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Blog: जोग लिखी

Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
मीडिया की आज़ादी की बात अभिव्यक्ति की आज़ादी के समानांतर है. जितनी ज़रूरी अभिव्यक्ति की आज़ादी है उतनी ही ज़रूरी मीडिया की आज़ादी भी है. और मुझे यह कहने में गर्व का अनुभव हो रहा है कि भारत में कुछ छुट-पुट अपवादों को छोड़कर ये दोनों ही आज़ादियां विद्यमान हैं. इन छुट-पुट ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   2:07am 26 Jan 2012
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
बीतते जा रहे साल के आखिरी दिनों में पूरे साल का लेखा जोखा करने बैठा हूं तो सबसे पहले इस बात पर ध्यान जाता है कि हमारे समाज की भाषा की ज़रूरतों में तेज़ी से बदलाव आ रहा है. अब तक हम जिस तरह से भाषा को बरतते रहे हैं, बरताव का वह तरीका अब प्रचलन से बाहर होता जा रहा है. हमारे समय ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   9:44am 25 Dec 2011
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
भारत के टेलीकॉम और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल इन दिनों अनगिनत आलोचनाओं और उपहासों के पात्र बन रहे हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार कोई छह सप्ताह पहले उन्होंने कुछ सोशल मीडिया साइट्स के एक्ज़ीक्यूटिव्स के साथ मुलाकात करके उन्हें आपत्तिजनक स... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   3:11am 10 Dec 2011
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
हाल ही में मेरे एक सुधी अति संवेदनशील और बहु पठित मित्र ने अपना एक नया लेख मुझे मेरी प्रतिक्रिया जानने के लिए भेजा. हम मित्रों के बीच यह एक सामान्य बात है कि अपने लिखे को प्रकाशनपूर्व अपने मित्रों को पढ़वा कर उनकी प्रतिक्रिया जान लें और यदि आवश्यक हो अपने लिखे में सुधार... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   7:27am 24 Jul 2011
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल से डॉ पल्लव की बातचीतपल्ल्व:हिंदी में शुरुआत में ही घुमक्कड़ शास्त्र (राहुल सांकृत्यायन) जैसी किताब, और उससे भी पहले हमारी परंपरा की जड़ में रामायण (राम का अयन. अयन का अर्थ भ्रमण भी है) होने के बावज़ूद क्या कारण हैं कि हिंदी में यात्राओं पर लिखन... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   12:53pm 13 Jul 2011
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
कभी-कभी ऐसा होता है कि कोई एक रचना रचनाकार के समस्त कृतित्व पर छा जाती है. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी से पहले ‘उसने कहा था’ याद आने लगती है और भगवतीचरण वर्मा से पहले ‘चित्रलेखा’. हरिवंश राय बच्चन से पहले ‘मधुशाला’ कानों में गूंजने लगती हैं तो भीमसेन जोशी से पहले ‘मिले सुर ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   2:54pm 20 Jun 2011
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
वर्ष 20101 के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मारियो वर्गास लोसा की गणना एक अति महत्वपूर्ण लातीन अमरीकी लेखक के रूप में की जाती है तथा उनका नाम ऑक्टावियो पाज़ और गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ जैसे लेखकों के साथ लिया जाता है. साहित्यालोचक गेराल्ड मार्टिन ने उचित ही लिखा है कि ल... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   3:29am 27 Dec 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
इंटरनेट पर अपनी एक टिप्पणी में अमरीका में रह रहे मेरे मित्र श्री अनूप भार्गव ने  हिंदी  कवि सम्मेलनों की स्तरहीनता पर अपना क्षोभ व्यक्त किया है. उन्होंने महाकवि निराला के एक अति प्रसिद्ध कथन, गिर कर कोई चीज़ मत उठाओ, चाहे वह कविता ही क्यों न हो’ को भी स्मरण किया है.  उनकी ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   2:31pm 23 Sep 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
हिंदी दिवस फिर आ गया है. हर साल आ जाता है. विभिन्न सरकारी संस्थानों के  हिंदी अधिकारियों के लिए अपनी दक्षता के दिखावे का  वार्षिक महोत्सव. (दिखावे शब्द का प्रयोग मैंने जान-बूझकर किया है. यह मानते हुए कि वे वर्ष भर काफी कुछ सार्थक भी करते रहते हैं, लेकिन हिंदी दिवस या हिंदी ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   10:07am 13 Sep 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
अब पीछे मुड़ कर देखता हूं तो सोचता हूं कि उस प्रख्यात अंग्रेज़ी कहावत के राजेन्द्र यादवीय अनुवाद को साकार करने की क्या सूझी थी मुझे? अग्रेज़ी कहावत है fools rush in where angels fear to tread in. राजेंद्र जी ने इसका जो अनुवाद किया, वह शालीन भले ही न हो, उससे सटीक अनुवाद और कोई हो नहीं सकता. उनका कि... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   4:52am 23 Aug 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
मेरी मांहर सुबह जब तारे हो जाते अस्त ऊंची-ऊंची चिमनियों के सायरनों से निकलती आवाज़ के बीच मिल की तरफ़ जल्दी-जल्दी कदम बढ़ातेकौन पीछे मुड़कर हमें देखती और कहती इतने प्यार से “लड़ना मत किसी से” और थमा देती दो पैसे दशहरे के एक दिन पहले वो गई थी हम पांचों के साथ मेले में ह... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   11:43am 22 Aug 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
कभी-कभी एक अकेला गीत ही सिर्फ साढ़े सात मिनिट में पूरे देश को अपने आगोश में समेट लेता है. 15 अगस्त, 1988 की सुबह भारत के टीवी दर्शकों ने देखा एक केशरिया सूरज, समुद्र और उसकी उत्ताल तरंगों की छवियों में से उभरते अधमुंदी आंखों वाले भीमसेन जोशी को, जो अधमुंदी आंखों के साथ गा रह... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   2:49am 18 Aug 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
पिछले दिनों पत्नी ने अपने घुटने बदलवाने का ऑपरेशन करवाया तो उनकी देखभाल करते हुए मुझे भारतीय मानसिकता के कुछ खास पहलुओं से रू-बरू होने का अवसर मिला. पत्नी ऑपरेशन के लिए जिस अस्पताल में भर्ती हुई थीं वहां रोगियों से मिलने वालों की आवाजाही पर कड़ा प्रतिबंध था. प्रत्ये... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:41am 2 Jul 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
अक्सर कहा जाता है कि लोग आसानी से बदलना नहीं चाहते और बदलाव बहुत मुश्क़िल होता है आप धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, छोड़ नहीं पाते. वज़न घटाना चाहते हैं, कामयाब नहीं होते. फिज़ूलखर्ची रोकना चाहते हैं, रोक नहीं पाते. आप सब कुछ समझते हैं फिर भी वह नहीं कर पाते जो करना चाहते हैं.... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   7:11am 6 May 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
2005 में प्रकाशित बहु-चर्चित पुस्तक अ होल न्यू माइंड: व्हाय राइट-ब्रेनर्स विल रूल द फ्यूचरके लेखक डेनियल एच पिंक अपनी हालिया प्रकाशित किताबड्राइव: द सरप्राइज़िंग ट्रुथ अबाउट व्हाट मोटिवेट्स असमें यह कहकर हमें चौंकाते हैं कि कुछ करने के लिए हम क्यों प्रेरित होते हैं इस... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   1:42am 7 Mar 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
एक बहुत दिलचस्प उक्ति है कि अस्पताल बीमार लोगों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं है. इसलिए नहीं है कि यह स्थान ऐसी अनेक बातों और चीज़ों से भरा होता है जो आपकी सेहत के लिए ख़तरनाक होती हैं, जैसे छोटे-बड़े इन्फेक्शन, निदान या दवा देने में होने वाली चूकें और मानवीय भूलों की वजह से ... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   5:35am 7 Feb 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
अपनी मेगा बेस्टसेलर थ्री कप्स ऑफ टी (अब तक 30 लाख प्रतियां बिक चुकी हैं) में ग्रेग मॉर्टेन्सन ने पाकिस्तान के दुर्गम इलाकों में लड़कियों के लिए स्कूल बनाने के अपने प्रयासों का मार्मिक वृत्तांत दिया था. उसी किताब की अगली कड़ी है स्टोन्स इण्टु स्कूल्स: प्रोमोटिंग पीस वि... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   2:50am 24 Jan 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
पिछले एक दशक में अपनी तीन सुपर बेस्टसेलर किताबों द टिपिंग पॉइंट, ब्लिंक और आउटलायर्स से बहु चर्चित और अपने परिवेश को देखने का हमरा नज़रिया बदल डालने वाले लेखक माल्कम ग्लैडवेल की नई किताब व्हाट द डॉग सॉ: एंड अदर एडवेंचर्स असल में लगभग इसी कालावधि में न्यूयॉर्कर पत्रिक... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   3:46am 10 Jan 2010
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
सन 2005 में प्रकाशित एक छोटी-सी किताब फ्रीकोनोमिक्स ने अर्थशास्त्र और दुनिया के प्रति लोगों का नज़रिया बदलने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की. न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्ट सेलर सूची में रही स्टीवेन डी. लेविट्ट और स्टीफ़ेन जे. ड्युबनेर कृत इस किताब की दुनिया की 35 भाषाओं में 40 ला... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   5:44am 7 Dec 2009
Blogger: Dr Durgaprasad Agrawal
पुलित्ज़र पुरस्कार जीतने वाले पहले विवाहित दम्पती निकोलस डी क्रिस्टोफ और शेरिल वुडन ने अफ़्रीका और एशिया की सघन यात्राओं के बाद लिखी इस किताब में बताया है कि कैसे एक छोटी-सी सहायता भी पद दलित, पीड़ित बच्चियों और स्त्रियों की ज़िंदगी में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   2:16pm 5 Nov 2009
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