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मैं:सहज और सरल

प्रेमचंद प्रेमचंद तुम छिपे!किन्तु यह नहीं समझा था प्रेमसूर्य  का अभी कहाँ हुआ उदय था उपन्यास और कथा जगत तमपूर्ण निरुत्तर दीप्यमान था अभी तुम्हारा ही कर पाकर अस्त हुए रूम ,वृत यहाँ छा गया अँधेरा लिया आंधी ने डाल तिमर में आन डेरा उपन्यास है सिसकता रहा,रो र...
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  March 23, 2013, 5:00 pm
प्रेमचंद प्रेमचंद तुम छिपे!किन्तु यह नहीं समझा था प्रेमसूर्य  का अभी कहाँ हुआ उदय था उपन्यास और कथा जगत तमपूर्ण निरुत्तर दीप्यमान था अभी तुम्हारा ही कर पाकर अस्त हुए रूम ,वृत यहाँ छा गया अँधेरा लिया आंधी ने डाल तिमर में आन डेरा उपन्यास है सिसकता रहा,रो रही कहानी देख ...
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Tag :Poems/कविताएँ
  March 23, 2013, 5:00 pm
विख्यात हिंदी साहित्यिक मासिक पत्रिका "हँस"के १९३७ के "प्रेमचंद विशेषांक"में प्रेमचंद के निधन के  बाद उनसे जुड़ी हुए सस्मरणों को कई भाषाओँ के साहित्यकारों ,समाजसेवियों,प्रकाशकों आदि ने अपने अपने अपने ढंग से  व्यक्त किया | इसमे सब से अन्तरंग और मार्मिक लेख उनकी पत्न...
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Tag :लेख
  March 23, 2013, 3:22 pm
सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"मुंशी प्रेमचंद (१९२५)जून १९३६ में मुंशी प्रेमचंद की तबियत बहुत खराब थी ,उस वक्त उन्हें देखेने कुछ लेखकगण आकर उन से मिल जाया करते थे ,महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला" भी उनसे मिलने आते रहते थे | निराला इस बात से क्षुब्ध थे कि हिंदी-उर्दू  स...
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Tag :लेख
  March 23, 2013, 2:56 pm
गंगा की सफाई एक ऐसा विषय है जिसने वर्तमान भारतीय जन मानस को उद्देलित किया हुआ हैं . ये बड़े आश्चर्य की बात है कि हम गंगा और अन्य नदियों को पवित्र मानकर उन्हें इतना मान देते हैं ,पर वास्तव में गन्दगी का नाला बनाने में हमारे समाज का कोई सानी नहीं ,तमाम तरह का औद्योगिक कचरा,ध...
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Tag :लेख
  January 9, 2013, 11:36 pm
आज पाकिस्तान के वजीर-खारजा जनाब रहमान मलिक हिंदुस्तान तशरीफ़ लाये ..हिंदुस्तान ने अपनी कदीम रवायत के मुताबिक अपने महमान के इसतकबाल में पलकें बिछा दीं.आखिर क्यों न हो मेहमान को खुदा का दर्ज़ा देना हमारी सकाफत का एक जुज़ हैं .जनाब मलिक साहबआपका कहना हैं कि हिंद-पाक को अब ...
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Tag :लेख
  December 14, 2012, 11:00 pm
भारतीय दर्शन और इसकी विभिन् धाराओं के बारें में समय समय पर मै थोड़ा बहुत पढता रहा हूं पर इनको समझन पाना मेरे लिए एक बौद्धिक चुनौती ही रही.जिसका कारण हमारे जीवन से संस्कृत कालोप होना और हमारे तथाकथित आजकल के संस्कारों में तर्क और वितर्क को धृष्टता मानना संभवतः रहा हो. स...
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Tag :लेख
  December 9, 2012, 7:45 pm
आज एक अंग्रेजी पत्रिका में मुझे फ़्रांसिसी कवि ऑर्थर रिम्बौद (Arthur Rimbaud) कि एक सुन्दर कविता "अ ड्रीम फॉर विंटर"पढने को मिली. यह कविता एक सुन्दर अनुभूति है और भाव प्रवण भी .एकाएक  मन में ख्याल आया कि इसका हिंदी भावार्थ कर के देखना चाहिए बस फिर क्या था ...सर्दियों में जब हम निकल प...
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Tag :Poems/कविताएँ
  December 7, 2012, 8:25 pm
When I enter in the KonkanAcross the mighty SahyadriMy mind was fully awakenMind exploring heights of SahyadriThinking of famous Maratha BraverySoul floating on blue waveBody loosing whole race.When mind travels along with bodyBody can’t cope with mind's peaceThere created a long huge spaceAround seaMurmuring divine chantingHumans seeking lost blessingWind & waves buzzing the bellNo one can able to tellSizzling damp crystalline sendForce me enough  to bendWith diluting body into itI said confidently "I got it"...
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Tag :
  December 6, 2012, 8:08 pm
When I enter in the KonkanAcross the mighty SahyadriMy mind was fully awakenMind exploring heights of SahyadriThinking of famous Maratha BraverySoul floating on blue waveBody loosing whole race.When mind travels along with bodyBody can’t cope with mind's peaceThere created a long huge spaceAround seaMurmuring divine chantingHumans seeking lost blessingWind & waves buzzing the bellNo one can able to tellSizzling damp crystalline sendForce me enough  to bendWith diluting body into itI said confidently "I got it"...
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Tag :Poems/कविताएँ
  December 6, 2012, 8:08 pm
मुझे न जाने कितनी बार ही यह अनुभूति होती हैं कि खुशियों और समुद्री लहरों में आपस में कुछ समानताएँ होती हैं ,उदाहरणार्थ खुशियाँ भी लहरों के तरह  उफनती हुई आती हैं और हमारे मन और मस्तिष्क को अपनी शीतल अनुभूतियों से सरोबर कर देती हैं ,आती हुई लहरे ज्यादा  रोमांचित करती है...
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Tag :लेख
  November 26, 2012, 8:12 pm
प्रिये तुम कितनी कोमल कितनी चंचलआवाज़ तुम्हारीकितनी सुरमईदेती मुझे प्रेरणा और हिम्मत हर पलसमीप रहती तुम सदैव मेरे मन केछवि अमिट है तुम्हारी,ह्रदय में मेरेनहीं भूल सकता तुम्हे चाह कर केवो क्षण, जब तुम रहती हो मेरे आसपाससुंगंध तुम्हारे,काले टेसुओं कीअविस्मृत कर देत...
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Tag :Poems/कविताएँ
  November 10, 2012, 3:29 pm
Finding happiness in your life Excellent Articleshttp://livelifehappi.blogspot.in It's There, Somewhere..http://theoriginalpoetry.blogspot.in/2012/11/its-there-somewhere.html...
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Tag :Poems/कविताएँ
  November 10, 2012, 3:00 pm
मुझे ईश्वर का वरदान हैं मेरे पिता,/मेरे लिए धूप में छावं है मेरे पिता,मेरे वजूद का नाम है मेरे पिता,/मेरी धड़कन मेरी जान हैं मेरे पिता,........लेखक  और कवि अंकुर जी का ब्लॉगhttp://www.writerankur.in/2012/11/blog-post_9.html?spref=tw...
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Tag :अन्य
  November 9, 2012, 10:51 pm
Eroticism & Spirituality विगत दिनों एक बेहद फूहड़ किस्म की फिल्म सिनेमाग्रहों में अवतरित हुई हैं , जिसका नाम "स्टूडेंट ऑफ़ इयर " (Student of Year) हैं, इस फिल्म के बारे में काफी कुछ लिखा जा चुका हैं अत इसके बारे और लिखना इस लेख के लिए उपुक्त विषय वस्तु  नहीं हैं | इस लेख का उद्देश्य उस विवाद पर ...
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Tag :लेख
  November 9, 2012, 10:07 pm
                      मदिरा वह द्रव है जो दवा होने का दवा करने के साथ साथ  सीधे अवचेतन याने Subconsciousnessपर आघात करती हैं | यह उस विश्व के होने का अति विश्वसनीय आभास देती हैं जो हमारे मस्तिष्क के रचनात्मक क्रियाशीलता का भाग नहीं होता ,इसी अवस्था को नशा या मद नाम से भी परिभाषित किया जा सकत...
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Tag :Poems/कविताएँ
  November 7, 2012, 10:05 pm
                      मदिरा वह द्रव है जो दवा होने का दवा करने के साथ साथ  सीधे अवचेतन याने Subconsciousnessपर आघात करती हैं | यह उस विश्व के होने का अति विश्वसनीय आभास देती हैं जो हमारे मस्तिष्क के रचनात्मक क्रियाशीलता का भाग नहीं होता ,इसी अवस्था को नशा या मद नाम से भी प...
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Tag :
  November 7, 2012, 10:05 pm
                            -:मदिरा :- मदिरा वह द्रव है जो दवा होने का दवा करने के साथ साथ  सीधे अवचेतन याने Subconsciousnessपर आघात करती हैं | यह उस विश्व के होने का अति विश्वसनीय आभास देती हैं जो हमारे मस्तिष्क के रचनात्मक क्रियाशीलता का भाग नहीं होता ,इसी अवस्था को नशा या मद नाम से भी परिभाषित ...
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Tag :Poems/कविताएँ
  November 7, 2012, 10:05 pm
Did I fly too high?Sun blazes angrilyWax weeps from my wings.......वस्तुतः कविता न होकर एक प्रकार से सवेंदना स्वयं शब्द बनकर प्रस्तुत हैं http://followyourshadow.wordpress.com/...
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Tag :प्रेरणा
  October 30, 2012, 9:58 pm
Did I fly too high?Sun blazes angrilyWax weeps from my wings.......वस्तुतः कविता न होकर एक प्रकार से सवेंदना स्वयं शब्द बनकर प्रस्तुत हैं http://followyourshadow.wordpress.com/...
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Tag :प्रेरणा
  October 30, 2012, 9:58 pm
गज़ल  मूलतः अरबी साहित्य की एक विधा थी..यह कसीदे का शुरुवाती भाग हुआ करता था | बाद में  इरानी फारसी साहित्य में  गज़ल को एक उन्नत और अपने आप में एक पूर्ण विधा का दर्जा मिला |इसी उन्नत रूप में यह काव्य विधा खड़ीबोली में उर्दू गज़ल के रूप में परवान चढ़ी |इस विधा के अपने कुछ उस...
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Tag :Poems/कविताएँ
  October 27, 2012, 2:43 pm
गज़ल  मूलतः अरबी साहित्य की एक विधा थी..यह कसीदे का शुरुवाती भाग हुआ करता था | बाद में  इरानी फारसी साहित्य में  गज़ल को एक उन्नत और अपने आप में एक पूर्ण विधा का दर्जा मिला |इसी उन्नत रूप में यह काव्य विधा खड़ीबोली में उर्दू गज़ल के रूप में परवान चढ़ी |इस विधा के अपने कुछ उसूल और क...
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Tag :Poems/कविताएँ
  October 27, 2012, 2:43 pm
यह कविता करीब वर्ष भर पहले लिखी गई थी ,,परन्तु कुछ उथल पुथल समयातीत होती हैंजीवन मूल्यों को चुनौती देता आया कलयुग मानव मन को कलुषित करता आया कलयुग फिर भी तस्वीरें उज्वल होती रहींमिटा न पाया इन्हें कलयुग गुनाहों और पापों का ये कलयुग मनुष्यों को अमनुष्य  बनाता ये कलयुग ...
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Tag :Poems/कविताएँ
  October 14, 2012, 1:50 pm
यह कविता करीब वर्ष भर पहले लिखी गई थी ,,परन्तु कुछ उथल पुथल समयातीत होती हैंकलयुगजीवन मूल्यों को चुनौती देता आया कलयुग मानव मन को कलुषित करता आया कलयुग फिर भी तस्वीरें उज्वल होती रहींमिटा न पाया इन्हें कलयुग गुनाहों और पापों का ये कलयुग मनुष्यों को अमनुष्य  बनाता ये ...
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Tag :Poems/कविताएँ
  October 14, 2012, 1:50 pm
यह कविता  ७ अक्टूबर २००६  की रात को हैदराबाद में लिखी गई थी ...कुछ घटनाएँ याद आ गई थी ......नकाब से ये नकली  चेहरे, मानो बदलना इनका स्वभाव हैं चाहे लाख लगाओ पहरे,ये तो हैं बदलते चेहरे !आडम्बरो से आच्छादित, चालाकी से आनंदित कहते इनको कलयुगी चेहरे,ये तो हैं बदलते चेहरे !विश्वास  क...
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Tag :Poems/कविताएँ
  October 11, 2012, 11:57 am
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