Hamarivani.com

स्वामी विवेकानन्द

"हर काम को तीन अवस्थाओं में से गुजरना होता है- उपहास, विरोध और स्वीकृति। इसलिए विरोध और अत्याचार हम सहर्ष स्वीकार करते हैं। परन्तु मुझे दृढ़ तथा पवित्र होना चाहिए और भगवान में अपरिमित विश्वास रखना चाहिए, तब ये सब लुप्त हो जायेंगे।"...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  May 31, 2013, 5:50 am
"यही दुनिया है! यदि तुम किसी का उपकार करो, तो लोग उसे कोई महत्व नहीं देंगे; किन्तु ज्यों ही तुम उस कार्य को बन्द कर दो, वे तुरन्त (ईश्वर न करे) तुम्हें बदमाश प्रमाणित करने में नहीं हिचकिचायेंगे। मेरे-जैसे भावुक व्यक्ति अपने सगे-स्नेहियों द्वारा सदा ठगे जाते हैं।"...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  May 31, 2013, 5:49 am
"शुद्ध बनना और दूसरों की भलाई करना ही सब उपासनाओं का सार है। जो गरीबों, निर्बलों और पीड़ितों में शिव को देखता है, वही वास्तव में शिव का उपासक है। पर यदि वह केवल मूर्ति में ही शिव को देखता है, तो यह उसकी उपासना का आरम्भ मात्र है।"...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  April 14, 2013, 11:51 am
"मनुष्य को, वह जितना नीचे जाता है, जाने दो। एक समय ऐसा अवश्य आयेगा, जब वह ऊपर उठने का सहारा पायेगा और अपने आप में विश्वास करना सीखेगा। पर हमारे लिए यही अच्छा है कि हम इसे पहले ही जान लें।"...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  April 14, 2013, 11:41 am
"मेरी दृढ़ धारणा है कि तुममें अन्धविश्वास नहीं है। तुममें वह शक्ति विद्यमान है, जो संसार को हिला सकती है; धीरे-धीरे और भी अन्य लोग आयेंगे। साहसी शब्द और उससे अधिक साहसी कर्मों की हमें आवश्यकता है। उठो! उठो! संसार दुःख से जल रहा है।"...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  April 14, 2013, 11:32 am
"जो सबका दास होता है, वही उनका सच्चा स्वामी होता है। जिसके प्रेम में ऊँच-नीच का विचार होता है, वह कभी नेता नहीं बन सकता। जिसके प्रेम का कोई अन्त नहीं है, जो ऊँच-नीच सोचने के लिए कभी नहीं रुकता, उसके चरणों में सारा संसार लोट जाता है।"...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  March 28, 2013, 9:13 am
"...तुम्हारे सामने एक भयानक दलदल है- उससे सावधान रहना। सब कोई उस दलदल में फँसकर खत्म हो जाते हैं।वर्तमान हिन्दुओं का धर्म न तो वेद में है और न पुराण में, न भक्ति में है और न मुक्ति में- धर्म तो भोजन पात्र में समा चुका है- यही वह दलदल है। वर्तमान हिन्दू धर्म न तो विचारप्रधान ह...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  March 27, 2013, 7:08 pm
 "...चाण्डाल के लिए शिक्षा की जितनी आवश्यकता है, उतनी ब्राह्मण के लिए नहीं। यदि किसी ब्राह्मण के पुत्र के लिए एक शिक्षक आवश्यक हो, तो चाण्डाल के लड़के के लिए दस शिक्षक चाहिए। कारण यह है कि जिसकी बुद्धि की स्वाभाविक प्रखरता प्रकृति द्वारा नहीं हुई है, उसके लिए अधिक सहायता क...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  March 9, 2013, 6:59 am
"...यदि आलू बैगन का स्पर्श हो जाये, तो कितने समय के अन्दर यह ब्रह्माण्ड रसातल को पहुँच जायेगा, तथा चौदह बार हाथ में मिट्टी न लगाने से चौदह पुरूष नरकगामी होते हैं अथवा चौबीस पुरूष, इन कठिन प्रश्नों की मीमांसा में ये लोग आज दो हजार वर्षों से लगे हुए हैं; जबकि दूसरी ओर जनता का ए...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  March 6, 2013, 8:33 pm
"गरीबों और वंचितों के बारे में कौन सोचता है? उन्हें शिक्षा का प्रकाश नहीं मिल रहा। मैं तो उस व्यक्ति को महात्मा मानता हूँ, जो गरीबों के लिए रोता है। ऐसा नहीं करने वाला तो दुरात्मा है। जब तक करोड़ों लोग भूखे और वंचित रहेंगे, तब तक मैं हर उस आदमी को गद्दार मानूँगा, जिसने गरी...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  February 18, 2013, 8:05 am
स्वामी जी को परेशानियों की महज कल्पना या झलक सिहरन पैदा करती है, पर इनके बावजूद उन्होंने वे काम किये, जो भारत हजारों-हजार वर्ष तक याद रखेगा. इस इंसान से बढ़ कर दूसरा कौन बड़ा प्रेरक है, मानव समाज के लिए? पारिवारिक जीवन की भारी मुसीबतें, निजी जीवन में रोगों से परेशान फिर भी ...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  February 18, 2013, 7:42 am
घर की परेशानियों से भी स्वामी जी आजीवन व्यथित-दुखी रहे. अपनी बीमारियों से अधिक वह अपनी मां, भुवनेश्वरी देवी के लिए बेचैन और परेशान रहे. कहते हैं, जब तक पिता विश्वनाथ दत्त जीवित थे, उनके परिवार का मासिक खर्च था, लगभग एक हजार रुपये. वर्ष 1884 में उनकी मौत के बाद स्वामी जी की मां,...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  February 18, 2013, 7:41 am
विवेकानंद की हम 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं. वह महज 39 वर्ष जीये. पर कई हजार वर्षों का काम कर गये. इस छोटी आयु में. उनके जीवन को नजदीक से देखने-समझने पर लगता है कि परेशानियों, चुनौतियों, मुसीबतों के पहाड़ के बीच वह पैदा हुए. पल-पल जीये. आजीवन इनसे ही घिरे रहे. फिर भी हैरत में डालन...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  February 18, 2013, 7:40 am
आज लोग अपने जीवन से लेकर सामाजिक जीवन में जो चुनौतियां झेलते हैं, वे विवेकानंद की परेशानियों के मुकाबले एक रत्ती भी नहीं हैं. उनके शरीर को ‘व्याधिमंदिरम’ कहा गया. जब तक वह जीये, बीमारियों से जूझे. उन्हें दो बड़ी बीमारियां तो वंशगत मिलीं. कहें, तो विरासत में. पहला मधुमेह औ...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  February 18, 2013, 7:40 am
"शिक्षा, शिक्षा और सिर्फ शिक्षा। यूरोप के कई शहरों की यात्रा करके मैंने यह देखा कि वहाँ के गरीब भी शिक्षित हैं और उनकी हालत हमारे यहाँ के गरीबों से बहुत अच्छी है। यह फर्क शिक्षा ने पैदा किया है। शिक्षा आत्मबल देती है।"...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  February 17, 2013, 7:23 pm
"शिक्षा का मतलब यह नही है कि दिमाग में कई ऐसी सूचनायें एकत्रित कर ली जायें, जिसका जीवन में कोई इस्तेमाल ही नहीं हो। हमारी शिक्षा जीवन निर्माण, व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण पर आधारित होनी चाहिए। ऐसी शिक्षा हासिल करने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति से अधिक शिक्षित माना जा...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  February 17, 2013, 7:23 pm
"किसी भी देश की प्रगति का सबसे बेहतर पैमाना यह है कि वह देश अपनी महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करता है। जब तक महिलाओं की स्थिति नहीं सुधरेगी, तब तक इस दुनिया के कल्याण की कोई सम्भावना नहीं है। भारत में पुरुषों ने महिलाओं को उत्पादन मशीन बना कर छोड़ा है। लेकिन अगर महिलाओं क...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  February 17, 2013, 7:22 pm
"कोई एक विचार लो और उसे अपनी जिन्दगी बना लो।उसी के बारे में सोचो और सपने में भी वही देखो. उस विचार को जीओ।अपने शरीर के हर अंग को उस विचार से भर लो।सफलता का रास्ता यही है।जब तुम कोई काम कर रहे हो, तो फिर किसी और चीज के बारे में नहीं सोचो।इसे पूजा की तरह करो।इस दुनिया में आये ह...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  February 17, 2013, 7:22 pm
"कोई भी समाज अपराधियों की सक्रियता की वजह से गर्त में नहीं जाता, बल्कि अच्छे लोगों की निष्क्रियता इसकी असली वजह है।इसलिए नायक बनो।हमेशा निडर रहो।कुछ प्रतिबद्ध लोग देश का जितना भला कर सकते हैं, उतना भला कोई बड़ी भीड़ एक सदी में भी नहीं कर सकती।मेरे बच्चों, आग में कूदने क...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  February 17, 2013, 7:13 pm

...
स्वामी विवेकानन्द ...
Tag :
  January 1, 1970, 5:30 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3652) कुल पोस्ट (163583)