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Blog: मानव 'मन'

clicks 12 View   Vote 0 Like   12:50pm 3 Apr 2019
clicks 96 View   Vote 0 Like   7:15am 6 Mar 2017
Blogger: Manav Mehta
बहुत देर हुई,होंठों पे नज़्म का ज़ायका महसूस किएख़ामोशी कब्र सी ना जाने कब से बिखरी है.. रातें देर तक ऊँघती हैं,पड़ी रहती है छत पर सितारे ओढ़े मगर इन सितारों में भी अब कोई चेहरा नहीं बनता कोई नज़्म कोई ख़याल दिल में नहीं आता |दिन बूढ़ा सा खस्ता सी हालत में आता है .. चला जाता है मायूस स... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   11:02am 28 Feb 2017
Blogger: Manav Mehta
किताबें धूल फांकती है शेल्फ परअरसा हो गया है उन्हें पढ़े हुए मैं नहीं खोलता अब उनके वर्क –कि अब उन लफ्ज़ों में ठहरता नहीं है मन रात जब मद्धम करके रौशनी को अपनी टेबल पर बैठता हूँ तो उन किताबों से खुद ब खुद निकल कर आ बैठते हैं कुछ अल्फाज़ मेरे ज़ेहन में बहुत शोर करती है लफ्ज़ों क... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   10:52am 15 Sep 2014
Blogger: Manav Mehta
ख़ामोशीपरत दर परतजमती जाती हैएहसासों पर...सन्नाटा लफ़्ज़ों परगिरफ्त बढ़ा हैलम्हा लम्हाहमारे बीच की आवाजेंअब दफ़न हो रही हैं.......!!!!मानव मेहता 'मन' ... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   9:04am 22 Jul 2014
Blogger: Manav Mehta
ख़ामोशीपरत दर परतजमती जाती हैएहसासों पर...सन्नाटा लफ़्ज़ों परगिरफ्त बढ़ा है लम्हा लम्हाहमारे बीच की आवाजेंअब दफ़न हो रही है... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   3:12am 1 Jun 2014
Blogger: Manav Mehta
जिंदगी दर्द में दफ़न हो गई इक रात,उदासी बिखर गई चाँदनी में घुल कर....!!चाँद ने उगले दो आँसू,ज़र्द साँसें भी फड़फड़ा कर बुझ गयी......!!इस दफा चिता पर मेरे-मेरी रूह भी जल उठेगी.........!!मानव मेहता 'मन' ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   9:46am 6 Jan 2014
Blogger: Manav Mehta
कल मैंने मेरी बड़ी बहन समान नीलीमा शर्मा जी के  इनबॉक्स में  कुछ लिखा  कि दीदी देखो कैसा लिखा  हम दोनों अक्सर इस तरह अपना लिखा एक दुसरे को दिखाते  रहते हैं फिर  क्या जुगलबंदी हुयी आपकी नजर पेश हैं ..............~~तुमने सुना तो होगाजब चलती हैं तेज़ हवाएंफड़फड़ा उठता हैस... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   2:20pm 19 Nov 2013
Blogger: Manav Mehta
शौक...बस शौक ही था तुम्हेंहवाओं पे पैर रख करआसमान पे चलने का...तेज़ तेज़ क़दमों सेचल करजाने किस मंजिल पर पहुँचना था तुम्हें...तुë... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   5:04am 1 Nov 2013
Blogger: Manav Mehta
पंजाबी नज़्म और उसका हिंदी में अनुवाद...ਤੇਰੀ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਦੇ ਇੱਕ ਇੱਕ ਅਖੱਰਮੈਂਨੂੰ ਵਾਜਾਂ ਮਾਰਦੇ ਨੇ, ਬੁਲਾਓਂਦੇ ਨੇਤੇ ਮੈਂ ਵੀ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਗੱਲਾਂ ਕਰਦੀ ਕਮਲੀ ਹੋਈ ਫਿਰਦੀ ਹਾਂ ...ਰਾਤ ਦੀ ਕਾਲੀ ਚਾੱਦਰ ਉਤੇੱਮੈਂ ਰੋਜ਼ ਬਿਛੌਂਦੀ ਹਾਂ ਇਹਨਾਂ ਅੱਖਰਾਂ ਨੂੰ ਪੁਛੱਦੀ ਹਾਂ ਤੇਰਾ ਹਾਲਕੁੱਝ ਅਪਣਾ ਸੁਨਾਨੀ ਹਾਂ ...ਤੇ ਇਹ ਅੱਖਰ ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   1:18am 17 Oct 2013
Blogger: Manav Mehta
पंजाबी नज़्म और उसका हिंदी में अनुवाद...ਤੇਰੀ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਦੇ ਇੱਕ ਇੱਕ ਅਖੱਰਮੈਂਨੂੰ ਵਾਜਾਂ ਮਾਰਦੇ ਨੇ, ਬੁਲਾਓਂਦੇ ਨੇਤੇ ਮੈਂ ਵੀ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਨਾਲਗੱਲਾਂ ਕਰਦੀ ਕਮਲੀ ਹੋਈ ਫਿਰਦੀ ਹਾਂ ...ਰਾਤ ਦੀ ਕਾਲੀ ਚਾੱਦਰ ਉਤੇੱਮੈਂ ਰੋਜ਼ ਬਿਛੌਂਦੀ ਹਾਂ ਇਹਨਾਂ ਅੱਖਰਾਂ ਨੂੰਪੁਛੱਦੀ ਹਾਂ ਤੇਰਾ ਹਾਲਕੁੱਝ ਅਪਣਾ ਸੁਨਾਨੀ ਹਾਂ ...ਤੇ ਇਹ ਅੱਖਰ ਮ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   1:18am 17 Oct 2013
Blogger: Manav Mehta
हर बारआती हुई लहरमुझे छू करले जाती है मुझसेमेरा थोड़ा साहिस्सा_दूर कहीं सागर मेंछोड़ देती है...कतरा कतराहर बारयूँ ही बिखरते हुएसमा जाऊंगा इसमें!!सारे का सारा...और दूर जहाँ मिल रहे है सागर और आकाशएक दूजे में....मैं भी वहीँ कहींहो जाऊंगा विलीन....।... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   11:33am 5 Oct 2013
Blogger: Manav Mehta
लफ्ज़ दिल का आईना होते हैंदिल खुशगवार हो तोखुशबू से बिखरते है लफ्ज़और निखर आती है खुशनुमा पेंटिंग...और दिल गर उदास हो तोलफ्ज़ दर्द में भीगे सेकुछ यूँ उतरते हैं कागज़ परकि जैसे 'मोनालिसा का उदास चेहरा'...... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   3:09pm 30 Sep 2013
Blogger: Manav Mehta
तुम... तुम तो चली गयी थी ना... फिर कैसे आई हो तुम... क्यूँ आई हो तुम... तुम्हे मेरे सामने आने में ज़रा भी हिचकिचाहट नहीं हुई?... क्या देखने आई हो तुम भला... यही ना कि तुम्हारे बिना कैसे जी रहा हूँ मैं... या ये देखने आई हो कि कितना मर चुका हूँ तुम्हारे न होने पर... तुम खामोश क्यूँ हो... अब जु... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   8:30am 21 Sep 2013
Blogger: Manav Mehta
रात भर झांकता रहा चाँदमेरे दिल के आँगन में.......कभी रोशनदान सेतो कभी चढ़ कर मुंडेरों पेकोशिश करता रहामेरे अंदर तक समाने की.....जाने क्या ढूँढ रहा थागीली मिट्टी में...!!तेरी यादों को तो मैंनेसंभाल के रख दिया थाइक संदूक में अरसा पहले......फिर भी न जाने कैसेउसे उनकी महक आ गई...चलो अब ... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   10:49am 23 Aug 2013
Blogger: Manav Mehta
मैले कुचैले कपड़ों में लिपटीएक बूढ़ी औरत सर से लेकर पाँव तक झुकी हुई एक वक्त की रोटी भी नसीब नहीं जिसको हाथ बाए खड़ी है चौराहे पर पेट भरने के लिए मांगती है भीख |मुरझाई हुई सी इन बूढ़ी आँखों को चंद सिक्कों के आलावा तलाश है कुछ और |झाँका करती है अक्सर आते जाते लोगों के चेहरो... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   10:26am 10 Aug 2013
Blogger: Manav Mehta
रुखसत होने को अब चंद ही लम्हें बचे हैं .....मेरे जिस्म से निकला है लावा इक शोला बैठ गया है छिप कर -रूह के पिछले हिस्से में इक खला सी बस गयी है ...... ना उदासी है ना हैरानी है न ख़ामोशी , न तन्हाई सीला सा मौसम है बस...!न धूप है ना बारिश बस चिपचिपे से लम्हें बरसते जाते हैं ब... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   5:18pm 29 Jul 2013
Blogger: Manav Mehta
रात तारों ने फांसी लगा ली...चांदनी का कफ़न ओढे-चाँद सोता रहा ।दर्द चिपचिपाते रहे आपस में...उमस भरी रात जख्म कुरेदती रही...अँधेë... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   4:56am 3 Jul 2013
Blogger: Manav Mehta
.......कभी गरम धूप सी चुभती है जिंदगी,कभी हसीं शाम सी कोमल लगती है जिंदगी....कभी मासूम सुलझी सी दिखती है जिंदगी,कभी उलझनों के जाले बुनती है जिंदगी......कभी लगता है कि ये अपनी ही हो जैसे,कभी गैरों सी अजनबी लगती है जिंदगी......कभी झरनों सा तूफान लगती है जिंदगी,कभी नदी सी खामोश लगती है ज... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   9:46am 19 Jun 2013
Blogger: Manav Mehta
इस हवा के बदन पर मैंने अपनी मुहब्बत का इत्र छिड़का है .... और भेजा है तेरी ओर बंद लिफ़ाफे में भर कर ..... जब मिल जाए तो इसको धीरे से खोलना महसूस करना मेरी वफ़ा को और भर लेना साँसों में अपनी .... नई सुबह फिर से नया पैगाम भेजूँगा ....... तब तक अपने जिस्म को महकाए रखना इससे .... !!'मन'... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   7:22am 6 Jun 2013
Blogger: Manav Mehta
चमन में फूल खिल गए हैं , बहार आने परहमारे नसीब खुल गए हैं , आपके आने परयूँ मिले हो हमसे,जिस कदर कोई मिलता है अपनामिल गया है हमें कोई अपना, आपके आने परये मरासिम रहे बरकरार यूँ ही, ये तमन्ना है मेरीये जगह हो गई है दुर्खरे-महफिल, आपके आने परचाह थी हर वक्त, कि कोई हमें समझे अपनामि... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   6:07pm 30 May 2013
Blogger: Manav Mehta
अभी अभीपीपल की झड़ी पत्तियों कोएक तरफ रख करजला कर बैठा ही था किउसके धुएं में भीतुम्हारा ही चेहरा नज़र आयाकल भी कुछ ऐसा ही हुआ थाजब रोशनदान सेसूरज की रोशनीमेरे कमरे में पहुँची थी तो लगा थाकि तुम आए होतुम हर जगह दिखती हो मुझकोतुम नहीं होपर...हर वक़्त तुम्हारा एहसासमेरे स... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   6:51am 24 May 2013
Blogger: Manav Mehta
ना राह ना मंजिल, कुछ ना पाया जिन्दगी मेंना जाने कैसा मोड़ ये आया जिन्दगी मेंतकलीफ,दर्द,चुभन,पीड़ा सब कुछ मिले इससेफ़कत एक खुशी को ही ना पाया जिन्दगी मेंवक़्त के मरहम ने सभी घाव तो भरे मेरेमगर जख़्मों से बने दाग को पाया जिन्दगी मेंऔरों की खुशी के लिए अपनी खुशी भूल गएमुस्... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   5:06pm 16 May 2013
Blogger: Manav Mehta
मानो इक ही कहानी का हक़दार था मैं...साल दर साल गुजरते गए,हर लम्हे को पीछे छोड़ा मैंने,मगर आज तक ये मलाल है मुझको,कि मेरी जिंदगी कि किताब के हर सफ्हे पर;एक सी ही लिखावट नज़र आई है मुझे...गम ; अफ़्सुर्दगी ; रंज ; और तन्हाई;बस इन्ही लकीरों में जिया जाता हूँ हर लम्हा...और मजबूरी के आल... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   11:07am 14 May 2013
Blogger: Manav Mehta
मेरे अल्फाज़ अब तुम मुझसे यूँ दगा ना करोमैं जानता हूँ कि चंद महीनों से ,मैंने कागज पर उतारा नहीं तुमको ...एक मुद्दत से अपने जख्मों पर ,तेरे नाम का मरहम नहीं रखा ...मगर ऐ मेरे अल्फाज़ सब कसूर मेरा तो नहीं ....तुमने भी तो कहाँ मेरे जेहन में आकर –सोई हुई कविताओं को जगाया था कभी ....और... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   5:10pm 10 May 2013
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