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Blog: खुला आसमां ‘मरकज़’

Blogger: asif iqbal
तन्हा-तन्हा सा हर लम्हाबेकरार रहता हैइन आंखों को तेरा इंतज़ार रहता हैसंवारता हूं हर इक चीज़ कोकुछ इस तरहजैसे तू आज भी आसपास रहता हैदूर होकर भी हर पल में तू है शामिल तेरे तसव्वुर से मेरी जिंदगी है कामिलहवा का झोखा तेरी खुशबू लेकर गुज़रता है इन आंखों को तेरा इंतज़ार रहता ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   6:09pm 10 Jun 2015
Blogger: asif iqbal
बुरे होने का सबूत मिल गयामैं अपनी पहचान पाकर हिल गयावक्त भी गवाही दे रहा हैसाथ रहते मालूम ही नहीं पड़ाकितने गुनाह कर रहा थाजिसका हिसाब किताब लगातार तुम जोड़ रहे थेएक कारोबारी बनिये की तरहपाई-पाई की तोहमत को जोड़ रखा थाजैसे मालूम हो कि एक दिन यही काम आएंगेमेरे किरदार को ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   4:20pm 9 Jun 2015
Blogger: asif iqbal
अब निकलना है हमें दूर कहींफ़ासलों का वक्त आ गयासमेट लो अपना-अपना सामानकहीं रह न जाए कोई चीज़जो सबब बन जाए पछताने कामैंने तो अपना ग़म उठा लियाये लो अपने चेहरे की खुशीबड़ी क़ीमती है तुम्हारे लिएहमेशा इसे साथ रखनाख़ूबसूरत जो लगती हो इसके साथचलो अपना-अपना मज़हब अलग करोकितने दिन ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   4:45pm 3 Jun 2015
Blogger: asif iqbal
कुछ इस कदर तुझपे ऐतबार हुआ हैचरागों को हवाओं से प्यार हुआ हैमिसालें जीत की देता रहा जिसकी जमानावहीं शिकस्त होने को तैयार हुआ हैकशिश है तुझमें गजब का हुनर हैआंखों से तेरी झांके शामो सहर हैकत्ल होने को दिल तैयार हुआ हैकुछ इस कदर उस पर ऐतबार हुआ हैलफ्जों का तेरा जादू बोल ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   6:18pm 4 Apr 2015
Blogger: asif iqbal
अब और क्या इन दुआओं में चाहता हूंतेरी जिंदगी को खूबसूरत बनाना चाहता हूंइतनी तासीर इन हाथों में देदे ऐ मेरे खुदातोड़कर कदमों में सितारे बिछाना चाहता हूंरौशन रखना चाहता हूं उम्मीदों का चरागगम चुराना चाहता हूंउन आंखों के आंसूइन आंखों से गिराना चाहता हूंहर मुसीबत मिटान... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   6:28pm 3 Mar 2015
Blogger: asif iqbal
वक़्त कैसे वो त्वारीख़ दोहरा रहा हैकोई आ रहा है, कोई जा रहा हैऐ मेरे मौला करम कर दे मुझपेवो क्यों आ रहा है, वो क्यों जा रहा हैउसे मैंने चाहा जिसे तूने भेजाइन सांसों में फिर न बसा कोई दूजाफिर कोई आख़िर क्यों भा रहा है कोई आ रहा है, कोई जा रहा हैमेरे आंसुओं की क़दर भी न जानीहर ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   10:09pm 24 Feb 2015
Blogger: asif iqbal
वक़्त कैसे वो त्वारीख़ दोहरा रहा है कोई आ रहा है,  कोई जा रहा है ऐ मेरे मौला करम कर दे मुझपेवो क्यों आ रहा है, वो क्यों जा रहा हैउसे मैंने चाहा जिसे तूने भेजाइन सांसों में फिर न बसा कोई दूजाफिर कोई आख़िर क्यों भा रहा है कोई आ रहा है,  कोई जा रहा हैमेरे आंसुओं की क़दर भी ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   10:05pm 24 Feb 2015
Blogger: asif iqbal
बड़ी बत्तमीज होती हैं यादेंभगाए नहीं भागतींकभी इधर से तो कभी उधर सेटपक ही जाती हैंकभी झूलतीं हैं तुम्हारे दुप्पटों सेतो कभी बिस्तर पर पड़ी रहती हैं करवट लिएतो कभी टीवी से निकलकर गुनगुनाने लगती हैंखाली पड़ी फ्रिज से भड़भड़ाकर बाहर आ जाती हैंऔर दूध के बरतन के साथ रसोई तक पह... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   5:55pm 20 Jan 2015
Blogger: asif iqbal
आइने में देखकर अपना चेहरासिहर गया बदन मेराअचानक कुछ बदल गया थाअजीब बदसूरती में ढल गया थाबरस रही थी उस पर फिटकारजैसे किसी ने थूका हो बार-बारनफरतें बालों से टपक रही थींलबों से गालियां लिपट रही थींबद्दुआएं रेंग रहीं थीं माथे परमनहूसियत का लग रहा था घरजिल्लत आंखों से झा... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:46pm 19 Jan 2015
Blogger: asif iqbal
चलो तुम ही बना लो अपनी जिंदगी, शायद तुम्हें अपनी खोई हुई जिंदगी मिल जाएवो हंसी जो तुमने कभी महसूस की थी, वो आजादी की उड़ान तुम्हारे जज्बातों में थीगुम हो गई थी किसी ‘अरमान’ के बंधनों में बंधके, कितना जालिम रहा होगा वो वक्तहर पल महसूस की होगी घुटन तुमने, जार-जार खून के आंसू ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   4:47pm 19 Jan 2015
Blogger: asif iqbal
जब हमनवा के खयालात बदल जाते हैंहर रिश्ते में मतलब नज़र आते हैंकसूर हो सकता है मेरे भरोसे कावो भी अब नाज़ कहाँ उठाते हैंआदत सी हो गयी थीके तू सह लेगा मेरे गुस्से कोमुस्करा के टाल देगा ये सोच केकि इसकी तो आदत है बड़बड़ाने कीलेकिन शायद नहीं रही वो आदत भी तुम्हारीअब क्यों सुनोग... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   7:41am 15 Jan 2015
Blogger: asif iqbal
क्यों भाग रहा उस मंज़िल की तरफकहता चीख-चीख के हर इक हरफठिकाना तेरा यहाँ नहींजो छोड़ गया बीच राह में कहींमाना के वहां तन्हाई हैसाथ तेरे तेरी परछाई हैफिर कहाँ तू अकेला हैजो चला गया वो खुद अकेला हैतू तो वहीँ पर हैउसे अपनी मंज़िल का डर हैतू जितना भी पीछे भागेगावो उतना ही आगे भ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   9:51am 10 Jan 2015
Blogger: asif iqbal
दूर जाकर भी पास हमें पाओगीदिल में रहकर भी याद बहुत आओगीजुदा होकर भी तन्हा खुद को न समझनाबाहों में थाम लेंगे जब भी लड़खड़ाओगीमेरे महबूब न जाने वो आलम क्या होगालम्हा-लम्हा कैसे वक्त से जुदा होगाखिलेंगे फूल आंगन में जब मुस्कराओगीदूर जाकर भी पास हमें पाओगीरहेंगे पास तेरे ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   5:48pm 2 Nov 2014
Blogger: asif iqbal
अहसासों से जुदा होकर इक एहसान कर दोमेरी रूह जो ले गए हो  मेरे नाम कर दोदिल के किसी कोने में सिसक रही है मोहब्बत तुम्हारी कुछ और ग़म देकर इसे बेजान कर दोरूठने मनाने की आदत फ़ना हुई ज़िंदगी न हुई जैसे कोई गुनाह हुई मेरे वजूद का भी क़त्ल सरेआम कर दोकुछ और ग़म देकर इसे बेजान कर द... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   12:25pm 18 Oct 2014
Blogger: asif iqbal
काश कोई लेकर पता तेरा आएहम बन के हवा तुझको फिर छू आएंछोड़कर चले गए किस जहां में सांस लूं तो तेरी खुशबू आएरिश्ते-नाते बेमतलब हो गएख्वाब भी थक हार कर सो गएहर आहट में लगे जैसे तू आएहम बन के हवा तुझको फिर छू आएतेर गली से जब गुजरते हैंउस शोख नजर को तरसते हैंक्यों लगता  है कि ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   3:24pm 11 Oct 2014
Blogger: asif iqbal
कभी खुशी कभी गम सहते हैतेरे नैना बहुत कुछ कहते हैंमेरी पलकों में अपने आंसू रख देखिलते चेहरे गुमसुम नहीं रहते हैंउड़ते वक्त को कैद कर लेख्वाबों को अपने आगोश में भर लेये वो पल हैं जो मुख्तसर होते हैंतेरे नैना बहुत कुछ कहते हैंमुझे अपनी जिंदगी का सहारा कर लेमेरे हिस्से की... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   4:07pm 4 Aug 2014
Blogger: asif iqbal
अपने दिल से मुझे निकाला, तो क्या बात हुईमेरे दिल से खुद को निकालों तो जानूंइश्क-ए-जहां में मैं तेरे लिए अजनबी सहीइस जिगर के मकान का मालिक मैं तुझे मानूंकुछ इस तरह से तूने इस पर कब्जा किया हैहर पल सांसों ने जिंदगी से सौदा किया हैफिर कैसे तुझे अपनी मौत का सौदागर मानूंमेरे ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   5:45pm 1 Aug 2014
Blogger: asif iqbal
सहज सरल तुम्हरी छविजिस पर भटकत जाऊंमोहन तुम बंसी धरोमैं व्याकुल हुई जाऊंब्रज मे घूमत फिरै होबैठी मैं यमुना के तीरसब गोपियन के प्रेमी तुमसमझ न आवै हमरी पीरहमरे ह्रदय की पीड़ा कातुमका सुध कब आवे हैकह दूंगी मैया से जाकेकान्हा बड़ा सतावे हैइस कोमल काया परतुम कब दृष्टि डाल... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   5:06pm 27 Jul 2014
Blogger: asif iqbal
कभी सुना है तुमने यादों को ख़ूब हंसती हैं, ख़ूब रोती हैं कभी महफ़िल, तो कभी तन्हाई में बोलती हैंहां, शायद तुमने भी सुना होगा कल ही तो आईं थीं तुम्हारे ज़हन के कोठे पर पानी लेकर आईं थी अश्कों की झील सेसहर तकिए पर पड़ी थी कुछ बूंदेअरे वो देखो तुम्हारे पुराने मकां में कौन ह... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   4:01pm 26 Jul 2014
Blogger: asif iqbal
हर पल ने किया जिक्र तेराअब मुझे करार नहीं आताखामोशी भी शोर मचाती हैक्यों मुझमें तू है समा जाताआलम तो देखो हिज्र काखुद से परदा करते हैंथमी-थमी सी है धड़कनफिर भी यूं दम भरते हैंमेरे जैसे जाने कितनेयादों में तेरी खोए हैंजाने कितने दीवानों केदिल में कांटे बोए हैंकुछ तो मि... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   4:06pm 24 Jul 2014
Blogger: asif iqbal
तेरी सांसों की तपिश मेरी सांसों में है बाकीतेरे नैनों ने बना दिया है मुझे साकीहोशवालों में अब मैं शुमार कहांख़बर नहीं रही मुझको इस जहां कीवो खूबसूरत आंचल जो तुमने लहरा दियागुजरते वक्त को कुछ इस तरह ठहरा दियाजैसे किसी मर्ज को जरूरत होती है दवा कीख़बर नहीं रही मुझको इस जह... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   11:26am 21 Jul 2014
Blogger: asif iqbal
अरमान...घसीटे गुस्से में ऐसे बड़बड़ाता चला जा रहा था, जैसे सीधे जाकर कोई नई क्रांति लिख देगा। वैसे घसीटे के लिए ये कोई नई बात नहीं थी, ये तो उसकी खानदानी आदत है। इसके पिता भी सामाजिक जंगी थे। सोशल सिस्टम से इतनी जंग लड़ी कि घर के सामानों में ज़ंग लग गई। बेचारे घसीटे के पिता... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   12:12pm 20 Jul 2014
Blogger: asif iqbal
आसिफ इकबाल घसीटे गुस्से में ऐसे बड़बड़ाता चला जा रहा था, जैसे सीधे जाकर कोई नई क्रांति लिख देगा। वैसे घसीटे के लिए ये कोई नई बात नहीं थी, ये तो उसकी खानदानी आदत है। इसके पिता भी सामाजिक जंगी थे। सोशल सिस्टम से इतनी जंग लड़ी कि घर के सामानों में ज़ंग लग गई। बेचारे घसीटे क... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   12:12pm 20 Jul 2014
Blogger: asif iqbal
ख़ामोशी की चादर अक्सर ओढ़ लेती है रात  कितनी तनहा है ये किससे करेगी बातमुद्दतों से लगता है जैसे सोई नहींअंधेरों के सन्नाटे में कहीं खोई नहींमैं तो किसी की याद में जाग रहा हूँ उजाले से अंधेरे की तरफ भाग रहा हूँ तू किससे अपना मुंह छिपाती है जो हर रोज नकाब ओढ़कर चली आती है ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   8:31pm 19 Jul 2014
Blogger: asif iqbal
चलो हम तुम मिलकर एक नजम लिखते हैंशब के कोयले से दीवार-ए-वादों पर कसम लिखते हैंवक्त की बारिश भी धो न पाये इस इबारत कोकुछ ऐसी ही त्वारीख इस जनम लिखते हैंफलक से समेट लेते हैं चांद तारों कोहर एक पर नाम-ए-सनम लिखते हैंख्वाहिशों की पतंग खूब ढील देके तानोऐसे खुले आसमान किस्मत स... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   4:12pm 17 Jul 2014
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