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मेरा जहाँ

ये सफर चलता रहेगा ,मोड़ आयेंगे नये ,राह के राही डटा रह ,मेघ छाएंगे नए । जलजलों का खौफ या हो गर्म सेहरा की तपिश ,पाँव को आगे बढ़ाना ,सहर आयेंगे नए । काफिले हर मोड़ वीथी पर सदा मिलते रहेंगे ,हर तरह के साथियों के साथ हम चलते रहेंगे । क्या हुआ जो साथ छूटे ,डोर रिश्तों की न टूट...
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  April 21, 2013, 4:56 pm
आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !!               दोस्तों !जिन्दगी के रहगुजर पर चलते हुए आज हम फिर से एक पड़ाव को पार कर रहें हैं ।जहाँ बीता हुआ वर्ष कुछ खट्टी ,कुछ मीठी तथा कुछ कड़वी यादों को हमारे जेहन में वसाकर हम सभी को अलविदा कह रहा है ,वहीँ एक नया साल कुछ पीड़ा को सजो...
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  December 31, 2012, 9:54 pm
                       आज दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर सरकार पर प्रदर्शनकारियों का गुस्सा फूट पड़ा ।हजारों लोगों के समूह ने जनपथ ,राष्ट्रपतिभवन ,मंत्रियों तथा सोनिया गाँधी के आवास का घेराव किया ,और दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोक...
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  December 23, 2012, 8:31 am
तेरे बाद इस तूफां का मंजर कम नहीं होता ,उमड़ते हैं जवां रातों में काले मेघ यादों के ।दरिया के पुराने पुल से ,बैठे फेंकते पत्थर ,सहर के लाल आंचल के तले ,हम-तुम नहाए से ।शबा चलती थी ,पंखुड़िया लरजती ,तेरे जुल्फों की ,बिखरती शाम के साये में ,प्याले तेरे हाथों के ।निखरती है कभी ...
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  December 21, 2012, 11:49 pm
कुछ तुड़े से ,कुछ मुड़े से ,और कुछ,तनकर खड़े सेक्यारियों के ,फूल है ये ।हो कहानी,प्रेम की ,या मगजमारी ,क्षेम की ,हर जगह ,उल्लास की ,उठती हुई सी ,धूल है ये ।समिति हो ,संवेदना की ,इष्ट के ,आराधना की ,आर्त के ,मुश्किल क्षणों मेंनित्य चुभते ,शूल है ये ।राजपथया राजघाट ,या कभीशमशान घाट...
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  December 16, 2012, 7:21 pm
हमारे अन्तर्मन की ,ये रात गहराती जा रही है ।ये घुप अँधेरा ,जो हमारी त्वचा से होकर ,दिल की गहराइयों तक उतर चुका है ।कभी भागता था ,हमारे शरीर के संसार में प्रकाशित ,अनुभूतियों के सूरज से ।अनगिनत अणुओं के संलयन से ,उपजित होती असीमित किरणें ,जो करती थी रौशन ,अपने को ,अपने चारों ...
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  December 10, 2012, 2:11 am
                   कहा जाता है की अब तक ज्ञात सभी तंत्रों में जनतंत्र अथवा लोकतंत्र ही एक ऐसी शाशन-पद्धति है ,जिसमें लिए गए निर्णय वास्तविक रूप से रूप से जनता की अभिव्यक्ति तथा जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करते है ।प्रत्यक्षतः जब इस काम को करने में जनता असमर्थ होती है ,तब जनप्रत...
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  December 6, 2012, 11:40 pm
निगाहों में समाया था, कभी ये ख्वाब मेरे भी ,रौशन इस फिजाँ में कोई ,अपना आशियाँ होगा ।चमकती रेत ,सूरज की तपिश है ,सारे आलम में ,खुदा जाने यहाँ दरिया में अब ,पानी कहाँ होगा ।नहीं होंगी दरकती डोरियाँ ,रिश्तों की आपस में ,बहेगा खून ना सरहद पे ,राह-ए-राजदां होगा ।रहेंगीं साथ साहिल...
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  December 6, 2012, 7:56 pm
विचरण करते नभ मंडल में ,खग वृन्दों की उन्मुक्त उड़ान ।लघु कोमल चंचल पंखों से ,मापन करते सारा जहान ।।असीमित संसार है इनका ,मजहब की दीवार नहीं है ।जांति -पांति ना भेद -भाव है ,कलुषित द्वेश विकार नहीं है ।।अपने दानों से मतलब है ,अम्बर के दीवानों को ।सृजित करते पत्तों -तिनकों ...
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  December 5, 2012, 10:48 pm
जन्म लेते ही, हमारा कागजीकरण  कर दिया गया |तत पश्चात थमा दिया गया कागजो का एक बण्डल ,और  कहा गया कि रट डालो इन्हें ,  यह तुम्हारे बेहतर जीवन के लिए है |कागजो के वे बण्डल जीवन का हिस्सा होते चले गए ,बाद में पता चला,ये कागज दूसरे कागजो को पाने के लिए है |हमारे बेहतर जीवन के लिए ह...
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  December 5, 2012, 9:41 pm
खोजता रहता हूँ ,इक नाम इसी मेलें में ।था कोई अपना भी ,दुनिया के इस झमेले में ।खोजता -------------जैसे आता है चाँद ,शाम घिरने पर आँगन में ,और चला जाता है ,नित शहर के उजाले में ।खोजता  -----------जैसे कलियों पर ,शबनम की चमकती बूंदें ,खो जाती है कहीं ,उषा किरण के रेले में ।खोजता --------------आ जाओ फिर क...
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  December 4, 2012, 9:47 pm
शहर की गलियों -कूचों पर ,छात्रों के मन मष्तिस्क पर ,आइ-नेक्सट,जागरण ,उजाला और हिन्दुस्तान के पृष्ठों पर ,कॉलेज की ऑटोनोमी छाई हुई थी ।हमने भी पूछा यार ये ,ऑटोनोमी कौन सी चिड़िया का नाम है ?अपने गोरखपुर की आइआइटी में ,उसका भला क्या काम है ??सब बोले यार अपने इन छोटे-छोटे खयालों...
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  November 18, 2012, 5:49 pm
गाँव चोर और नगर चोर सब जनप्रतिनिधि हो बैठें हैं ,खाकर जनता का ही पैसा जनता से ही अब ऐठें हैं ।बस पांच साल दे दो हमको ,तस्वीर बदल देंगे हम ,आते चुनाव ही मिमियाते ,तकदीर पलट देंगे अब हम।तस्वीरें तकदीरें तो इनकी पांच साल में चमक गयी ,बैठा प्यारा भारत महान और लोग यहाँ के बैठें ...
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  November 16, 2012, 9:05 pm
तिनका हूँ ,हवावों में उड़ा जाता हूँ ।खामोश होकर ,तूफानों से लड़ा जाता हूँ ।देख मत ,ये रौद्र रूप हवावों का ,पीछे जिनके ,वीरान खड़ा पाता  हूँ ।।शांत रह ,ये तूफां तो कुछ पल का है ।छंट जायेगा ,आसमां में जो धुंधलका है ।दिया मालिक ने  ,लघुरूप तो क्या हुआ ?ये इम्तहान ,तेरी हिम्मत ,आत...
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  October 31, 2012, 12:47 am
                 अपने कॉलेज के पुरातन छात्र समारोह में कल मैंने देखा 1987 ,सिविल इंजीनियरिंग बैच के रवि राय सर को ।सिंगापुर में कुछ साल तक इंजीनियरिंग की सर्विस के बाद ,अपने देश के लिए कुछ करने का जज्बा लिए वापस चले आये ।आज वो गरीब ,अनाथ तथा असहाय बच्चों को उनका अधिकार एवं खुशियाँ...
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  October 28, 2012, 7:14 pm
पड़ोस में उतरते हुए गुड़ की वो भीनी सी महक ,दौड़ा ले जाती थी हमको ,चेनगे की तलाश में ।आम के बौरों के रस से ,पेड़ों के नीचे लसलसाई पत्तियाँ ,जो हमारे पैरों में ,चिपक जाया करती थी ।और उठती थी ,एक मीठी सी महक ,जब पुरवाई छूकर हमारे शरीर को ,सर्र से निकल जाया करती थी ।ओसारे में लगा ...
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  October 24, 2012, 8:08 am
                रक्षाबंधन की छुट्टियों की वजह से मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग का रमन छात्रावास लगभग खाली सा हो गया है ।अधिकांश छात्र अपने घर जा चुके हैं और कुछ जाने की तैयारी में लगे हुए है। रमन भवन के छोर पर स्थित कमरा नंबर 126 में खिड़की के पास बैठा मै बाहर खेल के मैदान को तथा छ...
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  October 23, 2012, 1:31 am
घनघोर अँधेरी रातों में ,इन तीखे झंझावातों में ।जलता रह दीपक बुझ ना तू ,विपरीत विकत हालातों में ।।है काल रात्रि चंहु ओर तमस ,सूरज का निकलना बाकी है ।दमकी दामिनि ,अति तीव्र पवन ,हे दिये !तू ही एकाकी है ।।बुझ गए सकल साथी तेरे ,आगे तूफान भयंकर है ।गिरती उठती तेरी लौ है ,अब और न क...
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  October 21, 2012, 11:45 pm
(माननीय मुख्यमंत्री जी के कॉलेज दौरे पर ,इस राज्य सरकार के इंजीनियरिंग कॉलेज की नवनिर्माण प्रक्रिया को देखकर मन कुछ कहे बिना ना रह सका  )मुख्यमंत्री आ रहें हैं ,मुख्यमंत्री आ रहें हैं ।छात्र ,अध्यापक ,चपरासी ,कर्मचारी ,सभी एक स्वर में गा रहे हैं ।।मुख्यमंत्री आ रहें हैं ...
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  October 20, 2012, 4:21 pm
नित बदलती इस धरा का रूप अब क्या हो गया है ।थे शुशोभित हरित उपवन नाश सबका हो गया है ।।सप्त स्वर से गूंजते वे पक्षियों के मधुर कलरव ,मंद शीतल वायु के झोंको से विचलित पेड़ पल्लव ।हरित उपवन से शुशोभित ,काले बदरों से अलंकृत ,इस धरा और आसमां का रंग क्या अब हो गया है ।नित बदलती --------...
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  October 20, 2012, 12:26 pm
                  ########                     मुसाफ़िर                                                               यादों के हंसी गुलशन में जीना सीख लेना तुम ,हवाओ के सदिश रुकना व चलना सीख लेना तुम |कभी खुशियों के मेले आयेंगे तुझको हंसायेगे ,कभी गम से भरे सागर यहाँ तुझको रुलायेंगे ||मिलेंगे हर कदम पर हर तरह के लोग इ...
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  October 20, 2012, 10:17 am

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  January 1, 1970, 5:30 am
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