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anupama's sukrity : View Blog Posts
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anupama's sukrity

देखो तो कैसा दहक रहा है ...तुम्हारा  गुलमोहर ....सुर्ख लाल ....!!बिलकुल  तपते  हुए उस सूर्य  की तरह ...मेरे प्यार से ही  ...लिया  है उसने ये रंग ...!!और ....उससे ही  लिया है मैंने ...जीवन जीने का ये  ढंग ...!!सूर्य की तपिश हो ...या हो ...जीवन की असह्य पीड़ा ...क्या रत्ती मात्र भी कम कर पाई है ...मेरे प्र...
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Tag :प्रेम.;भावनाएं
  May 26, 2013, 3:53 pm
जब ...भरी दुपहरी ...दमके सूरज ...जलता जल ...जले जिया ...!!आकुल मन  ...सूना सा नभ ...शुष्क हिया ...!!तब  ...जीवन ठगिनी ...माया  जानी .....कौन दिशा से ..आई है री ...पवन दिवानी ....!!रही  हरि से अंजानी ...!!मुठ्ठी मे भर लाती ...थोड़ी ठंडक ...थोड़ा सा पानी ...!!अबसमझे कौन  है...........आस मेरी वो  प्यास मेरी ...पीर  मेरी ...हृद...
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Tag :;प्रेम; विचार . हिंदी कविता. गुण.
  May 21, 2013, 9:11 am
चम्पक बन में बैठ सखी संग ...वृहग वृन्द  का  कलरव सुनना ....ढलते दिवस के अवरोह पर ..राग दरबारी के ....खरज से ...कुछ गंभीर प्रकृति के  स्वर लेना ......फिर तजकर ....कुछ हंसकर ..संध्या के  आरोह  गुनना .....ई मन राग की पकड़ से ...कुछ भावों का आलाप लेना ...कुछ गाना ...गुनगुनाना ...मन बहलाना ....कुछ मन की ...कु...
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Tag :.जीवन . .;भावनाएं
  May 17, 2013, 7:54 am
आस का पंछी ......उड़े निर्बाध जब ...खिले सृजन  ....कैसे रचाऊँ ..नित नया सृजन ...ये शब्द पूछें ...!!उड़े बयार .....शब्द उड़ा ले जाए  ....भरें उड़ान ...पंख पसार ...उड़  जा उस पार ....संदेसा ले जा ....उड़ती जाऊं ...मैं ढूंढ ढूंढ लाऊँ ...शुभ   सृजन.....जागा सवेरा ....अब उड़ते  पंछी ...नील वितान .......
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Tag :.जीवन . .;भावनाएं
  May 5, 2013, 10:13 am
चन्द्रिका  तुम आओ ....!!प्रेम भरा धरती पर धरो पग ..अपने स्पर्श मात्र से ..दिवसाग्नि को तनिक ...शीतलता दे जाओ ....!!अब निरंतर  निर्झर झरो ...मृणाल पात पर मेरे धर जाओ ....अपनी सम्पूर्ण धरोहर ...एक  बूँद ओस  सी मनोहर .....!!महत् आनंद सरसाओ ....चन्द्रिका तुम आओ ... तुम्हारा ..शीतल रजत प्रकाश ...यूँ हो ...
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Tag :.जीवन . .;भावनाएं
  April 25, 2013, 10:18 pm
एक घना आम का वृक्ष है ,उसी की शीतल छाया में जैसे झूला झूल  रही हूँ ....तेज ...और तेज पींगें लेती हुई ...!!ऊपर नीला आसमान ....और मेरी पींग और तेज ...!!विचार कुछ हलके से ...उड़ गए मुझसे आगे ...मैं विचारों के पीछे पीछे उड़ रही हूँ ....सुखद सी अनुभूति होती है ....!!कुछ तो है ...ध्येय जिसके पीछे भाग रही ...
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Tag :भावनाएं
  April 20, 2013, 9:39 am
पसरा मौन ...बिखरे हैं सुमन ....आया है कौन ...?रूह  छू जाए ....वसुंधरा मुस्काए  ...आस जगाए ...धुंध मिटती .....वेदना है छंटती .....पुष्प बिखरे ...रौशन  लम्हें  ...जो रुक जाएँ यहीं ...बीतें न पल ...खिली  लालिमा .......देती अब   सन्देश .....मिटी  कालिमा ...उगता सूरज ....करता है निहाल ...छाया प्रकाश ...छूकर तुम्हें ......
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Tag :एहसास
  April 16, 2013, 7:35 pm
अनुभूति ...से अनुभूत ...अनुभूति से अनुरंजित ...अनुभूति के अनुकूल ...अनुभूति  से अनुरक्त ...अनुभूति  से अभिभूत ...अनुभूति का अनुनेह ...अनुभूति की अनुगूंज ...अनुभूति  की अनुशंसा ...अनुभूति  की अनुकृति ...ऐसे ही बह चली ....अनुभुति से सुकृति...अनुभूति  की सुकृति ....मेरे ब्लॉग की आज तीसरी वर्...
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Tag :आभास
  April 5, 2013, 11:23 am
जोगिया रंग ...भर लाया  प्रभास ....फैला उजास ....छू कर मन ....भाँती भाँती के रंग ....भरते उमंग ***कागा सुहाए ...द्वार सँदेसा लाये ...जिया हर्षाए***स्वर्ग धरा ..सुरभित सुमन .....बांवरा मन ....***भोर की बेला ....धुंधलका मिटाये .....मन रमाए ......***ह्रदय शक्ति ...अँधियारा मिटाए  ...प्रभात खिले ..***स्निग्ध  ज्योत...
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Tag :. भावनाएं.
  March 30, 2013, 7:31 pm
फाल्गुनी   रंग ......निर्झर बहे धारा ...मिले  किनारा ,,,,,रंग बिरंगी ....बसंत की सौगातें ...फूलों की बातें ....रंग गुलाबी ...जब छाया बसंत ...मन शराबी ....बुन ले गुण ...रंग झरे  बहार ....भीगे  फागुन ....!!अलिखित है ....जैसे मन की  प्रीत .....जीवन गीत .....ओ रे भ्रमर ...मत गूँज इधर ...पिया  न घर ... ....!!...
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Tag :seasons .spring .
  March 25, 2013, 6:12 pm
राग के भाव ...मन के भाव कितने विचित्र हैं ...इतनी सुंदर राग बसंत में सुख और दुःख एक साथ कैसे गाया जा सकता है ....?आप  खुद भी सोचिये.. .......बहुत  हंसने  के  बाद  एक  घड़ी  शांत  बैठने  का  मन  करता  ही  है...है न  ...!क्यों सहसा मन के भाव बदल जाते हैं .....??क्या हमारे मन पर सिर्फ हमारा ही नियंत्...
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Tag :.जीवन . विचार . आध्यात्म
  March 20, 2013, 10:31 pm
किसलय अनुभूति देती .....सागर सी ...सुनील तरंग ...सुशील उमंग ..!!!!रंग भर भर ...  झर-झर निर्झर बहें....!निसर्ग  झूम झूम गाए...सुमंगल  स्वस्तिवाचन ....!!!!!हुआ स्वर्ग सा  विस्तार  नयनाभिराम ...सुलक्षण सुमन  ..सुविकसित सुवास ....खिली खिली धरा ...पा गई  ....सुनिधि सुहास ....!!!!सुपर्ण सुनियोजित ....प्रभास अन...
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Tag :.जीवन . विचार . गुण
  March 14, 2013, 4:23 pm
प्रकृति गाये  मधुवंती ....और बहार राग ...हरसूँ ऐसा छिटका ....फाग के अनुराग का पराग ...हृदय छंद हुए स्वच्छंद  ....मंद मंद महुआ की गंध ......तोड़ती मन तटबंध ....निशा  रागवन्ती दिवस परागवंत ....अलमस्त  मधुमास देख  ........वनिता लाजवंत ........ पलाश मन रंग रंगा ...पुष्प पंखुड़ियों से रंगोली सजाई ...फाग...
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Tag :फागुन ।seasons.hindi poetry .
  March 8, 2013, 1:37 pm
निष्प्राण .....निस्तेज ....यूँ ज़मीन पर क्यों पड़ी हो ....???तुम पत्थर  क्यों हुईं ....?बोलो न माँ ...पत्थर  बनी ...ईश्वर स्वरूप ......अब तुम ही संबल हो मेरा ....स्थापित मंदिर में मूरत तुम्हारी ....अनमिट थकान से भरी ...अब भी  तुम ही से करती हूँ संवाद ...और पा जाती हूँ ...जीवन की हर अनबूझ पहेली का हल .......
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Tag :.जीवन . विचार . गुण. श्रद्धांजलि ।
  March 5, 2013, 5:00 am
Knowledge Sheet: Simple or Complex?Life is utterly simple and yet most complex. You have to simultaneously attend to both facets of life. When life appears most complex, turn to the simplicity. Simplicity brings peace. When you are peaceful, attend to the complexity within you. That will make you more skill full. If you are only with simplicity, it makes you lazy and dull. Being only with complexity makes you angry and frustrated. The intelligent ones balance them and rejoice in both. If you look only to simplicity, growth is not there. Looking only at the complexity, there is no life at all. All that you need is a skill full balance. If you recognize both simplicity and complexity of life, ...
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Tag :.जीवन . विचार . हिंदी कविता .
  February 26, 2013, 3:18 pm
आभार मीनाक्षी ...चटकी कलियाँ ......फूली बेला चमेली ...बनन में....बागन में बगरो बसंत ...बिखरे अनगिन रंग ....ज्यों रूप अनंग ....रोम-रोम हर्षाया....सुभग सलोना सा ...कैसा बसंत छाया ....नवल उल्लास अंगना  आया ...पुष्प गुच्छ लद गए ..........राग -रंग खिल गए ...श्वेत 'श्याम- रंग'  नीले नीले ...बैगनी  गुलाबी .....'...
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Tag :भावनाएं
  February 17, 2013, 11:09 am
पीत  रंग भरा  अनुराग  ...सरसों के खेतों में...सरस ....हरख हरख लहराया हूँ ...हरियाली टहनी   की फुनगी पर झूम कर ....सुर्ख लाल लाल ...टेसू सा .........!!छुपा हुआ इन्हीं रंगों में....कुछ भावों सा ...कुछ शब्दों सा ......जीवन का प्रेमी मैं .....बसंत .....अमुवा की मंजरी   पर बौराया हूँ ....!!बसंती हवा के संग सदा  .........
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Tag :.जीवन . आध्यात्म
  February 14, 2013, 8:06 pm
निर्मल निर्लेप नील आकाश ...देता है वो विस्तार .....कि तरंगित हो जाती है कल्पना ... नाद सी.......हो साकार ....अकस्मात  जब ढक लेते हैं  बादल ...नीलांबर  का वो नयनाभिराम  सौन्दर्य .....गुण को गुणातीत ...तत्व को तत्वातीत......अगम्य को गम्य कर त्वरित गति  देती हैं ...मन की अनहद उन्माद तरंगें ...!!मूक ...
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Tag :. आध्यात्म
  February 11, 2013, 6:26 pm
तुम से ही है ...मेरे मन की हर सिंदूरी बेला ...डूब जाता है जैसे मेरा मन...इस सिंदूरी सांझ के मौन में ...स्मित तुम्हारी छवि ....सदा अंकित है मेरे मनः पटल में .. .....!!शांत स्निग्ध व्यक्तित्व तुम्हारा ...उगता हुआ चन्द्र ज्यों नील निलय में ......बरसाता ही गया ज्योत्स्नामृत....पोर-पोर ...हृदयालय...
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Tag :.जीवन . हिंदी कविता .;भावनाएं. . विचार . गुण.
  February 7, 2013, 5:00 am
शरदे माँ श्वेत वसने वंदना स्वीकार कर ....हो रहे पद्भ्रांत सारे ...विश्व का उद्धार कर .....इस बसंत में विश्व शांति के लिए की है प्रार्थना ....आज आप को भी सुनाने का मन हुआ .....बल्कि आइये मेरे साथ हम सब मिल कर माँ शरदे से यह प्रार्थना करें .....इसे ईयर फोन पर सुनिएगा तब शब्द सही समझ मे आएं...
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Tag :भारतीय संगीत /
  February 4, 2013, 7:35 pm
इंसान  की इंसानियत के साथजीता ...जागता ..लहलहाता ...खड़ा हूँ यहाँ ...इसी जगह ...सदियों से ...!!देखे हैं धरा पर ...मौसम के कई  रूप  ..आज फिर देख रहा हूँ ... वही मौसम का  बदला हुआ स्वरूप ..पतझड़ से भला मैं क्यों डर जाऊँगा ....?ए हवा .. सायं सायं चलती है ..इठलाती ..करती अटखेली है .....प्रेम से छूकर मुझ...
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Tag :जीवन
  February 1, 2013, 7:48 am
जीवन यात्रा अनवरत ...चलता चल ॥...रे मन ....!!आँख मूँद लेने से निशा नहीं होती ...न ही पलक खोलने से प्रात  का दिव्य स्पर्श होता है ....समय के साथ ही हर रात की प्रात होती है ...शाश्वत सत्य को समेटे ......अहर्निश अपने निर्धारित मार्ग पर चलती प्रकृति .....भावना को रूप देती ...शब्द  को स्वरूप देती .....
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Tag :.जीवन ;भावनाएं . गुण. विचार . साँझ ।
  January 1, 2013, 4:17 pm
कह तो लूँ .....पर कोयल की भांति कहने का ...अपना ही सुख है ...बह तो लूँ ......पर नदिया की भांति बहने का .....अपना ही सुख है ...सह तो लूँ ....पर सागर की भाँति सहने का ....अपना ही सुख है ....सुन तो लूँ ....पर विहगों के कलरव  सुनने का ...अपना ही सुख है ...गुन  तो लूँ .....पर मौन दिव्यता गुनने का ....अपना ही सुख है .......
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Tag :मन .....
  December 27, 2012, 7:10 pm
आज फिर चली जा रही हूँ ...बढ़ी जा रही हूँ .....आस से संत्रास तक .....खिँची खिँची ...नदिया किनारे ....कुछ यक्ष प्रश्न लिए ...डूबता हुआ सूरज देखने ....पंछी लौटते हुए .. ...अपने नीड़....मेरे हृदय  में भरी जाने क्या पीर ....कहाँ है  मेरी आँखों में नीर ....??जवाब नहीं देती ....दग्ध ....सुलक्षण बुद्धि भी ..जैसे ...
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Tag :.कर्तव्य . विचार . गुण.
  December 19, 2012, 2:46 pm
स्निग्ध उज्जवल चन्द्र  ललाट  पर .....विस्तृत  सुमुखी सयानी चन्द्रिका ....भुवन  पर ....निखरी है स्निग्धता ..बिखरी है   चन्द्रिका .........पावस ऋतु  की मधु बेला ...  बरस रहा है मधुरस ...सरस हुआ   है मन ..बादल की घनन घनन ...झींगुर की झनन  झनन ..जैसे लगे बाज रही ... ...  किंकनी  की खनन खनन ..मन करता  मनन  ...
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Tag :प्रकृति .जीवन
  December 13, 2012, 6:49 pm
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