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साझा आसमान

ये: एहतरामे-वफ़ा  है  कि  कम  नहीं  होताअजीब  मर्ज़  लगा  है  कि  कम  नहीं  होताइधर-उधर  के  कई  ग़म  उठा  लिए  सर  परमगर  ये:  बार  बड़ा  है  कि  कम  नहीं  होताबिखर  रहा  है    मेरा  ज़ह्र    गर्म  झोंकों  सेबग़ावतों  का  नशा&n...
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  January 19, 2018, 10:13 pm
ये: एहतरामे-वफ़ा  है  कि  कम  नहीं  होताअजीब  मर्ज़  लगा  है  कि  कम  नहीं  होताइधर-उधर  के  कई  ग़म  उठा  लिए  सर  परमगर  ये:  बार  बड़ा  है  कि  कम  नहीं  होताबिखर  रहा  है    मेरा  ज़ह्र    गर्म  झोंकों  सेबग़ावतों  का  नशा&n...
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  January 19, 2018, 10:13 pm
वफ़ा  में  ज़रा  सी  कमी  पड़  गईहमें  दुश्मनों  की   कमी  पड़  गईदरिंदे    गली  दर  गली    छा  गएकि  इंसां की  भारी कमी  पड़ गईचला  शाह   घर  लूटने   रिंद   काख़ज़ाने  में   थोड़ी  कमी  पड़  गईकभी   ज़ब्त  की   इन्तेहा  हो  ग...
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  January 18, 2018, 6:27 pm
यूं  ही  हमको  दिल  मत  देनाआसां  सी  मुश्किल  मत  देनाकश्ती  तूफां  की  आशिक़  हैमिटने  को   साहिल  मत  देनादुश्मन  वो:   जो    ईमां  ले  लेकमज़र्फ़  मुक़ाबिल  मत  देनामंज़िल  के  सदक़े     गर्म  लहूसरसब्ज़   मराहिल   मत&n...
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  January 17, 2018, 9:01 pm
दिल  ही  न  दिया  तो  क्या  देंगेज़ाहिर  है      आप      दग़ा  देंगेहम      दीवाने     हो  भी    जाएंक्या  घर  को   आग  लगा  देंगे ?सब  नफ़रत  अपनी   ले  आएंहम  सबको   प्यार  सिखा  देंगेख़ामोश    मुहब्बत  है   ...
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  January 16, 2018, 7:15 pm
बीमारे-आरज़ू  से        कितने        सवाल  कीजेपुर्सिश  को  आए  हैं  तो    कुछ  देखभाल  कीजेचुपचाप  दिल  उठा  कर  चल  तो  दिए  मियांजीइस  बेमिसाल  शय  का    कुछ  इस्तेमाल  कीजेमायूस  रहते-रहते           &n...
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  January 15, 2018, 9:25 pm
बेख़ुदी    गो    बहुत  ज़रूरी  हैज़र्फ़  भी  तो  बहुत  ज़रूरी  हैदोस्तों  को  दुआ  न  दे  लेकिनदुश्मनों  को  बहुत  ज़रूरी  हैजल  न  जाए  फ़सल  उमीदों  कीग़म  नए  बो  बहुत  ज़रूरी  है लोग    इस्लाह  तो   करेंगे  हीवो  करें जो &nbs...
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  January 14, 2018, 11:09 pm
दुश्मनों  की  नब्ज़  में  धंसते  हुएख़ाक  में  मिल  जाएंगे  हंसते  हुएज़र्द  पड़ती   जा  रही  है   ज़िंदगीतार  दिल  के  साज़  के  कसते  हुएसाफ़  कहिए  क्या  परेशानी  हुईशह्रे-दिल  में  आपको  बसते  हुएइश्क़  जिसने  कर  लिया  सय्या...
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  December 8, 2017, 10:57 pm
रास्ते   कम  नहीं    मोहब्बत  केपर  क़दम  तो  उठें  इनायत  केजानलेवा  है        मौसमे  सरमांहिज्र  में   दिन  हुए   हरारत  केबात  क्या  इश्क़  की  करेंगे  वोजो   तरफ़दार  हैं   अदावत  केशाह  की  बद्ज़ुबानियां  तौबा !...
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  December 7, 2017, 9:10 pm
हर  शख़्स        जानता  है       दुश्वारियां  हमारीशाहों  को      खल  रही  हैं      ख़ुद्दारियां  हमारीया   तो  क़ुबूल  कर  लें  या  हम  कमाल  कर  देंमहदूद  हैं        यहीं  तक         ऐय्यारियां  हमारी ऐ  चार:गर   ...
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  November 15, 2017, 5:59 pm
ग़रीबों  का  दिल    'गर   समंदर  न  होतो  दुनिया  कभी  हद  से  बाहर  न  होकरें         क़त्ल  हमको      बुराई  नहींअगर    आपका  नाम     ज़ाहिर  न  होरहे  कौन       ऐसी  जगह  पर       जहांकहीं       ...
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  November 10, 2017, 4:53 pm
बहरहाल  कुछ  तो  हुआ  है  ग़लततुम्हारी  दुआ    या  दवा   है   ग़लतख़बर  ही     नहीं  है    शहंशाह  कोकि  हर  मा'मले  में  अना  है  ग़लतहुकूमत    निकल  जाएगी    हाथ  से अगर  सोच  का  सिलसिला  है  ग़लततमाशा -ए- ऐवाने - जम...
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  November 6, 2017, 5:38 pm
कम  अज़  कम  क़त्ल  तो  कीजे  ख़ुशी  सेन  होगा          काम  ये          मुर्दादिली  सेबवंडर  ही       उठा  देगा        किसी  दिनलगाना  आपका      दिल      हर  किसी  सेनिभाना  हो          ज़रूरी         तो...
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  November 3, 2017, 4:50 am
हवा  में  घुटन  है  मगर  क्या  करेंकि  तूफ़ान  में  और  घर  क्या  करेंफ़क़त  एक  ही लफ़्ज़   है  दर्द  काये:  क़िस्सा-ए-ग़म  मुख़्तसर  क्या  करेंजहां  रिज़्क़  एहसां  जता  कर  मिलेदवाएं  वहां  पर  असर  क्या  करेंक़फ़न  लूट  कर  भी  तसल्ल...
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  October 20, 2017, 5:16 am
मोम  के  हैं  पर  हमारे  और  जलता  आस्मांकोशिशे-परवाज़  पर  आतिश  उगलता  आस्मांहम  अगर  मज़्लूम  हैं  तो  भी  सज़ा  के  मुस्तहक़ख़ुद   हज़ारों  जुर्म  करके  बच  निकलता  आस्मांसौ  बरस  की  राह  में  नव्वे  बरस  के  इम्तिहांहर  सफ़र&...
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  September 18, 2017, 7:32 pm
साफ़  मौसम  के  लिए  कुछ  कीजिएज़ुल्फ़  के  ख़म  के  लिए  कुछ  कीजिएदुश्मनों  पर  सर्फ़  करते  हो  वफ़ाकाश ! हमदम  के  लिए  कुछ  कीजिएताक़यामत  तोड़ना  मुमकिन  न  होउन  मरासिम  के  लिए  कुछ  कीजिएदर्द  हो  थोड़ा-बहुत  तो  झेल  लेंशिद...
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  September 11, 2017, 6:59 pm
ज़रा-से  करम  को  ज़माने  लगेख़ुदा  रोज़   एहसां   जताने  लगेनज़र  में   न  थे  तो   परेशां  रहेनज़र  में  लिया  तो  सताने  लगेसंवरना  हमीं  ने  सिखाया  उन्हेंहमीं  को   अदाएं   सिखाने  लगेइसे  रहज़नी  के  सिवा  क्या  कहेंकि&...
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  August 19, 2017, 6:55 pm
क़त्ल  करके  हसीं  बहारों  कातन  गया  सर  रसूख़दारों  कालाशे-अत्फ़ाल  रौंद  कर  ख़ुश  हैंतुफ़ ! ये:  किरदार  ताजदारों  कामुंह  छुपा  लें  कि  सर  कटा  डालेंहै  पसोपेश  शर्मसारों  काहै  हमारी  कमी  कि  क़ायम  हैदबदबा  ज़ुल्म  के  इदार...
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  August 17, 2017, 7:16 am
मेरे  अल्फ़ाज़  मुझसे  रूठ  कर  कुछ  दूर  बैठे  हैंकि  जैसे  वक़्त  के  हाथों  सनम  मजबूर  बैठे  हैंकरें  किससे  शिकायत  दोस्तों  की  बेनियाज़ी  कीवफ़ा  के  दफ़्तरों  में  भी  तन-ए-रंजूर  बैठे  हैंकिसी  दिन  फिर  नमी  होगी  निगाह...
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  July 11, 2017, 6:57 am
चंद  अश्'आर  जो  सीने  में  दबा  रक्खे  हैंकुछ  समझ-सोच  के  यारों  से  छुपा  रक्खे  हैंएक  उम्मीदे-शिफ़ा  ये  है  कि  वो  आ  जाएंइसलिए  मर्ज़  तबीबों  से  बचा  रक्खे  हैंहो  अगर  दिल  में  शरारत  तो  बता  दें  हमकोवर्न:  हमने...
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  July 8, 2017, 5:42 pm
आज  ख़ामोश  रहें  भी  तो  क्याऔर  दिल  खोल  कर  कहें  भी  तो  क्या ?आपको  तो  रहम  नहीं  आताहम  अगर  दर्द  सहें  तो  भी  क्याक़त्ल  करके  हुज़ूर  हंसते  हैंभीड़  में  अश्क  बहें  भी  तो  क्याज़ुल्म  तारीख़  में  जगह  लेंगेशाह  क...
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  July 7, 2017, 9:41 pm
न  दिल  चाहते  हैं  न  जां  चाहते  हैंफ़क़त  आशिक़ों  की  अमां   चाहते  हैंउड़ानों  पे  बंदिश  न  पहरा  सुरों  परपरिंदे    खुला  आस्मां   चाहते  हैंमुरीदे-शहंशाह  हद  से  गुज़र  कररिआया  के  दोनों  जहां  चाहते  हैंक़फ़न  खेंच  कर&...
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  July 6, 2017, 2:53 pm
किधर  ढूंढिएगा  कहां  खो  गयामियां  मान  लीजे  कि  दिल  तो  गयाउसे  तिश्नगी  ने  न  बख़्शा  कभीअकेला  ख़राबात  में  जो  गयागुलों  को  न  अब  कोई  इल्ज़ाम  देकि  मौसम  रग़ों  में  ज़हर  बो  गयामदारी  बना  शाह  जिस  रोज़  सेहक़ीक़त&...
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  June 29, 2017, 6:47 pm
जब  जहालत  गुनाह  करती  हैसल्तनत  वाह  वाह  करती  हैआइन-ए-मुल्क  में  बहुत  कुछ  हैक्या  सियासत  निबाह  करती  हैसल्तनत  चार  दिन  नहीं  चलतीजो  सितम  बेपनाह  करती  हैअस्लहे  वो:  असर  नहीं  करतेजो  वफ़ा  की  निगाह  करती  हैआश...
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  June 27, 2017, 4:16 pm
ईद  में  मुंह  छुपाए  फिरते  हैंग़म  गले  से  लगाए  फिरते  हैंदुश्मनों  के  हिजाब  के  सदक़ेरोज़  नज़रें  चुराए   फिरते  हैंदिलजले  हैं  बहार  के  आशिक़तितलियों  को  उड़ाए  फिरते  हैंकोई  उनको  पनाह  में  ले  लेजो  वफ़ा  के  सता...
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  June 26, 2017, 3:09 pm
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