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Pratibha Verma

कैसे शुभकामनाएं दूँ तुमको इस गड्तंत्र दिवस की बोलो कोई है वज़ह हमारा भारत आज भी तो वहीं है जहाँ कल था जाके देखो उन गाँव में जहाँ आज भी बिजली की ज़गह दिया जलता है उन मिट्टी की दीवारों से आज भी बारिश में पानी अन्दर आता है तब अपने तन को ढकने के बजाय वो आज भी अपने जानवरों ...
Pratibha Verma...
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  January 26, 2013, 5:29 pm
आज तुमसे कुछ कहना और कुछ सुनना चाहती हूँ,फिर से तुम्हें पलकों के साए में रखना चाहती हूँ।सदियों से इंतज़ार था तुम्हारा,अब आये हो तो पहलु में ठहरो भी ज़रा।कुछ कहो और कुछ सुनो तो ज़रा,हवाओं का अंदाज़ भी कुछ बदला - बदला सा है,कुछ तुम्हारी ही तरह खफा - खफा सा है।गर शिकायत है ...
Pratibha Verma...
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  January 18, 2013, 10:00 pm
रिश्तों की ये अजब सी सौगात है,आज खुद हमें ये एहसास है।क्या ज़माना आ गया है ,कि  कोई रिश्ता न अब खास है।माँ - बाप का नाम जल्द कहीं आता नहीं,हम कहतें हैं आज हमारा उनसे कोई नाता नहीं।कैसा अजब है ये दुनिया का दस्तूर,जो हमें इस दुनिया में लाया वही है अब हमसे दूर।तो चलो आज ये खुद...
Pratibha Verma...
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  January 11, 2013, 10:56 pm
आज के  हिंदुस्तान टाइम्स के सर्वे की एक  रिपोर्ट के अनुसार अठत्तर प्रतिशत महिलाएं दिल्ली में  बीते वर्ष सुरछित नहीं थीं ...अब चिंता का विषय ये है कि आने वाला साल इस राजधानी को क्या एक सुरक्षित भाविष्य दे पायेगा ? क्या कोई औरत, बेटी, बहन अपने आपको सुरक्षित महसूस कर पायेग...
Pratibha Verma...
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  January 2, 2013, 10:36 am
नया साल आया हैकुछ सपने सुहाने लिएकुछ नगमें सुहाने लिए ...इसलिए नव वर्ष कास्वागत करो दिल कीगहराइयों से ....माना कि एक औरवर्ष बीत गयाबहुत सारी मीठी - कड़वीयादों के साथ ...लेकिन जो आया हैउसे अपना बनाओनई उम्मीदों के साथ ...कुछ सपने सजाओकुछ नगमें गुनगुनाओताकि पूरा कर सको उन्हे...
Pratibha Verma...
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  January 1, 2013, 3:42 pm
एक कशिश रह गईहर दिल में  बाकीहर दिल में था एक तूफांहर दिल में थी एक आसकि एक दिन वो उठ खड़ी होगीऔर लेगी बदला अपने गुनहगारों सेपर नहीं हुआ कुछ भी ऐसाबुझ गई वो लौ आजअब कौन लेगा बदलाऔर कौन करेगा इन्साफबस छोड़ गई हर दिल मेंएक सवालबेटी को ज़न्म दें या सिर्फ बेटों को??...
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  December 29, 2012, 1:43 pm
ऐसा नहीं कि  हर पहलूहमें ख़ुशी दे जाएऐसा भी नहीं कि  हर पहलूहमें गम दे जाएपर कौन सा पहलूकब क्या दे जाएये हम कैसे जान पायेंगेंजब खुद के सीने की साँसों  कोहम महसूस नहीं कर पातेहर धड़कन को हमपहचान नहीं पातेतो हम कैसे पता करेंकि कौन सा इंसान हमेंकब क्या दे जाएगा ।।...
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  December 26, 2012, 12:28 am
गुज़रे हुए लम्हों को कौन याद रखता है,बीत गया जो पल उसका किसको एहसास होता है।चार दिनों की है ये ज़िन्दगी, जिसमें हर कोई ख़ुशी तलाशता है।मिल गई तो अच्छा न मिलीतो दूजी राह पकड़ता है,जहाँ उसे ये नहीं पता कि खुशियाँ मिलेंगी भी या नहीं पर फिर भी हर बार वो अपनी किस्मत अजमाता ह...
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  December 18, 2012, 9:35 pm
इन्सान की फितरत है बदलना ,वक्त का काम है चलना।राह में हमें साथी तो कई मिलतें हैं ,पर हर कोई हमसफ़र नहीं बनता ।ये ज़िन्दगी है इसका तो काम है चलते रहना,फिर इंसान की  फितरत भी तो है हमेशा बदलते रहना ।।...
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  December 16, 2012, 10:21 pm
ये किस तरह याद आ रहे होहमें इस कदर क्यों तड़पा रहे होक्या कसूर है मेराजो मेरे ख्वाबों में आकेमेरी नींद उड़ा रहे हो।ये किस तरह ....ख्वाबों में न सही लेकिनएक बार सामने तो आ जाओ ज़रासामने आके मुस्कुरा दो ज़राये किस तरह ...क्यों दूर रहकर मुझसेमुझे तड़पा  रहे होआखिर इस तरह क्य...
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  December 15, 2012, 12:07 am
लोग कहते हैं कि गुनाह मत करो ज़िन्दगी में ,ये खुदा सजा देता है सबको!तो हमने सोंचा की चलो एक गुनाह हम भी तो करके देखें,इसी बहाने उस खुदा के दर्शन  तो मिलेंगें!!...
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  December 14, 2012, 1:10 am
मुबारक हो ये पल और ये साथ आपको,खुशियों से भरा ये संसार आपको ।ख्वाहिशों की महफ़िल सजा कर रखना ,छोटी - छोटी बातों का गम न करना ।जी लो ज़िन्दगी की हर खुशी साथ मिलके,कि खुदा भी झुक जाए तुम्हारे सामने हंस के।ये पल ये खुशियाँ समेट लो दामन में अपने ,की फिर कभी अँधेरा न हो आँगन में ।...
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  December 11, 2012, 12:33 pm
दोस्ती का हर फ़र्ज़ अदा किया हमने,आपकी बेरुखी को भी अपना कहा हमने ।यूँ तो ज़माने ने बहुत कुछ सिखाया हमको ,पर आपने अपनी वफ़ा के लिए बहुत तरसाया हमको ।हमारी क्या मजाल थी की हम तुमसे दूर जाने की सोंचते ,पर तुमने तो अपने ही गले से लगा के रुलाया हमको ।।...
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  December 9, 2012, 7:10 pm
समन्दर  से अलग होकर  बूँद,समन्दर से बेवफाई करती है ,लेकिन अपने आस्तित्व को एक नया जन्म देती है !बूँद फिर से समन्दर में समाकर,समन्दर से अपनी  वफ़ा निभाती है,और अपने आस्तित्व को एक बार फिर से मिटाती  है !!...
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  December 7, 2012, 12:27 pm
लम्हा - लम्हा कर ज़िंदगी बीतती जा रही है ,ऐसा क्यों  लग रहा है मुझे जैसे की सारे लम्हे,मेरे हांथों से फिसलते जा रहे हैं ।इन लम्हों को जितनी तेजी से पकड़ना चाहा हमने ,फिर क्यों उतनी ही तेजी से मेरा साथ छोड़ते जा रहे हैं ।ज़िन्दगी रेत  की तरह हो चुकी है अब तो,जितनी तेज़ से पक...
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  September 6, 2012, 5:18 pm
कभी उन्हें हम पर गुस्सा आता थाकभी हमें उन पर गुस्सा आता था,जब एक्स्ट्रा क्लासेस में वो हमें बार -बार बुलाते थे ,और हम क्लासरूम से बंक करके भाग जाते थे ।फिर अगले दिन वो हम पर चिल्लाते थे ,और हम बेशरम सर झुकाकर माफ़ी भी मांगते थे।कभी उनका कहना सुनते थे तो कभी ,अपनी मनमानी करत...
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  September 5, 2011, 11:51 am
दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है एक ऐसा नाता है ,जिसने एक दिल को दुसरे दिल से बंधा है|दोस्ती का ये रिश्ता हर रिश्ते से ऊपर है,ये तो एक ऐसा पवित्र बंधन है,जो हर रिश्ते को पीछे छोड़ आया है,आज भी हमें याद है वो बचपन के दिन,जब हम साथ खेलते थे और लड़ते भी थे,लेकिन आज भी हम उसी पवित्रता से एक द...
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  August 6, 2011, 1:05 pm
हमें न जाने कहाँ से परिंदों से प्यार हो गयासुबह बाज़ार जाकर हम कुछ परिंदे ले आयेकैद कर के रखा था हमने उन्हें किकहीं हमें छोड़ कर शायद वो उड़ न जाएँहर सुबह मैं उन्हें दाना खिलातीउनके साथ मैं घंटों बितातीवो फड़्फड़ाते थे उस बंद पिंजड़े मेंशायद उड़ना चाहते थे खुले असमान में प...
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  January 22, 2011, 12:09 am
हम ज़िन्दगी से ऐसे क्यों हार जाते हैं,एक ही पल में सारा जहाँ झोड़ जातें हैं|क्या चाहत है हमारी ज़िन्दगी से ,हम उस पल वो भी भूल जातें हैं|लोग कहतें हैं ये तो खेल है कुदरत का ,ये तो किस्मत में लिखा है उस खुदा ने|अगर कहीं खुदा है इस जहाँ में,तो वो इतना बड़ा दर्द हमें कैसे दे पाता...
Pratibha Verma...
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  December 26, 2010, 12:36 am
हम कश्ती में बैठे थे किनारे कि तलाश में ,पर लहरों में कोई तो खलल थी ,कोई तो तूफां था समंदर में|हम समझना चाहते थे कि समन्दर,इतना बेचैन क्योँ है आज |हम कुछ भी समझ पाते ,किनारा तलाश कर पाते |उससे पहले ही हम अपनी कश्ती डूबा बैठे||...
Pratibha Verma...
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  December 21, 2010, 4:00 pm
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