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अनूप सेठी

साल का अंत आते आते सत्‍ता का चेहरा इतना पत्‍थर हो गयाकि पता नहीं वो पुलिस का था पाषाण का था तराशा हुआ राजसी ठाठ में लोग थे और भी लोग थे हाड़ मांस के जीते जागते आक्रोश और क्रोध से भरे हुए सत्‍ता ने बंद कर लिए अपने नेत्र जो वहां थे ही नहीं द्वार भी जो दरअसल कभी बने ही नहीं वहा...
अनूप सेठी...
Tag :कविता
  January 1, 2013, 10:32 pm
धीरोदात्त नायक की प्रतीक्षा करती और साथ ही उत्तेजक उत्तर-आधुनिकतावादी नारीवादी विमर्श करती पद्मिनी नायिकाकथादेश में पवन करण और अनामिका की कविताओं पर जारी बहस में कात्‍यायनीका लेख. इस बहस में आप पहले प्रभु जोशीका लेख पढ़ चुके हैं.  रजा,  हाल में मुंबई में लगी प्रदर्...
अनूप सेठी...
Tag :समकालीन कविता
  December 9, 2012, 7:10 pm
छायांकन - हरबीरयह लेख कुछ वर्ष पहले शिखर संस्‍था द्वारा हिमाचल की युवा रचनाशीलता पर आयोजित संगोष्‍ठी‍ में पढ़ा गया था. हाल में यह स्‍वाधीनता के शारदीय विशेषांक में छपा है. इस बीच आत्‍मारंजन का काव्‍यसंग्रह पगडंडियां गवाह हें भी आ गया है और अजेय के संग्रह की घोषणा हो च...
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Tag :हिमाचल
  November 10, 2012, 7:59 pm
  कुछ समय पहले मुंबई में कहानीकार लखनऊ से हरिचरण प्रकाश और कानपुर से अमरीक सिंह दीप आए हुए थे। कथाकार ओमा शर्मा, आर.के. पालीवाल और हरियश राय मुंबई में हैं ही। कवि विनोद दास भी अब मुंबई में ही हैं। ओमा ने इनसे मिलाने का प्रोग्राम बनाया।'चिंतन दिशा'  के संपादक हृदयेश मयं...
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Tag :बातचीत
  October 28, 2012, 12:03 am
        जैसा कि आप जानते हैं, मुंबई से प्रकाशित पत्रि‍का चिंतनदिशा में विजय बहादुर सिंह और विजय कुमार की चिट्ठियों के जरिए समकालीन कविता पर बहस शुरू हुई थी. अगले अंकों में इन चिट्ठियों पर विजेंद्र और जीवन सिंह; राधेश्‍याम उपाध्‍याय, महेश पुनेठा, सुलतान अहमद और मेरी प्...
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Tag :समकालीन कविता
  October 17, 2012, 12:31 pm
  हिंदी दिवस पर हिंदी की सेवा में प्रस्‍तुत  लिपि का विकास शायद आद्य बिंबों की तरह हुआ है। अक्षर,वर्ण,व्यंजन आदि के रूप सैकड़ों हजारों वर्षों की यात्रा करके स्थिर हुए हैं। अक्षरों के रूपाकार या रेखाओं के पैटर्न में प्रकृति और प्राणिजगत प्रतिबिंबित होता है। भौगोलिक ...
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Tag :हिंदी
  September 14, 2012, 12:00 am
इधर हिंदी साहित्‍य जगत में बात-बात में बहसें क्‍या उठ खड़ी हो जा रही हैं, मानो पानी को उबाल कर गाढ़ा करने का खेल चल रहा हो. पत्रि‍काओं के चूल्‍हे पर जहां पतीलियों में पानी चढ़ाया जाता है, वहां इंटरनेट का पंखा आग को हवा देने की ड्यूटी संभाल लेता है. सब जानते हैं पानी गाढ़ा न...
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Tag :समकालीन कविता
  September 7, 2012, 4:56 pm
सिद्धार्थ की गायमेरी पिराबलम बोले तो मालूम क्या है? मैं हर टैम फील करती है कि आदमी लोक की बस्‍ती में रहती है तो आदमी लोक का हेल्‍प करने का. आदमी लोक के वास्‍ते कुछ करने का. मैं एक बात बोलती है, ध्‍यान से सुन. एक रोज मैं मेरो को बोली. रोज पेपर खाती है, आज पेपरशन करेगी. पेट का अं...
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Tag :जुगाली उर्फ गऊ चिंतन
  August 18, 2012, 1:50 pm
तू लिक्‍खकागज को घोच मतअच्‍छी कविता लिक्‍ख ...
अनूप सेठी...
Tag :समकालीन कविता
  June 29, 2012, 11:24 pm
जब से खबर मिली है, भगवत रावत नहीं रहे, उनकी छवि रह रह के आंखों के सामने तैर जाती है. जिंदादिल, आत्‍मीय और मुस्‍कुराता चेहरा. शायद 1991 की बात है, राजेश जोशी ने शरद बिल्‍लोरे पुरस्‍कार समारोह के सिलसिले में भोपाल बुलाया. उन दिनों मैं और सुमनिका दोनों ही आकाशवाणी में थे. नई नई श...
अनूप सेठी...
Tag :समकालीन कविता
  May 27, 2012, 9:01 pm
जगदीश्‍वर चतुर्वेदी इधर अपने ब्‍लागमें समसामयिक विषयों पर नियमित टिप्‍पणियां कर रहे हैं. सत्‍यमेव जयते पर उनकी टिप्‍पणी आप भी पढि़ए. सत्यमेव जयते सीरियल की इन दिनों खूब चर्चा है। सामाजिक समस्याओं पर समाज का ध्यान खींचने वाले इस सीरियल को लोग विभिन्न चैनलों पर देख र...
अनूप सेठी...
Tag :विमर्श
  May 22, 2012, 11:06 pm
मैं बचपन में गांव में था तो स्कूल की कोई याद नहीं है, कब लगता था कब छूटता था। बस आना जाना भर याद है। रास्ते में एक खड्ड पड़ती थी। जंगल था। झाड़ियां थीं। उनमें फल होते थे। जंगली बेर होते थे। यही सब याद है। घर में ट्रक के टायर से निकाले हुए रबड़ के सख्त चक्के को 'गड्डा' कहकर दौ...
अनूप सेठी...
Tag :टिप्पणी
  April 29, 2012, 3:01 pm
शायद दो साल पहले की बात है. सुबह तैयार हो कर दफ्तर के लिए निकला तो हवा खुशगबार थी. यूं वक्‍त का दबाव हमेशा बना रहता है लेकिन उस दिन हवा में कुछ अलग तरह की तरंग थी. जैसे सुबह और शाम के संधिकाल का स्‍वभाव दिन और रात के स्‍वभाव से अलग होता है, वैसा ही शायद मौसमों के बदलने के दौरा...
अनूप सेठी...
Tag :हिमाचल मित्र
  April 1, 2012, 6:22 pm
इस बार सर्दी का मौसम बड़ा लंबा चल रहा है. कहते हैं कि लोहड़ी वाले दिन सर्दी लंबी छलांग लगाती है. लेकिन यहां तो होली भी एक तरह से सर्दियों मे ही आई. शिमला में बर्फ गिरी, मुंबई सर्द गर्म चल रही है. पिछले दिनों ठियोग से मोहन साहिलने बर्फ के ये फोटो भेजे. भेखल्‍टी गांव की तरफभेख...
अनूप सेठी...
Tag :छायाचित्र
  March 10, 2012, 1:44 pm
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