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देर रात के राग

*स्मृतियाँ नींद की तरह आती हैं और वह हलके-हलके थरथराते जल की सतह से नीचे तली की ओर उतरती चली जाती है Iवहाँ स्वप्न-छायाएँ देती हैं दर्द से राहत देने वाली थपकी, कहीं गूँजते हैं, ज्यों कहीं किसी सघन वन-प्रांतर में, सांत्वना के शब्द Iकोई थम्हा देता है उसके हाथों में एक माया-दर्...
देर रात के राग...
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  May 8, 2018, 3:42 pm
सरलता एक जटिल चीज़ होती है | सरल होना बहुत कठिन होता है |***सच कभी पूरीतरह पकड़ में नहीं आता | उसका लगातार पीछा करना पड़ता है |***ज्यादा से ज्यादा, हम एक सार्थक जीवन जीने की कोशिश कर सकते हैं | महत्वपूर्ण होने की महत्वाकांक्षा हमें नक्काल बना देती है, या कुंठित कर देती है |***जब दूसरो...
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  May 8, 2018, 3:39 pm
--कविता कृष्णपल्लवीआज 'पृथ्वी दिवस'के अवसर पर पूरी दुनिया में पर्यावरण को बचाने की चिंता प्रकट करते हुए कार्यक्रम हो रहे हैं I 1970 में इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई और मुझे यह बात अनायास नहीं लगती कि इसके लिए 22 अप्रैल का दिन चुना गया जो लेनिन का जन्मदिन है I लेनिन के बहाने क्र...
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  May 8, 2018, 2:35 pm
"... वे (प्रबोधनकाल के दार्शनिक) एक बुद्धिसंगत राज्य तथा एक बुद्धिसंगत समाज की स्थापना करना चाहते थे I वे ऐसी प्रत्येक वस्तु को निर्ममतापूर्वक हटा देना चाहते थे, जो शाश्वत बुद्धि के ख़िलाफ़ जाती थी Iहमने यह भी देखा था कि वह शाश्वत बुद्धि वास्तव में अठारहवीं शताब्दी के उस न...
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  May 8, 2018, 2:32 pm
जागो मृतात्माओ!बर्बर कभी भी तुम्हारे दरवाज़े पर दस्तक दे सकते हैं।कायरो! सावधान!!भागकर अपने घर पहुँचो और देखोतुम्हारी बेटी कॉलेज से लौट तो आयी है सलामत,बीवी घर में महफूज़ तो है।बहन के घर फ़ोन लगाकर उसकी भी खोज-ख़बर ले लो!कहीं कोई औरत कम तो नहीं हो गयी हैतुम्हारे घर और कुन...
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  May 8, 2018, 2:20 pm
मक्का मस्जिद में कोई ब्लास्ट हुआ ही नहीं था Iसोहराबुद्दीन और इशरतजहाँ का फर्ज़ी एनकाउंटर नहीं हुआ था I उन्होंने आत्महत्या की थी Iकठुआ, उन्नाव,सूरत, एटा, राजकोट और रोहतक में कोई बलात्कार नहीं हुआ I सब छद्म-सिकुलरों का मिथ्या प्रचार है Iजज लोया दिल के दौरे से स्वाभाविक मौत म...
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  May 8, 2018, 2:16 pm
धनपतियों की दासी और श्रमिकों के लिए डाकू तो पूँजीवादी गणतंत्र में हर सरकार होती है, पर सबसे अधिक लोक-लुभावन नारा देकर सत्ता में आने वाले हिन्दुत्ववादी फासिस्टों का इस मामले में किसी से मुकाबला नहीं है I चन्द उदाहरण ही काफी हैं Iतीन वर्षों के भीतर (यानी 2016 तक) सरकार ने पू...
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  February 27, 2018, 10:05 am
बर्बरता जब हवा में घुल जाती है, आतंक जब लगातार धीमी बारिश की तरह बरसता रहता है, ज़ुल्म जब लगातार अपने अतिरेकी रूपों में जारी रहता है, तो सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि हम इन चीज़ों के आदी हो जाएँ और घोर अमानवीय परिस्थितियों में जीते चले जाने को अपनी नियति मान लें।अखलाक़, जुनैद,...
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  February 27, 2018, 9:58 am
 इतिहास-बोध (एक)पत्थर को धोता है पानी, पानी को धोती है हवाऔर फिर सुगन्धहवा को पवित्र करती है।हृदय को धोते हैं आँसूआँसू को स्मृति बनाते हैं विचार,विचार को शुद्ध और प्रामाणिकबनाता है पसीना।पसीने को सार्थकतामिलती है सृजन से,सृजन को सार्थकता मिलती है जीवन सेऔर जीवन कोध...
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  February 27, 2018, 9:55 am
आज से ठीक 170 वर्ष पहले दो युवा युगद्रष्टा क्रांतिकारियों --- मार्क्स और एंगेल्स द्वारा लिखित यह पुस्तिका प्रकाशित हुई जो पूँजीवाद के खिलाफ विश्व सर्वहारा का ऐतिहासिक युद्धघोष बन गयी Iतबसे पूँजीवादी दुनिया को कम्युनिज्म का हौवा दिन-रात सताता रहा I आज भी सता रहा है I पूँ...
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  February 27, 2018, 9:37 am
(एक)मरी हुई आत्माएँ ज़िंदगी की नई-नई व्याख्याएँ कर रही हैं ।(दो)नाउम्मीद लोग उम्मीदों पर विमर्श कर रहे हैं !(तीन)कवियों की प्रगतिशीलता इनदिनों ज़िंदगी का मर्सिया गा रही है ।(चार)"मार्क्सवादी"आलोचक ओशो और कृष्णमूर्ति से सीखकर अपनी दृष्टि पैनी कर रहे हैं !(पांंच)अनुभववाद का ...
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  February 16, 2018, 4:41 pm
उस नगर राज्‍य में सुसंस्‍कृत संवेदनशील भद्रजनों और कला-मर्मज्ञों की कमी न थी। नगर के केन्‍द्र में कई रंगशालाओं, सभागारों, कला-वीथिकाओं, संगोष्‍ठी कक्षों और विशाल पुस्‍तकालय वाले भव्‍य कला भवन की बहुमंजिली अट्टालिका थी। वहाँ नियमित कला प्रदर्शनियाँ, संगीत समारोह, न...
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  December 28, 2017, 7:56 pm
पंचकूला हिंसा और राम रहीम परिघटना की अंतर्वस्तु को समझने के लिए पंजाब-हरियाणा में डेरों की राजनीति के इतिहास और वर्तमान को समझना ज़रूरी है।पंजाब में डेरों की राजनीति का एक लम्‍बा इतिहास रहा है। यूँ तो पंजाब में डेरों का इतिहास काफी पुराना रहा है। लेकिन आज़ादी के बाद क...
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  December 19, 2017, 3:20 pm
दुःख अंत की भाषा था Iऔर भाषा का अंत था Iअँधेरे का व्याकरण था दुःखऔर व्याकरण का अन्धेरा Iदुःख था अकेलेपन की चीखऔर एक चीख का अकेलापन Iदुःख अन्दर की खोहों कीनिरुद्देश्य खोजपूर्ण यात्रा था Iदुःख अकेले भोग लेने कीएक स्वार्थपूर्ण कामना था Iदुःख जूते में घुसा हुआ एक कंकड़,बहा दि...
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  December 19, 2017, 1:49 pm
(1) आज दो राज्यों के विधानसभा चुनावों, विशेषकर गुजरात के नतीजे आने के बाद वामपंथी बौद्धिक हलकों में भी जिस मायूसी का माहौल है और जैसे विश्लेषण किये जा रहे हैं, उनसे यही पता चलता है कि हिन्दुत्ववादी फासीवाद के कहर और मोदी सरकार की निरंकुश नव उदारवादी नीतियों का मुकाबला क...
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  December 19, 2017, 1:47 pm
जीवन के जनपद मेंज्वार की प्रतीक्षा है Iपूरी तैयारी है Iपूर्णिमा का चाँदचढने दो Iविचारों कोपकने दो Iउमड़ता जनज्वारविचारों कोसमेट लेगा अपने भीतर Iखुद को,विचारो को,सबकुछ को नया कर जायेगा I-- शशि प्रकाश(अप्रैल, 1994)...
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  December 19, 2017, 1:39 pm
--- आलोक रंजननेपाल में भारी बहुमत पाकर वाम गठबंधन सत्तारूढ़ होने जा रहा है । के.पी. ओली का प्रधान मंत्री बनाना लगभग तय है । कयास इस बात के लगाये जा रहे हैं कि माधव नेपाल और प्रचंड में से एक देश का राष्ट्रपति बनेगा और दूसरा ने.क.पा.(ए.मा.ले.) और ने.क.पा. (माओवादी केंद्र) के प्रस्ता...
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  December 19, 2017, 1:18 pm
दर्द जितना गहरा थाउतने ही अकेले थे हम ।उतनी ही अधिक शिद्दत सेकारणों की तलाश थी,संग-साथ की चाहत थीउतनी ही ज़रूरत महसूस की प्यार की ।और दर्द की गहराईऔर बढ़ गयी,और अधिक अकेले पड़ गए हम ।इस पूरी दुनिया के लिएऔर अधिक प्यार की चाहत सेलबरेज थे हमारे दिल ।एक दिशा थीरोशनी की तीखी लक...
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  December 19, 2017, 12:33 pm
कभी एक स्वप्न को मैंनेआमंत्रित किया थादुखों के एक अकेले निर्जन द्वीप परपर मैं वहाँ खुद हीनहीं पहुँच पाई समय पर ।फिर कविता ने मुझे आमंत्रित कियाएक शाम साथ बिताने कोनिर्वासितों की घाटी में ।वहाँ तक पहुँचने के लिएबनैले समय में मुझेबर्बर गद्य की सड़कों सेहोकर जाना थाऔर ...
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  December 19, 2017, 12:30 pm
एक शब्दआँसू की तरह उमड़ता हैऔर गले में अटकता है ।रात निश्शब्द ढलती है ।अकेला निशाचर पक्षी भी चुप है ।सहसा मैं अच्छे दिनों कोयाद करता हूँ ।बचपन के चित्रचलचित्र-से आते हैं सामने ।शायद सुखद, शांत, आत्मीय मृत्युआ रही है किसी के निकटचीज़ों के निकटया कि मेरे ही किसी व्यक्तित्...
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  December 19, 2017, 12:26 pm
सार्थक के साथ हरदमकरती रहती हूँ कुछ निरर्थक भी ।अज्ञात के रहस्यों को जानने कीकोशिश करते हुएस्वयं ही कुछ रहस्य रचती रहती हूँ ।जैसे दे ही दूँ एक मिसाल, किनिजी डायरियाँ भी लिखती हूँछिपाकर पूरी दुनिया सेऔर उन्हें कहीं दबा देती हूँकभी सुदूर रेगिस्तान मेंरेत के किसी टीले ...
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  December 17, 2017, 9:52 pm
दूर कहीं से सुन रहा हूँकोई शब्द-शब्द थाहकरपढ़ रहा है मेरी कविताऔर मैं मर रहा हूँस्मृतियों की नर्म गोद में ।ऊपर झुके एक सपने की पलकों सेगर्म आँसू की एक बूँदमेरे चेहरे पर।-- शशि प्रकाश(जनवरी,1998)...
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  December 17, 2017, 9:36 pm
दुःखसरपत के जंगलों से एक यात्रा Iसमझ हो तोयह हवा का गुज़रना हो सकता है Iमहज़ एक सरसराहट Iटीस तो फिर भी सुरक्षित रहेगीकविता के लिए I--- शशि प्रकाश(15 अक्टूबर, 1997)...
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  December 17, 2017, 9:29 pm
( सत्‍यव्रत की यह टिप्‍पणी 'आह्वान'में बीस वर्षों पहले निकली थी जब वह पाक्षिक के रूप में प्रकाशित हुआ करता था। यह रचना आज उससमय से भी अधिक प्रासंगिक प्रतीत होती है। मित्र इसे पढ़ें और आनंद लें। )--सत्‍यव्रतयह प्राणी जितना अधिक तुच्‍छ है, उतना अधिक शोर मचाता है। अनवरत लम्...
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  December 17, 2017, 9:00 pm
(इस लेख का एक संक्षिप्त और संपादित रूप 'रविवार डाइजेस्ट'के अगस्त'2017 अंक में मेरे स्तम्भ 'रहगुज़र'के अंतर्गत प्रकाशित हुआ है । पूरा लेख यहाँ दे रही हूँ । )--कविता कृष्णपल्लवीहसन नाम जानलेवा हो सकता हैअमृत यह नाम भी निरापद नहीं रहाबहुत सुरक्षित नहीं हैं आपमहंगू नाम के साथ ब...
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  September 15, 2017, 3:04 pm
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