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Blog: जिरह

Blogger: anurag anveshi
इतना भी बुरा नहीं यह वक्त, जितना सब कोसते हैंकल की कल देखेंगे, हम तो बस आज की सोचते हैंबेफिक्र होकर तू सपने पाल, भर ले अपनी उड़ान पूरीअपनी जिद पर अड़े हम, शायद कुछ ज्यादा सोचते हैंदिल्ली में तो रोशनी है, पर गांव का है मेरे बुरा हालकैसे छोड़ आए बूढ़े बाबा को, रात-दिन हम सोचते ... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   9:30pm 25 Jan 2014
Blogger: anurag anveshi
खूबसूरत शहर की यह अजब बात हैसंभलो यारो, कदम-दर-कदम घात है।मेरे दिए खून से बची जिसकी जिंदगीवही मुझसे पूछता है, तेरी क्या जात है।खुद ही सबको लड़नी है अपनी लड़ाईकिसका भरोसा, अब किसका साथ है।तू सिर्फ अपना काम किए चला चलमत सोच जिंदगी शह या कि मात है।मेरी हिम्मत का राज अब तू भी... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   5:49am 24 Jan 2014
Blogger: anurag anveshi
दिल की बात कहो जब, बंद किवाड़ समझते हैंअजब अहमक हैं वो, तिल को ताड़ समझते हैंकितनी बार कहा कि खुली हवा में घूम आएंघर में बैठे हैं और घर को तिहाड़ समझते हैंतकलीफें तो हैं, पर मन है अब भी हरा-भराउनसे क्या कहूं जो मुझको उजाड़ समझते हैंयह उसका असर नहीं, आपमें बसा वह डर हैकि उसक... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   7:00am 23 Jan 2014
Blogger: anurag anveshi
मन की बात बोलना कोई मर्ज नहींमुझसे कुछ भी बोलो, कोई हर्ज नहींसीधेपन पर मेरे तुम मत करो शकघटनाएं याद हैं, नाम कोई दर्ज नहींहां यह सही है कि मैं जिद्दी हूं बहुतउतारूंगा सारे, रखूंगा कोई कर्ज नहींजरूरी नहीं कि तुम रखो मेरा ख्याललगे जो मजबूरी, वह कोई फर्ज नहींअनगढ़ रास्तों ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   6:26am 21 Jan 2014
Blogger: anurag anveshi
मन की बात बोलना कोई मर्ज नहींमुझसे कुछ भी बोलो, कोई हर्ज नहींसीधेपन पर मेरे तुम मत करो शकघटनाएं याद हैं, नाम कोई दर्ज नहींहां यह सही है कि मैं जिद्दी हूं बहुतउतारूंगा सारे, रखूंगा कोई कर्ज नहींजरूरी नहीं कि तुम रखो मेरा ख्याललगे जो मजबूरी, वह कोई फर्ज नहींअनगढ़ रास्तों ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:26am 21 Jan 2014
Blogger: anurag anveshi
खुद की सांसों से जब लिहाफ गरम होता हैपस्त पड़ती है ठंड, शरीर नरम होता है।अजब शहर है दिल्ली, रौनक देखो यहां कीजिससे भी मिलो, सगे होने का भरम होता है।अजब हाल है, शक होने लगा है खुद पर भीक्योंकि अब तो हर मर्द में एक हरम होता है।वह संस्कार गुम हो गया है हर घर से कहींशायद जानवरो... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   5:51am 20 Jan 2014
Blogger: anurag anveshi
यह कोई नयी बात नहींयह सब जानते हैंकि मां माने आश्वस्तिमैंने यह तब जाना था अपने छुटपन में हीजब बहुत कुछ नहीं था हमारे पासपर थी मेरी एक मांजिसके आंचल में मेरी हर परेशानीऔर जरूरत का हल भरा होता थाकुछ और बरस बादजब मेरे भीतर पलने लगे थे सपनेपसरने लगे थे कई-कई शौक, जिन्हें पू... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   1:48pm 6 Jan 2014
Blogger: anurag anveshi
खुद की सांसों से जब लिहाफ गरम होता हैपस्त पड़ती है ठंड, शरीर नरम होता है।अजब शहर है दिल्ली, रौनक देखो यहां कीजिससे भी मिलो, सगे होने का भरम होता है।अजब हाल है, शक होने लगा है खुद पर भीक्योंकि अब तो हर मर्द में एक हरम होता है।वह संस्कार गुम हो गया है हर घर से कहींशायद जानवरो... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   1:47pm 6 Jan 2014
Blogger: anurag anveshi
अनुराग अन्वेषी11 अक्टूबर की बिग पार्टी का हैंगओवर उतरा भी नहीं था कि बिग बी को जूनियर बी ने उठा दिया। एक बुड्ढा मिलने आया है आपसे। खुद को सत्तर का हीरो बता रहा है – जूनियर बी ने कहा था। बिग बी चौंके कि अरे, अभी तो रात में मिले थे दिलीप साहेब...फिर इतनी सुबह-सुबह क्यों आए भला। ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   8:22pm 11 Oct 2013
Blogger: anurag anveshi
इरोम चानू शर्मिला पर अदालत ने आरोप तय कर दिया है और अब उन पर आत्महत्या की कोशिश का मुकदमा चलेगा। यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने 4 नवंबर 2000 को अपना अनशन शुरू किया था, इस उम्मीद के साथ कि 1958 से अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, असम, नगालैंड, मिजोरम और त्रिपुरा में और 1990 से ... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   6:17am 9 Mar 2013
Blogger: anurag anveshi
जरूरी नहीं कि सारे सच कहे ही जाएंया कि देखे जाएंसच कहना नहीं चाहते तो न कहेंनहीं देखना चाहते, तो न देखेंपर ऐसा कुछ भी करने सेसच का चेहरा जरा भी नहीं बदलताजो बदलाव होता है वह आप में होता हैकि आप जानते हैं कि सच आपने नहीं देखाकि आप जानते हैं कि सच आपने नहीं सुनाकि आप जानते ह... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   4:47am 12 Feb 2013
Blogger: anurag anveshi
दिल्ली में हुए गैंगरेप की सुनवाई कोर्ट में इन कैमरा चल रही है। मेरे पड़ोसी ने मुझसे पूछा – इस मामले में न्याय पाने के लिए जितना तीखा विरोध हुआ, उसे उतने ही जबर्दस्त तरीके से मीडिया में जगह भी मिली। पर जब अब मामला कोर्ट में है तो उसकी खबर उतने विस्तार से नहीं है, आखिर बात क... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   6:57am 11 Feb 2013
Blogger: anurag anveshi
यह लेख मैंने पांच दिन पहले लिखा था। उस वक्त तक वह जिंदा थी। आज फर्क इतना है कि वह हम सबों के भीतर जिंदा है। पर अगर उसे सचमुच जिंदा रखना है तो इस मर्दवादी समाज को बदलना होगा, उसे स्त्रियों के बारे में अपने सोचने के तौर-तरीके में बदलाव करना होगा। अन्यथा वह बार-बार मरती रहेगी ... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   7:22pm 29 Dec 2012
Blogger: anurag anveshi
प्यार क्या है एक अदृश्य ताकत?जो आपको खड़ा होने की हिम्मत देता है खिलाफ बह रही तमाम हवाओं के खिलाफजो आपको सिखाता है कि जीना है तो मरने के लिए रहो हरदम तैयार और आप मेमने को खाने पर अड़े भूखे शेर से भी लड़ने को हो जाते हैं खड़ेजब तक यह अदृश्य ताकत आपके भीतर बहती हैतेज से तेज ... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   7:04am 2 Dec 2012
Blogger: anurag anveshi
संसद की स्थायी समिति के पास है लोकपाल विधेयक। सरकार उसे वापस ले सकती है। इस बीच अरुणा राय और अन्ना हजारे के प्रस्तावित बिल भी संसदीय समिति के पास भेजे जा चुके हैं। अनशन के नौवें दिन बिल के विभिन्न बिंदुओं पर सर्वदलीय बैठक में कोई सहमति नहीं हो सकी और अन्ना टीम के साथ क... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   3:59am 26 Aug 2011
Blogger: anurag anveshi
किसी गर्म, कुरमुरी, जायकेदार जलेबी को मुंह में रखनेऔर उसे गप कर जाने से पहलेउसकी खुशबू और उसके रस का पूरा आनंद लेने के बीचक्या आपने ध्यान दिया हैकि हमारी भाषाकैसे-कैसे बेख़बर अत्याचार करती है?अगर किसी को आप जलेबी जैसा सीधा कहते हैंतो ये उसके टेढ़ेपन पर व्यंग्य भरी टिप... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   6:01am 30 Sep 2010
Blogger: anurag anveshi
मोह जब हो भंग, तो आदमी खुद को ठगा सा महसूस करता है। उसे लगता है कि वह अब तक खुद को छल रहा था। वैसे खुद को छलने वाले लोग भी होते हैं, आत्ममुग्ध, आत्मरति के शिकार। पर जब वाकई दूसरों के हाथों छले जाएं, तो उनकी पीड़ा मुखर हो जाती है। पीड़ा के ऐसे क्षणों में आखिर आदमी क्या करे, कहां... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   12:09pm 11 Apr 2010
Blogger: anurag anveshi
अनिता, अनुनय और मान्या के बिना शुरू के दो दिन तोमैंने खूब चैन से गुजारे। लगा कि 17 मार्च की खुशियां बरकरार हैं। अगर स्वर्ग होता होगा तो शायद उसका सुख यही है। पर तीसरे दिन से ही मेरा भ्रम टूटने लगा। मुझे मेरा घर अचानक पराया लगने लगा। दफ्तर से लौटता तो यहां का सूनापन मुझे का... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   2:37am 24 Mar 2010
Blogger: anurag anveshi
सुबह 5 बजे सोने गया और अब 10:30 बजे सो कर उठा हूं। कोई शोरगुल नहीं। खूब गहरी नींद आई। सोकर उठा तो मोबाइल में 18 मिस्ड कॉल दिखी। चार बार मेमसाब (मेरी श्रीमती जी) ने फोन किया था। बाकि 14 साथी-संगतियों की कॉल थी। सोचा था इन सात दिनों में पुराने बचे कई काम निबटा लूंगा। कुछ लेख लिखने थे... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   5:05am 18 Mar 2010
Blogger: anurag anveshi
पिछले कई दिनों से इस सत्रह मार्च का मैं बेसब्री से इंतजार कर रहा था। रोज जीटॉक के स्टेटस मेसेज में इस दिन के इंतजार में मेसेज बदल रहा था। संगी-साथी पूछ रहे थे कि क्या मामला है। मैं क्या बताता उन्हें। डरा मैं भी था कि श्रीमती जी ने कहीं टिकट कैंसल करा दिया तो? बहरहाल, श्रीम... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   8:16pm 16 Mar 2010
Blogger: anurag anveshi
प्यारी बेटा,कैसी है तू? पढ़ाई-लिखाई का क्या हाल है? समय का इक्वल डिस्ट्रिब्यूशन किया है न? देख बेटा, पढ़ाई के साथ मस्ती भी बेहद जरूरी है। जितनी ईमानदारी से पढ़ती है उतनी ईमानदारी के साथ मस्ती भी कर। किसी एक चीज पर पिले रहने से मुकाम तो हासिल कर लेगी, पर पर्सनैलिटी नहीं। इस... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   9:29pm 13 Feb 2010
Blogger: anurag anveshi
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दूर से जितना लुभावना लगता है उसका सच उतना ही भयानक है। मेरी एक बेहद करीबी मित्र जो दिल्ली के एक न्यूज चैनल में काम करती थी। पर वहां उसे अपने बॉस के अप्रोच ने इस कदर डरा दिया कि उसने नौकरी छोड़ दी। उसने कसम खाई कि वह कभी किसी इलेक्ट्रॉनिक चैनल में काम ... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   7:50am 23 Jan 2010
Blogger: anurag anveshi
पामें न अमिताभ दिखते हैं, न उनकी एक्टिंग की ऊंचाई। दरअसल, उस करेक्टर में अभिनय की गुंजाइश ही नहीं थी। अमिताभ की एक्टिंग देखनी हो तो ब्लैक जैसी दर्जनों फिल्में हैं। इसलिए कहना पड़ता है कि यह फिल्म किसी एक्टर के लिए नहीं याद की जाएगी। कर्स्टन टिंबल और डोमिनिक के लाजवाब म... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   6:43am 19 Dec 2009
Blogger: anurag anveshi
पामें न अमिताभ दिखते हैं, न उनकी एक्टिंग की ऊंचाई। दरअसल, उस करेक्टर में अभिनय की गुंजाइश ही नहीं थी। अमिताभ की एक्टिंग देखनी हो तो ब्लैक जैसी दर्जनों फिल्में हैं। इसलिए कहना पड़ता है कि यह फिल्म किसी एक्टर के लिए नहीं याद की जाएगी। कर्स्टन टिंबल और डोमिनिक के लाजवाब म... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   6:43am 19 Dec 2009
Blogger: anurag anveshi
रामदास कदम को एनडीटीवी पर बोलते सुना। शुक्र है उनका कि यहां वह हिंदी में बोल रहे थे। उसी हिंदी में जिसमें शपथ लेते समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी के साथ उन्होंने हाथापाई की। इसे कहते हैं दुकानदारी। मराठियों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए (यह बहस का अलग मुद्दा हो सकता ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   4:26pm 9 Nov 2009
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