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Blog: छाँव

Blogger: विशाल कश्यप
ऐ मानव तू एक मानव है, जो मानव हो एक बलशालीनहीं डरेगा नहीं झुकेगा, जो आये कोई विपदा भारीचलाना तूने सीख लिया है, अब कब तक बाँट संजोयेगाउंगली की इक आस में अब तू, क्या अपना भविष्य भी खोएगापग-पग पर घने अँधेरे हैं, सब जाती-धर्म के फेरे हैंबिक गया ये देश हमारा है, कौन कहेगा अंग्रे... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   5:59pm 10 Nov 2012
Blogger: विशाल कश्यप
मैंने सोंचे थे, कदमों के निशान छोड़ जाने कोबस यादें ही नहीं, हर एक मक़ाम छोड़ जाने को भींगी रेत पे रास्ता, इक ऐसा बनाऊंगा बीती पीढ़ी को, इक एहसास ऐसा कराऊंगाजिस रास्ते से, मंजिल तेरे अपनों ने पाई हैवो मैंने ही, भींगी रेत पे खुद से बनाई  हैनिराशाओं को आशाओं में, कुछ यूँ बदल ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   2:23am 5 Nov 2012
Blogger: विशाल कश्यप
इक अजीब पहेली बन बैठी है ये जिंदगीचाहत क्याकिस्मत कि कश्ती बन बैठी है ये जिंदगीजहाँ मुसाफिर को हवाओं के रुख की इक आस हैक्या पताकहीं ये मेरा ही झूठा एहसास है  सोंचता हूँक्या ऊपर वाले ने सोंच रखा कुछ खास हैया दिलासों के संकलन में, ये मेरा इक प्रयास है ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   4:34pm 4 Nov 2012
Blogger: विशाल कश्यप
तू जिन्दा है, तो जिन्दगी की जीत में यकीन कर  अगर कहीं है स्वर्ग तो, उतर ला जमीन पर ये गम के और चार दिन, सितम के और चार दिन ये दिन भी जायेंगे गुजर, गुजर गए हजार दिन कभी तो होगी, इस चमन पे भी बहार की नजर अगर कहीं है स्वर्ग तो, उतर ला जमीन पर  तू जिन्दा है, तो जिन्दगी की जीत में यकी... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   1:31pm 29 Aug 2012
Blogger: विशाल कश्यप
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   3:32am 19 May 2012
Blogger: विशाल कश्यप
कभी उफनती हुई नदी हो, कभी नदी का उतार हो माँरहो किसी भी दिशा-दिशा में, तुम अपने बच्चों का प्यार हो माँनरम-सी बाँहों में खुद झुलाया, सुना के लोरी हमें सुलायाजो नींद भर कर कभी न सोई, जनम-जनम की जगार हो माँभले ही दुख को छुपाओ हमसे, मगर हमें तो पता है सब कुछकभी थकन हो, कभी दुखन हो, ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   2:41am 13 May 2012
Blogger: विशाल कश्यप
नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ काम करोजग में रह के निज काम करो ।यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें, यह व्यर्थ न हो ।कुछ तो उपयुक्त करो तन कोनर हो, न निराश करो मन को ।। संभलो कि सुयोग न जाए चला कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला समझो जग को न निरा सपना पथ आप, प्रशस्त करो अपना ... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   6:51pm 7 Apr 2012
Blogger: विशाल कश्यप
आज कुछ कमी सी है ..... तुम बिन !!!ना रंग, ना रौशनी ही है ..... तुम बिन !!! वक्त अपनी रफ़्तार से चल रहा है ..... बस, एक धड़कन सिर्फ थमी सी है ..... तुम बिन !!!ना बारिश है, ना धुआं ही .....  फिर भी दिल में तपीश सी है ..... तुम बिन !!!बहुत रोका है मैंने बदल को, बरसने से .....  फिर भी, आँखों में नमी सी है ..... तुम... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   5:50pm 9 Dec 2011
Blogger: विशाल कश्यप
एक अदनी सी सोंच, एक ऐसी कहानी जिस दिल को छू ले, उसे कर दे पानीयूँ तो, तुम हमसे-हम तुमसे जुड़े हुए हैं ऐसे बस दिल के दरख्तों के पत्ते सूखे हुए हों जैसे इतनी बोझिल हैं सांसें, चंद धड़कनों में ऐसे कि, दम घुटता है मेरा अब; जियूं मैं कैसे क्यों इतना बोझ हम सीने में समाये बैठे है... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   5:59pm 27 Nov 2011
Blogger: विशाल कश्यप
क्यों रिश्ते इतने अजनबी हो जाते हैं?कभी जिनपे, खुद से ज्यादा भरोसा था..वो ही, सबसे पहले बेगाने हो जाते हैं क्यों रिश्ते इतने अजनबी हो जाते हैं? हमारी एक मुस्कान पे जान लुटाने वालेक्यों इतने अजीब हो जाते हैं...............?हाय, ये रिश्ते ही तो हैं; जो बड़े अजनबी हो जाते हैं कभी हँस-... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   10:59pm 26 Nov 2011
Blogger: विशाल कश्यप
है, कौन-सी कश्ती और दरिया हमारा जो कभी साथ दे-दे, वो जरिया हमारा आज फिर मौज ली है अंगड़ाई दुबारानहीं, मैं नहीं हूँ वो पथिक बेचारा बंद आँखों ने देखें हैं सपने दुबारा मैं वही छोटा लड़का हूँ, जो सबका था प्यारा वो गेंदे का मौसम, वो ठंढी हवाएं बहुत याद आतीं हैं वो पतली राहेंवो ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   3:14pm 24 Nov 2011
Blogger: विशाल कश्यप
आज दुल्हन के लाल जोड़े में,उसकी सहेलियों ने उसे इतना सजाया  होगा …उसके गोरे हाथों पर, सखियों ने मेहँदी लगाया होगा …क्या खूब.... चढ़ेगा रंग, मेहँदी का;उस मेहँदी में उसने मेरा नाम छुपाया होगा … रह-रह कर रो पड़ेगी, जब भी ख्याल मेरा आया होगा … खुद को देखा होगा, जब आईने में,तो, अ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   1:28pm 11 Oct 2011
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