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Blog: अल्फ़ाज़

Blogger: prashant gupta
धुआँ ही धुआँ सबकी आँखों में भर जाएगा,और फिर अश्क़ों में घुल के उतर जाएगा.जिन्हें रास्तों का इल्म था वो भटक गए,जो भटका हुआ है वो गुज़र जाएगा.आज हर एक खाने में कई मोहरें हैं,कल हर एक खाना सिकुड़ जाएगा.जो सरे बाज़ार सच का ढोल पीटता है,जब उससे सच पूछोगे तो मुकर जाएगा.... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   6:01am 10 Jan 2019
Blogger: prashant gupta
तमाम कोशिशों के बाद भी ना गढ़ा गया,कैसा कुम्हार है, चाक पे रेतीली मिट्टी चढ़ा गया.तुम तो अजनबी हो फिर भी तुम से अड़ जाता है,हमसे तो इश्क था, फिर भी ना उससे अड़ा गया.ये जो तुम आज मेरे चेहरे पे पढ़ रहे हो,ये तो सारी उम्र किसी से भी ना पढ़ा गया.जो बहके हुए हैं उन्हें रास्तों का इल... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   5:49am 10 Jan 2019
Blogger: prashant gupta
Since it was launched, on 31stMarch 2017, Netflix’s original series created a lot of buzz around the globe. More often for the bad influence than the good ones. There have been countless reports in the media of how someone tried to imitate what was shown in the series. Various orders/disclaimers were issued to warn parents not to watch this with their children. Schools were issuing notices to their students asking them to watch it as any other fiction. So much was the backlash on the series that Netflix had to release a statement, “While many of our members find the show to be a valuable driver for starting an important conversation with their families, we have also heard concern from th... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   7:48am 10 Jun 2017
Blogger: prashant gupta
चलो माना कि वो उम्र भर हमारा होगा,पर क्या फ़क़त इतने से गुज़ारा होगा.आओ ढूंढें कहीं हमारे असीम ख़्वाबों में,किसी गर्द में छुपा हुआ कोई सितारा होगा.जो भटक रहा हूँ सेहरा में तो मेरी ही खता है,गुंजी होगी अना कानों में जो उसने पुकारा होगा.अब की आओ तो अपने साथ एक कफ़न लेते आना,जो आसम... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   10:18am 4 Apr 2017
Blogger: prashant gupta
कहीं तो किसी को ज़रूर खलते होंगे,कुछ ख्वाब बेबात जब पलकों से फिसलते होंगे.अपनी आँखों में लेकर अश्क भी आग भी,नासेह अदावतों के बाज़ार में निकलते होंगे.कोई कैसे करें उम्मीद मुकम्मल जहान की,उन बच्चों से जो नफरती दरारों में पलते होंगे.जिन्हें यकीन हैं की सब ठीक हो जाएगा,वो भी ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   2:21pm 20 Nov 2015
Blogger: prashant gupta
चलो आज फ़रिश्तों से ख़ुदाई मांगी जाए,रिसते हुए ज़ख्मों की दवाई मांगी जाए.उसकी एक झलक देखी और शरीर हो गए,ये कैसी मोहब्बत इससे रिहाई मांगी जाए.उसकी शान में एक ज़माने से लिखते रहे हैं हम,थोड़ा सा सच लिख सकें ऐसी रौशनाई मांगी जाए.महफ़िलों को हमारी ग़ज़लों ने तन्हा ही किया है,दानिश-वर... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   10:44am 23 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
फ़क़त इक कली में हासिल-ए-बहार ढूंढते हैं, हम शगुफ़्ता चेहरों में इश्क के आसार ढूंढते हैं.जिसके ज़रिये दो घरों की बातें हो जाती थीं,कहाँ गया खिड़कियों से बंधा वो तार ढूंढते हैं.इक अब्र आवारा मिरे सर-ए-बाम क्या दिखा,लोग मेरे आँगन में खोयी बहार ढूंढते हैं.किसने कब क्यों कैसे ... Read more
clicks 137 View   Vote 1 Like   12:31pm 22 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
हज़ार चुप रख लो मगर कभी तो सुनानी ही होगी,जो उम्रों के मरासिम हैं तो कोई कहानी भी होगी.जो भर रहे हो तो गिन के भरना इसे अज़ाबों से,क़यामत के रोज़ ये जिस्म की गठरी उठानी भी होगी.उनकी आँखों के चराग़ फूंकते हो मगर याद रहे,तुम्हारे घर की रौशनी कभी सयानी भी होगी.हम अपने रहनुमाओं की रह... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   4:33pm 21 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
एक एक फंदे गिन कर पलकों पर जो थे बुने गए,कुछ ख्वाब कल रात वहीँ दीवारों में चुने गए.बरसों जिनकी आवाजों पर ख़लाओं की पाबंदी थी,वो सियाह सन्नाटे फिर कई बज्मों में सुने गए. रात की रौशनी में उनकी गिरहें साफ़ दिखती हैं,जो मनहूस रिश्ते दिन के अंधेरों में थे बुने गए.तुझे है उम... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   8:50am 19 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
दिल की दिल में रखने से रिश्ते तो बच जाते हैं,ये अन्दर के ज़लज़ले मगर हम को खा जाते हैं.यूँ तो सभी को ज़माने में रौशनी से इश्क है,फिर भी यूँ ही कभी अँधेरे नज़रों को भा जाते हैं.बराए खौफ़ झुकते हैं सर उसकी सभाओं में,सुना है फ़रिश्ते रहमत में घर जला जाते हैं.अपने आगे फैली हुई नन्ही हथ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   5:03pm 16 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
उसने कभी जो मुड़ के आवाज़ लगायी होती, हम उम्मीदों के असीर थे हमारी रिहाई होती. बहुत सुना है ज़माने से कि ख़ुदा होता है, उसे देख सके आँखों में ऐसी बीनाई होती . कहने को उसकी आँखों में इश्क का समंदर है, हम डूब जाते काश इतनी तो गहराई होती.अधजले से कुछ ख्वाब रह गए इन आँखों मे... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   4:35pm 13 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
वो रख के चौखट पे चराग देखते हैं,बुझते हुए सूरज की आग देखते हैं.उम्र ने लगाई थी कुछ यादें ज़ेहन पर,वक़्त कैसे धो रहा है वो दाग देखते हैं.किस सम्त इस जहां में जल रही है ख़ुदाई,हम राख में सने हुए बाग़ देखते हैं.दुनिया के साथ गोल-गोल वो भी घूमते हैं,इस बात से बेखबर हैं लोगबाग देखते ह... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   1:17pm 13 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
खुद को इंसान कहता है और शैतान से बदतर है, हर लफ्ज़ उसका ज़हर में डूबा हुआ नश्तर है. उसे रहा इश्क किसी भी बात से नहीं है, बस इश्क के नाम पे वो लूटता अक्सर है, कोई भी तारीख हो यही हुनर जानता है,बस्तियां उजाड़ के ज़मीन को करता बंजर है. तरक्की मान के जिसपे गुरुर कर रहा है, वो देख नही... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   6:38pm 10 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
ऐसा नहीं है कि नादानी से काम अटक जाता है,रास्ता मालूम हो तो भी इंसान भटक जाता है.कितनी भी होशियारी से तुम बातों को दफ्न करो,वक़्त कहीं से ढूंढ कर उन्हें पैरों पर पटक जाता है.सबको है शौक़ नया सारा सच जानने का,और अगर सच कह दो तो खटक जाता है.उससे कह दो सूरज का इंतज़ार न किया करे,चा... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   12:23pm 10 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
विरह की गोद में कोई सिर रख कर रोता है,दर्द मिलता है जब टूट कर इश्क होता है.दूर तक निगाहों में नफरत और रंजिश के खेत हैं,बुज़ुर्ग कहते थे काटेगा वही जो तू बोता है.कितने ही दर-ओ-बाम उजाड़े हैं आजादी के लिए,लेकर आजादी अपनी अब वो क़फ़स को रोता है.एक उम्र से ख्वाहिशों के सफ़र में था,थक ग... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   7:37am 10 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
मेरी बेइंतेहा मसरुफ़ियत देख कर वो,छोड़ कर मुझे सफ़र पर तनहा निकल गया.उसके चेहरे को ग़ज़लों में ढूंढता हूँ मैं,जो एक शेर सा चुपके से निकल गया.बिखरे हैं तस्बीह के सब दाने ज़मीं पर,जिसने थाम के रखा था वो धागा निकल गया.खुद ही रखने होंगे ज़ख्मों पर मरहम अब तुझे,मसीहाओं का जो दौर था कब ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   8:08am 9 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
उसकी तकलीफों का एक ही लिबास होता है,वो चुप हो जाता है जब भी उदास होता है.सर सब्ज़ पेड़ सारे पत्तों को दफ्न करने लगते हैं,खिज़ा का मौसम जब पास होता है.कौन आसानी से खींच लेता है ज़मीं औरों की,ये हुनर ही इस जहां में ख़ास होता है.हर चौखट हर दीवार पे जिंदा लाशें टंगी हैं,ख़ुदा मर गया है ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   3:48pm 8 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
तमाम उम्र की दौड़-भाग,ख्वाहिशों की बेतरह कांट-छांट,और बेहिसाब चौखटों की धूल पिये,गयी रात उसकी हामला बेचैनी ने,एक बेतरतीब सा ख्वाब जना है...प्रशांत ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   12:58pm 8 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
रहेगा गम उसे हर उम्र इस बात का,मेरे साथ कर न सका वो सौदा जज़्बात का.मेरे इज़हार पर उसने मज़हब पूछ कर,दे दिया था फ़र्क हमारे ख़यालात का.जाम है, शाम है और रकीबों का हुजूम,देखें क्या होगा हश्र इस मुलाकात का.उसे न दिखा तो उसकी नज़रों का दोष था,अँधेरे में डूबना तो मुकद्दर है रात का.प्रश... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   11:51am 3 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
आज शाख से फिर एक फूल उतर जाएगा,उन्हीं बहानों से ये साल भी गुज़र जाएगा.मैं जानता हूँ की वो मेरा सुकून ले गया है,मुझे ये भी पता है पूछने पे मुकर जाएगा.मुद्दतें हो गयीं मुझे घर से निकले हुए,मेरी छत ले आना कोई जो उधर जाएगा.मेरा वक़्त हो कर भी मुझे ही नहीं मिलता,उम्मीद है इस बरस शाय... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   11:16am 2 Jan 2015
Blogger: prashant gupta
बेवजह लफ़्ज़ों को जोड़ कर कोई नज़्म कही जाए,या कि ज़िन्दगी की नज़्म को लफ़्ज़ों की डोर दी जाए.खुदापरास्तों ने सर सब्ज़ हवा को शर कर दिया है,काफिरों ने सहेजी हैं कुछ सांसें, आओ बांटी जाए.मुर्दा किताबों के हर्फ़ में जब इंसानियत घुटने लगे,समझो वक़्त हो चला है कि किताब बदल दी जाए.अब की शा... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   7:01am 19 Dec 2014
Blogger: prashant gupta
मैं आज भी रुका हूँ वहीँ इंतज़ार सा,तेरे स्पंदन से स्पंदित तार सा,कश्ती पे टंगी पतवार सा,मैं आज भी रुका हूँ वहीँ इंतज़ार सा.टहनियां सब हरे पत्तों से भर गयीं,ज़मीं तक उतरती धूप शीतल कर गयीं,रह गया हवाओं में फिर भी खार सा,मैं आज भी रुका हूँ वहीँ इंतज़ार सा.उम्रों के टेढ़े रास्ते अब... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   2:24pm 17 Dec 2014
Blogger: prashant gupta
आज-कल ज़िन्दगी को थोड़ा कम पीते हैं, है प्यास बड़ी और प्यासे जीते हैं.  रफ़्तार में कहाँ कुछ नज़र आता है कभी, जो दिखते हैं मंज़र धुंधले दिखते हैं. लोगों से सुनते थे कभी तश्नगी-ए-मंजिल का हाल,हमें भी हर कदम अब सराब ही मिलते हैं. वो मिल जाएँ कभी तो हमारा हाल कह देना, फ़रिश्ते कहाँ ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   4:10am 28 May 2014
Blogger: prashant gupta
वो घर अपना छोड़ के मकान ढूंढता है, गली-गली जीने का समान ढूंढता है.  खानाबदोशों को मिलता है सफ़र और तनहाई, कैसे-कैसे दिल में अरमान लिए घूमता है.  टुकड़ा-टुकड़ा रोटी के ढेर में दबा,वो रेहन पर रखे सारे ख्वाब भूलता है.... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   10:58am 25 May 2014
Blogger: prashant gupta
राघव अभी गेट के अन्दर घुसा ही था, कि शोभा की नरकट सी आवाज़ ने उसके सुकून को तार-तार कर दिया. एक बार तो उसका मन हुआ कि उलटे पाँव वापस चला जाए. जाकर किसी घाट किनारे बैठे या फिर कहीं मंदिर में डेरा डाल लें. पर दिन भर की थकान के बाद उसे बैठने का मन भी नहीं होता. खैर सारी हिम्मत बट... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   12:15pm 22 May 2014
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