Hamarivani.com

एक शाम मेरे नाम

कुछ गीत ज़िंदगी में कभी भी सुने जाएँ, कितनी बार भी सुने जाएँ वही तासीर छोड़ते हैं। कुछ दिनों से ऐसा ही एक सदाबहार नग्मा होठों पर जमा हुआ है। 1959 में आई फिल्म सुजाता के इस गीत को गाया था तलत महमूद ने।  हिंदी फिल्म जगत में तलत महमूद एक ऐसे गायक थे जो फिल्म संगीत में छाने के प...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :मजरूह सुल्तानपुरी
  June 26, 2013, 12:01 am
अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कविताओं से मेरा पहला परिचय बोर्ड की हिंदी पाठ्य पुस्तकों के माध्यम से हुआ था। छायावादी कवियों की तुलना में हरिऔध मुझे ज्यादा भाते थे। अपने सहज शब्द चयन के बावज़ूद उनकी कविताएँ मानव जीवन के गूढ़ सत्यों को यूँ बाहर निकाल लाती थीं कि मन अच...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :पॉडकॉस्ट
  June 18, 2013, 10:14 pm
पिछली पोस्ट में मैंने आपसे इब्ने इंशा के व्यंग्य संग्रह 'उर्दू की आख़िरी किताब' के कुछ पहलुओं पर चर्चा की थी। आज इस सिलसिले को ज़ारी रखते हुए  बात करेंगे इतिहास, गणित, विज्ञान, व्याकरण और नीति शिक्षा से जुड़ी इब्ने इंशा की कुछ दिलचस्प व्यंग्यात्मक टिप्पणियों पर। इंशा ज...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :पॉडकॉस्ट
  June 5, 2013, 10:10 pm
पिछली बार विमल मित्र की किताब 'एक और युधिष्ठिर' के बारे में चर्चा करते हुए मैंने उसे आपको ना पढ़ने की सलाह दी थी, पर आज जिस पुस्तक की बात मैं आपसे करूँगा ना सिर्फ वो पढ़ने योग्य है बल्कि सहेज के रखने लायक भी। दरअसल इब्ने इंशा की लिखी 'उर्दू की आख़िरी किताब' की तलाश मुझे वर्...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :इब्ने इंशा
  May 31, 2013, 10:48 pm
पिछली बार विमल मित्र की किताब 'एक और युधिष्ठिर' के बारे में चर्चा करते हुए मैंने उसे आपको ना पढ़ने की सलाह दी थी, पर आज जिस पुस्तक की बात मैं आपसे करूँगा ना सिर्फ वो पढ़ने योग्य है बल्कि सहेज के रखने लायक भी। दरअसल इब्ने इंशा की लिखी 'उर्दू की आख़िरी किताब' की तलाश मुझे वर्षो...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :इब्ने इंशा
  May 31, 2013, 10:48 pm
पिछले साल एक फिल्म आई थी टुटिया दिल। फिल्म कब आई और कब गई ये तो पता नहीं चला पर पिछले साल RMIM पुरस्कार के लिए बतौर जूरी ये गाना जब हिंदी फिल्म संगीत प्रेमियों द्वारा नामांकित हो कर आया तो मैंने इसे पहली बार सुना। तब तक वार्षिक संगीतमाला 2012 के सारे गीत चयनित हो चुके थे इसलिए ...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :मीनल जैन
  May 21, 2013, 1:30 pm
फिल्म 'अर्थ' और उसका संवेदनशील संगीत तो याद  है ना आपको। बड़े मन से ये फिल्म बनाई थी महेश भट्ट ने। शबाना, स्मिता का अभिनय, जगजीत सिंह चित्रा सिंह की गाई यादगार ग़ज़लें और कैफ़ी आज़मी साहब की शायरी को भला कोई कैसे भूल सकता है। पर फिल्म अर्थ में शामिल एक ग़ज़ल के शायर का नाम ...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :इफ़्तिख़ार इमाम सिद्दिकी
  May 15, 2013, 3:00 pm
आशिक़ी 2 फिल्म और उसके गीतों के आज काफी चर्चे हैं। सोचा आज इसके गीतों को सुन लिया जाए। सुन रहा है..और कुछ हद तक तुम ही हो के आलावा फिल्म के बाकी गीत सामान्य ही लगे। हाँ ये जरूर हुआ कि जिस फिल्म की वज़ह से ये दूसरा भाग अस्तित्व में आया  है उसके गीत संगीत की इस फिल्म ने यादें ता...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :कुमार शानू
  May 8, 2013, 3:00 pm
ज़िंदगी की दौड़ में आगे भागने की ज़द्दोज़हद मे हमें कई सीढ़ियाँ पार करनी पड़ती हैं। हर सीढ़ी पर चढ़ने में नामालूम कितने जाने अनजाने चेहरों की मदद लेनी पड़ती है। पर जब हम शिखर पर पहुँचते हैं तो कई बार उन मजबूत हाथों और अवलंबों को भूल जाते हैं जिनके सहारे हमने सफलता की पॉ...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :हरिवंश राय बच्चन
  May 1, 2013, 9:28 pm
शमशाद बेगम ये नाम आज का संगीत सुनने वालों के लिए अनजाना ही है। जाना हुआ हो भी तो कैसे ? आजकल पुराने गानों का मतलब साठ और सत्तर के दशक के गीतों से रह गया है। हद से हद पचास के दशक के गीत आप विविध भारती सरीखे सरकारी चैनलों पर सुन पाते हैं। पर जो गायिका चालिस और पचास के दशक में अ...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :संगीत चर्चा
  April 26, 2013, 8:00 am
बड़ा अज़ीब सा शीर्षक है ना। पर इस ग़ज़ल के बारे में बात करते वक़्त उससे परिचय की छोटी सी कहानी आपके सम्मुख ना रखूँ तो बात अधूरी रहेगी। बात अस्सी के दशक की  है। क्रिकेट या यूँ कहूँ उससे ज्यादा उस वक़्त मैच का आँखों देखा हाल सुनाने वाली क्रिकेट कमेंट्री का मैं दीवाना था। सं...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :नसीम बानो चोपड़ा
  April 19, 2013, 7:29 pm
ज़रा बताइए तो अख़बार शब्द से आपके मन में कैसी भावनाएँ उठती हैं ? चाय की चुस्कियो् के साथ हर सुबह की आपकी ज़रूरत जिसके सानिध्य का आकर्षण कुछ मिनटों के साथ ही फीका पड़ जाता है। देश दुनिया से जोड़ने वाले काग़ज के इन टुकड़ों का भला कोई काव्यात्मक पहलू हो सकता है ....ये सोचते हुए भ...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :विवेक राणाडे
  April 7, 2013, 7:41 pm
बंगाली साहित्यकारों की हिंदी में अनुदित पुस्तकें स्कूल जीवन में पढ़े गए हिंदी उपन्यास का सबसे बड़ा हिस्सा रही हैं। आशापूर्णा देवी तो मेरी सबसे पसंदीदा उपन्यासकार थीं ही,  उन दिनों मुझे बिमल मित्र, महाश्वेता देवी, समरेश बसु व वरेन गंगोपाध्याय को भी पढ़ना बुरा नहीं लगता ...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :बिमल मित्र
  April 1, 2013, 10:00 am
वक़्त का पहिया बिना रुके घूमता ही रहता है। आपके इस चिट्ठे ने भी आज समय के साथ चलते हुए अपनी ज़िंदगी के सात साल पूरे कर लिए हैं। सात सालों के इस सफ़र में करीब पौने छः लाख पेजलोड्स, हजार से ज्यादा ई मेल सब्सक्राइबर और उतने ही फेसबुक पृष्ठ प्रशंसक,  मुझे इस बात के प्रति आश्वस...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :वर्षगाँठ विशेष
  March 26, 2013, 11:28 pm
लगभग ढाई महिनों के इस सफ़र को तय कर आज बारी है वार्षिक संगीतमाला 2012 के शिखर पर बैठे गीत से आपको रूबरू कराने। वार्षिक संगीतमाला 2012 के सरताज गीत के गायक पहली बार किसी संगीतमाला का हिस्सा बने हैं और वो भी सीधे पहली पॉयदान पर। इस गीत के गीतकार वार्षिक सगीतमालाओं में दो बार प्...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :पापोन
  March 20, 2013, 7:00 am
इससे पहले कि वार्षिक संगीतमाला 2012 के सरताज़ गीत के नाम का आपसे खुलासा करूँ एक नज़र पिछले साल के फिल्म संगीत की तरफ़। गत वर्ष करीब सौ फिल्में रिलीज़ हुई यानि हर तीसरे या चौथे दिन एक नई फिल्म! पर अगर आप मेरी वार्षिक संगीतमाला 2012 पर गौर करेंगे तो पाएँगे कि इनमें से सिर्फ सोल...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :वार्षिक संगीतमाला 2012
  March 13, 2013, 10:28 pm
वार्षिक संगीतमाला 2012 की दूसरी पॉयदान पर खड़ा है वो गीत जिसे गाया सोनू निगम ने,धुन बनाई अजय अतुल ने और बोल लिखे अमिताभ भट्टाचार्य ने। जी हाँ सही पहचाना आपने वार्षिक संगीतमाला 2012 के रनर्स अप खिताब जीता है फिल्म अग्निपथ के गीत अभी मुझ में कहीं,बाकी थोड़ी सी है ज़िन्दगी ने। ...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :अजय अतुल
  March 11, 2013, 7:00 am
वार्षिक संगीतमाला 2012 का सरताज बिगुल बजने में अब ज्यादा देर नहीं है। बस बची है आख़िर की तीन सीढ़ियाँ। शिखर पर बैठे इन तीनों गीतों का मेरे हृदय में विशेष स्थान है और तीसरी पॉयदान पर विराजमान इस गीत को सुनने के बाद तो मन ही अनमना हो जाता है। वैसे भी अगर साक्षात भगवन ही हमार...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :वार्षिक संगीतमाला 2012
  March 5, 2013, 7:00 am
वार्षिक संगीतमाला 2012 का सरताज बिगुल बजने में अब ज्यादा देर नहीं है। बस बची है आख़िर की तीन सीढ़ियाँ। शिखर पर बैठे इन तीनों गीतों का मेरे हृदय में विशेष स्थान है और तीसरी पॉयदान पर विराजमान इस गीत को सुनने के बाद तो मन ही अनमना हो जाता है। वैसे भी अगर साक्षात भगवन ही हमार...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :वार्षिक संगीतमाला 2012
  March 5, 2013, 7:00 am
इंसान की इस फितरत से भला कौन वाक़िफ़ नहीं ? अक्सर उन चीजों के पीछे भागा करता है जो पहुँच से बाहर होती है। पर दुर्लभ को प्राप्य बनाने की जुगत में बने बनाये रिश्तों को भी खो देता है। गीतकार जावेद अख्तर मनुष्य की इसी मनोदशा को वार्षिक संगीतमाला 2012 की चौथी पॉयदान पर के गीत के ...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :जावेद अख्तर
  March 1, 2013, 7:00 pm
इंसान की इस फितरत से भला कौन वाक़िफ़ नहीं ? अक्सर उन चीजों के पीछे भागा करता है जो पहुँच से बाहर होती है। पर दुर्लभ को प्राप्य बनाने की जुगत में बने बनाये रिश्तों को भी खो देता है। गीतकार जावेद अख्तर मनुष्य की इसी मनोदशा को वार्षिक संगीतमाला 2012 की चौथी पॉयदान पर के गीत के ...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :जावेद अख्तर
  March 1, 2013, 6:00 am
वार्षिक संगीतमाला का सफ़र आ पहुँचा है अपनी आखिरी पाँच पॉयदानों के मुकाम तक। संगीतमाला के इन अंतिम पाँच गीतों की शुरुआत गैंग्स आफ वासेपुर में पीयूष मिश्रा के गाए इस गीत के साथ। इस साल जो दो एकल गीत पीयूष ने गाए हैं वे दोनों ही इस संगीतमाला का हिस्सा बने हैं। पीयूष मिश्र...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :वार्षिक संगीतमाला 2012
  February 24, 2013, 6:00 am
वार्षिक संगीतमाला की आठवीं और सातवीं पॉयदान के गीत को सुनाने की बजाए आज आपको सीधे लिए चलते हैं छठी पॉयदान के गीत की तरफ़। आप भी सोचे रहे होंगे कि ये क्या बात हुई पर क्या कहें हुजूर संत वैलेंटाइन ने मुझे आज के दिन इस गीत के आलावा किसी और गीत के बारे में लिखने की सख़्त ताकी...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :अरिजित सिंह
  February 21, 2013, 2:30 pm
अच्छा जरा बताइए तो हिंदी फिल्मों में दो प्रेम के मारों को अपने नए नवेले ख़्वाबों का घर बनाते आपने कितनी बार सुना और गुना है। अपने हमसफ़र के साथ नयी ज़िदगी अपने नए घोंसले में शुरु करने का ख़्याल इतना प्यारा है कि गीतकारों ने अलग अलग रंगों में इस जज़्बे को हमारे साथ बाँटा...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :श्रेया घोषाल
  February 20, 2013, 7:00 am
जिंदगी की राहें हमेशा सहज सपाट नहीं होती। कभी कभी ये ज़िंदगी बड़े अज़ीब से इम्तिहान लेने लगती है। आपके और आपके करीबियों के साथ कुछ ऐसा होता है जो आप एकदम से स्वीकार नहीं कर पाते। मन अनायास ही ये सवाल कर उठता है..ऐसा मेरे साथ ही क्यूँ भगवन ? पर उस सवाल का जवाब देने के लिए ना आ...
एक शाम मेरे नाम...
Manish Kumar
Tag :विशाल-शेखर
  February 17, 2013, 8:00 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3667) कुल पोस्ट (166028)