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सुज्ञ : View Blog Posts
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एक पंडितजी कई वर्षों तक काशी में शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद गांव लौटे. पूरे गांव में शोहरत हुई कि काशी से शिक्षित होकर आए हैं और धर्म से जुड़े किसी भी पहेली को सुलझा सकते हैं.शोहरत सुनकर एक किसान उनके पास आया और उसने पूछ लिया-, पंडितजी आप हमें यह बताइए कि पाप का गुरु क...
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  December 28, 2015, 4:50 pm
एक राजा का जन्मदिन था।प्रातः जब वह नगर भ्रमण को निकला, तो उसने निश्चय किया कि वह मार्ग में मिलने वाले पहले व्यक्ति को पूरी तरह खुश व संतुष्ट करेगा।सामने से आता हुआ एक भिखारी दिखा। भिखारी ने राजा सें भीख मांगी, तो राजा ने भिखारी की तरफ एक तांबे का सिक्का उछाल दिया।सिक्का...
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Tag :असंतोष
  October 24, 2015, 12:51 pm
गाँव में एक पशुपालक रहता था जो दूध से दही और मक्खन बना, बेचकर रोजी चलाता था। हमेशा की तरह आज भी उसकी पत्नी ने  मक्खन तैयार करके दिया, और वह  उसे बेचने के लिए अपने गाँव से शहर की तरफ निकल पड़ा।  मक्खन गोल पिंड़ी के आकार में होता था और प्रत्येक पिंड़ी का वज़न एक किलो था। शहर ...
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Tag :दृष्टांत
  May 25, 2015, 6:11 pm
एक युवा तीरंदाज खुद को सबसे बड़ा धनुर्धर मानने लगा। जहां भी जाता, लोगों को मुकाबले की चुनौती देता और हराकर उनका खूब मजाक उड़ाता।एक बार उसने एक ज़ेन गुरु को चुनौती दी। उन्होंने पहले तो उसे समझाना चाहा, लेकिन जब वह अड़ा रहा तो उन्होंने चुनौती स्वीकार कर ली। युवक ने पहले प्रया...
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Tag :नियंत्रण
  May 14, 2015, 7:07 pm
एक नगर मे रहने वाले एक पंडित जी की ख्याति दूर-दूर तक थी। पास ही के गाँव मे स्थित मंदिर के पुजारी का आकस्मिक निधन होने की वजह से, उन्हें वहाँ का पुजारी नियुक्त किया गया था।एक बार वे अपने गंतव्य की और जाने के लिए बस मे चढ़े, उन्होंने कंडक्टर को किराए के रुपये दिए और सीट पर जा...
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Tag :अनासक्ति
  April 16, 2015, 12:37 pm
एक बार शीत ऋतु में राजा श्रेणिक अपनी पत्नी चेलना के साथ भगवान महावीर के दर्शन कर वापस महल की तरफ लौट रहे थे। रास्ते में एक नदी के किनारे उन्होंने एक मुनि को ध्यान में लीन देख। उन्हें देख कर रानी ने सोचा, धन्य हैं ये मुनि जो इतनी भयंकर सर्दी में भी निर्वस्त्र ध्यान कर रहे ...
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Tag :कषाय
  March 16, 2015, 3:53 pm
एक कुएं में मेंढकों का एक समूह रहता था। समूह क्या उनका पूरा संसार ही था। एक समय की बात है जोरदार वर्षा के कारण कुआं पानी से लबालब भर गया। एक क्षमतावान मेंढक ने अपने पूरे सामर्थ्य से छलांग लगाई, परिणामस्वरूप वह कुएं से बाहर था। भीतर के मेंढक स्वयं को कुएं के सुरक्षा घेरे ...
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Tag :अनेकान्त
  March 14, 2015, 3:31 pm
एक बार जब राजा श्रेणिक भगवान महावीर के दर्शनार्थ जा रहे थे तो रास्ते में उन्हें एक मुनि घोर तपस्या में लीन दिखाई दिए। कायोत्सर्ग की अवस्था में सूर्य की ओर मुख करके वो पर्वत के सामान स्थिर अपने ध्यान में लीन थे। राजा श्रेणिक ने उनको वंदन किया तथा प्रभु महावीर की देशना स...
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Tag :चिंतन प्रभाव
  March 12, 2015, 7:12 pm
मगध के सम्राट् श्रेणिक ने एक बार अपनी राज्य-सभा में पूछा कि - "देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए सबसे सस्ती वस्तु क्या है?"मंत्रि-परिषद्  तथा अन्य सदस्य सोच में पड़ गये। चावल, गेहूं, आदि पदार्थ तो बहुत श्रम बाद मिलते हैं और वह भी तब, जबकि प्रकृति का प्रकोप न हो। ऐसी हाल...
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Tag :जीवदया
  March 12, 2015, 5:11 pm
किसी समय वाणिज्य नामक शहर में आनंद नामक व्यापारी रहता था। वह अपार धन संपदा का स्वामी था तथा राजा भी उसका सम्मान करता था| एक बार उस शहर में भगवान महावीर स्वामी पधारे। आनंद भी उनके प्रवचन को सुनने पहुंचा। भगवान के प्रवचन को सुनकर उसने श्रावक धर्म स्वीकार कर लिया।चौदह वर...
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Tag :ऋजुता
  March 10, 2015, 5:35 pm
भादो की काली अंधियारी रात में घने काले बादल गरज गरज कर बरस रहे थे, चारों ओर अंधकार छाया था और अत्यंत तीव्र बारिश हो रही थी, बिजलियाँ रह रह कर कौंध रही थ। महाराज श्रेणिक और महारानी चेलना अपने झरोखे से वर्षा का आनंद ले रहे थे। तभी रात्रि के गहन अंधकार को चीरते हुए, दूर एक बिज...
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Tag :तृष्णा
  March 8, 2015, 8:40 pm
किसी समय एक व्यापारी माल की बहुत सारी बैलगाड़ियां भर कर साथियों के साथ दुसरे देश में जा रहा था। उसने रास्ते में खर्चे के लिए फुटकर सिक्कों का बोरा एक खच्चर पर लाद रखा था। जंगल में चलते हुए फुटकर सिक्कों का वह बोरा किसी तरह से फट गया और उसमे से बहुत से सिक्के निकल कर बाहर ...
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Tag :दृष्टान्त
  March 7, 2015, 2:29 am
पुराने समय की बात है, छोटे से गाँव में एक किसान रहता था। वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरने से स्वच्छ पानी लाया करता था। इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें एक लाठी से कावड़ की तरह कंधे के दोनों ओर लटका लेता था।उनमे से एक घड़ा तो सही था किन्तु दूसरा कहीं से ...
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Tag :बोध-कथा
  March 1, 2015, 3:20 am
प्रजा का हाल-चाल जानने के उद्देश्य से, हर माह की पहली तिथि को, नगर बाज़ार में राजा की सवारी निकलती थी। बाजार में एक दूकान पर बैठे एक व्यापारी को देखकर, आजकल राजा असहज महसूस करने लगे। उन्हें उस व्यापारी की सूरत देखते ही अप्रीति उत्पन्न होती।राजा समझदार था, अकारण उपजते द्व...
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Tag :कषाय
  February 3, 2015, 5:33 pm
एक नगर में एक जुलाहा रहता था। वह स्वाभाव से अत्यंत शांत, नम्र एवं निष्ठावान था। क्रोध उसके स्वभाव में ही नहीं था। एक बार कुछ लड़कों को शरारत सूझी वे सब उस जुलाहे के पास यह सोचकर पहुँचे कि देखें इसे गुस्सा कैसे नहीं आता ?उन में एक लड़का धनवान माता-पिता का पुत्र था। वहाँ पहुँ...
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Tag :उदारता
  February 2, 2015, 4:58 pm
संत कबीर रोज सत्संग किया करते थे। दूर-दूर से लोग उनकी बात सुनने आते थे। एक दिन सत्संग खत्म होने पर भी एक आदमी बैठा ही रहा। कबीर ने इसका कारण पूछा तो वह बोला, ‘मुझे आपसे कुछ पूछना है। मैं गृहस्थ हूं, घर में सभी लोगों से मेरा झगड़ा होता रहता है। मैं जानना चाहता हूं कि मेरे यह...
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Tag :दृष्टांत
  January 31, 2015, 12:29 pm
रघुनाथ पटेल एक छोटे से गांव के मुखिया थे, उनके यहाँ अच्छी संख्या में दूधारु गाय भैस आदि थे। गांव में बाकि लोग तो दूध बेच दिया करते थे, किन्तु बिलौना मात्र रघुनाथ पटेल के यहाँ ही होता था। अतः गांव के लोग अपने जरुरत की छास, रघुनाथ पटेल के यहाँ से ही लाते थे। एक बार उस गांव म...
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Tag :दृष्टांत
  January 19, 2015, 5:26 pm
एक बार कुछ वैज्ञानिकों ने एक बड़ा ही रोचक परीक्षण किया..उन्होंने पाँच बन्दरों को एक बड़े से पिंजरे में बंद कर दिया और बीचों-बीच एक सीढ़ी लगा दी जिसके ऊपर केले लटक रहे थे..जैसा की अनुमानित था, एक बन्दर की नज़र केलों पर पड़ी वो उन्हें खाने के लिए दौड़ा..जैसे ही बन्दर ने कुछ सीढ़ियां ...
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Tag :आस्था
  January 17, 2015, 5:04 pm
सड़क के किनारे, मिट्टी के बर्तन व कलाकृतियाँ सजा कर, कुम्हार खाट पर पसरा हुआ था।एक विदेशी उन कलाकृतियों का तन्मयता से अवलोकन कर रहा था। उसने मोल पूछा और कुम्हार ने लेटे लेटे ही मूल्य बता दिया। विदेशी उसकी लापरवाही से बड़ा क्षुब्ध हुआ। उसे आश्चर्य हो रहा था। उसने कुम्हार ...
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Tag :अनासक्ति
  January 16, 2015, 2:57 pm
एक सेठ जी थे, जो दिन-रात अपना काम-धँधा बढ़ाने में लगे रहते थे। उन्हें तो बस, शहर का सबसे अमीर आदमी बनना था। धीरे-धीरे पर आखिर वे नगर के सबसे धनी सेठ बन ही गए। इस सफलता की ख़ुशी में उन्होने एक शानदार घर बनवाया। गृह प्रवेश के दिन, उन्होने एक बहुत शानदार पार्टी का आयोजन किया। ज...
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Tag :कर्तव्यनिष्ठा
  August 19, 2014, 3:18 pm
एक बार एक लड़का अपने स्कूल फीस के बंदोवस्त के लिए घरों के द्वार द्वार जाकर कुछ सामान बेचा करता था।एक दिन उसका कोई सामान नहीं बिका और उसे बड़े जोर से भूख भी लग रही थी। उसने तय किया कि अब वह जिस भी दरवाजे पर जायेगा, उससे खाना मांग लेगा।पहला दरवाजा खटखटाते ही एक लड़की ने दरव...
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Tag :कृतज्ञ
  August 16, 2014, 6:55 pm
फेसबुक पर एक सुन्दर दृष्टान्त पढ़ने में आया……एक मनोवैज्ञानिक श्रोताओं को स्ट्रेस मैनेजमेंट समझा रही थी।  बात करते करते उसने पानी का ग्लास उठाया और सवालिया निगाह कमरे में मौजूद लोगों पे घुमाई.. लोग समझे फिर वही पुराना "आधा भरा या आधा खाली"वाला सवाल आएगा!! मगर प्रश्न ह...
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Tag :दृष्टांत
  August 15, 2014, 12:21 pm
एक राजमहल के द्वार पर एक वृद्ध भिखारी आया। द्वारपाल से उसने कहा, ‘भीतर जाकर राजा से कहो कि तुम्हारा भाई मिलने आया है।’ द्वारपाल ने समझा कि शायद कोई दूर के रिश्ते में राजा का भाई हो। सूचना मिलने पर राजा ने भिखारी को भीतर बुलाकर अपने पास बैठा लिया। उसने राजा से पूछा, ‘कहिए ...
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Tag :नीर क्षीर विवेक
  August 12, 2014, 3:16 pm
क्यों लगता जीवन भार सखे, सहले सब दुख प्रहार सखे।जीत जीत मत हार सखे, करले निष्फल हर वार सखे॥माना कि दुर्भागी तुम सा, इस अवनीतल पर एक नहीं।दुख संकट तुझ पर है सारे, और संग सहारा टेक नहीं।सभी अहित चाहते तेरा, और कोई ईरादा नेक नहीं।बस सांसों में साहस भर ले, तू इधर उधर अब देख नही...
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Tag :आत्मसंयम
  August 9, 2014, 1:46 pm
एक कामचोर भंडारी के कारण राजकोष में बड़ी भारी चोरी हो गई। राजा ने उस भंडारी को तलब किया,और ठीक से जिम्मेदारी न निभाने का कारण पूछा। भंडारी ने उछ्रंखलता से जवाब दिया, "चारों और चोरी बेईमानी फैली है मैं क्या करूँ, मैं तो ईमानदार हूँ।"राजा ने उसका नाक कटवा कर उसे छुट्टी दे द...
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Tag :पाखण्ड
  August 7, 2014, 7:46 pm
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