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खुला आसमां ‘मरकज़’

तन्हा-तन्हा सा हर लम्हाबेकरार रहता हैइन आंखों को तेरा इंतज़ार रहता हैसंवारता हूं हर इक चीज़ कोकुछ इस तरहजैसे तू आज भी आसपास रहता हैदूर होकर भी हर पल में तू है शामिल तेरे तसव्वुर से मेरी जिंदगी है कामिलहवा का झोखा तेरी खुशबू लेकर गुज़रता है इन आंखों को तेरा इंतज़ार रहता ...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  June 10, 2015, 11:39 pm
बुरे होने का सबूत मिल गयामैं अपनी पहचान पाकर हिल गयावक्त भी गवाही दे रहा हैसाथ रहते मालूम ही नहीं पड़ाकितने गुनाह कर रहा थाजिसका हिसाब किताब लगातार तुम जोड़ रहे थेएक कारोबारी बनिये की तरहपाई-पाई की तोहमत को जोड़ रखा थाजैसे मालूम हो कि एक दिन यही काम आएंगेमेरे किरदार को ...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  June 9, 2015, 9:50 pm
अब निकलना है हमें दूर कहींफ़ासलों का वक्त आ गयासमेट लो अपना-अपना सामानकहीं रह न जाए कोई चीज़जो सबब बन जाए पछताने कामैंने तो अपना ग़म उठा लियाये लो अपने चेहरे की खुशीबड़ी क़ीमती है तुम्हारे लिएहमेशा इसे साथ रखनाख़ूबसूरत जो लगती हो इसके साथचलो अपना-अपना मज़हब अलग करोकितने दिन ...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  June 3, 2015, 10:15 pm
कुछ इस कदर तुझपे ऐतबार हुआ हैचरागों को हवाओं से प्यार हुआ हैमिसालें जीत की देता रहा जिसकी जमानावहीं शिकस्त होने को तैयार हुआ हैकशिश है तुझमें गजब का हुनर हैआंखों से तेरी झांके शामो सहर हैकत्ल होने को दिल तैयार हुआ हैकुछ इस कदर उस पर ऐतबार हुआ हैलफ्जों का तेरा जादू बोल ...
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  April 4, 2015, 11:48 pm
अब और क्या इन दुआओं में चाहता हूंतेरी जिंदगी को खूबसूरत बनाना चाहता हूंइतनी तासीर इन हाथों में देदे ऐ मेरे खुदातोड़कर कदमों में सितारे बिछाना चाहता हूंरौशन रखना चाहता हूं उम्मीदों का चरागगम चुराना चाहता हूंउन आंखों के आंसूइन आंखों से गिराना चाहता हूंहर मुसीबत मिटान...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  March 3, 2015, 11:58 pm
वक़्त कैसे वो त्वारीख़ दोहरा रहा हैकोई आ रहा है, कोई जा रहा हैऐ मेरे मौला करम कर दे मुझपेवो क्यों आ रहा है, वो क्यों जा रहा हैउसे मैंने चाहा जिसे तूने भेजाइन सांसों में फिर न बसा कोई दूजाफिर कोई आख़िर क्यों भा रहा है कोई आ रहा है, कोई जा रहा हैमेरे आंसुओं की क़दर भी न जानीहर ...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  February 25, 2015, 3:39 am
वक़्त कैसे वो त्वारीख़ दोहरा रहा है कोई आ रहा है,  कोई जा रहा है ऐ मेरे मौला करम कर दे मुझपेवो क्यों आ रहा है, वो क्यों जा रहा हैउसे मैंने चाहा जिसे तूने भेजाइन सांसों में फिर न बसा कोई दूजाफिर कोई आख़िर क्यों भा रहा है कोई आ रहा है,  कोई जा रहा हैमेरे आंसुओं की क़दर भी ...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  February 25, 2015, 3:35 am
बड़ी बत्तमीज होती हैं यादेंभगाए नहीं भागतींकभी इधर से तो कभी उधर सेटपक ही जाती हैंकभी झूलतीं हैं तुम्हारे दुप्पटों सेतो कभी बिस्तर पर पड़ी रहती हैं करवट लिएतो कभी टीवी से निकलकर गुनगुनाने लगती हैंखाली पड़ी फ्रिज से भड़भड़ाकर बाहर आ जाती हैंऔर दूध के बरतन के साथ रसोई तक पह...
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  January 20, 2015, 11:25 pm
आइने में देखकर अपना चेहरासिहर गया बदन मेराअचानक कुछ बदल गया थाअजीब बदसूरती में ढल गया थाबरस रही थी उस पर फिटकारजैसे किसी ने थूका हो बार-बारनफरतें बालों से टपक रही थींलबों से गालियां लिपट रही थींबद्दुआएं रेंग रहीं थीं माथे परमनहूसियत का लग रहा था घरजिल्लत आंखों से झा...
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  January 19, 2015, 11:16 pm
चलो तुम ही बना लो अपनी जिंदगी, शायद तुम्हें अपनी खोई हुई जिंदगी मिल जाएवो हंसी जो तुमने कभी महसूस की थी, वो आजादी की उड़ान तुम्हारे जज्बातों में थीगुम हो गई थी किसी ‘अरमान’ के बंधनों में बंधके, कितना जालिम रहा होगा वो वक्तहर पल महसूस की होगी घुटन तुमने, जार-जार खून के आंसू ...
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  January 19, 2015, 10:17 pm
जब हमनवा के खयालात बदल जाते हैंहर रिश्ते में मतलब नज़र आते हैंकसूर हो सकता है मेरे भरोसे कावो भी अब नाज़ कहाँ उठाते हैंआदत सी हो गयी थीके तू सह लेगा मेरे गुस्से कोमुस्करा के टाल देगा ये सोच केकि इसकी तो आदत है बड़बड़ाने कीलेकिन शायद नहीं रही वो आदत भी तुम्हारीअब क्यों सुनोग...
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  January 15, 2015, 1:11 pm
क्यों भाग रहा उस मंज़िल की तरफकहता चीख-चीख के हर इक हरफठिकाना तेरा यहाँ नहींजो छोड़ गया बीच राह में कहींमाना के वहां तन्हाई हैसाथ तेरे तेरी परछाई हैफिर कहाँ तू अकेला हैजो चला गया वो खुद अकेला हैतू तो वहीँ पर हैउसे अपनी मंज़िल का डर हैतू जितना भी पीछे भागेगावो उतना ही आगे भ...
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  January 10, 2015, 3:21 pm
दूर जाकर भी पास हमें पाओगीदिल में रहकर भी याद बहुत आओगीजुदा होकर भी तन्हा खुद को न समझनाबाहों में थाम लेंगे जब भी लड़खड़ाओगीमेरे महबूब न जाने वो आलम क्या होगालम्हा-लम्हा कैसे वक्त से जुदा होगाखिलेंगे फूल आंगन में जब मुस्कराओगीदूर जाकर भी पास हमें पाओगीरहेंगे पास तेरे ...
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  November 2, 2014, 11:18 pm
अहसासों से जुदा होकर इक एहसान कर दोमेरी रूह जो ले गए हो  मेरे नाम कर दोदिल के किसी कोने में सिसक रही है मोहब्बत तुम्हारी कुछ और ग़म देकर इसे बेजान कर दोरूठने मनाने की आदत फ़ना हुई ज़िंदगी न हुई जैसे कोई गुनाह हुई मेरे वजूद का भी क़त्ल सरेआम कर दोकुछ और ग़म देकर इसे बेजान कर द...
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  October 18, 2014, 5:55 pm
काश कोई लेकर पता तेरा आएहम बन के हवा तुझको फिर छू आएंछोड़कर चले गए किस जहां में सांस लूं तो तेरी खुशबू आएरिश्ते-नाते बेमतलब हो गएख्वाब भी थक हार कर सो गएहर आहट में लगे जैसे तू आएहम बन के हवा तुझको फिर छू आएतेर गली से जब गुजरते हैंउस शोख नजर को तरसते हैंक्यों लगता  है कि ...
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  October 11, 2014, 8:54 pm
कभी खुशी कभी गम सहते हैतेरे नैना बहुत कुछ कहते हैंमेरी पलकों में अपने आंसू रख देखिलते चेहरे गुमसुम नहीं रहते हैंउड़ते वक्त को कैद कर लेख्वाबों को अपने आगोश में भर लेये वो पल हैं जो मुख्तसर होते हैंतेरे नैना बहुत कुछ कहते हैंमुझे अपनी जिंदगी का सहारा कर लेमेरे हिस्से की...
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  August 4, 2014, 9:37 pm
अपने दिल से मुझे निकाला, तो क्या बात हुईमेरे दिल से खुद को निकालों तो जानूंइश्क-ए-जहां में मैं तेरे लिए अजनबी सहीइस जिगर के मकान का मालिक मैं तुझे मानूंकुछ इस तरह से तूने इस पर कब्जा किया हैहर पल सांसों ने जिंदगी से सौदा किया हैफिर कैसे तुझे अपनी मौत का सौदागर मानूंमेरे ...
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  August 1, 2014, 11:15 pm
सहज सरल तुम्हरी छविजिस पर भटकत जाऊंमोहन तुम बंसी धरोमैं व्याकुल हुई जाऊंब्रज मे घूमत फिरै होबैठी मैं यमुना के तीरसब गोपियन के प्रेमी तुमसमझ न आवै हमरी पीरहमरे ह्रदय की पीड़ा कातुमका सुध कब आवे हैकह दूंगी मैया से जाकेकान्हा बड़ा सतावे हैइस कोमल काया परतुम कब दृष्टि डाल...
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  July 27, 2014, 10:36 pm
कभी सुना है तुमने यादों को ख़ूब हंसती हैं, ख़ूब रोती हैं कभी महफ़िल, तो कभी तन्हाई में बोलती हैंहां, शायद तुमने भी सुना होगा कल ही तो आईं थीं तुम्हारे ज़हन के कोठे पर पानी लेकर आईं थी अश्कों की झील सेसहर तकिए पर पड़ी थी कुछ बूंदेअरे वो देखो तुम्हारे पुराने मकां में कौन ह...
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  July 26, 2014, 9:31 pm
हर पल ने किया जिक्र तेराअब मुझे करार नहीं आताखामोशी भी शोर मचाती हैक्यों मुझमें तू है समा जाताआलम तो देखो हिज्र काखुद से परदा करते हैंथमी-थमी सी है धड़कनफिर भी यूं दम भरते हैंमेरे जैसे जाने कितनेयादों में तेरी खोए हैंजाने कितने दीवानों केदिल में कांटे बोए हैंकुछ तो मि...
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  July 24, 2014, 9:36 pm
तेरी सांसों की तपिश मेरी सांसों में है बाकीतेरे नैनों ने बना दिया है मुझे साकीहोशवालों में अब मैं शुमार कहांख़बर नहीं रही मुझको इस जहां कीवो खूबसूरत आंचल जो तुमने लहरा दियागुजरते वक्त को कुछ इस तरह ठहरा दियाजैसे किसी मर्ज को जरूरत होती है दवा कीख़बर नहीं रही मुझको इस जह...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  July 21, 2014, 4:56 pm
अरमान...घसीटे गुस्से में ऐसे बड़बड़ाता चला जा रहा था, जैसे सीधे जाकर कोई नई क्रांति लिख देगा। वैसे घसीटे के लिए ये कोई नई बात नहीं थी, ये तो उसकी खानदानी आदत है। इसके पिता भी सामाजिक जंगी थे। सोशल सिस्टम से इतनी जंग लड़ी कि घर के सामानों में ज़ंग लग गई। बेचारे घसीटे के पिता...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  July 20, 2014, 5:42 pm
आसिफ इकबाल घसीटे गुस्से में ऐसे बड़बड़ाता चला जा रहा था, जैसे सीधे जाकर कोई नई क्रांति लिख देगा। वैसे घसीटे के लिए ये कोई नई बात नहीं थी, ये तो उसकी खानदानी आदत है। इसके पिता भी सामाजिक जंगी थे। सोशल सिस्टम से इतनी जंग लड़ी कि घर के सामानों में ज़ंग लग गई। बेचारे घसीटे क...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  July 20, 2014, 5:42 pm
ख़ामोशी की चादर अक्सर ओढ़ लेती है रात  कितनी तनहा है ये किससे करेगी बातमुद्दतों से लगता है जैसे सोई नहींअंधेरों के सन्नाटे में कहीं खोई नहींमैं तो किसी की याद में जाग रहा हूँ उजाले से अंधेरे की तरफ भाग रहा हूँ तू किससे अपना मुंह छिपाती है जो हर रोज नकाब ओढ़कर चली आती है ...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  July 20, 2014, 2:01 am
चलो हम तुम मिलकर एक नजम लिखते हैंशब के कोयले से दीवार-ए-वादों पर कसम लिखते हैंवक्त की बारिश भी धो न पाये इस इबारत कोकुछ ऐसी ही त्वारीख इस जनम लिखते हैंफलक से समेट लेते हैं चांद तारों कोहर एक पर नाम-ए-सनम लिखते हैंख्वाहिशों की पतंग खूब ढील देके तानोऐसे खुले आसमान किस्मत स...
खुला आसमां ‘मरकज़’...
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  July 17, 2014, 9:42 pm
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