसाई की प्रार्थना।कभी सिख की अरदास,तो कभी मुस्लिम की अजान है ।।कहीं गंगा, कहीं यमुना,कहीं है ब्रह्मपुत्र की जलधारा।इनका स्वच्छ और अविरल पानी,हमारी संपू... Read more
clicks 265 View   Vote 0 Like   10:28am 6 Apr 2015 #ऋषभ शुक्ला
Blogger: rishabh shukla
पापा मुझे चाहिए मेरा खिलौना,मुझे मेरी वो गेंद ला दो ना।मैंने आज ही उछाला था हवा मे,देखो बैठ गया है जाकर नभ में।।वो देखो मे&#... Read more
clicks 277 View   Vote 0 Like   6:14pm 1 Apr 2015 #
Blogger: rishabh shukla
दोस्त,एक ऐसा लफ्ज है।जिसे शायद सभी,पसंद करते होंगे।।वैसे रिश्ते तो कई है,एक इन्सा के लिए।लेकिन दोस्ती तो,सब रिश्तों मे महान होगी।।जब साथ-साथ पैदल,नंगे पैर स्कूल जाते थे।खुद की चप्पल भी,हमको पहना जाते होंगे।।टिफिन भुल जाने पर,खुद के डिब्बे से।रोटी निकालकर,खिला जाते ह... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   5:58pm 27 Mar 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
https://housing.com/lookupमेरा भी एक सपना है,की मेरा भी एक सुन्दर संसार हो|जहा सिर्फ प्रेम और विश्वास हो,जहा अपनो का बेइंतहा प्यार हो||जहा ना हो अकेलापन,ना हो उदासी|जहा मा की ममता,और करुणा का संसार हो||जहा एक जिम्मेदार,और प्यार करने वाला पिता हो|जिसके घर लौटने का,हमे बेसब्री से इंतजार हो|... Read more
clicks 370 View   Vote 0 Like   11:00am 25 Mar 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
http://www.startwithmotoe.com/मैं जब भी कोई मोबाइल देखता,तो उसे अपने हाथों मे लेना चाहा।लेकिन छोटे होने की दलील,सबने दिया और मैंने सहा।।फिर मेरे सपनो को पंख लगे,जब माता-पिता ने यह कहा।उन्होंने दसवीं मे अच्छे नम्बर से पास ह... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   10:25am 23 Mar 2015 #
Blogger: rishabh shukla
http://www.intel.in/अब बदल रहा है भारत,कर रहा है विकास ।जल्द ही झुकाएगा कदमो पे जहाँ को,ऐसा है मुझको विश्वास ॥हर गाँव में हो बिजली,पानी की समस्या हो दूर।इस देश के किसान के लिए,खेती हो आसान ॥हर घर में हो एक टी.वी.,जो है हर गरीब के मनोरंजन का साधन ।आज हर घर में है एक मोबाइल फ़ोन,हर घर के दूरस... Read more
clicks 427 View   Vote 0 Like   11:20am 19 Mar 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
https://housing.com/दुःख हो या सुख,हम होंगे साथ-साथ । धुप हो या छाँव,देंगे एक दूसरे का साथ ॥ कभी रार और तकरार,रूठना, मनाना । मुश्किल भरी राहो में,चलेंगे पकड़कर एक दूसरे का हाथ ॥ कभी हो कोई परेशानी,तो बैठकर एक दूसरे के साथ । दिन-रात जागकर,सुलझा लेते थे समस्या करके बात ॥ परिस्थि... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   8:45am 15 Mar 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
कभी गिरना, कभी उठना,कभी रोना, कभी हँसना ।कभी सोना, कभी जगना,कभी हाथो के बल चलना ॥माँ की एक झलक के लिए,कभी रोना, सुबकना ।शायद यही है,मेरा बचपना ॥पापा के शब्दों को,बहुत ध्यान से सुनना ।बहुत याद आये ये,सुनहरा पचपना ॥किसी और से सहमना,और डरना ।फिर माँ के आँचल,के पीछे जा छिपना ॥कभ... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   2:02pm 25 Feb 2015 #गजल
Blogger: rishabh shukla
मै एक छोटा,परन्तु भाग्यशाली वयस्क हूँ ।क्योकि मेरे पास,एक संयुक्त परिवार है ॥इस परिवार में है सभी,और मेरे दोस्त ।सुख-दुःख के साथी,मेरा सारा संसार है ॥जब वह मुझे अपने,हाथो से उठाते है ।और मुझे लुभाते,बार-बार है ॥कभी-कभी छोटे मीठे दाने,कभी खिलाते चोकोबार है ।तब ऐसा लगा जै... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   2:38pm 18 Feb 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
अब बहुत हो चुका,हद हो गयी है ।देश तो वही है,लेकिन लोग नए है ॥हमारा शरीर तो,भले ही नया है ।लेकिन हम आदतो से तो,वर्षो पुराने हो गए है ॥हम हमेशा से गन्दगी में,रहना पसंद करते थे ।आज भी कूड़ा-करकट,में ही रहा करते थे ॥हम भारतीय भी गन्दगी पसंद करने में,चार-प्रकार के होते है ।अब हम ग... Read more
clicks 319 View   Vote 0 Like   7:35am 11 Feb 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
आम आदमी के होते,ज्यादा से ज्यादा तीन अरमान ।दो वक्त की रोटी, तन भर कपड़ा,और हो अपना एक मकान ॥दो वक्त की रोटी के लिए,दर-दर ढूढे कुछ भी काम ।कठिन परिश्रम और मेहनत से,फिर भी सेठ सुना  देता फरमान ॥सुना के मालिक सारे काम,वो जाता अपने धाम ।करदे सारे काम सभी,लेकिन फिर एक काम ॥पुरे ... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   1:26pm 8 Feb 2015 #कपड़ा और मकान
Blogger: rishabh shukla
ये है जीवन के दो पल,कभी खट्टा, कभी मीठा । सुबह से लेकर शाम,कभी बच्चा, जवान और बूढ़ा ॥कभी मै हुआ था,बहुत ही दुखी । और ये सोचा की,पहले मै था तो सुखी ॥ मैंने ये सोचा,मै क्यों हूँ दुखी । इससे पहले भी तो,मै था दुखी ॥ जन्म से लेकर आज तक,हुआ ना सुखी । क्यों मै हूँ अपने,आज पर द... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   10:55am 4 Feb 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
http://greatindian.timesofindia.com/सच मे हम है,एक महान भारतीय है |नियम और कानून को ,तोड़ना हमे अति प्रिय है ||हम सभी यह मानते है,की कचरा इधर-उधर नही फेकना चाहिये |लेकिन धीरे-धीरे यह हमारी,मजबूरी बनती जा रही है ||वैसे हम भारतवासी सड़क और अन्य,जगहो पर कचरा फेककर अपना फर्ज निभाते है |अरे हमारी वजह से ... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   7:49am 22 Jan 2015 #कविता
Blogger: rishabh shukla
मैंने अभी तक जो सुना  था, की अंडरवर्ड से सब डरते है । लेकिन फिर पता चला की, नेताओ से तो अंडरवर्ड भी,डरता है ॥ एक दिन मैंने देखा, की एक व्यक्ति टोल देने के बजाय,अपना एक कार्ड,प्रदर्शित करता है ॥ दूसरे ही दिन मै उसी व्यक्ति के साथ,दुर्घटना का शिकार हो गया ।तो पुल... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   9:44am 17 Jan 2015 #ऋषभ शुक्ला
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